भारत में दुर्लभ पृथ्वी तत्व (आरईई)
दुर्लभ पृथ्वी तत्व (आरईई) आवर्त सारणी में रासायनिक रूप से समान 17 धात्विक तत्वों का एक समूह है। इसमें 15 लैंथेनाइड्स तत्व (लैंथेनम, सेरियम, प्रेजोडायमियम, नियोडिमियम, प्रोमेथियम, समैरियम, यूरोपियम, गैडोलीनियम, टर्बियम, डिस्प्रोसियम, होल्मियम, एरबियम, थ्यूलियम, यटरबियम और ल्यूटेटियम), प्लस स्कैंडियम और यट्रियम शामिल हैं।
- आरईई की विशेषता उच्च घनत्व, उच्च गलनांक और उच्च तापीय चालकता है। आरईई को भारी आरईई और हल्के आरईई में वर्गीकृत किया गया है।
- दुर्लभ पृथ्वी वास्तव में प्रकृति में ‘दुर्लभ’ नहीं हैं; वे प्रचुर मात्र में होते हैं, लेकिन अक्सर व्यवहार्य निष्कर्षण के लिए पर्याप्त रूप से केंद्रित नहीं होते हैं।
- आरईई मुक्त अवस्था में नहीं होते हैं। ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

