आंतरिक सुरक्षा खतरों का मुकाबला: केंद्रीय खुफिया एवं जांच एजेंसियों की भूमिका
भारत में आंतरिक सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने में केंद्रीय खुफिया और जांच एजेंसियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- उनकी जिम्मेदारियों में खुफिया जानकारी एकत्र एवं विश्लेषण करना शामिल है। आतंकवाद विरोधी अभियान में इनके द्वारा विभिन्न राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय आवश्यक माना जाता है।
- देश की प्रमुख केंद्रीय खुफिया और जांच एजेंसियां निम्नलिखित हैं:
- इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB)
- अनुसंधान और विश्लेषण विंग (RAW)
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)
- केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)
- मल्टी-एजेंसी सेंटर (MAC)
- राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO)
- नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID)
आंतरिक सुरक्षा में इनकी भूमिका
खुफिया जानकारी एकत्र करना और विश्लेषण ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) का खतरा
- 2 उपग्रह युद्ध एवं GPS स्पूफिंग: नौवहन और रक्षा के लिए जोखिम
- 3 अंतरिक्ष शासन एवं वैश्विक मानदंड: संधि-विहीन क्षेत्र में भारत की भूमिका
- 4 उभरते सुरक्षा खतरे एवं कानूनी अंतराल: अद्यतन ढाँचों की आवश्यकता
- 5 राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति: एकीकृत एवं समन्वित सुरक्षा संरचना की अनिवार्यता
- 6 सुरक्षा ढांचे के रूप में IT मध्यवर्ती नियम: डिजिटल प्लेटफॉर्म का विनियमन
- 7 एन्क्रिप्टेड संचार एवं सुरक्षा
- 8 सोशल मीडिया एवं भ्रामक जानकारी
- 9 वन्यजीव एवं संसाधनों की तस्करी
- 10 मानव तस्करी के माध्यम से आतंकवादी नेटवर्क का विस्तार

