किसान एवं जनजातीय आंदोलन
ब्रिटिश आर्थिक नीतियों ने कृषि के व्यावसायीकरण पर बल दिया, जिसने उत्पादन के तरीके को बदल दिया और भारत में पारंपरिक कृषि संबंधों को बाधित कर दिया। विभिन्न भू-राजस्व बंदोबस्तों ने भूमि को एक व्यापार योग्य इकाई बना दिया, साथ ही नकदी फसलों के लिए वनों की कटाई, किसान आंदोलनों के कारण थे जो जमींदारों और साहूकारों के खिलाफ सामाजिक अशांति और अंग्रेजों के खिलाफ नागरिक अशांति दोनों थे।
- इसके साथ ही जनजतियों के प्रति ब्रिटिश सरकार की नीति ने उनके जीवन के हरेक भाग में व्यापक परिवर्तन लाया। ब्रिटिश ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

