लिव-इन संबंधों में घरेलू क्रूरता से सुरक्षा: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि घरेलू क्रूरता के विरुद्ध आपराधिक कानून की सुरक्षा केवल कानूनी रूप से विवाहित महिलाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने माना कि कुछ परिस्थितियों में लिव-इन संबंध में रहने वाली महिला भी पूर्ववर्ती IPC की धारा 498A के तहत संरक्षण प्राप्त कर सकती है। वर्तमान में इसका समकक्ष प्रावधान BNS की धारा 85 है।

निर्णय का आधार

  • धारा 498A का उद्देश्य महिलाओं को पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा की जाने वाली घरेलू क्रूरता से सुरक्षा प्रदान करना था। न्यायालय ....
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