न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता: कॉलेजियम व्यवस्था पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने हाल में न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता की आवश्यकता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की नियुक्ति संबंधी सिफारिशों में कारण दर्ज किए जाने चाहिए, ताकि न्यायपालिका के प्रति जनविश्वास, जवाबदेही और संस्थागत विश्वसनीयता मजबूत हो सके।

कॉलेजियम व्यवस्था

कॉलेजियम व्यवस्था न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण की न्यायिक रूप से विकसित प्रणाली है, जिसका संविधान में स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

  • इसका विकास Three Judges Cases के माध्यम से हुआ—
  • प्रथम जजेज केस (1981): न्यायिक नियुक्तियों में कार्यपालिका की प्रधानता।
  • द्वितीय जजेज केस (1993): न्यायपालिका को प्रधानता और कॉलेजियम व्यवस्था ....
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