प्रश्न : मानव विकास उपागम निश्चयपूर्वक कहता है कि आर्थिक वृद्धि की अपेक्षा शिक्षा एवं स्वास्थ देखभाल की वृद्धि अधिक महत्वपूर्ण है। उत्तर-उदारीकृत भारतीय समाज की प्रकाश में इस मुद्दे पर चर्चा कीजिए।
(2015)
उत्तर : मानव विकास खुशहाली के बहुत से आयामों पर ध्यान केंद्रित करता है लेकिन हमारे केंद्र बिन्दु और इसे मापने और तुलना करने के योग्य बनाने के लिए, मानव विकास रिपोर्ट टीम ने मानव विकास के तीन महत्वपूर्ण मूलतत्वों पर ध्यान केंद्रित किया था। ये हैं- जीवन प्रत्याशा या दीर्घायु ज्ञान तक पहुंच या साक्षरता और जीवन स्तर जिसे मुख्यतया आमदनी के स्तरों और इसकी खरीद क्षमता की दृष्टि से मापा जाता है। इसमें आर्थिक वृद्धि ....
प्रश्न : भारत में नृजातीय अस्मिता तथा धार्मिक अस्मिता के मुख्य सरोकार कौन-से हैं?
(2015)
उत्तर : इस संसार में अपना अस्तित्व सक्रिय बनाए रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को एक पहचान की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार प्रत्येक समाज की भी अपनी पहचान होती है। यही बात हर तरह की संस्कृति, समुदाय के साथ भी है और इससे संबंधित या जुड़े हुए लोग इस पहचान को आत्मसात करते हैं या उससे संबंधित साबित करते हैं।
भारत में नृजातीयता और धार्मिकता के साथ भी यही तत्व जुड़ा हुआ है। नृजातीय और धार्मिक संघर्ष ....
प्रश्न : विकास के माध्यम से विस्थापन का ग्रामीण भूमिहीन और सीमान्त किसानों पर प्रभाव।
(2015)
उत्तर : ग्रामीण क्षेत्रें में आजीविका का साधन मुख्य रूप से खेती ही होती है और जो भूमिहीन हैं वे उनके खेतों में काम करते हैं एवं सरकारी परियोजनाओं में काम कर अपना जीवन चलाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रें में विकास करना थोड़ा सा पेचीदा हो जाता है क्योंकि वे सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक तौर पर जुड़े होते हैं।
ऐसे में विकास से ग्रामीणों को अपने क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में विस्थापित होना पड़ता है अगर विस्थापित भी होते ....
प्रश्न : गरीबी, वंचित होने तथा असमानता के अन्तः सम्बन्धों की व्याख्या कीजिए।
(2013)
उत्तर : समाज की संरचना तथा संस्कृति में परिवर्तन का सूत्रपात आन्तरिक तथा बाह्म दोनों कारणों से होता है। आन्दोलन भी आन्तरिक कारणों का एक घटक है जो कहीं न कहीं से गरीबी, आर्थिक, राजनीतिक तथा सामाजिक असमानता का परिणाम है। आन्दोलन शोषण के विरुद्ध आवाज तथा विदेशों में चल रहे आन्दोलनों से प्रेरणा लेकर दोनों रूपों में हो सकता है। शोषण से मुक्ति तथा अधिकारों की प्राप्ति के लिए वर्तमान व्यवस्था के विरोध में संघर्ष को ....
प्रश्न : नृजातीयता और राष्ट्रवाद के मुद्दे किस प्रकार संबंधित हैं? भारत में नृजातीय राष्ट्रवाद के प्रादुर्भाव के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
(2011)
उत्तर : नृजातीयता समूह का शाब्दिक अर्थ है- राष्ट्र। सजातीयता की उत्त्पत्ति इसी राष्ट्र से हुई है, परन्तु सजातीयता का अर्थ राष्ट्रीयता से नहीं जोड़ा जाता। सजातीयता का अर्थ लोगों के एक समूह से लगाया जाता है, जिसकी प्रकृति किसी प्रजाति, वंश और संस्कृति के आधार पर विशिष्ट प्रकार की कही जा सकती है एवं इसकी अनुभूति समूह के सदस्यों द्वारा किया जाना आवश्यक है।
एन्थोनी गिडिन्स लिखते हैं कि नृजातीयता समूह के सदस्य समाज में अपने आप ....
प्रश्न : भारत में अंतर्जातीय द्वंद्व के महत्वपूर्ण आयामों पर प्रकाश डालिये।
(2010)
उत्तर : जाति व्यवस्था भारतीय समाज की एक महत्वपूर्ण संरचना है। सी. बुशल के अनुसार जाति व्यवस्था वंश पर आधारित विभिन्न समूहों का एक पदक्रम है एवं प्रत्येक वंशानुगत समूह एक-दूसरे से अलग हैं, परंतु कार्यात्मक दृष्टि से दूसरे पर आश्रित हैं। भारतीय समाज में जाति व्यवस्था केवल एक स्तरीकरण का प्रकार ही नहीं था, एक सामूहिक जीवन शैली भी था। इस जाति व्यवस्था में जातियां लंबवत् क्रम में व्यवस्थित हैं एवं एक पदक्रम का निर्माण करती ....
प्रश्न : भारतीय समाज में परिवर्तन में बाधाएं।
(2005)
उत्तर : यह सत्य है कि भारतीय समाज परिवर्तित हो रहा है और विकास की कुछ दिशाएं स्पष्ट होती जा रही हैं, फिर भी हमें इस बात से इन्कार नहीं करना चाहिए कि हम सभी लक्ष्यों की प्राप्ति में सफल नहीं हो पाए हैं, जो हम चाहते थे। वास्तव में, इसके पीछे मूल कारण भारतीयसमाज में उपस्थित कुछ समस्याएं जो परिवर्तन में बाधायें उत्पन्न करती हैं, उत्तरदायी ही हैं। इस सम्बन्ध में निम्न कारकों का विश्लेषण आवश्यक ....
प्रश्न : धार्मिक कट्टरवाद।
(2005)
उत्तर : धार्मिक कट्टरवाद एक आंदोलन या आस्था है जो पैराणिक धर्म ग्रंथों या प्रकट धर्म के मौलिक तत्वों की ओर लौटने का आग्रह करता है। बहुधा इसकी धर्म में आधुनिकतावाद और उदारतावाद से तुलना की जाती है। मूलतः इस अवधारणा की प्रकृति धर्मशास्त्रीय है, फिर भी इसका प्रयोग समाज सुधार की योजनाओं को क्रियान्वित करने या राजनीतिक सत्ता को हथियाने के एक हथियार के रूप में किया जाता है। परंतु प्रायोगिक तौर पर इसका प्रयोग वर्तमान ....
प्रश्न : महिलाओं पर अत्याचारों की सविस्तार चर्चा कीजिए और उनके लिए सर्वनाशी उपाय सुझाइए।
(2004)
उत्तर : महिलाओं पर अत्याचारों का वर्णन हम मुख्यतः महिलाओं के प्रति हिंसा एवं उससे संबंधित तथ्यों के अंतर्गत करते हैं। महिलाओं पर अत्याचार को इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है- आपराधिक हिंसा (बलात्कार, अपहरण, हत्या), घरेलू हिंसा (दहेज हत्या, पत्नी की पिटाई, नातेदारों द्वारा शोषण, विधवाओं और वृद्ध स्त्रियों से दुर्व्यवहार, बहू को यातना) और सामाजिक हिंसा (पत्नी या बहु को कन्या भ्रूण हत्या के लिए बाध्य करना, छेड़छाड़, युवा विधवा को ‘सती’ होने के ....
प्रश्न : भारतीय समाज पर जनसंचार माध्यमों और शिक्षा के प्रभाव पर विस्तार से चर्चा कीजिए।
(2004)
उत्तर : किसी समाज पर जनसंचार के माध्यमों के अंतर्गत हम मुख्यतः प्रिंट एवं विजुअल जनसंचार माध्यमों की बात करते हैं। जनसंचार के ये साधन विशेष रूप से अखबार, फिल्म, रेडियो, टी.वी. एक साथ विश्वव्यापी श्रोताओं को संदेश पहुंचाते हैं। इन साधनों ने सभी सीमाओं को समाप्त कर दिया है, जैसे- भारतीय नेशनल नेटवर्क पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक जैसे- महाभारत, रामायण तथा वर्तमान में प्रसारित हो रहा धारावाहिक ‘शक्तिमान’ एवं ‘क्योंकि सास भी कभी बहु थी’का ....
प्रश्न : जनजातीय नीति की पृथक्तावादी अवधारणा।
(2003)
उत्तर : जनजातीय समाज में जहां तक अवधारणा की बात है तो यह मुख्यतः भौगोलिक एवं सामाजिक सांस्कृतिक एकाकीपन है। भौगोलिक पृथक्तावादी अवधारणा के आधार के विषय में यह कहा जाता है कि जनजाति के लोग भौगोलिक दृष्टि से अलग-अलग भू-भागों, जैसे पहाड़, जंगल आदि में रहते हैं लेकिन जातिवादी हिन्दू मैदानों में रहते हैं। सभ्य पड़ोसियों से अलग तथा उनसे कम संपर्क के कारण वे हिन्दुओं की तुलना में कम सभ्य हैं। यद्यपि यह सत्य है ....
प्रश्न : निर्बल वर्गों की शैक्षिक समस्याएं।
(2003)
उत्तर : निर्बल वर्गों के अंतर्गत मुख्यतः महिलाएं, अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियां एवं पिछड़े वर्ग आते हैं। इन वर्गों में शैक्षणिक समस्याएं मुख्य रूप से भेद-भाव की नीति एवं सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि रही है। एम-एस- गोरे के आठ राज्यों के अध्ययन के आधार पर यह पाया कि महिलाओं के शैक्षिक अवसरों में भेदभाव लिंग के आधार पर सर्वाधिक था। मोटे तौर पर लड़कियों ने शिक्षा में बहुत प्रगति की है और आज विश्वविद्यालयों के कई विभागों संभागों में ....
प्रश्न : भारत में बाल श्रम की समस्याएं।
(2002)
उत्तर : बालश्रम की समस्या बहुत गहराई तक जड़ें जमा चुकी हैं। यह समस्या वास्तव में गरीबी, बीमारी व कुपोषण के कारण उत्पन्न होती है। बाल श्रम पर गठित विश्व श्रम संगठन की विशेषज्ञ समिति का कहना है कि 10 से 14 वर्ष की आयु वाले लगभग 25 प्रतिशत बच्चे विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। अधिकांश बच्चों से गैरकानूनी रूप से काम लिया जाता है, वे शिक्षा से वंचित हैं तथा जीवन पर्यन्त गरीबी में ....
प्रश्न : विवाहित महिलाओं पर अत्याचारों की प्रकृति।
(2002)
उत्तर : विवाहित महिलाओं पर अत्याचारों की प्रकृति मूलतः हम आंतरिक एवं बाहरी के सापेक्ष ले सकते हैं। विवाहित महिला अपने पैतृक घर को छोड़कर एक नये घर में प्रवेश करते है जिसके कारण उसे वहां की सारी परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बिठाना पड़ता है। जहां तक अत्याचारों की प्रकृति का सवाल है, यह दहेज प्रथा से शुरू होता है। दहेज प्रथा के फलस्वरूप महिलाओं को अपने ससुराल में बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ....
प्रश्न : मद्यपान एवं नशीले पदार्थ व्यसन के सामाजिक परिणाम
(2001)
उत्तर : मद्यपान एवं नशीले पदार्थ व्यवसन के सामाजिक परिणाम का हम निम्नांकित बिंदुओं के आधार पर वर्णन कर सकते हैं:
प्रश्न : भारत में शैक्षिक असमानताएं।
(2000)
उत्तर : यद्यपि यह एक तथ्य है कि सभी मनुष्य योग्यता और दक्षता में समान नहीं है और ऐसे समाज की कल्पना करना भी अविवेकपूर्ण और आदर्शहीन होगा जो अपने सभी सदस्यों को एक समान स्थिति और लाभ प्रदान कर सके, फिर भी उनके उद्देश्यों और आकांक्षाओं की प्राप्ति के लिए सभी लोगों को समान अवसर प्रदान करना आवश्यक है।
भारत में शैक्षिक असमानता को 1967 में आठ राज्यों में किये गये एक अनुभावात्मक अध्ययन के आधार पर ....
प्रश्न : वेश्यावृत्ति के सामाजिक सहसंबंधक।
(2000)
उत्तर : वेश्यावृत्ति एक ऐसी सामाजिक समस्या है जो समाज को अंदर-ही-अंदर खोखला करते जा रही है। वर्तमान समय में वेश्यावृत्ति भारत के हर एक शहरों में देखने को मिल जाता है। साथ ही आज शिक्षित वर्ग, समाजसेवी संस्थाएं एवं सरकार के बीच वेश्यावृत्ति को कानूनी मान्यता प्रदान करने की एक बहस सी चल पड़ी है।
सवाल उठता है वेश्यावृति के क्या-क्या सामाजिक सहसंबंधकहै? उत्तर के रूप में यह कहा जा सकता है वेश्यावृत्ति का मूल समाज की ....
प्रश्न : संपूर्ण साक्षरता अभियान।
(1999)
उत्तर : भारत में बढ़ती अशिक्षा की समस्या का समाधान करने के लिए एक प्रोद्योगिक मिशन 5 मई, 1988 को शुरू किया गया, जिसे राष्ट्रीय साक्षरता मिशन कहते हैं। इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य 1995 तक 15-35 वर्ष के बीच के आयु के 80 मिलियन लोगों को प्रकार्यात्मक साक्षरता प्रदान की जाय। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए बहुत से प्रभावी कार्यक्रम चलाये गये एवं बहुत से संगठनों के माध्यम से सम्पूर्ण साक्षरता अभियान चलाये गये। माध्यम के रूप ....
प्रश्न : दहेज, एक सामाजिक समस्या के रूप में।
(1999)
उत्तर : दहेज एक ऐसी सामाजिक समस्या है जो पूरे समाज को खोखला करते जा रहा है। दहेज वस्तुतः वह राशि या संपत्ति होती है जो वर पक्ष द्वारा वधु पक्ष से डिमांड की जाती है। सर्वप्रथम यह हिंदू समाज तक ही सीमित है परंतु वर्तमान समय में यह मुस्लिम, ईसाई एवं अन्य प्रकार के समाजों में भी प्रचलन बढ़ रहा है। यहां तक जनजाति समाजों में भी दहेज की प्रथा की शुरुआत हो चुकी है।
दहेज मुख्यतः ....
प्रश्न : भारत में वयस्क असाक्षरता की समस्या।
(1998)
उत्तर : भारत में वयस्क असाक्षरता की समस्या बहुत ही गंभीर एवं आलोचनयोग्य है। स्वतंत्रता के 55 वर्ष बाद भी भारत इस समस्या से जूझ रहा है। वास्तव में यह विभिन्न विदेशी शासकों द्वारा किये गये शोषण की नीति के फलस्वरूप हुआ है। भारत गांवों का देश है जहां पर अभी भी शिक्षा साधनों की कमी है। भारत के अधिकांश लोग गांवों में निवास करते हैं। इसलिए यहां प्रौढ़ असाक्षरता की संख्या अधिक है। इस समस्या से ....