प्रश्न : नगरीय भारत में अनौपचारिक श्रम-बाजार से संबंधित मुद्दे।
(2015)
उत्तर : नगरीय भारत में अधिकांश श्रम-शक्ति अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है। अनौपचारिक श्रम-बाजार में प्रधानता अप्रवासी श्रमिकों की होती है जो आजीविका की खोज में ग्रामीण क्षेत्रें से आए होते हैं। चूंकि उनके कौशल व शिक्षा का स्तर बहुत निम्न होता है इसलिए वे निम्न प्रौद्योगिकी संबंधित रोजगार में संलग्न होते हैं जो कि कम मजदूरी वाले होते हैं। श्रमिक को उसके श्रम के बदले कम मजदूरी मिलती है जो उसके भरण-पोषण के स्तर से काफी ....
प्रश्न : प्रवासी नगरीय निर्धनों की समस्याओं का समाजशास्त्रीय विश्लेषण कीजिए।
(2014)
उत्तर : अड़तालीस वर्षों की योजनाओं के पश्चात भी भारत अभी तक विश्व के सबसे अधिक निर्धन देशों में से एक है। कई देशों ने, जो भारत से कहीं छोटे हैं, प्रगति की है। संसार के निर्धनों में हर तीसरा व्यक्ति भारतीय है और इस संख्या में वृद्धि हो रही है।
हमारे समाज में निर्धन जिन महत्वपूर्ण समस्याओं का सामना करते हैं वे हैं: (1) सामाजिक भेदभाव और सामाजिक निन्दा, (2) आवास और (3) निर्धनता की उप-संस्कृति।
प्रश्न : अनौपचारिक क्षेत्रक में श्रमिकों पर वैश्वीकरण के प्रभावों की विवेचना कीजिए।
(2014)
उत्तर : छोटे कारखानों और संस्थानों के मजदूरों के अलावा ऐसे भी मजदूर बड़ी संख्या में हैं, जिन्हें नियमित श्रमिकों की सुविधाएं नहीं मिलती।
ये श्रमिक ठेका मजदूरों या अनियमित श्रमिक के रूप में नियुक्त किए जाते हैं। इस क्षेत्र में कई ऐसी समस्याएं हैं, जो रोजगार की स्थितियों में शर्तों और काम की सुरक्षा आदि के संदर्भ में देखी जा सकती हैं। औपचारिक क्षेत्र के मजदूर कई तरह के सुविधाएं पाते हैं, जिससे मालिकों को उन पर ....
प्रश्न : जाति पर औद्योगिकरण के प्रभाव की परीक्षा कीजिए।
(2013)
उत्तर : उद्योग का प्रभाव मशीनी नहीं है। इनके प्रभाव सभी समाजों में एक जैसे नहीं है परन्तु टी.बी. बोटोमोर के अनुसार, कुछ उद्योगों को परिणामों के साथ जोड़ा जा सकता है। विलियम आगबर्न ने कहा उद्योग और पूंजीवाद ने मानव समाज में तीन सौ वर्षों में जितने परिवर्तन किये हैं उतने परिवर्तन तीन हजार वर्षों में नहीं हुये थे। इन परिवर्तनों को मूल रूप कुछ कोटियों में आकलित किया जा सकता है।
प्रश्न : नगरों में झुग्गी-झोपडि़यों पर विश्लेषणात्मक टिप्पणी लिखिए।
(2013)
उत्तर : हाल के दशकों में भारत की जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ी है, आज भारत का स्थान जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में दूसरा है। भारत आज भी विकासशील देशों की श्रेणी में ही खड़ा है। जनसंख्या जिस दर से बढ़ रही है, उसके अनुपात में भारत की आधारभूत संरचना का विकास नहीं हो पाया है, थोड़ा बहुत जो कुछ देखने को मिलता है वह भी भारत और इंडिया के बीच की खाई को नहीं पाट ....
प्रश्न : सेज (विशेष आर्थिक क्षेत्र) की नीति और उसके प्रति सामाजिक अनुक्रिया की प्रकृति का मूल्यांकन कीजिए।
(2010)
उत्तर : सेज (विशेष आर्थिक क्षेत्र) एक भौगोलिक क्षेत्र है जिसका अपना कानून है जो देश के सामान्य आर्थिक कानून की तुलना में काफी उदार है। सेज की नीति का निर्माण व्यापार एवं विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए किया गया है, साथ ही इस बात पर भी ध्यान दिया गया है कि आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के क्रम में राजनीति संवेदनशील सुधार की आवश्यकता ना पड़े, खासकर श्रम कानून आदि से सम्बन्धित मुद्दे। इस ....
प्रश्न : युवा वर्ग पर बी.पी.ओ. उद्योग के प्रभावों का समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य से परीक्षण कीजिए।
(2010)
उत्तर : बी.पी.ओ. उद्योग जो भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में काफी सहायक सिद्ध हो रहा है। यह उद्योग भारतीय समाज में बहुआयामी नये परिवर्तन को भी जन्म दे रहा है। इस उद्योग का अत्यधिक प्रभाव युवाओं पर देखने को मिल रहा है। समाजशास्त्रियों पर भी देखने को मिल रहा रहा है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि बी.पी.ओ. उद्योग का प्रभाव केवल एक आर्थिक प्रभाव के रूप में ही अनुभव नहीं किया जा सकता, बल्कि इसको विभिन्न रूपों ....
प्रश्न : भारत में नगरीय पर्यावरण के विभिन्न पक्षों की व्याख्या कीजिए तथा नगरीय पर्यावरण पर नगरीय विकास कार्यक्रमों के प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए।
(2005)
उत्तर : भारत में नगरीय संरचना, ग्रामीण संरचना से पूर्णतः भिन्न होता है, फिर भी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भारत में नगरीय पर्यावरण हाल के कुछ वर्षों में प्रवजन और औद्योगिकीकरण के कारण प्रभावित हुआ है। भारत में नगरीय पर्यावरण के विभिन्न पक्षों के अंतर्गत हम विभिन्न पर्यावरणीय समस्याओं का आकलन कर सकते हैं। ये हैं- मकान एवं गन्दी बस्तियां भीड़ और निर्वैयक्तिकरण, जल आपूर्ति और जल निकास परिवहन एवं यातायात ....
प्रश्न : भारत में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। उन कारकों की विवेचना कीजिए, जिन्होंने इसे अवरोधित किया है।
(2003)
उत्तर : आधुनिकीकरण एक ऐसी स्थिति है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति उत्पादन या आय में वृद्धि करने के लिए प्राकृतिक साधनों पर नियंत्रण तथा नवीन प्रौद्योगिकी के उपभोग को विशेष महत्व देता है। संरचनात्मक विशेषताएं एवं सामाजिक- सांस्कृतिक विशेषताओं का अनुकरण सामाजिक विशेषताओं में आर्थिक विशेषीकरण, नगरीकरण, गतिशीलता में वृद्धि, शिक्षा का विस्तार राजनीतिक सत्ता का विकेंद्रीकरण जीवन के सभी पाठकों में राजनीति का प्रवेश परंपरागत अभिजात वर्ग की शक्ति में कमी, जनसामान्य की राजनीतिक सहभागिता में वृद्धि, ....
प्रश्न : भारतीय समाज पर जन-संचार माध्यमों के प्रभाव का परीक्षण कीजिए। क्या जन-संचार माध्यमों में से मंथर गति से प्रवेश करता हुआ पश्चिमी उपभोक्तावाद और भौतिकवादी संस्कृति पर विपरीत प्रभाव डाल रहे हैं?
(2002)
उत्तर : किसी समाज पर जनसंचार के साधनों से जैसे पुस्तकें, रेडियो, समाचारपत्र, फिल्म या सिनेमा, रिकार्ड और वीडियो का गहरा प्रभाव पड़ता है जनसंचार के ये साधन विशेष रूप से फिल्म, रेडियो टी.वी. एक साथ राष्ट्रव्यापी श्रोताओं को संदेश पहुंचाते हैं। इन साधनों ने सभी सीमाओं को समाप्त कर दिया है, जैसे-भारतीय नेशनल नेटवर्क पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक जैसे-महाभारत, रामायण एवं वर्तमान में प्रसारित हो रहा धारावाहिक ‘शक्तिमान’ एवं ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी, ....
प्रश्न : क्या आप इस विचार से सहमत हैं कि गंदी बस्तियां अंधकार और निराशा के क्षेत्र होते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण बताइए।
(2000)
उत्तर : वर्तमान में औद्योगिक केंद्रों में जनसंख्या की तीव्र वृद्धि हुई है एवं उसी के अनुपात में मकानों का निर्माण नहीं हो पाने के कारण वहां अनेक गंदी बस्तियां बन गयी है। विश्व के प्रत्येक प्रमुख नगर के पांचवें भाग से लेकर आधे भाग तक की जनसंख्या गन्दी बस्तियां अथवा उसी के समान दशाओं वाले मकानों में रहती हैं। नगरों की कैन्सर के समान इस वृद्धि को विद्वानों ने ‘पत्थर का रेगिस्तान’ व्याधिकी नगर, ‘नरक की ....
प्रश्न : गंदी बस्तियां सामाजिक पटल पर क्षत्चिन्ह हैं। इन क्षत्चिह्नों को किस प्रकार दूर किया जा सकता है?
(1999)
उत्तर : वर्तमान में औद्योगिक केंद्रों में जनसंख्या की तीव्र वृद्धि हुई है। एवं उसी के अनुपात मे मकानों का निर्माण नहीं हो पाने के कारण वहां अनेक गंदी बस्तियां बन गयी हैं। विश्व के प्रत्येक नगर में पांचवें भाग से लेकर आधे भाग तक की जनसंख्या गन्दी बस्तियों अथवा उसी के समान दशाओं वाले मकानों में रहती है। नगरों की फैन्सर के समान इस वृद्धि को विद्वानों ने ‘पत्थर का रेगिस्तान’व्याधिकी नगर, ‘नरक की संक्षिप्त रूप ....
प्रश्न : आधुनिकीकरण किस प्रकार परिवर्तन का कारण है? इसके सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्षों की विवेचना करें।
(1999)
उत्तर : वर्तमान समय में आधुनिकीकरण सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त कारण है। इस तथ्य की पुष्टि डब्ल्यु- मूर, मैकलीलैंड एवं आधुनिकीकरण सिद्धांत के आलोचकों ने की है। विलबर्ट मूर ने अनुसार सामाजिक परिवर्तन परम्परागत और पूर्व आधुनिक समाज का प्रोद्योगिकी पर आधारित सामाजिक संगठनों जैसे कि आर्थिक रूप से विकसित एवं तुलनात्मक रूप से राजनीतिक स्थायित्व वाले पश्चिमी विश्व के राष्ट्रों में पूर्ण रूपांतरण है। उसने औद्योगीकरण जिसके अंतर्गत मूल्यों, संस्थाओं, संगठनों एवं प्रेरणाओं में परिवर्तन ....
प्रश्न : ग्रामीण और शहरी आबादी के बीच बढ़ती आर्थिक असमानताएं
(1998)
उत्तर : नगरीय एवं ग्रामीण आर्थिक जीवन में बहुत अंतर है। सिम्स लिखते हैं, जीविकोपार्जन की दो मौलिक रूप से भिन्न रीतियों ने ग्रामीण और नगरीय संसार को अलग कर दिया है। गांव मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर हैं तो नगर व्यवसायों पर। गांववासियों का जीवन-स्तर नगर वासियों की तुलना में निम्न होता है। नगर के लोग गांव वालों की अपेक्षा अधिक खर्चीले होते हैं। रॉस ने सही कहा है कि ‘ग्रामीण जीवन सुझाव देता है ....
प्रश्न : अनियोजित शहरी वृद्धि के सामाजिक परिणाम।
(1998)
उत्तर : अनियोजित शहरी वृद्धि के फलस्वरूप निम्नांकित सामाजिक परिणाम हुए हैं-