प्रश्न : वृद्ध भारत में वृद्धों की समस्या की चर्चा कीजिए। उनकी समस्याओं के समाधान निकालने के लिए कौन से विभिन्न परिपेक्ष्य हैं।
(2015)
उत्तर : वृद्ध अपने जीवन के जैव-शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक क्षेत्रें में समस्याओं का सामना करते हैं। जैव शारीरिक क्षेत्र में जैसे-जैसे व्यक्ति विकसित होता है तो जीवन में वह प्रजनन क्षमता, शारीरिक शक्ति, कोशिकाओं के कार्यों का ह्नास होता चला जाता है तथा रोग की प्रतिरोधक क्षमता निरंतर कम होती जाती है।
धीरे-धीरे मनोवैज्ञानिक क्षेत्र में अपनी बोध क्षमताओं के विकास, अपने जीवन लक्ष्यों और आत्मपहचान का आभास करता है इसके साथ-साथ वृद्ध होता जाता है। आत्म छवि ....
प्रश्न : महिलाओं में शिशु मृत्यु-दर की प्रवृत्तियां
(2014)
उत्तर : शिशु मृत्युदर से तात्पर्य आयु के प्रथम वर्ष (0-1) की मृत्यु से है। शिशु मृत्युदर को समाज की सामान्य स्वास्थ्य दशाओं का सर्वश्रेष्ठ सूचक माना जाता है।
यह दर जितनी कम होगी जीवन स्वास्थ्य उतना ही अच्छा होगा व प्रजनन दर भी कम होगी। इसके विपरीत, जहां शिशु मृत्युदर अधिक होगी वहां प्रजनन दर भी ऊंची होगी। शिशु मृत्यु दर को ज्ञात करने हेतु जीवन के प्रथम वर्ष (0-1) में हुई कुल मृत्यु को उसी काल ....
प्रश्न : अगले दशक के लिए, वृद्ध होती हुई जनसंख्या (60+) के लिए क्या जनांकिकीय प्रक्षेपण है? उनके लिए नीति-निर्माण के इसके क्या निहितार्थ हैं?
(2014)
उत्तर : वृद्धावस्था को पहले इसलिए गंभीर सामाजिक समस्या नहीं माना जाता था कि कुल जनसंख्या में वृद्धों का अनुपात अपेक्षाकृत बहुत कम होता था। परंपरागत भारतीय समाज में वृद्धों की परिवार में एक सम्मानित प्रस्थिति होती थी। उनकी प्रतिष्ठित प्रस्थिति, आदर्श परिवार की भांति विशेष स्वरूप की देन थी, जो संयुक्त परिवार कहलाता था।
संयुक्त परिवार में संबंधियों के नातेदारी के विन्यास नातेदारी प्रथा के सिद्धांतों द्वारा निर्धारित किए जाते थे। परिवार उत्पादन की एक इकाई थी ....
प्रश्न : स्त्री-पुरुष अनुपात।
(2013)
उत्तर : प्रति हजार पुरुषों की संख्या में स्त्रियों की संख्या को सम्मिलित रूप से स्त्री-पुरुष अनुपात कहते हैं। जेंडर का दृष्टिकोण आधुनिक दृष्टिकोण है जिसका मूल सिद्धान्त ये है कि संस्कृति, सामाजिक संरचना, अर्थव्यवस्था और राजनीति में महिला को कमजोर किया है। जूलिया क्रिस्टोवा के अनुसार स्त्री को अपनी आंखों से दुनिया देखने का मौका नहीं मिला। पुरुषों ने तय किया उसका नायक कौन होगा। वेकैसे गीत गायेंगी। सुबह उन्हें क्या पसन्द है, इसलिए उनके अनुसार ....
प्रश्न : भारतीय युवा का जनांकिकीय परिप्रेक्ष्य।
(2012)
उत्तर : 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 121 करोड़ से थोड़ी अधिक है। विगत दशक में भारतीय जनसंख्या में 17.64% की वृद्धि हुई है। भारत की नयी जनगणना के अनुसार भारत की कार्यशील जनसंख्या मे काफी वृद्धि हुई है।
नयी जनसंख्या आंकलन के अनुसार वर्ष 2010 से 2030 के मध्य भारत के 484 मिलियन व्यक्ति कार्यशील जनसंख्या में शामिल हो जाऐंगे। इस कार्यशील जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग 15-34 आयु वर्ग के युवा जनसंख्या आने ....
प्रश्न : शिशु मृत्यु दर के कुछ सामाजिक एवं सांस्कृतिक निर्धारकों की विवेचना कीजिए। शिशुहत्या को रोकने के लिए अपने सुझाव दीजिए।
(2012)
उत्तर : शिशु मृत्यु का सबसे प्रचलित स्वरुप कन्या भ्रूण हत्या है जो समाज के लिए एक अभिशाप की तरह है, यह लिंग भेद पर आधारित है। वर्तमान समय में भारतीय समाज में शिशु मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण कन्या भ्रूण हत्या है। भारतीय समाज एक पितृसत्तात्मक समाज रहा है, जिसके कारण लड़कों का महत्व अधिक है एवं लड़कियों के प्रति भेदभाव देखने को मिलता है और यही प्रवृत्ति कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा देती है। भारत ....
प्रश्न : वृद्ध जनसंख्या की क्या समस्याएं हैं? वृद्ध व्यक्तियों की सहायक परम्परागत सामाजिक व्यवस्था के पतन का वर्णन कीजिए। वृद्ध जनसंख्या की सहायता के लिए वैकल्पिक उपायों का सुझाव दीजिए।
(2012)
उत्तर : सामाजिक परिवर्तन के इस दौर में आम व्यक्ति की जिंदगी का सभी पक्ष आज प्रत्यक्षतः या परोक्षतः प्रभावित हुआ है। इसी क्रम में आज वृद्धों के समक्ष भी कई प्रकार की समस्याएं इन नवीन सामाजिक परिवर्तन की वजह से परिलक्षित हुई हैं। आज वृद्धों की स्थिति दिन-प्रति-दिन एक चिंता का विषय बनती जा रही है। अपने समूचे जीवन के दौरान अपनी कर्मठशीलता, लगन, प्यार तथा मेहनत की बदौलत अपने परिवारों की जिम्मेदारी उठाते-उठाते उम्र का ....
प्रश्न : मृत्युदर तथा सामाजिक वर्ग में सम्बन्ध
(2011)
उत्तर : मृत्युदर से तात्पर्य 1000 व्यक्तियों पर मरने वाले लोगों की संख्या से है। यद्यपि भारत जैसे विकासशील देश में स्वास्थ सेवाओं में विस्तार, परिवार नियोजन व सामाजिक सांस्कृतिक जागरूकता के कारण मृत्युदर को काफी नियंत्रित किया गया है (1921 के 36.3 से 2011 में 8.2 तक) फिर भी अन्य देशों की तुलना में यह काफी कम है। भारत में मृत्युदर को सीधे सामाजिक सांस्कृतिक कारकों तथा जीवन जीने की परिस्थितियों से सम्बन्धित किया जा सकता ....
प्रश्न : जाति एवं जनजाति के सम्बन्ध का विश्लेषण कीजिए।
(2011)
उत्तर : वैश्वीकरण में आधुनिक मूल्यों तथा भारत सरकार की विकास योजनाओं के प्रभाव से वर्तमान दौर में जाति जनजाति का अन्तर समाप्त सा हो चला है। कई जनजातीय (जैसे राजस्थान की मीणा) इनका लाभ पाकर समाज की मुख्य धारा में अपने को बेहतर अनुकूलित कर पायी हैं, तो कई जनजातियां आज भी परम्परागत नियमों धार्मिक आचारो-विचारों में है। अतः जाति जनजाति के मध्य सम्बन्धों का विश्लेषण आवश्यक सा हो गया है।
सामान्यतया जाति से तात्पर्य अर्न्तविवाहों समूहों ....
प्रश्न : तीव्र नगरीकरण एवं धारणीय विकास एक साथ नहीं चल सकते हैं। तर्क सहित विवेचना कीजिये।
(2011)
उत्तर : समाजशास्त्रीय अर्थ में नगरीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें नगरीय जीवन शैली एवं नगरीय क्षेत्रें का विस्तार सम्भव होता है।
भारत में स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात मुख्यता औद्योगिक नगरों का विकास हुआ है जिससे नगरीकरण तथा औद्योगिकरण को तीव्र ब्रढ़ावा मिला है। पर अति नगरीकरण के नकारात्मक परिणाम आवास की समस्या, गंदी बस्तीयों की समस्या, स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की समस्या, परिवहन समस्या, प्रदूषण की समस्या व बढ़ते अपराधों आदि के रूप में सामने आये हैं। भारत ....
प्रश्न : विकास के मापन हेतु शिशु मृत्यु दर सबसे अधिक संवेदनशील अनुक्रमणिका है। टिप्पणी कीजिए।
(2011)
उत्तर : शिशु मृत्युदर से तात्पर्य आयु के प्रथम वर्ष (0-1) की मृत्यु से है। शिशु मृत्यु दर को समाज की सामान्य दशाओं का सर्वश्रेष्ठ सूचक माना जाता है। यह दर जितनी कम होगी जीवन स्वास्थ्य उतना ही अच्छा होगा व प्रजनन दर उतनी ही कम होगी। उसके विपरीत जहां शिशु मृत्यु दर अधिक होगी, वहां प्रजनन दर भी अधिक होगी। शिशु मृत्यु दर जनसंख्या संरचना का प्रमुख पक्ष है और किसी भी देश में इसकी अधिकता ....
प्रश्न : भारत के सन्दर्भ में जनसंख्या परिस्थितिकी तथा पर्यावरण के पारस्परिक संबंध की व्याख्या कीजिये।
(2011)
उत्तर : बीसवीं शताब्दी के अन्तिम वर्षों में पर्यावरण पर मानवीय क्रियाओं के परिणामस्वरूप कई नवीन सामाजिक तथा राजनीतिक परिस्थितिकी आन्दोलनों का जन्म हुआ है (भारत में अरूणा राय का नर्मदा बचाव, सुन्दरलाल बहुगुणा का चिपको तथा वर्तमान में वन्दना शिला द्वारा अनेक आन्दोलन) जिन्होंने ग्रामीण तथा नगरीय समाजशास्त्र को प्रभावित किया है। पाक तथा वर्गेस के शहरों की बनावट तथा जनसंख्या वितरण के सम्बन्ध तथा उनका परिस्थिकी पर प्रभाव के अनेक अध्ययन कर निष्कर्ष दिये कि ....
प्रश्न : भारत के कुछ राज्यों में गिरते हुए स्त्री-पुरुष अनुपात के सामाजिक-सांस्कृतिक कारणों पर चर्चा कीजिए।
(2010)
उत्तर : भारत में जनसंख्या वृद्धि के पीछे सामाजिक-सांस्कृतिक कारण, जैविक कारण से अधिक प्रभावशाली है। धार्मिक पृष्ठभूमि, शिक्षा स्तर, विवाह की उम्र, महिला की प्रस्थिति, पुत्र प्राप्ति की इच्छा, गर्भ निरोधक उपायों के प्रति लोगों की सोच सरकार की नीति आदि ऐसे सामाजिक कारक हैं, जो जनसंख्या को नियंत्रित करते हैं।
स्त्री-पुरुष अनुपात, जनसंख्या की विशेषता को अध्ययन करने का एक महत्वपूर्ण पहलू है। पिछले सौ वर्षों में भारत के स्त्री-पुरुष अनुपात में लगातार गिरावट आई है, ....
प्रश्न : वयोवृद्धों के लिए सामाजिक सुरक्षा उपाय।
(2010)
उत्तर : भारत एक ऐसा देश है जहां आपसी भाईचारा, परिवार एवं समाज में दूसरे के हितों का ध्यान, आपसी सहयोग आदि परंपरागत पारिवारिक मूल्य आज भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। आधुनिकता एवं नगरीकरण के कारण संयुक्त परिवार की संरचना विखंडित है। यह तस्वीर लगातार धूमिल होती नजर आ रही है। बुजुर्ग जिनका परिवार में बहुत सम्मान एवं देख-रेख होती थी, अब कहीं-कहीं यह सुनने को भी मिलता है कि कुछ बुजुर्ग लोगों से परिवार में गलत बर्ताव ....
प्रश्न : भ्रूणवध से संबंधित सामाजिक-सांस्कृतिक कारक
(2004)
उत्तर : भ्रूणवध वास्तव में समाज के लिए एक अभिशाप की तरह है जो लिंग-भेद पर आधारित होता है। वर्तमान समय में भारतीय समाज में यह समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। भ्रूणवध से संबंधित सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों का वर्णन हम निम्नलिखित बिन्दुओं के तहत कर सकते हैं-
प्रश्न : शिशु-मत्यु दर से संबंधित सामाजिक सांस्कृतिक कारक
(2003)
उत्तर : धर्म एवं जाति भारतीय समाज का मूल तत्व है। इसके अतिरिक्त सांस्कृतिक प्रयोग में परिवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। परिवार के अंतर्गत बच्चों का पालन-पोषण एवं महिलाओं के द्वारा समाजीकरण का कार्य, बच्चों का जन्म देना एवं देखभाल प्रमुख हैं।
विभिन्न अध्ययनों के द्वारा यह देखा गया कि धर्म, जाति एवं परिवार के प्रकार शिशु-मृत्यु दर को बहुत प्रभावित करता है। साधारणतया, हिन्दू जातियों में अहिन्दू जातियों की अपेक्षा अधिक शिशु-मृत्यु दर पायी जाती है। ....
प्रश्न : भारत में बाल-कल्याण कार्यक्रमों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। क्या इनसे भारत में बच्चों के सभी वर्गों को लाभ मिला है?
(2000)
उत्तर : मानव संसाधन विकास मंत्रालय में 1985 में महिला और बाल विकास विभाग का गठन किया गया। इसका उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के लिए आवश्यक सर्वांगीण विकास की जरूरत को पूरा करना है। यह विभाग देश में महिलाओं और बच्चों की स्थिति में सुधार के लिए कार्य कर रहे सरकारी तथा गैर-सरकारी, दोनों तरह के संगठनों के प्रयासों में तालमेल कायम करने के साथ-साथ इस संबंध में योजनाएं, नीतियां और कार्यक्रम तैयार करने तथा कानूनों के ....
प्रश्न : स्त्री-पुरुष अनुपात में स्त्रियों के घटते अनुपात से संबंधित सामाजिक सांस्कृतिक कारक
(2000)
उत्तर : जनसंख्या में लिंग अनुपात महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसका प्रभाव विवाह दर, मृत्यु दर, जन्म दर और यहां तक कि प्रव्रजन दर भी पड़ता है। 2001 जनसंख्या आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रति 1000 पुरुषों पर 933 स्त्रियों का अनुपात आता है। लिंग असन्तुलन के कारण हैः स्त्री बाल हत्या, बालिकाओं की उपेक्षा, बाल-विवाह, बच्चे की जन्म पर मृत्यु, स्त्रियों के साथ बुरा व्यवहार और कठिन कार्य से लिंग अनुपात लगातार गिरता चला जा रहा ....
प्रश्न : भारतीय आबादी के बदलते आयु-संघटन के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का परीक्षण कीजिए।
(1998)
उत्तर : उच्च जन्म दर और तेजी से कम होती मृत्यु दर के कारण जनसंख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी होती है, जिसके कारण आयु संबंधी ढांचा विकृत होने लगता है। यह आयु-लिंग पिरामिड के आधार को भी व्यापक करता है। यह कार्यशील जनसंख्या अर्थात् काम पर लगे हुए लोगों पर निर्भरता के बोझ को बहुत अधिक बढ़ा देता है। इस विकृत संरचना का प्रभाव कई वर्षों तक बना रहता है, उस समय भी जबकि जन्म दर कम ....