दीक्षा चौरसिया

दीक्षा चौरसिया

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025

(All India Rank - 44AIR)

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल: सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल की ओर से आपकी सफलता पर आपको हार्दिक बधाई। आपको कैसा महसूस हो रहा है?

दीक्षा: धन्यवाद! जब मैंने पीडीएफ में अपना नाम देखा, तो यह सब एक सपने जैसा लग रहा था। जैसे-जैसे शुरुआती उत्साह कम हुआ, मुझे उन सभी के प्रति गहरा आभार महसूस हुआ जिन्होंने इस पूरी यात्रा में मेरा साथ दिया। मैं आखिरकार अपनी इस नई ज़िम्मेदारी को निभाने के लिए उत्साहित हूं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आईएएस अधिकारी बनने के लिए आपकी प्रेरणा क्या है? आप अपनी सफलता का श्रेय किसे देती हैं? आपकी तैयारी और सफलता में परिवार और अन्य लोगों (शिक्षकों, दोस्तों) की क्या भूमिका है?

दीक्षा: मेरी माँ ने पहली बार मेरे स्कूल के दिनों में सिविल सेवा में करियर बनाने से मेरा परिचय कराया था। जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई, मुझे समझ में आने लगा कि एक आईएएस अधिकारी समाज में कितनी परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण प्रभावों में से एक इंदौर का भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में अद्भुत कायाकल्प देखना था, जो इंदौर नगर निगम के साथ काम करने वाले अधिकारियों की दृष्टि और नेतृत्व से संचालित था। उस अनुभव ने मुझे यह एहसास कराया कि सिविल सेवा केवल एक पेशा नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में सार्थक बदलाव लाने का एक अनूठा अवसर है।

मैं अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, दोस्तों और शिक्षकों को देती हूं, जो इस यात्रा के हर चरण में मेरे साथ खड़े रहे। यूपीएससी केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं है; यह समान रूप से दृढ़ता (perseverance) और सहनशक्ति (resilience) की परीक्षा भी है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : सामान्य अध्ययन - प्रारंभिक (Prelims) और मुख्य (Mains) परीक्षा की तैयारी के लिए किस रणनीति का पालन करना चाहिए? क्या आपने अपनी प्रारम्भिक और मुख्य परीक्षा की तैयारी को एकीकृत (integrate) रूप से किया था या यह अलग-अलग थी?

दीक्षा: मुझे लगता है कि सबसे महत्वपूर्ण बात इस परीक्षा की मांग को समझना है। प्रारम्भिक और मुख्य परीक्षा के लिए आपको तार्किक रूप से सोचने, जटिल मुद्दों को सरल बनाने और सभी वैश्विक घटनाओं के प्रति सामान्य रूप से जागरूक होने की आवश्यकता होती है।

मेरा सुझाव है कि किताबों, पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) और पाठ्यक्रम से परे, उम्मीदवारों को स्मार्ट और विश्लेषणात्मक तरीके से सोचने की योग्यता विकसित करनी चाहिए। मेरी तैयारी काफी हद तक एकीकृत (integrated) थी। हालांकि प्रारम्भिक और मुख्य परीक्षा की मांग अलग-अलग है, लेकिन ज्ञान काफी हद तक समान ही है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपने इस परीक्षा - प्रीलिम्स, मेन्स, इंटरव्यू और वैकल्पिक विषय (Optional) के लिए कितना समय दिया ? आपने अपने समय का प्रबंधन (Time Management) कैसे किया?

दीक्षा: अपने 4 प्रयासों में, मैंने दिसंबर में प्रारम्भिक परीक्षा के लिए पढ़ाई शुरू की थी। मैंने नवंबर तक अपने सामान्य अध्ययन (GS) और वैकल्पिक विषय के नोट्स बनाने का काम पूरा कर लिया था और उत्तर लेखन (answer writing) का अभ्यास भी किया था। साक्षात्कार (Interview) की तैयारी के लिए मैंने 2 महीने दिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल: क्या आपने नोट्स तैयार किए थे? नोट्स कितने मददगार होते हैं? नोट्स बनाने पर आपकी क्या सलाह है?

दीक्षा: हाँ, मैंने नोट्स तैयार किए थे। विस्तृत पाठ्यक्रम को देखते हुए, मेरे नोट्स काफी भारी (bulky) हो गए थे। लेकिन अपने आखिरी प्रयास में मैंने उन्हें बहुत संक्षिप्त (short notes) में समेटने की कोशिश की।

मैं सभी विषयों के लिए एक-पेज के नोट्स बनाती थी और 'स्टिकी नोट्स' का भी उपयोग करती थी। जहाँ मेरे अधिकांश नोट्स हाथ से लिखे हुए थे, वहीं मैंने करेंट अफेयर्स के लिए एवरनोट (Evernote) पर डिजिटल नोट्स बनाए क्योंकि वे गतिशील (dynamic) प्रकृति के होते हैं।

मेरी सलाह होगी कि आप स्मार्ट और आसान नोट्स बनाएं जिन्हें आप जल्दी से रिवाइज कर सकें। 'एक्टिव रिकॉलिंग' (active recalling) पर अधिक ध्यान दें।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपका वैकल्पिक विषय (Optional) क्या था? इस विषय को चुनने का आधार क्या था? इसके लिए क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

दीक्षा: मेरा वैकल्पिक विषय इतिहास (History) था। मैंने मिरांडा हाउस (दिल्ली विश्वविद्यालय) से इतिहास में ही स्नातक किया है, इसलिए मैं विषय की बुनियादी बातों से पहले से ही अच्छी तरह वाकिफ थी।

इतिहास का पाठ्यक्रम काफी विस्तृत है। मेरी रणनीति पाठ्यक्रम को कई छोटे भागों में विभाजित करने, पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) का विश्लेषण करने, उन विषयों पर नोट्स बनाने और फिर टेस्ट देने की थी। इसके बाद कम से कम दो बार रिवीजन किया जाना चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल: एथिक्स (पेपर-IV) के लिए आपकी तैयारी की रणनीति और किताबें कौन सी थीं?

दीक्षा: एथिक्स के लिए, मैंने प्रासंगिक उदाहरणों, दार्शनिकों, उद्धरणों (quotes) और केस स्टडीज को शामिल करते हुए हर टॉपिक के लिए अपने संक्षिप्त नोट्स तैयार किए। बुनियादी अवधारणाओं को समझने के लिए 'लेक्सिकन' (Lexicon) की मदद ली।

केस स्टडीज के लिए, मैंने व्यावहारिक, संतुलित और लागू करने योग्य समाधान देने पर ध्यान केंद्रित किया। मैंने अपने उत्तरों को समृद्ध करने के लिए भारतीय दर्शन के उदाहरणों का भी सहारा लिया।

चूँकि एथिक्स में समय प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए मैंने कंटेंट और गति दोनों में सुधार करने के लिए उत्तर लेखन का व्यापक अभ्यास किया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल: निबंध (Essay) के पेपर की तैयारी के बारे में हमें कुछ बताएं।

दीक्षा: मैं हर सप्ताहांत (weekend) दो निबंध लिखती थी और उनका मूल्यांकन करवाती थी। मेरा मानना है कि एक अच्छे निबंध का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसकी संरचना (structure) है, इसलिए मैंने लिखने से पहले विचार-मंथन और रूपरेखा (framework) तैयार करने के लिए शुरुआती 10-15 मिनट समर्पित किए।

मैंने अपनी प्रस्तावना (introduction) और निष्कर्ष (conclusion) को रचनात्मक और प्रभावशाली बनाने पर भी ध्यान दिया। दार्शनिक निबंधों के लिए, मैंने महत्वपूर्ण मूल्यों और विषयों पर संक्षिप्त नोट्स तैयार किए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल: परीक्षा में आपके लिखने की शैली क्या थी? यह दूसरों से अलग कैसे थी? आपने इसे कैसे विकसित किया?

दीक्षा: मैंने 'पॉइंट फॉर्मेट' (बिंदुवार) में उत्तर लिखे। मैंने उत्तर लेखन की एकरसता (monotony) को तोड़ने के लिए फ्लोचार्ट, ग्राफ और मानचित्रों को शामिल करने का प्रयास किया।

चूँकि मुख्य परीक्षा में दिन में लगभग छह घंटे लगातार लिखने की आवश्यकता होती है, इसलिए मैंने परीक्षा जैसी परिस्थितियों में नियमित रूप से 'फुल-लेंथ मॉक' देकर अपनी लिखने की गति और स्टैमिना (stamina) दोनों विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल: आपने साक्षात्कार (Interview) की तैयारी कैसे की? किस तरह के प्रश्न पूछे गए? क्या आपने उन सभी के उत्तर दिए? क्या कोई ऐसा विशेष क्षेत्र था जिस पर उन्होंने अधिक जोर दिया?

दीक्षा: मेरे साक्षात्कार की तैयारी मोटे तौर पर तीन भागों में विभाजित थी: मेरे स्नातक के विषय, करेंट अफेयर्स और विस्तृत आवेदन पत्र (DAF)।

प्रश्नों में इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, करेंट अफेयर्स के साथ-साथ मेरे शौक और व्यक्तिगत रुचियों सहित विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल थी। मैंने अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता के अनुसार सभी प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास किया। चूँकि मैंने कथक में 'विशारद' की डिग्री प्राप्त की थी, इसलिए बोर्ड ने सांस्कृतिक विषयों में विशेष रुचि दिखाई और कई प्रश्न भारतीय कला, संस्कृति और नृत्य रूपों से संबंधित थे।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : तैयारी में कोचिंग का क्या महत्व है?

दीक्षा: मेरा मानना है कि कोचिंग की भूमिका हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होती है। यदि किसी अभ्यर्थी को कुछ विषयों को समझने, निरंतरता बनाए रखने या नियमित फीडबैक प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन की आवश्यकता महसूस होती है, तो कोचिंग संस्थान और मेंटर्स (मार्गदर्शक) निश्चित रूप से सहायक हो सकते हैं। हालांकि, यूपीएससी में सफलता के लिए कोचिंग कोई अनिवार्य आवश्यकता नहीं है। यह आपकी निरंतरता और कड़ी मेहनत पर निर्भर करता है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपकी सफलता में 'सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल' की क्या भूमिका रही है?

दीक्षा: मैंने पिछले वर्षों में इस पत्रिका में कई टॉपरों के साक्षात्कार पढ़े थे। उन साक्षात्कारों ने मुझे बहुत प्रेरित किया और मुझे आशा है कि मेरी यात्रा भी अन्य अभ्यर्थियों के लिए मददगार साबित होगी!

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपकी तैयारी के स्रोत क्या थे? आपने किन पुस्तकों, पत्रिकाओं, समाचार पत्रों और ऑनलाइन स्रोतों का उपयोग किया?

दीक्षा: मैं हर दिन समाचार पत्र पढ़ती थी - 'द हिंदू' (The Hindu) या 'इंडियन एक्सप्रेस' (Indian Express)। इसके अलावा, मैंने प्रीलिम्स के लिए करेंट अफेयर्स पत्रिकाओं पर भरोसा किया। मैंने अपनी तैयारी में और अधिक सुधार (value addition) के लिए चैटजीपीटी (ChatGPT) और यूट्यूब (YouTube) का व्यापक उपयोग किया। मैंने कुछ विषयों के लिए आर्थिक सर्वेक्षण, बजट और 'योजना' एवं 'कुरुक्षेत्र' जैसी सरकारी पत्रिकाओं को भी पढ़ा।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : प्रारम्भिक (GS और CSAT), मुख्य परीक्षा (पेपर I–IV) और निबंध के लिए अपनी पसंदीदा पुस्तक सूची का सुझाव दें।

दीक्षा: प्रारम्भिक परीक्षा के लिए, मैंने मुख्य रूप से एनसीईआरटी (NCERTs) और मानक संदर्भ पुस्तकों जैसे एम. लक्ष्मीकांत द्वारा 'इंडियन पॉलिटी', नितिन सिंघानिया द्वारा 'इंडियन आर्ट एंड कल्चर' के साथ-साथ अन्य सामान्य रूप से सुझाई गई सामग्री पर भरोसा किया। नियमित रिवीजन और पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) को हल करना मेरी तैयारी के समान रूप से महत्वपूर्ण हिस्से थे।

मुख्य परीक्षा और निबंध के लिए, मैं किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं थी। इसके बजाय, मैंने मानक पुस्तकों, करेंट अफेयर्स, रिपोर्टों और समाचार पत्रों के लेखों सहित कई संसाधनों से जानकारी एकत्रित करके अपने स्वयं के नोट्स तैयार किए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : वैकल्पिक विषय पेपर I और II (इतिहास) के लिए अपनी पसंदीदा पुस्तक सूची का सुझाव दें।

दीक्षा:

  • पेपर 1: प्राचीन भारत के लिए वी.के. जैन और उपिंदर सिंह; मध्यकालीन भारत के लिए सतीश चंद्र और इग्नू (IGNOU) की एम.ए. इतिहास की सामग्री।
  • पेपर 2: आधुनिक इतिहास के लिए शेखर बंद्योपाध्याय की 'प्लासी से विभाजन तक और उसके बाद' (From Plassey to Partition and After) और बी.एल. ग्रोवर; विश्व इतिहास के लिए नॉर्मन लोवे की 'मास्टरिंग मॉडर्न वर्ल्ड हिस्ट्री' और अर्जुन देव की 'हिस्ट्री ऑफ द वर्ल्ड'।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : अपनी प्रेरक यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की यात्रा और बहुमूल्य अंतर्दृष्टि हमारे साथ साझा करने के लिए धन्यवाद। हम आपके उज्जवल भविष्य की सफलता की कामना करते हैं।