मानसी गुप्ता

मानसी गुप्ता

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025

(All India Rank 78AIR)

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल की ओर से आपकी सफलता पर आपको हार्दिक बधाई। आप इसके बारे में कैसा महसूस कर रही हैं?

मानसी: बहुत-बहुत धन्यवाद। एक परीक्षा से बढ़कर, यह जीवन जीने का एक तरीका बन गया जिसने वर्षों की अनिश्चितता और आत्म-संदेह के बीच मेरी दिनचर्या, प्राथमिकताओं और जुझारूपन को आकार दिया। पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो मैं कृतज्ञता महसूस करती हूँ, क्योंकि यह परिणाम केवल मेरे प्रयासों की पुष्टि नहीं है बल्कि मेरे परिवार के बलिदानों का फल है। मैं इस चयन को केवल एक अंतिम पड़ाव के रूप में नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत के रूप में देखती हूँ।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आईएएस अधिकारी बनने के लिए आपकी प्रेरणा क्या है? आप अपनी सफलता का श्रेय किसे देती हैं?

मानसी: सिविल सेवा में शामिल होने का मेरा निर्णय किसी एक घटना से प्रेरित होने के बजाय धीरे-धीरे विकसित हुआ। नेशनल लॉ स्कूल, बेंगलुरु में पढ़ाई के दौरान, मैंने शासन, सार्वजनिक नीति और कानून की गहरी समझ विकसित की। मुझे अहसास हुआ कि जहाँ कानूनी प्रैक्टिस (वकालत) व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव लाने में सक्षम बनाती है, वहीं सिविल सेवा नीति कार्यान्वयन और बड़े पैमाने पर संस्थागत परिवर्तन में योगदान करने का अवसर प्रदान करती है।

मैं अपनी सफलता का श्रेय मुख्य रूप से अपने परिवार को देती हूँ, विशेष रूप से अपनी माँ को, जिनके निरंतर प्रोत्साहन और विश्वास ने मुझे कठिन चरणों के दौरान संबल दिया। इस चुनौतीपूर्ण यात्रा में मेरे दोस्तों ने भी मेरा साथ देकर और मुझे प्रेरित करके महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : सामान्य अध्ययन (GS) की तैयारी के लिए उम्मीदवारों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए? क्या आपने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए अलग-अलग तैयारी की थी?

मानसी: मैंने एक एकीकृत दृष्टिकोण (integrated approach) अपनाया, क्योंकि प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा का आधार काफी हद तक समान है। मैंने मानक स्रोतों पर ध्यान केंद्रित किया, करेंट अफेयर्स को स्टेटिक विषयों के साथ जोड़ा और कई बार रिवीज़न करने के लिए संसाधनों को सीमित रखा। लगातार नई सामग्री जोड़ने के बजाय, मैंने संक्षिप्त नोट्स, नियमित रिवीज़न, मॉक टेस्ट और गलतियों के विश्लेषण पर जोर दिया।

जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आई, मैंने चरण के अनुसार अपनी रणनीति में बदलाव किया। प्रारंभिक के लिए, मैंने MCQ अभ्यास, तथ्यात्मक जानकारी याद करने और एलिमिनेशन तकनीकों को प्राथमिकता दी, जबकि प्रीलिम्स के बाद मैंने उत्तर लेखन और प्रस्तुति पर ज्यादा ध्यान दिया ।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल: आपने परीक्षा के विभिन्न चरणों में अपने समय का प्रबंधन कैसे किया?

मानसी: मैंने पढ़ाई के घंटों के बजाय तैयारी की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया। प्रीलिम्स के दौरान, मैंने सामान्य अध्ययन, CSAT, रिवीज़न और मॉक टेस्ट पर ध्यान लगाया। प्रीलिम्स के बाद, मेरी प्राथमिकता उत्तर लेखन, नीतिशास्त्र (Ethics), निबंध (Essay) और अपने वैकल्पिक विषय की ओर स्थानांतरित हो गई।

साक्षात्कार के लिए, मैंने DAF (विस्तृत आवेदन प्रपत्र) की तैयारी, समसामयिक मामलों और मॉक इंटरव्यू पर ध्यान केंद्रित किया। मेरी पूरी यात्रा के दौरान, घंटे गिनने की तुलना में निरंतरता, नियमित रिवीज़न और चरण-वार योजना अधिक महत्वपूर्ण साबित हुई।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपकी तैयारी में नोट्स कितने उपयोगी थे?

मानसी: नोट्स मेरे लिए अपरिहार्य (indispensable) थे क्योंकि उन्होंने कई स्रोतों से जानकारी को समेकित करने में मदद की और रिवीज़न को बहुत अधिक कुशल बना दिया। मेरा ध्यान हमेशा लंबे संकलन बनाने के बजाय संक्षिप्त और रिवीज़न-केंद्रित नोट्स तैयार करने पर था।

मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए, मैंने आम तौर पर महत्वपूर्ण विषयों के एक या दो पन्नों के सारांश तैयार किए। मैंने विषय के आधार पर हस्तलिखित और डिजिटल दोनों तरह के नोट्स का उपयोग किया। निबंध के लिए, मैंने उदाहरण, उद्धरण और विचार जोड़ने के लिए डिजिटल दस्तावेज़ बनाए रखा। प्रीलिम्स के लिए, मैंने मॉक टेस्ट की गलतियों और कठिन अवधारणाओं को रिकॉर्ड करने के लिए विषय-वार नोटबुक बनाई, जो अंतिम रिवीज़न के दौरान अत्यंत उपयोगी साबित हुई।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपने वैकल्पिक विषय (Optional) के रूप में लॉ (Law) को क्यों चुना?

मानसी: मैंने अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और संवैधानिक एवं कानूनी अध्ययन में अपनी वास्तविक रुचि के कारण कानून को चुना। मैंने नियमित उत्तर लेखन के साथ-साथ वैचारिक स्पष्टता, संवैधानिक सिद्धांतों, 'बेयर एक्ट्स' (Bare Acts) और ऐतिहासिक निर्णयों (Landmark Judgments) पर ध्यान केंद्रित किया। उम्मीदवारों को मेरी सलाह है कि वे बदलते रुझानों (Trends) के बजाय अपनी वास्तविक रुचि, पाठ्यक्रम के साथ सहजता और निरंतर जुड़ाव के आधार पर वैकल्पिक विषय चुनें।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपने नीतिशास्त्र (Ethics) और निबंध (Essay) के पेपर की तैयारी कैसे की?

मानसी: नीतिशास्त्र के लिए, मैंने परिभाषाओं को रटने के बजाय अवधारणाओं को समझने और उन्हें व्यावहारिक स्थितियों में लागू करने पर ध्यान दिया। मैंने के.एम. पाथी सर, गुंजिता शर्मा मैम और पीयूष सर के नोट्स के साथ-साथ बुनियादी अवधारणाओं के लिए 'लेक्सिकन' (Lexicon) की मदद ली।

निबंध की तैयारी मेरी समग्र तैयारी के साथ ही एकीकृत थी। मैंने संतुलित दृष्टिकोण विकसित करने, विविध उदाहरणों का उपयोग करने और एक स्पष्ट संरचना बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित किया। नियमित मंथन (Brainstorming), उत्तर लेखन और टॉपर्स की कॉपियों की समीक्षा करने से मुझे ऐसे निबंध लिखने में मदद मिली जो विचारशील, मौलिक और संतुलित थे।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपने अपनी उत्तर-लेखन शैली (Answer-writing style) कैसे विकसित की?

मानसी: मेरी लेखन शैली स्पष्टता, तार्किक संरचना और संतुलित विश्लेषण पर केंद्रित थी। मैंने सीधे परिचय (Introduction), छोटे पैराग्राफ, शीर्षक (Headings), उप-शीर्षक (Subheadings) और जहाँ उपयुक्त हो, वहाँ बिंदुवार प्रस्तुति को प्राथमिकता दी। संवैधानिक प्रावधानों, कानूनी संदर्भों, रेखाचित्रों (Diagrams) और तालिकाओं (Tables) को मैंने वहाँ शामिल किया जहाँ वे उत्तर में मूल्य वृद्धि (Value addition) कर सकते थे।

यह शैली नियमित उत्तर लेखन, टेस्ट सीरीज़ से मिले फीडबैक और आत्म-मूल्यांकन के माध्यम से धीरे-धीरे विकसित हुई।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपने व्यक्तित्व परीक्षण (Personality Test) के लिए कैसे तैयारी की?

मानसी: मेरे साक्षात्कार की तैयारी केवल जानकारी जुटाने के बजाय विचारों की स्पष्टता और एक संतुलित व्यक्तित्व विकसित करने पर केंद्रित थी। मैंने अपने विस्तृत आवेदन पत्र (DAF) को पूरी तरह से तैयार किया, समसामयिक मामलों का अनुसरण किया, मॉक इंटरव्यू दिए और साथियों के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

अधिकांश प्रश्न मेरी शैक्षिक पृष्ठभूमि, संवैधानिक कानून, शासन और समसामयिक मामलों पर आधारित थे। मेरा मानना है कि हर प्रश्न का उत्तर देने के प्रयास की तुलना में ईमानदारी, संयम और संतुलित सोच एक मजबूत प्रभाव पैदा करती है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपकी तैयारी में सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल का क्या योगदान रहा?

मानसी: सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल ने मुझे परीक्षा के रुझानों, समसामयिक मुद्दों और सफल उम्मीदवारों के साक्षात्कारों से अपडेट रहने में मदद की। पिछले टॉपर्स के अनुभवों को पढ़ना उत्साहजनक था क्योंकि इसने इस तथ्य को पुष्ट किया कि सफलता का कोई एक सूत्र नहीं है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपकी तैयारी के प्राथमिक स्रोत (Sources) क्या थे?

मानसी : मेरा मार्गदर्शक सिद्धांत संसाधनों को सीमित रखना और उन्हें कई बार दोहराना (रिवीज़न करना) था। समसामयिक मामलों (Current Affairs) के लिए, मैं नियमित रूप से 'द इंडियन एक्सप्रेस' पढ़ती थी, जबकि साक्षात्कार के चरण के दौरान 'द हिंदू' और 'मिंट' विशेष रूप से उपयोगी रहे। मैंने समाचार विश्लेषण, MCQ अभ्यास और नीतिगत चर्चाओं के लिए चुनिंदा ऑनलाइन कोचिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग किया। सरकारी रिपोर्ट, पीआईबी (PIB), पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र और वार्षिक करंट अफेयर्स संकलन भी मेरी तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे।

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के लिए, मैंने मानक पुस्तकों पर भरोसा किया, जैसे राजव्यवस्था के लिए लक्ष्मीकांत, आधुनिक इतिहास के लिए स्पेक्ट्रम, एनसीईआरटी (NCERTs), अर्थव्यवस्था के लिए विवेक सिंह, पर्यावरण के लिए शंकर आईएएस, कला और संस्कृति के लिए नितिन सिंघानिया, और करंट अफेयर्स के लिए PT365। पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र और गुणवत्तापूर्ण मॉक टेस्ट मेरी तैयारी के केंद्र में रहे।

मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए, मैंने मानक स्रोतों, कोचिंग सामग्री और वैल्यू-एडिशन (मूल्य-वर्धन) सामग्री को समेकित करके स्वयं के संक्षिप्त नोट्स तैयार किए। नीतिशास्त्र (Ethics) की तैयारी मुख्य रूप से विशेष नोट्स और केस स्टडी के व्यापक अभ्यास पर आधारित थी। कानून वैकल्पिक विषय (Law Optional) के लिए, बेयर एक्ट्स (Bare Acts), मानक पाठ्यपुस्तकें, ऐतिहासिक निर्णय (Landmark Judgments), पिछले वर्षों के प्रश्न और निरंतर उत्तर लेखन मेरी तैयारी का मुख्य आधार थे।"

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल: अंत में, आप यूपीएससी उम्मीदवारों को क्या संदेश देना चाहेंगी?

मानसी: "यूपीएससी की तैयारी एक लंबी यात्रा है जो धैर्य, निरंतरता और जुझारूपन (resilience) की मांग करती है। इसमें अनिवार्य रूप से असफलताएं या बाधाएं आएंगी, लेकिन हर प्रयास कुछ मूल्यवान सबक देता है जो आपकी रणनीति को और बेहतर (परिष्कृत) बनाने में मदद करते हैं। उम्मीदवारों को अपनी तुलना दूसरों से करने से बचना चाहिए, अपने संसाधनों को सीमित रखना चाहिए, नियमित रूप से रिवीज़न करना चाहिए, उत्तर लेखन का अभ्यास करना चाहिए और अपने प्रयासों पर अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए।

सफलता शायद ही कभी किसी एक कारक का परिणाम होती है; यह अनुशासित तैयारी, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति, ईमानदार आत्म-मूल्यांकन और परिवार, गुरुओं एवं शुभचिंतकों के अटूट समर्थन का परिणाम है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप सीखने की इस प्रक्रिया का आनंद लें, जमीन से जुड़े रहें और याद रखें कि दृढ़ता ही अंततः सफलता की ओर ले जाती है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल: हमारे पाठकों के साथ अपनी प्रेरक यूपीएससी यात्रा और बहुमूल्य अंतर्दृष्टि साझा करने के लिए हम आपको तहे दिल से धन्यवाद देते हैं। हम आपके भविष्य के प्रयासों में निरंतर सफलता की कामना करते हैं।