शांभवी तिवारी

शांभवी तिवारी

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025

(All India Rank - 46AIR)

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल: सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल की ओर से आपकी सफलता पर आपको हार्दिक बधाई। आप कैसा महसूस कर रही हैं?

शांभवी: शुभकामनाओं के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। यह एक ऐसा सपना था जिसे मैंने लंबे समय तक संजोया था, और एक ऐसा सपना जिसे मेरे परिवार ने भी देखा था। मैं राहत महसूस कर रही हूँ, शुक्रगुजार हूँ और सच कहूँ तो यह अभी भी थोड़ा अवास्तविक (surreal) लग रहा है। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया, और मुझे खुशी है कि सब कुछ सफल रहा। मैं बस यही आशा करती हूँ कि मैं इस जिम्मेदारी के साथ न्याय कर सकूँगी और ईमानदारी से सेवा करूँगी।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : सिविल सेवा में आने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली और आप अपनी सफलता का श्रेय किसे देती हैं?

शांभवी: सिविल सेवा में शामिल होने का सपना कॉलेज के तीसरे वर्ष के दौरान आकार लेने लगा, हालाँकि कई मायनों में यह मेरे माता-पिता का भी सपना था। 2021 में स्नातक होने के बाद से, यह एक लंबी यात्रा रही है, और मैं अपने माता-पिता, शिक्षकों, दोस्तों और उन सभी के प्रति गहराई से आभारी हूँ जो मेरे साथ खड़े रहे। उनके अटूट विश्वास, मेरे परिवार के आशीर्वाद और मेरे गुरुओं एवं मित्रों के सहयोग ने मुझे पूरी यात्रा के दौरान प्रेरित बनाए रखा।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : सामान्य अध्ययन (General Studies) की तैयारी के लिए उम्मीदवारों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

शांभवी: मेरा मानना है कि यूपीएससी का पाठ्यक्रम (Syllabus) तैयारी का आधार होना चाहिए। मैंने जो भी विषय पढ़ा उसे पाठ्यक्रम से जोड़ा, जबकि पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQ) ने मुझे परीक्षा की प्रकृति को समझने और प्रासंगिक स्रोतों की पहचान करने में मदद की।

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims), मुख्य परीक्षा (Mains) और साक्षात्कार (Interview) को अलग-अलग चरणों के रूप में देखने के बजाय, मैंने एक एकीकृत दृष्टिकोण (Integrated Approach) अपनाया। शुरुआत में, मैंने वैचारिक स्पष्टता (Conceptual Clarity) बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जो प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के लिए सामान्य थी। प्रीलिम्स के नजदीक आने पर, मेरा ध्यान मॉक टेस्ट और PYQ विश्लेषण पर चला गया, जबकि प्रीलिम्स के बाद मैंने उत्तर लेखन (Answer Writing) के लिए अधिक समय दिया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : तैयारी के दौरान आपने समय का प्रबंधन (Time Management) कैसे किया?

शांभवी: यह मेरा चौथा प्रयास था। अपने पिछले प्रयास में परीक्षा उत्तीर्ण करने और भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा (यातायात) यानी IRMS में शामिल होने के बाद, मैंने प्रत्येक प्रयास के साथ अपनी रणनीति को और बेहतर बनाया। मैंने प्रारंभिक परीक्षा से काफी पहले अपने वैकल्पिक विषय (Optional Subject) को पूरा कर लिया था और साथ ही सामान्य अध्ययन की तैयारी भी जारी रखी। जैसे-जैसे परीक्षा नज़दीक आई, मॉक टेस्ट, रिवीज़न और PYQ विश्लेषण मेरी प्राथमिकता बन गए। प्रीलिम्स के बाद, मैंने उत्तर लेखन और प्रस्तुति (Presentation) पर ध्यान केंद्रित किया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : यूपीएससी की तैयारी में नोट्स कितने महत्वपूर्ण हैं?

शांभवी: नोट्स ने मेरी तैयारी में, विशेष रूप से मेरे वैकल्पिक विषय के लिए, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी शुरुआती तैयारी के दौरान, मैंने लगभग हर सामान्य अध्ययन विषय के लिए नोट्स तैयार किए और धीरे-धीरे उन्हें संक्षिप्त और रिवीज़न के अनुकूल सामग्री में बदल दिया। स्वयं के बनाए नोट्स आम तौर पर अधिक प्रभावी होते हैं क्योंकि वे अवधारणाओं की स्वयं की समझ और संगठन को दर्शाते हैं। मैंने फ्लोचार्ट, डायग्राम और बिंदुवार (Point-wise) प्रस्तुति का भी व्यापक उपयोग किया, जिससे न केवल रिवीज़न आसान हुआ बल्कि उत्तरों की प्रस्तुति में भी सुधार हुआ।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपने वैकल्पिक विषय के रूप में नृविज्ञान (Anthropology) को क्यों चुना?

शांभवी: हालाँकि मेरी शैक्षणिक पृष्ठभूमि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में है, फिर भी मैंने नृविज्ञान को चुना क्योंकि मुझे इसे पढ़ने में वास्तव में आनंद आता था। चूँकि यूपीएससी की तैयारी अक्सर कई वर्षों तक चलती है, मुझे लगा कि एक ऐसा विषय चुनना महत्वपूर्ण है जिसमें मेरी रुचि बनी रहे। नृविज्ञान का पाठ्यक्रम भी संक्षिप्त है, यह सामान्य अध्ययन के साथ ओवरलैप होता है और इसके अध्ययन संसाधन भी अच्छे उपलब्ध हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपने नीतिशास्त्र (Ethics) और निबंध (Essay) के पेपर की तैयारी कैसे की?

शांभवी: नीतिशास्त्र के लिए, मैंने अपने संसाधनों को मुख्य रूप से स्मृति मैम के लेक्चर और नोट्स तक सीमित रखा, और बुनियादी अवधारणाओं के लिए 'लेक्सिकन' (Lexicon) की मदद ली। मैंने पाठ्यक्रम के हर कीवर्ड (Keyword) को प्रासंगिक परिभाषाओं, उदाहरणों और व्यावहारिक अनुप्रयोगों के साथ समझने पर ध्यान केंद्रित किया। मेरी राय में, नीतिशास्त्र केवल अवधारणाओं को रटने के बारे में नहीं है, बल्कि एक संतुलित और नैतिक विचार प्रक्रिया विकसित करने के बारे में है।

निबंध की तैयारी मेरी समग्र यूपीएससी तैयारी के साथ ही एकीकृत थी। शुरुआत में, मेरे निबंध काफी हद तक आयाम-आधारित होते थे, लेकिन समय के साथ मैंने अधिक दार्शनिक और सूक्ष्म दृष्टिकोण अपनाया। एक अच्छे निबंध में न केवल ज्ञान, बल्कि वैचारिक परिपक्वता और विभिन्न विचारों को सार्थक रूप से जोड़ने की क्षमता भी झलकनी चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : समय के साथ आपके उत्तर लेखन (Answer Writing) में कैसे बदलाव आया?

शांभवी: इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से होने के कारण, उत्तर लेखन शुरू में चुनौतीपूर्ण था क्योंकि यूपीएससी वस्तुनिष्ठ (objective) उत्तरों के बजाय उदाहरणों द्वारा समर्थित विश्लेषणात्मक व्याख्या की मांग करता है। शुरुआती फीडबैक ने मुझे अपने उत्तरों को विस्तार से लिखने और बेहतर उदाहरण देने के लिए प्रोत्साहित किया। मेरा मानना है कि उत्तर लेखन किसी निश्चित टेम्पलेट का पालन करने के बजाय निरंतर अभ्यास, फीडबैक और सुधार के माध्यम से विकसित होता है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपने व्यक्तित्व परीक्षण (Personality Test) के लिए कैसे तैयारी की?

शांभवी: मैं साक्षात्कार की तैयारी को मुख्य परीक्षा के बाद शुरू होने वाली किसी चीज़ के बजाय पूरी यूपीएससी यात्रा का विस्तार मानती हूँ। मैंने अपनी अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास और संयम में सुधार करने के लिए कई मॉक इंटरव्यू दिए। चूंकि साक्षात्कार के कई प्रश्न विस्तृत आवेदन प्रपत्र (DAF) से उत्पन्न होते हैं, इसलिए मैंने अपनी शैक्षिक पृष्ठभूमि, गृहनगर, शौक और उनसे संबंधित समसामयिक मामलों (Current Affairs) पर व्यापक तैयारी की।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : कोचिंग पर आपकी क्या राय है?

शांभवी: कोचिंग एक व्यक्तिगत पसंद है। जिन उम्मीदवारों को मार्गदर्शन, मेंटरशिप या एक संरचित दृष्टिकोण की आवश्यकता है, उन्हें इसे लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। हालाँकि, केवल कोचिंग सफलता सुनिश्चित नहीं कर सकती। अंततः, निरंतर स्व-अध्ययन (Self-study), अनुशासित रिवीज़न और व्यक्तिगत दृढ़ता ही अंतिम परिणाम तय करती है। कोचिंग दिशा प्रदान कर सकती है, लेकिन निरंतर प्रयास की जिम्मेदारी पूरी तरह से उम्मीदवार पर होती है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : आपकी सफलता में सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल (CSC) की क्या भूमिका है?

शांभवी: मैंने अपनी तैयारी के विभिन्न चरणों में सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल का संदर्भ लिया, विशेष रूप से इसके संक्षिप्त रिवीज़न नोट्स और विस्तृत करेंट अफेयर्स कवरेज के लिए। मुझे इसके 'क्विक रिवीज़न' सेक्शन काफी उपयोगी लगे, खासकर भूगोल जैसे विषयों के लिए, क्योंकि उन्होंने मुझे अवधारणाओं को प्रभावी ढंग से समेकित करने में मदद की।

मैंने इस बात की भी सराहना की कि पत्रिका किस तरह से वर्तमान घटनाक्रमों को स्टेटिक सामान्य अध्ययन विषयों के साथ जोड़ती है, जो यूपीएससी के नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर, मुझे सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल एक विश्वसनीय संसाधन लगा, और मेरा मानना है कि उम्मीदवार इसे अपनी तैयारी में शामिल करके निश्चित रूप से लाभ उठा सकते हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल: अपनी तैयारी के दौरान आप किन संसाधनों (Resources) पर निर्भर रहीं?

शांभवी: मैंने मुख्य रूप से ऑनलाइन कक्षाओं, फैकल्टी नोट्स और कुछ मानक पुस्तकों के माध्यम से अध्ययन किया। राजव्यवस्था (Polity) के लिए मैंने एम. लक्ष्मीकांत का संदर्भ लिया; भूगोल (Geography) के लिए एनसीईआरटी (NCERTs) और जी.सी. लियोंग; अर्थव्यवस्था (Economics) के लिए रमेश सिंह; पर्यावरण (Environment) के लिए शंकर आईएएस; कला और संस्कृति (Art and Culture) के लिए नितिन सिंघानिया; और नीतिशास्त्र (Ethics) के लिए लेक्सिकन (Lexicon) को पढ़ा। करंट अफेयर्स के लिए विजन आईएएस की मासिक पत्रिकाएं, सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल, द हिंदू और द इंडियन एक्सप्रेस का सहारा लिया, जबकि साक्षात्कार (Interview) के चरण के दौरान 'मिंट' (Mint) काफी उपयोगी साबित हुआ। मुझे कोचिंग वेबसाइटों, संपादकीय विश्लेषणों, वाजीराम एंड रवि के 'मेन्स रिसाइटल्स प्रोग्राम' और चुनिंदा ऑनलाइन लेक्चर से भी लाभ मिला। पूरी तैयारी के दौरान, मैंने सचेत रूप से अपने संसाधनों को सीमित रखा और लगातार नई सामग्री जोड़ने के बजाय बार-बार रिवीज़न करने पर ध्यान केंद्रित किया।

नृविज्ञान (Anthropology) के लिए, मैंने क्लासरूम नोट्स और पूरक संसाधनों के साथ-साथ एम्बर एंड एम्बर, पी. नाथ और नदीम हसनैन जैसी मानक पुस्तकों का अध्ययन किया। हालाँकि, मेरे अपने बनाए नोट्स, जिन्हें बार-बार रिवीज़न के माध्यम से लगातार परिष्कृत (Refine) किया गया था, मेरे सबसे मूल्यवान संसाधन बने रहे। मैंने सरकारी रिपोर्टों, समिति की सिफारिशों और पाठ्यक्रम से संबंधित समकालीन घटनाक्रमों के माध्यम से भी अपनी तैयारी को और समृद्ध किया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : अंत में, आप यूपीएससी उम्मीदवारों को क्या संदेश देना चाहेंगी?

शांभवी: यूपीएससी की तैयारी एक लंबी यात्रा है जो धैर्य, निरंतरता और जुझारूपन की मांग करती है। इसमें असफलताएं मिलना स्वाभाविक है, लेकिन हर प्रयास मूल्यवान सबक देता है जो रणनीति को बेहतर बनाने में मदद करता है। उम्मीदवारों को अपनी तुलना दूसरों से करने से बचना चाहिए, अपने संसाधनों को सीमित रखना चाहिए, लगातार रिवीज़न करना चाहिए, नियमित रूप से उत्तर लेखन का अभ्यास करना चाहिए और अपने प्रयासों पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल : हमारे साथ अपनी प्रेरक यूपीएससी यात्रा साझा करने के लिए समय निकालने के लिए धन्यवाद।