Interview - भूपेंद्र सिंह
भूपेंद्र सिंह
CAPF 2025
(All India Rank - 127AIR)
सिविल सर्विस क्रॉनिकल : सिविल सर्विस क्रॉनिकल की ओर से आपकी सफलता पर हार्दिक बधाई। अपने बारे में बताइए।
भूपेंद्र सिंह: धन्यवाद। मैं चरखी दादरी, हरियाणा का रहने वाला हूँ और मैंने रसायन विज्ञान में बी.एससी. ऑनर्स किया है। मेरी प्रमुख रुचि दौड़ना है; मुझे फुटबॉल, वॉलीबॉल, हरियाणवी-पंजाबी संगीत और फिल्में भी पसंद हैं। CAPF AC 2025 के अपने पहले प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 127 प्राप्त करना मेरे लिए परिवार, शिक्षकों, मार्गदर्शकों और पिछली असफलताओं से मिली सीख का परिणाम है।
सिविल सर्विस क्रॉनिकल : CAPF को चुनने की वजह और आपकी प्रमुख चुनौतियाँ क्या थीं?
भूपेंद्र सिंह: CAPF में नेतृत्व, आंतरिक सुरक्षा, परिचालन जिम्मेदारी और प्रत्यक्ष जनसेवा का संयोजन मुझे आकर्षित करता था। इससे पहले रक्षा परीक्षाओं और SSB में मिले असफलताओं ने मुझे अनुशासन और आत्मविश्लेषण सिखाया। प्रमुख चुनौतियाँ थीं—लंबे समय तक निरंतरता, यह तय करना कि क्या नहीं पढ़ना है, समसामयिकी की बड़ी सामग्री, पिछली असफलताओं से उबरना और दूसरों से तुलना करने से बचना।
सिविल सर्विस क्रॉनिकल: CAPF की समग्र रणनीति और दोनों प्रश्नपत्रों की तैयारी कैसे की?
भूपेंद्र सिंह: मेरी रणनीति पाँच सिद्धांतों पर आधारित थी- सीमित स्रोत, बार-बार पुनरावृत्ति, PYQs, नियमित अभ्यास-परीक्षण और निरंतर विश्लेषण।
प्रश्नपत्र-I में व्यापक अध्ययन, तथ्य, अवधारणात्मक समझ और गति जरूरी थी। स्थिर विषयों को PYQs और समसामयिकी से जोड़ा तथा संख्यात्मक योग्यता और तर्कशक्ति में अभ्यास को प्राथमिकता दी। प्रश्नपत्र-II में अभिव्यक्ति, संरचना, विश्लेषण और लेखन-अभ्यास पर ध्यान दिया। निबंध में भूमिका, आयाम, तर्क, उदाहरण/आँकड़े, चुनौतियाँ, समाधान और संतुलित निष्कर्ष की संरचना अपनाई; संक्षेपण और बोधगम्यता में मूल विचार को स्पष्ट और संक्षिप्त रखने का अभ्यास किया।
सिविल सर्विस क्रॉनिकल : PYQs, अभ्यास-परीक्षण और अध्ययन-स्रोतों को आप कितना महत्वपूर्ण मानते हैं?
भूपेंद्र सिंह: PYQs बताते हैं कि UPSC किन विषयों को महत्व देता है, प्रश्न कैसे बनते हैं, कितनी गहराई अपेक्षित है और विकल्प हटाने की प्रवृत्ति कैसी है। हर अभ्यास-परीक्षण के बाद गलतियों को ज्ञान की कमी, अवधारणात्मक भ्रम, सामान्य भूल, समय-प्रबंधन और प्रश्न-चयन की गलती में बाँटता था। मेरे लिए परीक्षण से अधिक उसका विश्लेषण महत्वपूर्ण था। राजव्यवस्था के लिए एम. लक्ष्मीकांत, आधुनिक इतिहास के लिए स्पेक्ट्रम, भूगोल के लिए NCERT तथा अन्य विषयों में सीमित मानक स्रोत का उपयोग किया।
अगर समसामयिकी की बात की जाये तो इसे मैं स्थिर ज्ञान का विस्तार मानता था। किसी घटना को अलग से याद करने के बजाय उसे संविधान, भूगोल, अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संबंध या आंतरिक सुरक्षा से जोड़ता था। इसके लिए मैंने क्रॉनिकल पत्रिका के साथ-साथ कुछ अन्य ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग किया।
सिविल सर्विस क्रॉनिकल : आपकी दिनचर्या और शारीरिक सक्रियता की क्या भूमिका रही?
भूपेंद्र सिंह: तैयारी के चरण के अनुसार लगभग 6-8 घंटे की वास्तविक एकाग्र पढ़ाई का लक्ष्य रखता था। दिन की शुरुआत अक्सर दौड़ने से होती थी। इसके बाद सामान्य अध्ययन के विषय, समसामयिकी, पुनरावृत्ति और अभ्यास-परीक्षण के लिए दैनिक -सत्र निर्धारित करता था। मेरा मानना है कि छह एकाग्र घंटे बारह बिखरे हुए घंटों से अधिक उपयोगी हो सकते हैं। प्रेरणा बदलती रहती है, इसलिए मैंने अनुशासन पर भरोसा किया।
सिविल सर्विस क्रॉनिकल : साक्षात्कार की तैयारी आपने कैसे की?
भूपेंद्र सिंह: मैंने साक्षात्कार को ज्ञान-परीक्षा के बजाय व्यक्तित्व के आकलन के रूप में देखा। DAF के हर शब्द से संभावित प्रश्न बनाए। चरखी दादरी और हरियाणा के भूगोल, अर्थव्यवस्था, कृषि, सामाजिक मुद्दों, जल संबंधी चिंताओं, युवाओं, औद्योगिक विकास और सुरक्षा से जुड़े विषय पढ़े। रसायन विज्ञान की मूल अवधारणाओं और राष्ट्रीय विकास में विज्ञान की भूमिका पर भी तैयारी की। अभ्यास-साक्षात्कारों ने विशेष रूप से राकेश निखज के मार्गदर्शन में ‘दी इनविजिबल हेल्पिंग हैण्ड’ ने कई कमियाँ पहचानने में मदद की।
सिविल सर्विस क्रॉनिकल की ओर से भूपेंद्र सिंह को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।
भूपेंद्र सिंह: बार-बार किताबें, पीडीएफ, शिक्षक और रणनीतियाँ बदलने से बचें। वैकल्पिक योजना (Plan B) रखें, लेकिन उसे मुख्य लक्ष्य के प्रति कमजोर प्रतिबद्धता का बहाना न बनने दें। चिंता के बजाय आज के नियंत्रित कार्यों पर ध्यान दें।
असफलता एक घटना है, आपकी पहचान नहीं। हर दिन स्वयं से पूछें-“क्या मैं कल की तुलना में आज बेहतर तैयार हूँ?” यदि उत्तर लगातार ‘हाँ’ है, तो आगे बढ़ते रहें। मेरे लिए सहायक कमांडेंट बनना ईमानदारी से नेतृत्व करने, साहस से सेवा करने और राष्ट्र तथा अपने अधीन लोगों के प्रति जवाबदेह रहने की जिम्मेदारी है।
सिविल सर्विस क्रॉनिकल की ओर से भूपेंद्र सिंह को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।
साक्षात्कार
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