डिजिटल प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण : भारत के प्रयास एवं चुनौतियां
कंप्यूटर तथा इंटरनेट सुविधाओं के क्षेत्र में नवीन खोजों के आगमन के पश्चात वर्तमान समय में डिजिटल प्रौद्योगिकी के बिना अर्थव्यवस्था के किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करना संभव नहीं है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन तथा मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकी के महत्व को देखते हुए भारत को इस प्रकार के प्रयास करने चाहिए, जिससे वह एक निश्चित समय में इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर सके। इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा मशीन लर्निंग जैसी नवीन प्रौद्योगिकियों के आगमन के पश्चात डिजिटल प्रौद्योगिकी की जटिलता में वृद्धि हुई है। ऐसे में एक दीर्घकालिक नीति के ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 भारत की डेटा सेंटर संबंधी दुविधा: जल संकट बनाम डिजिटल विस्तार
- 2 कृत्रिम बुद्धिमत्ता: भारत की उभरती आधारभूत सार्वजनिक उपयोगिता
- 3 परीक्षाओं की विश्वसनीयता का संकट: क्या राधाकृष्णन समिति बनेगी समाधान?
- 4 सरकारी स्कूलों का बंद होना: शिक्षा के अधिकार और सामाजिक न्याय के सामने बढ़ता संकट
- 5 आतंकवाद पर SCO का कड़ा रुख : भारत की कूटनीतिक विजय
- 6 'क्लाइमेट टिपिंग पॉइंट्स' पर बढ़ता विवाद
- 7 चिकित्सा आपात स्थितियों में 'प्रोटीन जैव-सेंसर' की भूमिका
- 8 फास्ट ट्रैक कोर्ट: क्या परीक्षा पेपर लीक जैसे अपराधों पर लगेगी प्रभावी रोक?
- 9 Gen Z आंदोलन: विरोध-प्रदर्शन का अधिकार और संवैधानिक सीमाएँ
- 10 अमेरिका–ईरान इस्लामाबाद समझौता: पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक शुरुआत
- 1 भारत की गिग इकोनॉमी : संलग्न कार्यबल की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा हेतु विनियमन आवश्यक
- 2 ऊर्जा सुरक्षा : आत्मनिर्भर भारत की महत्वपूर्ण कड़ी
- 3 विश्व व्यापार संगठन एवं भारत : 12वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन तथा भारत के मुद्दे
- 4 भारत का इंडो-पैसिफिक विजन तथा आसियान : रणनीतिक संवाद एवं साझेदारी के 30 वर्ष
- 5 सहभागी शासन : सुशासन का उच्चतर स्तर - (डॉ. विवेक कुमार उपाध्याय)
- 6 शहरी रोजगार गारंटी योजना : समावेशी एवं धारणीय शहरी विकास हेतु आवश्यक - (डॉ. अमरजीत भार्गव)

