6वें सामूहिक विलोपन की शुरुआत
हाल ही में हवाई विश्वविद्यालय (University of Hawaii) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के अनुसार, वर्तमान में छठवां सामूहिक विलोपन (Sixth Mass Extinction) जारी है और यह मानव सभ्यता के लिए सबसे गंभीर पर्यावरणीय खतरों में से एक साबित हो सकता है।
अध्ययन के मुख्य बिन्दु
शोधकर्ताओं ने कहा कि मौजूदा सामूहिक विलोपन कोई नई घटना नहीं है और 16वीं शताब्दी से चल रही है।
- वर्ष 1500 के बाद, पृथ्वी पर पायी जाने वाली दो मिलियन ज्ञात प्रजातियों में से लगभग 7.5%-13% प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं।
- विलुप्त हो चुकी इन विभिन्न प्रजातियों की संख्या लगभग 150,000 से ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 सरिस्का बाघ पुनर्वास: विश्व का पहला सफल वैज्ञानिक कार्यक्रम
- 2 दुधवा गैंडा जनगणना 2026
- 3 संयुक्त एफएओ-डब्ल्यूएमओ रिपोर्ट
- 4 बांदीपुर टाइगर रिज़र्व
- 5 हिमालयन पैंगोलिन (Himalayan Pangolin)
- 6 ओमेगा ब्लॉक और यूरोप हीटवेव
- 7 इंडियन ओशन डाइपोल (Indian Ocean Dipole - IOD)
- 8 सिकुड़ता कैस्पियन सागर: कारण और परिणाम
- 9 CITES वनस्पति समिति की 28वीं बैठक (PC28)
- 10 स्वदेशी ग्रीन रेफ्रिजरेंट तकनीक विकसित

