निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया का सरलीकरण
24 जनवरी, 2023 को न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने ‘लिविंग विल’ (Living Will) से संबंधित मौजूदा दिशा-निर्देशों में बदलाव करके देश में निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की प्रक्रिया को सरल बनाने पर सहमति व्यक्त की।
- ‘लिविंग विल’ से संबंधित ये दिशा-निर्देश सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘कॉमन कॉज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया वाद’ (2018) में जारी किये गए थे; जिसके तहत देश में निष्क्रिय इच्छामृत्यु को अनुमति प्रदान की गई थी।
मुख्य बिंदु
- वर्तमान मामलाः संविधान पीठ, इंडियन काउंसिल फॉर क्रिटिकल केयर मेडिसिन द्वारा दायर एक याचिका पर विचार कर रही थी, ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 समुद्री चोक पॉइंट्स: व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीति के निर्णायक द्वार
- 2 ऑनलाइन गेमिंग नियम, 2026: उभरते डिजिटल क्षेत्र का समग्र नियामक ढांचा
- 3 दल-बदल विरोधी कानून: प्रासंगिकता, खामियां और सुधार की आवश्यकता
- 4 औद्योगिक आपदाएं: कारण, लागत और समाधान
- 5 एआई के उद्भव का प्रभाव: असीम संभावनाओं की राह और जोखिमपूर्ण चुनौतियां
- 6 जल-कुशल फसल नवाचार द्वारा भूजल दबाव का न्यूनीकरण
- 7 जलवायु परिवर्तनशीलता और निर्धनता का अंतर्संबंध: भारत में उभरती बहुआयामी चुनौती
- 8 भारत में खाद्य अपव्यय का विरोधाभास: भूख से जूझते भारत में संसाधनों की विडंबना
- 9 भारत में लुप्त होती झीलें: सामाजिक-पारिस्थितिक स्थिरता के लिए एक खतरा
- 10 बाह्य अंतरिक्ष शासन: वैश्विक शक्ति-संतुलन का उभरता क्षेत्र

