दक्षिण-दक्षिण सहयोग : चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिदृश्य में सहभागिता के नए आयामों की तलाश
12 जनवरी, 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरणीय, सांस्कृतिक एवं तकनीकी विषयों पर सहयोग करने के लिए राष्ट्रों के एक महत्वपूर्ण समूह के रूप में ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट-2023’ (Voice of Global South Summit-2023) का उद्घाटन किया।
- भारत ने इस आयोजन के माध्यम से दक्षिण के देशों (South Countries) की ओर से विश्व के समक्ष एक नवीन एजेंडा प्रस्तुत किया, इस एजेंडे को ‘प्रतिक्रिया, पहचान, सम्मान और सुधार’ (Respond, Recognise, Respect, and Reform) के रूप में प्रस्तुत किया गया।
- ध्यातव्य है कि ‘ग्लोबल साउथ’ ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 मणिपुर में जनगणना स्थगन, NRC और परिसीमन का विवाद
- 2 IBC में ‘डीप हेयरकट’ और ऋणदाताओं की चिंता
- 3 भारत के कपड़ा उद्योग का हरित भविष्य
- 4 स्कूलों में जनरेटिव एआई : प्रतिबंध, विनियमन या एकीकरण?
- 5 भारत का अनुसंधान विरोधाभास: मात्रा से वास्तविक दुनिया के प्रभाव तक
- 6 जंगल की आग और मानव स्वास्थ्य: एक बढ़ता वैश्विक और राष्ट्रीय संकट
- 7 स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के लिए भारत में 'ग्रिड क्रांति' की आवश्यकता
- 8 समावेशी 'ब्लू इकोनॉमी' और तटीय विरासत का पुनरुद्धार
- 9 शांति अधिनियम (SHANTI Act): भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण और परमाणु दायित्व व्यवस्था में बदलाव
- 10 कावेरी जल विवाद: संकट के दौर में जल-बंटवारे की नई चुनौती

