संसदीय कार्यवाही में प्रश्नकाल एवं शून्यकाल
- 2 सितंबर, 2020 को लोकसभा और राज्यसभा के सचिवालयों ने अधिसूचित किया कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रश्न काल (Question Hour) नहीं होगा. साथ ही शून्य काल के समय में भी कटौती कर दी गई है।
- विपक्षी सांसदों ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि इस कदम से वे सरकार पर सवाल उठाने का अधिकार खो देंगे। प्रश्नकाल के ना होने के निर्णय ने संसद के लोकतांत्रिक कामकाज के बारे में गंभीर चिंताओं को जन्म दिया है।
- प्रश्नकाल संसद सदस्यों के लिए न केवल सवाल उठाने का एक अवसर है, बल्कि यह एक ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 जी-7 में भारत: बदलती पश्चिमी दुनिया और नई रणनीति
- 2 भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य
- 3 अध्यादेश और न्यायिक स्वतंत्रता
- 4 दिव्यांगजनों के लिए समान व्यवहार और अधिकार
- 5 अंतरिक्ष में कक्षीय प्रतिद्वंद्विता
- 6 जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च स्तरीय समिति : राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध प्रवासन का नया विमर्श
- 7 EV क्रांति और ऊर्जा अवसंरचना की चुनौती
- 8 कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म और भारत के समक्ष चुनौतियाँ
- 9 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण में क्रीमी लेयर बहस
- 10 बढ़ती गर्म रातें : भारत में उभरता नया हीट संकट
करेंट अफेयर्स के चर्चित मुद्दे
- 1 नए कृषि विधेयक तथा इनसे संबंधित मुद्दे
- 2 चुनावी उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि का प्रकाशन
- 3 उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल
- 4 सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले
- 5 राज्यों के बाजार ऋण एवं सरकारी प्रतिभूति
- 6 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां एवं उनका विनियमन
- 7 भारत-चीन संबंध एवं पांच सूत्रीय कार्ययोजना
- 8 पराली दहन एवं उत्तर भारत में प्रदूषण
- 9 आत्मनिर्भर भारत अभियान में बांस का महत्त्व
- 10 शुक्र ग्रह पर मिले जीवन के संकेत

