भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की भूमिका : औचित्य, लाभ एवं चुनौतियां
भारत वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष अन्वेषण में अग्रणी राष्ट्र है, लेकिन इसमें निजी क्षेत्र का योगदान सीमित रहा है। इस चुनौती के समाधान तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में वाणिज्यिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जून 2020 में एक नई इकाई IN-SPACE की घोषणा की थी। अंतरिक्ष विभाग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के प्रसार को बढ़ाने के लिए अंतरिक्ष संचालन में निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा दे रहा है तथा इसके माध्यम से अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। अंतरिक्ष में निजी क्षेत्र द्वारा किये जाने वाले नवाचार राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 भारत की डेटा सेंटर संबंधी दुविधा: जल संकट बनाम डिजिटल विस्तार
- 2 कृत्रिम बुद्धिमत्ता: भारत की उभरती आधारभूत सार्वजनिक उपयोगिता
- 3 परीक्षाओं की विश्वसनीयता का संकट: क्या राधाकृष्णन समिति बनेगी समाधान?
- 4 सरकारी स्कूलों का बंद होना: शिक्षा के अधिकार और सामाजिक न्याय के सामने बढ़ता संकट
- 5 आतंकवाद पर SCO का कड़ा रुख : भारत की कूटनीतिक विजय
- 6 'क्लाइमेट टिपिंग पॉइंट्स' पर बढ़ता विवाद
- 7 चिकित्सा आपात स्थितियों में 'प्रोटीन जैव-सेंसर' की भूमिका
- 8 फास्ट ट्रैक कोर्ट: क्या परीक्षा पेपर लीक जैसे अपराधों पर लगेगी प्रभावी रोक?
- 9 Gen Z आंदोलन: विरोध-प्रदर्शन का अधिकार और संवैधानिक सीमाएँ
- 10 अमेरिका–ईरान इस्लामाबाद समझौता: पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक शुरुआत

