डिजिटल संविधानवाद
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा संचार साथी ऐप की अनिवार्यता को रद्द करना भारत में डिजिटल संविधानवाद (Digital Constitutionalism) की उभरती चेतना का प्रतीक है। जहाँ एक ओर 2024 में साइबर अपराधों का बढ़कर 20.4 लाख होना सुरक्षा की गंभीर चुनौती पेश करता है, वहीं सर्विलांस और डेटा निजता पर उपजा विरोध यह स्पष्ट करता है कि डिजिटल युग में भी राज्य की शक्तियाँ संवैधानिक सीमाओं और नागरिक स्वतंत्रता के साथ संतुलित होनी चाहिए।
अवधारणा:
- डिजिटल संविधानवाद का तात्पर्य डिजिटल शासन, डेटा-संग्रह, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और निगरानी प्रणालियों पर संवैधानिक मूल्यों (स्वतंत्रता, गरिमा, समानता, जवाबदेही और विधि-शासन) को लागू ....
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