शहरी रोजगार गारंटी योजना : समावेशी एवं धारणीय शहरी विकास हेतु आवश्यक - (डॉ. अमरजीत भार्गव)

शहरी रोजगार गारंटी योजना से शहरी निवासियों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा, जिससे उनकी जीवन की गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना है। इतना ही नहीं, इस योजना के माध्यम से शहरी अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा सामना की जा रही निम्न मजदूरी स्तर तथा संसाधनों के अनुचित नियोजन की .... Read More
सहभागी शासन : सुशासन का उच्चतर स्तर - (डॉ. विवेक कुमार उपाध्याय)

“केवल सुशासन पर्याप्त नहीं है; इसमें जनभागीदारी और सक्रियता आवश्यक है। इसीलिए जनभागीदारी को विकास प्रक्रिया के केन्द्र में रखा जा रहा है”। (नरेन्द्र मोदी)सहभागी शासन ऐसी प्रणाली है जो नीति निर्माण तथा निगरानी की प्रक्रिया में लोगों को जोड़कर शासन के लोकतांत्रीकरण को प्रोत्साहित करती है। यह लोक-संवाद, वार्ता .... Read More
भारत का इंडो-पैसिफिक विजन तथा आसियान : रणनीतिक संवाद एवं साझेदारी के 30 वर्ष

हिंद-प्रशांत क्षेत्र के भू-राजनीतिक (Geopolitical) एवं भू-रणनीतिक संरेखण (Geostrategic Alignment) में परिवर्तन देखा जा रहा है। इन परिवर्तनों ने एक तरफ नए अवसर पैदा किए हैं तो वहीं दूसरी तरह विभिन्न चुनौतियां भी पैदा की हैं। इस क्षेत्र की आर्थिक प्रगति ने गरीबी कम करने और लाखों लोगों के जीवन .... Read More
विश्व व्यापार संगठन एवं भारत : 12वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन तथा भारत के मुद्दे

डब्ल्यूटीओ के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के दौरान विश्व के विभिन्न व्यापारिक प्रतिनिधियों द्वारा अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए गए। सम्मेलन में भारत ने कुछ अन्य विकासशील देशों के साथ कृषि क्षेत्र में, विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में सब्सिडी और व्यापार .... Read More
ऊर्जा सुरक्षा : आत्मनिर्भर भारत की महत्वपूर्ण कड़ी

भारत ने अपने नागरिकों को ऊर्जा सेवाएं प्रदान करने में अभूतपूर्व प्रगति की है। पिछले 2 दशकों में लगभग 90 करोड़ लोगों तक विद्युत की पहुंच सुनिश्चित की गई है। वर्तमान में 96.7% भारतीय परिवार विद्युत ग्रिड से जुड़े हुए हैं। हालांकि भारत में प्रति व्यक्ति विद्युत खपत वैश्विक औसत .... Read More
भारत की गिग इकोनॉमी : संलग्न कार्यबल की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा हेतु विनियमन आवश्यक

नीति आयोग द्वारा हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट गिग अर्थव्यवस्था में लागू किए जाने वाले सुधारों के क्रम में एक विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करती है। अमेरिका के बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (Boston Consulting Group) द्वारा जारी की गई एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार भारत के गिग कार्यबल के तहत सॉफ्टवेयर, साझा .... Read More
डिजिटल प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण : भारत के प्रयास एवं चुनौतियां

कंप्यूटर तथा इंटरनेट सुविधाओं के क्षेत्र में नवीन खोजों के आगमन के पश्चात वर्तमान समय में डिजिटल प्रौद्योगिकी के बिना अर्थव्यवस्था के किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करना संभव नहीं है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन तथा मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकी के महत्व को देखते हुए .... Read More
पीएम गति शक्ति योजना : अवसंरचनात्मक विकास में भूमिका एवं महत्व - (डॉ. अमरजीत भार्गव)

निर्माण गतिविधियों में संलग्न विभिन्न एजेंसियों के मध्य सहयोग एवं समन्वय की व्यापक कमी देखने को मिलती है। ऐसी स्थिति में, बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को समयबद्ध रूप में पूरा करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, इससे अंतिम रूप से परियोजनाओं की लागत में वृद्धि होती है। समस्याओं को पहचान .... Read More
भावनात्मक बुद्धिमत्ता : नैतिक और समावेशी शासन का प्रेरक

भावनात्मक बुद्धिमत्ता, भावनाओं के अनुशासन की ऐसी योग्यता है, जिसके माध्यम से व्यक्ति स्वयं की तथा सामने वालों की भावनाओं को समझकर उनका प्रबंधन करता है। नैतिक शासन एवं समावेशी शासन दोनों ही विधि के शासन पर आधारित सुशासन से आगे बढ़कर मूल्यों पर आधारित व्यवस्था की स्थापना से संबंधित .... Read More
भारत-नेपाल संबंध : मौजूदा चुनौतियां एवं सहयोग के क्षेत्र

भारत और नेपाल के बीच संबंध व्यापक और बहुआयामी हैं तथा दोनों देशों ने ऐतिहासिक संबंधों को औपचारिक स्वर प्रदान करने के लिए 17 जून, 1947 को राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। नेपाल, सीमा पार संपर्क, बुनियादी ढांचा विकास, वित्तीय कनेक्टिविटी जैसी पहलों के माध्यम से भारत की आर्थिक प्रगति .... Read More
असंगठित क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण : सामाजिक सुरक्षा हेतु संरचनात्मक हस्तक्षेप आवश्यक

असंगठित क्षेत्र में सुधार समय की मांग है। इस क्षेत्र में बेरोजगारी के बढ़ते स्तर के साथ, श्रमिकों को पुनः नियोजित करना आवश्यक है। सरकार को इस क्षेत्र को संगठित रूप देने, सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा रोजगार के उचित एवं पर्याप्त अवसर प्रदान करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने .... Read More
क्लाइमेट फाइनेंस : जलवायु शमन एवं अनुकूलन में इसकी भूमिका

जलवायु वित्तीयन यानी क्लाइमेट फाइनेंस पिछले एक से अधिक दशक से विकसित एवं विकासशील देशों के मध्य मतभेद का विषय रहा है। वर्तमान में विकासशील देशों में जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कार्यों को लागू करने हेतु निवेश के लिए धन की कमी है। ऐसे में क्लाइमेट फाइनेंस पवन या .... Read More
वन हेल्थ मॉडल : उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने का संधारणीय दृष्टिकोण

मानव, वन्यजीव तथा पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य को स्थायी रूप से संतुलित और अनुकूलित करने हेतु वन हेल्थ दृष्टिकोण (One Health Approach) महत्वपूर्ण है| वन हेल्थ दृष्टिकोण स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर कार्य करने वाला एक सहयोगी, बहु-क्षेत्रीय और बहुविषयक दृष्टिकोण है, जिसका लक्ष्य लोगों, जंतुओं, वनस्पतियों और .... Read More
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की वहनीयता : नवीन चुनौतियां एवं समाधान

21वीं सदी में लगातार वैश्वीकरण की प्रक्रिया में तेजी आई है। इंटरनेट तथा नवीन प्रौद्योगिकियों के माध्यम से विश्व के लगभग सभी देश पहले की तुलना में एक दूसरे पर अधिक निर्भर हैं। ऐसी स्थिति में, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्त्व में वृद्धि हुई है, क्योंकि इनके माध्यम से वस्तुओं .... Read More
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति को लागू किए जाने की आवश्यकता - (डॉ. अमरजीत भार्गव)

वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास की प्रक्रिया तीव्र गति से डिजिटल अर्थव्यवस्था के रूप में परिवर्तित हो रही है। सूचना एवं संचार से लेकर रक्षा जैसे क्षेत्र भी अपने अधिकांश क्रियाकलापों के लिए इंटरनेट प्रौद्योगिकी पर निर्भर हो रहे हैं। ऐसे समय में देशों के समक्ष साइबर चुनौतियां अधिक मजबूती .... Read More
सामाजिक पूंजी : भूमिका, बाधाएं एवं संभावनाएं - (महेन्द्र चिलकोटी)

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तथा समूह में कार्य करता है। मानव सभ्यता की सम्पूर्ण यात्रा में लोगों के बीच आपसी सहयोग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समूह में कार्य करने के लिए समूह के सदस्य मूल्यों तथा मानदंडों के आधार पर एक-दूसरे के साथ अंतर्क्रिया तथा सहयोग करते हैं। .... Read More
भारत में गरीबी : व्युत्पन्न मुद्दे एवं चुनौतियां

भारत में गरीबी के स्तर में कमी लाने के लिए परंपरागत समाधान एवं उपायों से आगे जाकर कुछ ऐसे उपायों की खोज किये जाने की आवश्यकता है, जो आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी समाज का निर्माण कर सकें। इसी के आधार पर सभी व्यक्तियों के लिए रोजगार एवं आय के समान .... Read More
मानवजनित पर्यावरणीय क्षति : न्यूनीकरण की आवश्यकता एवं उपाय

वर्तमान में मानवजनित गतिविधियों और प्राकृतिक कारणों से पर्यावरणीय क्षति को बढ़ावा मिल रहा है| इसके परिणामस्वरूप पर्यावरण और मानव के अस्तित्व के समक्ष एक गंभीर चुनौती उत्पन्न हो रही है| इसी चुनौती के समाधान के लिए पर्यावरणीय क्षति के न्यूनीकरण (Mitigation of Environmental Damage) हेतु राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर .... Read More
भारत में पोषण सुरक्षा : 2030 तक खाद्य सुरक्षा से पोषण सुरक्षा की ओर स्थानांतरण

उचित पोषण को विकास का एक महत्वपूर्ण सूचक माना जाता है, इसके विपरीत अल्पपोषण मनुष्य के स्वास्थ्य को विपरीत रूप से प्रभावित करता है। अल्पपोषण, सामाजिक-आर्थिक न्याय में बाधक भी बनता है तथा यह गरीब और विकासशील देशों के स्वास्थ्य पर संसाधन खर्च का बोझ बढ़ाता है। सरकार के खाद्य .... Read More
भारत-ऑस्ट्रेलिया : बहुध्रुवीय हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वाभाविक भागीदार - (सतीश कुमार कर्ण)

परिवर्तनशील वैश्विक राजनीति में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनैतिक स्थिति में व्यापक परिवर्तन आया है। इस क्षेत्र के प्रमुख भागीदार होने के कारण भारत एवं ऑस्ट्रेलिया अपेक्षाकृत अधिक व्यापक सुरक्षा रणनीति को अपनाने की ओर अग्रसर हैं। चीन की बढ़ती आक्रामक गतिविधियों के प्रत्युत्तर में दोनों देश क्वाड समूह के माध्यम .... Read More
परिवहन क्षेत्र का विकार्बनीकरण : ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की आवश्यकता

परिवहन क्षेत्र कार्बन उत्सर्जन में प्रमुख योगदानकर्त्ता है। केवल सड़क परिवहन के माध्यम से लगभग 33% पार्टिकुलेट मैटर का उत्सर्जन होता है। भारत वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश के परिवहन क्षेत्र का विकार्बनीकरण किया जाना .... Read More
भारत के लिए एक व्यापक रक्षा एवं सामरिक नीति की आवश्यकता- (डॉ. अमरजीत भार्गव)

परिवर्तनशील वैश्विक व्यवस्था तथा तकनीक एवं नवाचारों के प्रयोग के कारण वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों द्वारा अपनी रक्षा एवं सामरिक नीति को अद्यतन करने की आवश्यकता महसूस हुई है। चीन ने अपनी आर्थिक प्रगति के साथ-साथ रक्षा एवं सामरिक क्षेत्र में व्यापक सुधार किए हैं। रक्षा एवं सामरिक क्षेत्र .... Read More
जलवायु परिवर्तन : प्रभाव, अनुकूलन एवं भेद्यता

आईपीसीसी की छठी मूल्यांकन रिपोर्ट के दूसरे खंड में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, जोखिमों और अनुकूलन उपायों की चर्चा की गई है। आईपीसीसी ने अपनी रिपोर्ट में पहली बार क्षेत्रीय आकलनों को शामिल किया है तथा इस रिपोर्ट में मेगासिटीज़ पर ध्यान केंद्रित किया गया है। भारत जलवायु परिवर्तन के .... Read More
सिंथेटिक बायोलॉजी : अनुप्रयोग एवं चुनौतियां- (शक्ति कुमार दुबे)

सिंथेटिक बायोलॉजी या संश्लेषित जीव विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक प्रयोग को देखते हुए वर्तमान में वैश्विक स्तर पर व्यापक शोध एवं विकास हो रहा है| इस कारण यह सबसे तेजी से विकसित हो रही विज्ञान की शाखा बन चुकी है| साथ ही इससे संबंधित विभिन्न प्रकार की चुनौतियां .... Read More
भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली : एक राष्ट्रीय निधि -(सतीश कुमार कर्ण)

पारंपरिक ज्ञान (Traditional knowledge) विश्व भर के देशज और स्थानीय समुदायों के ज्ञान, जानकारी, नवाचारों और परंपराओं को संदर्भित करता है। यह सदियों के अनुभव एवं स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण के अनुकूलन के आधार पर पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूप से संचालित होता है। लोक कथाएं, मूल्य, विश्वास, अनुष्ठान, सामुदायिक .... Read More
कॉरपोरेट गवर्नेंस : पारदर्शिता तथा नैतिकता आधारित व्यावसायिक शासन - (महेन्द्र चिलकोटी)

कॉरपोरेट गवर्नेंस का संबंध आर्थिक एवं सामाजिक लक्ष्यों तथा व्यक्तिगत एवं सामुदायिक लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाए रखने से है। कॉरपोरेट शासन ढांचा संसाधनों के कुशल उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए तथा उन संसाधनों के प्रबंधन के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है। इसका उद्देश्य व्यक्तियों, निगमों और .... Read More
परिवर्तनशील भू-राजनीतिक एवं भू-आर्थिक स्थिति : वैश्विक व्यवस्था एवं भारत

वैश्विक आर्थिक एवं राजनीतिक परिदृश्य हमेशा से अंतर-संबंधित रहे हैं। औपनिवेशिक काल से ही वैश्विक स्तर पर यह देखा गया कि आर्थिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों ने विभिन्न देशों के मध्य निर्मित होने वाले संबंधों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। स्वतंत्रता के बाद भारत ने विकास की एक लंबी .... Read More
हरित हाइड्रोजन नीति : शुद्ध शून्य उत्सर्जन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर हरित हाइड्रोजन को भविष्य के ईंधन के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया तथा यूएई जैसे विश्व के अनेक देशों ने अपने देश में हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए विस्तृत नीतियों का निर्माण किया है। भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं .... Read More
प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद : स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का प्रतिमान- (महेन्द्र चिलकोटी)

प्रतिस्पर्धा के विचार ने विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्ति में सदैव ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तुलनात्मक तथा प्रतिस्पर्धी मॉडल ने विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय स्तर पर प्रेरक कारक के रूप में कार्य किया है। भारत के संघवाद के विकासक्रम में प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद ने राज्यों के बीच .... Read More
इंडस्ट्री 4.0 : भारत की तैयारी, अंगीकरण एवं चुनौतियां

उद्योग 4.0 विनिर्माण और उत्पादन श्रृंखला से संबंधित चौथी औद्योगिक क्रांति को संदर्भित करता है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डेटा आदि जैसी डिजिटल तकनीकों में सफलताओं से प्रेरित है। ‘उद्योग 4.0’ में भारत में बहुआयामी रचनात्मक बदलाव लाने की क्षमता है। यह भारत के .... Read More
मेटावर्स : इंटरनेट और डिजिटल दुनिया का भविष्य

इंटरनेट प्रौद्योगिकी, डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा आभासी वास्तविकता के विकासक्रम में अगला चरण मेटावर्स का है। हालांकि प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगिक दृष्टिकोण से मेटावर्स की परिकल्पना अभी वास्तविक धरातल पर नहीं उतर सकी है। वर्तमान में मेटावर्स के संबंध में चर्चा करना 1970 के दशक में इंटरनेट के संबंध में बात करने .... Read More
रेडियोधर्मी प्रदूषण : कारण, प्रभाव एवं समाधान

वैश्विक स्तर पर रेडियोधर्मी प्रदूषण की घटनाओं में पिछले कुछ वर्षों में वृद्धि दर्ज की गई है, जो मानवीय स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। रेडियोधर्मी तत्वों का परमाणु हथियारों, एक्स-रे, एमआरआई तथा अन्य चिकित्सा उपकरणों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा .... Read More
भारत-यूएई संबंध : आर्थिक साझेदारी का एक नया पड़ाव- (सतीश कुमार कर्ण)

संयुक्त अरब अमीरात के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) भारत के लिए यूएई (UAE) के रणनीतिक भागीदार के रूप में स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इसके साथ ही यह भारत को अफ्रीका के बाजार और इसके विभिन्न व्यापार भागीदारों तक अपेक्षाकृत आसान पहुंच प्रदान करने में मदद कर .... Read More
भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी : अनुप्रयोग, महत्व एवं चुनौतियां- (डॉ. अमरजीत भार्गव)

21वीं सदी में उपग्रह तथा इंटरनेट आधारित प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोगों में वृद्धि होने के कारण भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी के महत्व में अत्यधिक वृद्धि हुई है। देश में भू-स्थानिक डेटा के उपयोग की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए भौगोलिक क्षेत्रों के सर्वेक्षण एवं उनके मानचित्रण की सटीकता में वृद्धि किए जाने की .... Read More
भारत की सेमीकंडक्टर नीति : महत्व तथा चुनौतियां

भारत में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और 5G तकनीक के आगमन के साथ सेमीकंडक्टर चिप की मांग बढ़ रही है और वर्ष 2025 तक इसकी मांग वर्तमान के 24 बिलियन डॉलर मूल्य से बढ़कर लगभग 100 बिलियन डॉलर मूल्य तक होने की संभावना है। साथ ही वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य .... Read More
लिंग आधारित हिंसा : सभ्य समाज का असभ्य चरित्र

लिंग आधारित हिंसा विश्व के लगभग सभी समाजों में प्रचलित हिंसा के सबसे आम रूपों में से एक है तथा यह दुनिया भर में लाखों महिलाओं तथा बालिकाओं के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। लिंग आधारित हिंसा के तत्व हालांकि सभी समाजों एवं संस्कृतियों में मौजूद होते .... Read More
भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का दोहन : मुद्दे एवं चुनौतियां

मानव संसाधन किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। इस संदर्भ में जनसांख्यिकीय लाभांश की स्थिति द्वारा न केवल किसी राष्ट्र का आर्थिक विकास सुनिश्चित होता है, अपितु यह उसकी सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाता है। वर्तमान में भारत जनसांख्यिकीय लाभांश की स्थिति में .... Read More
भारत-श्रीलंका संबंध : मुद्दे एवं चुनौतियां - ( सतीश कुमार कर्ण )

एक स्वतंत्र, सुरक्षित व समावेशी हिंद महासागर को वास्तविक स्वरूप प्रदान करने में भारत के लिए श्रीलंका का अत्यंत महत्व है| दोनों देशों के मध्य सामाजिक-आर्थिक व राजनीतिक संबंधों की ऐतिहासिक परंपरा रही है, जिसका निर्वहन वर्तमान में भी दोनों देशों द्वारा किया जा रहा है| हाल के कुछ वर्षों .... Read More
उभरती प्रौद्योगिकीः राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती या समाधान - ( डॉ. अमरजीत भार्गव )

प्रौद्योगिकी प्रगति ने हमेशा ही राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव डाला है। अतीत में देखने पर हम पाते हैं कि औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप हुए प्रौद्योगिकी नवाचार की प्रक्रिया ने उपनिवेशीकरण की दिशा को प्रभावित किया था। वर्तमान समय में नवाचार आधारित विभिन्न प्रकार की प्रौद्योगिकियां मानव जीवन की औद्योगिक तथा .... Read More
ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन : चिकित्सकीय तथा नैतिक निहितार्थ - ( महेन्द्र चिलकोटी )

मानव अंग प्रत्यारोपण कई गंभीर बीमारियों के इलाज में महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपकरण रहा है। किंतु इस प्रक्रिया में ‘दाता अंगों’ (Donor Organs) की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। प्रति वर्ष अंग प्रत्यारोपण कीप्रतीक्षा सूची में शामिल लोगों में से केवल 50% ही आवश्यक अंग प्राप्त कर पाते हैं। प्रत्यारोपण .... Read More
चीन की बढ़ती वैश्विक सैन्य उपस्थिति : भारत की चिंताएं एवं कूटनीतिक निहितार्थ

वैश्विक स्तर पर अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिनमें भारत एवं चीन सहयोगी भूमिका निभा रहे हैं। भारत, चीन समर्थित एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बैंक के संस्थापक सदस्य में भी शामिल है। साथ ही दोनों देश वर्ल्ड बैंक तथा आईएमएफ जैसी संस्थाओं के लोकतांत्रीकरण को बढ़ावा देने का समर्थन करते रहे हैं। .... Read More
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