भारत में व्यापक सामाजिक सुरक्षा नीति की आवश्यकता

सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में सरकार ‘आय पुनर्वितरण’(Income redistribution) के लिए हस्तक्षेपवादी भूमिका(Interventionist Role) निभाती है। सामाजिक सुरक्षा उपाय, आम तौर पर ‘रखरखाव के उपाय’(Maintenance Measures) हैं, जिनका उद्देश्य ऐसे लोगों को एक न्यूनतम जीवन स्तर प्रदान करना है, जो विकलांगता (Disability), बेरोजगारी (Unemployment), बुढ़ापे (Old Age) या अन्य वंचनाओं के .... Read More
सुदृढ़ सामाजिक अवसंरचना सशक्त अर्थव्यवस्था की नींव

सामाजिक अवसंरचना उन प्रमुख कारकों में से एक है, जो लोगों की आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में उत्पादन के लिए जरूरी मानव संसाधन उपलब्ध कराती है। सामाजिक बुनियादी ढांचा, पेशेवर उद्यमशीलता का विकास करता है। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा तथा राजनीतिक स्थिरता के लिए भी प्रभावी .... Read More
G20 सम्मेलन 2021 रोम घोषणा तथा भारत के लिए उपलब्धियां

वर्तमान बहुपक्षीय विश्व में G20 की प्रासंगिकता विकासशील देशों के हितों की रक्षा करने एवं वैश्विक निर्णय को प्रभावित करने में बनी हुई है। भारत का मानना है कि देश की विदेश नीति को घरेलू हितों से उचित रूप से जोड़ा जाना चाहिए, और भारत अन्य देशों से भी ऐसा .... Read More
मानव विकास का मापन विभिन्न उपागम तथा उनकी सीमाएं

मानव प्रगति के मापन का एक लंबा इतिहास रहा है तथा यह समय के साथ अनेक चरणों से गुजरा है। परिवर्तित सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में मानव विकास के मापन की उपलब्ध विधियां वर्तमान समय में अधिक व्यावहारिक प्रतीत नहीं हो रही हैं। इन विधियों में व्याप्त .... Read More
कॉप 26 ग्लासगो घोषणा और भारत

‘ग्लासगो जलवायु समझौता’ (Glasgow Climate Pact) जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के संदर्भ में प्रगति के लिए ‘बिल्डिंग ब्लॉक’ (Building Block) प्रदान करता है। सम्मेलन में की गई प्रतिबद्धता निश्चित रूप से पर्यावरणीय मुद्दों के बारे में जागरूकता तथा बढ़ती चिंताओं को प्रदर्शित करती है। हालांकि पर्यावरण के क्षेत्र .... Read More
न्यूनतम समर्थन मूल्य का वैधानीकरण मुद्दे तथा चुनौतियां

कृषि सब्सिडी की भांति किसानों को प्रदान किया जाने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रत्यक्ष रूप से सरकार की राजकोषीय स्थिति से संबंधित है। साथ ही कृषि क्षेत्र में अनेक संभावनाएं व्याप्त हैं और कृषि को उन्नत करके भारतीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि के रूप में इसके लाभ उठाए जा सकते हैं। .... Read More
उभरती प्रौद्योगिकियां : नैतिक मुद्दे एवं दृष्टिकोण

नैतिकता के दायरे में जीवन के लिए महत्वपूर्ण सार्वभौमिक मूल्यों का सम्मान तथा विधि के शासन जैसे पहलुओं को बढ़ावा देना तथा उनका बचाव करना शामिल है। नई प्रौद्योगिकियों के आगमन से नैतिकता की पारंपरिक समझ में बदलाव आया है तथा हमें नए सिरे से इस संदर्भ में विचार करने .... Read More
ऑकस एवं क्वाड हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए महत्व एवं भूमिका

ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका (AUKUS) के बीच नई त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी की घोषणा से इस क्षेत्र के संबंध में गठित एक अन्य संगठन- क्वाड के भविष्य तथा प्रासंगिकता पर प्रश्न उठे हैं। इस संबंध में इस बात का उल्लेख करना आवश्यक है कि क्वाड तथा ऑकस दो .... Read More
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम चुनौतियां एवं भावी दिशा

एमएसएमई क्षेत्र द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र के लिए सम्पूर्ण पारिस्थितिक तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था में उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ ही रोजगार के अवसर भी पैदा करता है। आरबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार एमएसएमई क्षेत्र, आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार के .... Read More
भारत की विस्तारित पड़ोस की नीति मध्य एशियाई संदर्भ

बदलती भू-रणनीतिक परिस्थितियों में भारत ने अपनी विदेश नीति में कई परिवर्तन किए हैं, जिनमें एक महत्वपूर्ण परिवर्तन पड़ोसी देशों के संदर्भ में नीति का बदलाव है। पड़ोसी देशों के साथ संबंधों की जटिलताओं को देखते हुए तथा भूमंडलीकरण के दौर में कूटनीतिक विकल्पों के महत्व को समझते हुए भारत .... Read More
सामाजिक प्रभाव आकलन आवश्यकता एवं महत्व

किसी भी विकास परियोजना का उद्देश्य देश की आबादी के जीवन स्तर और गुणवत्ता में वृद्धि करना तथा पर्यावरण के संसाधनों को नुकसान पहुंचाए बिना स्थानीय आय और रोजगार के अवसरों का निर्माण तथा विस्तार करना होता है। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि विकास गतिविधियों के कारण .... Read More
बायोप्लास्टिक प्लास्टिक अपशिष्ट समस्या का स्थायी समाधान

वर्तमान समय में सिंथेटिक प्लास्टिक की तुलना में बायोप्लास्टिक का उत्पादन अत्यंत ही सीमित मात्रा में हो रहा है किंतु लाभों को देखते हुए इसके अनुप्रयोगों में तेजी से वृद्धि हो रही है। जैव-निम्नीकरण तथा नगण्य कार्बन फुटप्रिंट के कारण सीमित मात्रा में ही सही किंतु इसकी स्वीकार्यता में वृद्धि .... Read More
महिला प्रतिनिधित्व: सशक्त समाज एवं समावेशी लोकतंत्र की बुनियाद

महिला प्रतिनिधित्व का उनकी आबादी के अनुपात में होना, महिला सशक्तीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। भारत द्वारा समानता आधारित समावेशी लोकतंत्र की स्थापना के 70 वर्षों के बाद भी लैंगिक स्तर पर समावेशी लोकतंत्र का लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सका है। इसके कारणों का .... Read More
ब्रिक्स के 15 वर्ष उपलब्धियां, चुनौतियाँ और प्रासंगिकता

उभरती विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के संगठन ब्रिक्स ने वर्ष 2021 में, 15 वर्षों की यात्रा पूरी की है। इस यात्रा के दौरान इस संगठन ने विविध वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों के समाधान में एक विकल्प प्रस्तुत किया है। वहीं संगठन को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। .... Read More
पूर्वोत्तर राज्य सीमा विवाद कारण एवं समाधान की राह

प्रशासनिक सहूलियत के हिसाब बनाई गई राज्यों की सीमाएं कभी-कभी जनजातीय क्षेत्रों और उनकी पहचान के साथ मेल नहीं खातीं। इस कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार तनाव बना रहता है और प्रायः हिंसक झड़पें होती रहती हैं। पूर्वाेत्तर राज्यों में सीमा विवाद औपनिवेशिक सीमांकन और स्वतंत्रता के बाद उत्तर-पूर्व में .... Read More
शंघाई सहयोग संगठन भू-राजनीतिक महत्व तथा भारत की स्थिति

सतीश कुमार कर्ण शंघाई सहयोग संगठन की आंतरिक नीति पारस्परिक विश्वास, लाभ, समानता, परामर्श, सांस्कृतिक विविधता के सम्मान और सामान्य विकास की इच्छा पर आधारित है। साथ ही इसकी बाहरी नीति खुलेपन (Openness), ‘आतंरिक मामले में गैर-हस्तक्षेप’ (Non Interference in Internal Issues) तथा ‘गुटनिरपेक्षता’ (Non alignment) के मूल सिद्धांतों पर आधारित .... Read More
हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सामरिक अनिवार्यताएं और भारत का रुख

प्रमुख समुद्री संचार मार्गों तथा प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रणनीतिक अवरोध बिंदुओं के उद्गम स्थल के रूप में हिंद महासागर क्षेत्र ने पिछले कुछ दशकों में एक महत्वपूर्ण शक्ति प्रदर्शन क्षेत्र के रूप में महत्व प्राप्त किया है। इस क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारत की अवस्थिति ने भारत को .... Read More
भारत में पर्यावरणीय लेखांकन: उपलब्धियां एवं चुनौतियां

डॉ. अमरजीत भार्गव आर्थिक विकास तथा पर्यावरण संरक्षण को एक साथ बढ़ावा देने की एक प्रथा के रूप में संपूर्ण विश्व में पर्यावरणीय लेखांकन को तीव्र महत्त्व प्रदान किया जा रहा है। औद्योगीकरण के आरंभिक समय से ही पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने की मानवीय क्षमता में ह्रास हुआ है। औद्योगीकरण .... Read More
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला संकट प्रभाव तथा भारत की कार्यनीति

महामारी के कारण वर्ष 2020 में लगभग पूरे समय औद्योगिक गतिविधियां ठप रहीं। जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था महामारी की गिरफ्त से बाहर आना शुरू हुई, ऊर्जा, श्रम एवं शिपिंग कंटेनरों की मांग में वृद्धि हुई। मांग में हुई इस अचानक वृद्धि से ‘औद्योगिक इकाइयों’ (Industrial Units) पर भारी दबाव पड़ा है। .... Read More
प्राथमिक शिक्षा: अधूरे लक्ष्य तथा नई शिक्षा नीति से उम्मीदें

पिछले दशकों में भारत द्वारा प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र मेंविभिन्न प्रयासों के बावजूद अभीष्ट लक्ष्यों (Desired Goals) को प्राप्त नहीं किया जा सका है। इसके कारणों का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है।यह भी विचारणीय है कि क्या केंद्र सरकार द्वारा आरम्भ की गई नई शिक्षा नीति (NEP 2020) इन लक्ष्यों को .... Read More
राष्ट्रपति और राज्यपाल की क्षमादान शक्तियां

सतीश कुमार कर्ण राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति निरपेक्ष नहीं होनी चाहिए तथा न्यायपालिका को भी न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग करने में अपनी सीमाओं का अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। क्षमादान की शक्ति सीमित न्यायिक समीक्षा के अधीन होनी चाहिए, क्योंकि न्यायिक समीक्षा हमारे संविधान का एक आधारभूत ढांचा है। हाल .... Read More
भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली: सुधार की दिशा

आपराधिक न्याय प्रशासन का मुख्य उद्देश्य कानून के शासन की रक्षा और बचाव करना है। त्वरित, लागत प्रभावी एवं समयबद्ध न्याय प्रत्येक नागरिक का हक़ है परन्तु वर्तमान आपराधिक न्याय प्रणाली लोगों को त्वरित न्याय प्रदान करने में तथा अपराधियों के लिए दंड सुनिश्चित करने में असफल रही है। इसलिए .... Read More
महामारी के दौर में मानवीय मूल्य तथा नैतिक दुविधाएं

कोविड-19 महामारी जिसने पूरे विश्व को त्रस्त किया हुआ है, ने मनुष्यता (Humanity) के समक्ष मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता (Relevence of Human Values) तथा नैतिक दुविधाओं (Ethical Dilemma) के संबंध में बहसों को पुनर्जीवित कर दिया है। महामारी के दौरान गंभीर रूप से बीमार मरीजों के संदर्भ में लिए जाने वाले .... Read More
भारत में शहरी आर्द्र-भूमियों की स्थिति : विनाश के कारण तथा उपाय

इंद्रजीत भार्गव शहरीकरण की अनियमित आवश्यकताओं ने शहरी आर्द्रभूमियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है तथा वर्तमान समय में देश की अनेक शहरी आर्द्रभूमियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई हैं। ‘केंद्रीय आर्द्रभूमि विनियामक प्राधिकरण’ जैसे प्रमुख नियामक निकायों की भूमिका में वृद्धि करने तथा उचित कानूनों के निर्माण .... Read More
जलवायु परिवर्तन अनुकूलन की विधियां तथा भारत के प्रयास

चंद्रकांत सिंह जलवायु परिवर्तन आज विश्व के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। यह एक ऐसी वैश्विक समस्या (Global Problem) है, जो आने वाले कई दशकों तथा सदियों तक पूरे विश्व को प्रभावित करती रहेगी। कार्बन डाईऑक्साइड, जो कि एक ग्रीन हाउस गैस है, सैकड़ों वर्षों तक वातावरण में .... Read More
भूमि क्षरण तटस्थता एवं भारत कारण, प्रभाव एवं रणनीति

डॉ- अमरजीत भार्गवभारत में भूमि क्षरण की समस्या के लिए प्राकृतिक तथा मानव निर्मित दोनों प्रकार के कारक उत्तरदायी हैं। पर्यावरण संरक्षण पर आधारित दृष्टिकोण को अपनाकर भूमि क्षरण की समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति को तैयार किया जाना अत्यंत ही आवश्यक है। भारत एक वृहद भौगोलिक आकार .... Read More
भारत की जनजातियां : उनका विकास एवं संस्कृति

भारत में जनजातीय आबादी संख्यात्मक रूप से एक अल्पसंख्यक समूह होने के बावजूद विशाल विविधता का प्रतिनिधित्व करती है। जनजातीय लोगों की अपनी विशिष्ट संस्कृति और इतिहास है, वे भारतीय समाज के अन्य वंचित वर्गों के साथ अपर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक वंचना और सांस्कृतिक भेदभाव जैसी समस्याओं का सामना कर .... Read More
भारत में ईंधन कीमतों में अत्यधिक वृद्धि : कारण, विकल्प और चुनौतियां

दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा ही एकमात्र समाधान है। तेल आधारित आय पर हमारी निर्भरता को कम करने का एकमात्र विकल्प हमारे देश की ऊर्जा प्रोफ़ाइल को महत्वपूर्ण रूप से बदलना, हमारी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और हमारे तेल आयात को कम करना है। अक्षय ऊर्जा स्रोतों की स्वीकृति बढ़ाने के .... Read More
भारत में असंगठित क्षेत्र के कामगारों की सामाजिक सुरक्षा

डॉ. अमरजीत भार्गव असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों द्वारा किए जाने वाले कार्यों को सम्मान देने के साथ ही उन्हें उपयुक्त जीवन दशाएं उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। संवैधानिक प्रावधानों तथा अनेक योजनाओं एवं नीतियों को लागू करने के पश्चात भी आज, 21वीं सदी के दूसरे दशक के अंत तक भी असंगठित .... Read More
जनसंख्या नियंत्रण नीति व्यावहारिकता एवं समस्याएं

इंद्रजीत भार्गव भारत एक तरफ तो जनसंख्या वृद्धि की समस्या से जूझ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ यह युवा आबादी की एक बड़ी संख्या धारित करने के साथ जनसांख्यिकीय लाभांश की स्थिति में है। कठोर जनसंख्या नीति से देश की जनसंख्या वृद्धि की समस्या का समाधान हो सकता है किंतु .... Read More
अमेरिकी सैनिकों की वापसी : अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय रणनीति

सतीश कुमार कर्ण 2001 में अमेरिका पर 9/11 के आतंकवादी हमलों ने अफगानिस्तान को अमेरिकी विदेश नीति की चिंता का विषय बना दिया। अमेरिका के नेतृत्व में अल-कायदा और अफगान तालिबान शासन के खिलाफ एक पश्चिमी सैन्य अभियान शुरू किया गया, जबकि पूर्व में अमेरिका ने ही इन्हें पनाह और समर्थन .... Read More
नेपाल में राजनीतिक एवं संवैधानिक संकट

वर्तमान राजनीतिक संकट से निकलने के लिए नई राजनीतिक व्यवस्था समय की मांग है। यह व्यवस्था चार मुख्यधारा की पार्टियों के बीच हो सकती है, अर्थात् कम्युनिस्ट पार्टी के दो गुट, नेपाली कांग्रेस और जनता समाजवादी पार्टी। विद्यमान परिस्थिति इन राजनीतिक दलों को एक साथ आने और अधिक संघीय लोकतांत्रिक .... Read More
भारत में जलवायु परिवर्तन सुभेद्यता

जलवायु परिवर्तन लगातार जारी है और यह प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र एवं मानवीय समाज को प्रभावित कर रहा है। जलवायु परिवर्तन और जलवायु परिवर्तनशीलता जैव-भौतिक प्रणालियों (पहाड़ों, नदियों, जंगलों, आर्द्रभूमियों, आदि) तथा सामाजिक-आर्थिक प्रणालियों (पहाड़ी समुदायों, तटीय समुदायों, कृषि, पशुपालन, आदि) दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। हालांकि तापमान, वर्षा, .... Read More
डीप ओशन मिशन : भारत की ब्लू इकोनॉमी को प्रोत्साहन

इंद्रजीत भार्गव गहरे समुद्री संसाधन आर्थिक विकास के लिए भूमि तथा अंतरिक्ष संसाधनों के समान ही महत्वपूर्ण हैं। भारत की ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं व्याप्त हैं। भारत के पास उपलब्ध संभावनाओं के बावजूद देश को इस दिशा में प्रगति के लिए अभी काफी कुछ करने की आवश्यकता है। .... Read More
G7 सम्मेलन एवं भारत: पश्चिम के साथ संबंधों के विस्तार का अवसर

सतीश कुमार कर्ण 7 देशों का समूह जिसे 'G7' के नाम से जाना जाता है, सात औद्योगीकृत लोकतंत्रें का एक अनौपचारिक समूह है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान शामिल हैं। समूह के राष्ट्र प्रमुख, वैश्विक आर्थिक शासन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा नीति, स्वास्थ्य, मानवाधिकार और जलवायु परिवर्तन जैसे .... Read More
इंटीग्रेटेड थियेटर कमांड संभावनाएं एवं चुनौतियां

डॉ- अमरजीत भार्गव व्यापक क्षेत्रफल तथा विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण भारत की सुरक्षा प्रणाली ने अपनी अलग पहचान बनाई है। भारत की रक्षा प्रणाली का विकास समय-समय पर पड़ोसी देशों के साथ किए गए युद्ध तथा उत्पन्न अनेक चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में एक लंबी प्रक्रिया के परिणामस्वरुप हुआ है। रक्षा .... Read More
शून्य उत्सर्जन की ओर प्रतिस्पर्धी कदम एवं भारत

चंद्रकान्त सिंह जलवायु परिवर्तन के सर्वाधिक नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए वैश्विक स्तर पर होने वाले हरित गैस (GHG) उत्सर्जन को 2030 तक आधा करना होगा। इसी के साथ ही हमें, मध्य-शताब्दी के आस-पास शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करना होगा। इस अत्यावश्यकता को स्वीकार करते हुए बड़ी संख्या .... Read More
kshitij Techno Management Fest