मिशन कर्मयोगी : प्रभावी जन-केंद्रित सिविल सेवा के निर्माण हेतु क्षमता विकास आवश्यक

नौकरशाही (Bureaucracy) सरकार की एक स्थायी शाखा है, जो प्रशासन की रीढ़ है। इसलिए भारत में सिविल सेवकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। बदलते भारत के लिए सिविल सेवकों के दृष्टिकोण में बदलाव की भी आवश्यकता है, जो सत्यनिष्ठा (Integrity), वस्तुनिष्ठता (Objectivity), नेतृत्व क्षमता (Leadership) के साथ प्रौद्योगिकी .... Read More
भारत में बेरोजगारी समावेशी विकास में बाधक

बेरोजगारी, भारत ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व के समक्ष एक गंभीर मुद्दा है। युवाओं में कौशल की कमी, वोट बैंक की राजनीति, बढ़ती आबादी और नौकरियों की अत्यधिक मांग के कारण भारत में बेरोजगारी की समस्या अधिक गंभीर है। सरकार ने बेरोजगारी की समस्या को कम करने के लिए अपने .... Read More
भारत की प्राकृतिक संसाधन क्षमता : आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की कुंजी

संसाधनों को उनकी उत्पत्ति के आधार पर जैविक या अजैविक के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। भारतीय भू-भाग में दोनों ही प्रकार के संसाधन विद्यमान हैं तथा भारत की अर्थव्यवस्था इन संसाधनों के उपभोग या निर्यात पर अत्यधिक निर्भर है। प्राकृतिक संसाधनों एवं आर्थिक विकास के बीच सकारात्मक संबंध .... Read More
G20 तथा SCO की अध्यक्षता : वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों के समाधान में भारत की भूमिका के सुदृढ़ीकरण का अवसर

G20 तथा SCO जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक संगठनों की अध्यक्षता करना न केवल भारत बल्कि अन्य विकासशील देशों के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इन संगठनों का नेतृत्व करते हुए भारत विकासशील देशों के लिए विशेष महत्व रखने वाले सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों की प्राथमिकताओं का निर्धारण कर सकता है। इतना .... Read More
स्वयं सहायता समूह सामाजिक-आर्थिक विकास एवं वित्तीय समावेशन में इनकी भूमिका

डॉ. अमरजीत भार्गव स्वयं सहायता समूहों द्वारा वित्तीय साक्षरता, बैंक खातों के संचालन, बचत, क्रेडिट, बीमा तथा पेंशन के साथ-साथ गरीबों को कम लागत वाली भरोसेमंद वित्तीय सेवाएं प्रदान की जाती हैं। वित्तीय समावेशन तथा समाज के वंचित वर्गों के विकास में भागीदारी को देखते हुए यह आवश्यक है कि स्वयं .... Read More
भारत की जैव अर्थव्यवस्था सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अहम

संपादकीय डेस्कसतत विकास, जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान है, जिसे अपनाया जाना एक विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन गई है। जैव अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है| जैव अर्थव्यवस्था, पर्यावरण अनुकूल विकास के साथ ही सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने में .... Read More
भारत में सहकारिता आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण

नवीन चंदन महात्मा गांधी ने देश को आत्मनिर्भर बनाने में सहकारिता को सबसे उपयुक्त मॉडल माना है, जो परस्पर सहयोग पर आधारित होता है न कि प्रतिस्पर्धा पर। ऐसे में सहकारिता को बढ़ावा देने का प्रयास भारत के सामाजिक-आर्थिक एवं राजनीतिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकता .... Read More
जलवायु प्रत्यास्थ कृषि खाद्य असुरक्षा से निपटने के लिए आवश्यक

वैश्विक स्तर पर जलवायु एवं मौसम परिवर्तनशील हो रहा है, कभी अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि; कभी अत्यधिक ठंड तो कभी भीषण गर्मी। यह जलवायवीय अनिश्चितता संपूर्ण मानव समुदाय के समझ विभिन्न चुनौतियां उत्पन्न कर रहे है| ऐसे में सर्वाधिक विकराल समस्या जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली खाद्य असुरक्षा की .... Read More
सुभेद्य वर्गों की औपचारिक वित्त तक पहुंच : आर्थिक सशक्तीकरण हेतु वित्तीय समावेशन आवश्यक

वित्तीय समावेशन से जहां एक ओर समाज के सुभेद्य वर्ग बैंकिंग, बीमा एवं पेंशन जैसी सेवाओं के माध्यम से अपनी भविष्य की आवश्यकताओं हेतु बचत करने को प्रेरित होते हैं; तो वहीं दूसरी तरफ, इससे देश में पूंजी निर्माण की दर में वृद्धि होती है। वित्तीय समावेशन के व्यापक परिणामों .... Read More
भारत में मानसिक स्वास्थ्य : वर्तमान परिप्रेक्ष्य में एक प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, निम्न एवं मधयम आय वाले देश कोविड-19 महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए तथा इसने वैश्विक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य विकारों में तेजी से वृद्धि की। इस रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य आबादी की तुलना में गंभीर मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति .... Read More
हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी : भारत के हित, जुड़ाव एवं निहितार्थ

भारत हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में समान हितों वाले देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को बढ़ावा दे रहा है तथा चीन के उभार से उत्पन्न चुनौतियों के समाधान का प्रयास भी कर रहा है। चीन अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी करते हुए, दक्षिण चीन सागर के अधिाकांश हिस्से पर अपना दावा करता है .... Read More
तटीय पारिस्थितिक तंत्र का संरक्षण : अनिवार्यताएं एवं निहितार्थ

संपूर्ण मानव इतिहास में तटीय क्षेत्र अपने विविध संसाधनों एवं पारिस्थितिक सेवाओं के कारण मानवीय गतिविधियों के केंद्र बिंदु रहे हैं। 7516.6 किमी. लंबी भारतीय तट रेखा 9 राज्यों एवं 4 केंद्रशासित प्रदेशों तक विस्तृत है। ऐसे में इसके संरक्षण को लेकर उठाए गए कदमों का अवलोकन करते हुए कैग .... Read More
भारत में बाढ़ आपदा प्रबंधन : एकीकृत, बहु-आयामी एवं समावेशी रणनीति की आवश्यकता

भारत में बाढ़ प्रति वर्ष आने वाली घटना है, जिसके कारण मानवीय तथा पर्यावरणीय आयाम व्यापक रूप से प्रभावित होते हैं। हालांकि समय-बद्ध उचित बाढ़ प्रबंधान रणनीतियों के माधयम से बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। बाढ़ प्रबंधान के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने .... Read More
वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य - विद्यमान चुनौतियां तथा व्यापक संभावनाओं के क्षेत्र

एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए आमतौर पर अपेक्षाकृत ऊंची आर्थिक विकास दर, बेहतर जीवन स्तर तथा उच्च प्रति व्यक्ति आय का होना आवश्यक है। साथ ही समग्र मानव विकास से संबंधित सामाजिक पूंजी मानकों- शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर भी खरे उतरने की जरूरत होती है। इन सभी मानकों पर .... Read More
दिव्यांग व्यक्तियों का सशक्तीकरण : सामाजिक भागीदारी के लिए समावेशी वातावरण का निर्माण आवश्यक

दिव्यांगता सैद्धांतिक रूप से एक व्यापक अवधारणा है, जिसके अंतर्गत शारीरिक एवं मानसिक असमर्थता के साथ-साथ सामाजिक भागीदारी एवं कार्य निष्पादन गतिविधियों की अक्षमता को भी शामिल किया जाता है। वर्तमान समय में देश की एक बड़ी जनसंख्या दिव्यांगता से प्रभावित है। सरकार ने दिव्यांग लोगों के कल्याण हेतु अनेक .... Read More
भारत में जनजातीय समुदाय : प्रतिनिधित्व, भेद्यता एवं समावेशन

भारत, परचेजिंग पावर पैरिटी (Purchasing Power Parity) के आधार पर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का है। किन्तु अभी भी एक तबका है जो हाशिए पर जीवन यापन कर रहा है, जिसे हम आदिवासी, आदिम जाति, वनवासी .... Read More
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की भूमिका : औचित्य, लाभ एवं चुनौतियां

भारत वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष अन्वेषण में अग्रणी राष्ट्र है, लेकिन इसमें निजी क्षेत्र का योगदान सीमित रहा है। इस चुनौती के समाधान तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में वाणिज्यिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जून 2020 में एक नई इकाई IN-SPACE की घोषणा की थी। अंतरिक्ष विभाग, अंतरिक्ष .... Read More
I2U2 समूह तथा भारत : पश्चिम एशिया में आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग की पहल

I2U2 समूह भारत, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका का एक समूह है, जिसका लक्ष्य संयुक्त निवेश के माध्यम से ‘जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा से संबंधित नई पहलों’ पर सहयोग करना है। यह समूह भारत के लिए अपने ऊर्जा और आर्थिक हितों तथा समूह .... Read More
अर्थव्यवस्था का विकार्बनीकरण : महत्व, चुनौतियां एवं उपाय

डिकार्बोनाइजेशन या विकार्बनीकरण एक व्यापक प्रक्रिया है, जिसके तहत जैव-ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना_ स्वच्छ वायु प्रौद्योगिकियों को अपनाना; हाइड्रोजन एवं कार्बन कैप्चर जैसी ऊर्जा दक्षता की नेक्स्ट जनरेशन तकनीकों को लागू करना तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यापक वित्तीय रूपरेखा को निर्मित करने जैसे कदम शामिल हैं। .... Read More
शहरी रोजगार गारंटी योजना : समावेशी एवं धारणीय शहरी विकास हेतु आवश्यक - (डॉ. अमरजीत भार्गव)

शहरी रोजगार गारंटी योजना से शहरी निवासियों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा, जिससे उनकी जीवन की गुणवत्ता में सुधार होने की संभावना है। इतना ही नहीं, इस योजना के माध्यम से शहरी अनौपचारिक क्षेत्र द्वारा सामना की जा रही निम्न मजदूरी स्तर तथा संसाधनों के अनुचित नियोजन की .... Read More
सहभागी शासन : सुशासन का उच्चतर स्तर - (डॉ. विवेक कुमार उपाध्याय)

“केवल सुशासन पर्याप्त नहीं है; इसमें जनभागीदारी और सक्रियता आवश्यक है। इसीलिए जनभागीदारी को विकास प्रक्रिया के केन्द्र में रखा जा रहा है”। (नरेन्द्र मोदी)सहभागी शासन ऐसी प्रणाली है जो नीति निर्माण तथा निगरानी की प्रक्रिया में लोगों को जोड़कर शासन के लोकतांत्रीकरण को प्रोत्साहित करती है। यह लोक-संवाद, वार्ता .... Read More
भारत का इंडो-पैसिफिक विजन तथा आसियान : रणनीतिक संवाद एवं साझेदारी के 30 वर्ष

हिंद-प्रशांत क्षेत्र के भू-राजनीतिक (Geopolitical) एवं भू-रणनीतिक संरेखण (Geostrategic Alignment) में परिवर्तन देखा जा रहा है। इन परिवर्तनों ने एक तरफ नए अवसर पैदा किए हैं तो वहीं दूसरी तरह विभिन्न चुनौतियां भी पैदा की हैं। इस क्षेत्र की आर्थिक प्रगति ने गरीबी कम करने और लाखों लोगों के जीवन .... Read More
विश्व व्यापार संगठन एवं भारत : 12वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन तथा भारत के मुद्दे

डब्ल्यूटीओ के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के दौरान विश्व के विभिन्न व्यापारिक प्रतिनिधियों द्वारा अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने के लिए कई रणनीतिक कदम उठाए गए। सम्मेलन में भारत ने कुछ अन्य विकासशील देशों के साथ कृषि क्षेत्र में, विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में सब्सिडी और व्यापार .... Read More
ऊर्जा सुरक्षा : आत्मनिर्भर भारत की महत्वपूर्ण कड़ी

भारत ने अपने नागरिकों को ऊर्जा सेवाएं प्रदान करने में अभूतपूर्व प्रगति की है। पिछले 2 दशकों में लगभग 90 करोड़ लोगों तक विद्युत की पहुंच सुनिश्चित की गई है। वर्तमान में 96.7% भारतीय परिवार विद्युत ग्रिड से जुड़े हुए हैं। हालांकि भारत में प्रति व्यक्ति विद्युत खपत वैश्विक औसत .... Read More
भारत की गिग इकोनॉमी : संलग्न कार्यबल की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा हेतु विनियमन आवश्यक

नीति आयोग द्वारा हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट गिग अर्थव्यवस्था में लागू किए जाने वाले सुधारों के क्रम में एक विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करती है। अमेरिका के बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (Boston Consulting Group) द्वारा जारी की गई एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार भारत के गिग कार्यबल के तहत सॉफ्टवेयर, साझा .... Read More
डिजिटल प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण : भारत के प्रयास एवं चुनौतियां

कंप्यूटर तथा इंटरनेट सुविधाओं के क्षेत्र में नवीन खोजों के आगमन के पश्चात वर्तमान समय में डिजिटल प्रौद्योगिकी के बिना अर्थव्यवस्था के किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करना संभव नहीं है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन तथा मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकी के महत्व को देखते हुए .... Read More
पीएम गति शक्ति योजना : अवसंरचनात्मक विकास में भूमिका एवं महत्व - (डॉ. अमरजीत भार्गव)

निर्माण गतिविधियों में संलग्न विभिन्न एजेंसियों के मध्य सहयोग एवं समन्वय की व्यापक कमी देखने को मिलती है। ऐसी स्थिति में, बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को समयबद्ध रूप में पूरा करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, इससे अंतिम रूप से परियोजनाओं की लागत में वृद्धि होती है। समस्याओं को पहचान .... Read More
भावनात्मक बुद्धिमत्ता : नैतिक और समावेशी शासन का प्रेरक

भावनात्मक बुद्धिमत्ता, भावनाओं के अनुशासन की ऐसी योग्यता है, जिसके माध्यम से व्यक्ति स्वयं की तथा सामने वालों की भावनाओं को समझकर उनका प्रबंधन करता है। नैतिक शासन एवं समावेशी शासन दोनों ही विधि के शासन पर आधारित सुशासन से आगे बढ़कर मूल्यों पर आधारित व्यवस्था की स्थापना से संबंधित .... Read More
भारत-नेपाल संबंध : मौजूदा चुनौतियां एवं सहयोग के क्षेत्र

भारत और नेपाल के बीच संबंध व्यापक और बहुआयामी हैं तथा दोनों देशों ने ऐतिहासिक संबंधों को औपचारिक स्वर प्रदान करने के लिए 17 जून, 1947 को राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। नेपाल, सीमा पार संपर्क, बुनियादी ढांचा विकास, वित्तीय कनेक्टिविटी जैसी पहलों के माध्यम से भारत की आर्थिक प्रगति .... Read More
असंगठित क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण : सामाजिक सुरक्षा हेतु संरचनात्मक हस्तक्षेप आवश्यक

असंगठित क्षेत्र में सुधार समय की मांग है। इस क्षेत्र में बेरोजगारी के बढ़ते स्तर के साथ, श्रमिकों को पुनः नियोजित करना आवश्यक है। सरकार को इस क्षेत्र को संगठित रूप देने, सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा रोजगार के उचित एवं पर्याप्त अवसर प्रदान करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने .... Read More
क्लाइमेट फाइनेंस : जलवायु शमन एवं अनुकूलन में इसकी भूमिका

जलवायु वित्तीयन यानी क्लाइमेट फाइनेंस पिछले एक से अधिक दशक से विकसित एवं विकासशील देशों के मध्य मतभेद का विषय रहा है। वर्तमान में विकासशील देशों में जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कार्यों को लागू करने हेतु निवेश के लिए धन की कमी है। ऐसे में क्लाइमेट फाइनेंस पवन या .... Read More
वन हेल्थ मॉडल : उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने का संधारणीय दृष्टिकोण

मानव, वन्यजीव तथा पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य को स्थायी रूप से संतुलित और अनुकूलित करने हेतु वन हेल्थ दृष्टिकोण (One Health Approach) महत्वपूर्ण है| वन हेल्थ दृष्टिकोण स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर कार्य करने वाला एक सहयोगी, बहु-क्षेत्रीय और बहुविषयक दृष्टिकोण है, जिसका लक्ष्य लोगों, जंतुओं, वनस्पतियों और .... Read More
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की वहनीयता : नवीन चुनौतियां एवं समाधान

21वीं सदी में लगातार वैश्वीकरण की प्रक्रिया में तेजी आई है। इंटरनेट तथा नवीन प्रौद्योगिकियों के माध्यम से विश्व के लगभग सभी देश पहले की तुलना में एक दूसरे पर अधिक निर्भर हैं। ऐसी स्थिति में, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्त्व में वृद्धि हुई है, क्योंकि इनके माध्यम से वस्तुओं .... Read More
Sure Success Civil Services Classes