भारत में विदेशी निवेश प्रवाह को प्रभावित करने वाले आंतरिक एवं बाह्य कारकों का विश्लेषण करते हुए दीर्घकालिक निवेश आकर्षण बढ़ाने के उपाय सुझाइए।
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उत्तर: प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) एवं विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए पूंजी, प्रौद्योगिकी, रोजगार तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। भारत विश्व की तीव्र गति से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, किंतु हाल के वर्षों में वैश्विक अनिश्चितताओं तथा पूंजी पुनर्प्रत्यावर्तन के कारण विदेशी निवेश प्रवाह पर दबाव देखा गया है।
विदेशी निवेश प्रवाह को प्रभावित करने वाले कारक
1. आंतरिक कारक
(i) नीतिगत एवं नियामकीय स्थिरता
- स्थिर कर व्यवस्था, उदारीकृत FDI नीति तथा ‘Ease of Doing Business’ निवेश आकर्षित करते हैं।
- वहीं नीतिगत अनिश्चितता, जटिल नियम तथा अनुपालन लागत निवेशकों का ....
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मुख्य विशेष
- 1 "प्राचीन डीएनए (aDNA) विश्लेषण और पुरालेखशास्त्र (Epigraphy) ने प्राचीन मानव इतिहास और सभ्यताओं के अध्ययन में एक नया आयाम जोड़ दिया है।" उदाहरणों के साथ स्पष्ट कीजिए।
- 2 "भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) का प्रतिस्थापन स्तर से नीचे गिरना एक 'जनसांख्यिकीय संक्रमण' का संकेत है।" इसके सामाजिक-आर्थिक निहितार्थों की चर्चा कीजिए, विशेषकर उत्तर और दक्षिण भारत के बीच बढ़ती क्षेत्रीय असमानता के संदर्भ में।
- 3 बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत के लिए रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।” रूस–चीन समीकरण के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
- 4 विकासशील देशों (जैसे भारत) के लिए अपने महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में 'जलवायु वित्त' और 'प्रौद्योगिकी हस्तांतरण' की क्या भूमिका है? चर्चा करें।
- 5 मॉडल प्रश्न: राष्ट्रीय सुरक्षा
- 6 मॉडल प्रश्न: वैश्विक संबंध
- 7 भूगोल
- 8 समाजशास्त्र
- 9 इतिहास
- 10 दर्शनशास्त्र

