सोशल मीडिया एवं भ्रामक जानकारी

भारत के विविध परिदृश्य में, सोशल मीडिया एक “दोधारी तलवार” की भांति है। जहाँ एक ओर यह सूचनाओं का लोकतंत्रीकरण करता है, वहीं दूसरी ओर भ्रामक जानकारियों (Misinformations) का तीव्र प्रसार अक्सर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और हिंसा के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है।

सोशल मीडिया सांप्रदायिक तनाव को कैसे जन्म दे सकता है?

  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कई विशिष्ट तंत्रों के माध्यम से सांप्रदायिक घर्षण को तीव्र करते हैं:
  • इको चैंबर्स {Echo Chambers}: एल्गोरिदम “यूजर इंगेजमेंट” को प्राथमिकता देते हैं, जिससे उपयोगकर्ता ध्रुवीकृत विचारों के जाल में फंस जाते हैं जो उनके मौजूदा सांप्रदायिक पूर्वाग्रहों को और पुख्ता करते ....

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