Interview - उत्तर लेखन शैली का विकास
उत्तर लेखन शैली का विकास
(AIR)
सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए लेखन का महत्व इतना अधिक व्यापक है कि इसे एक वाक्य में इस रूप में भी कहा जा सकता है कि ‘लेखन ही वह कला है जिसके माध्यम से अभ्यर्थी सिविल सेवा को पास कर सकता है तथा उसमें बेहतर रैंक प्राप्त कर सकता है।’ उत्तर लेखन शैली के विकास के क्रम में सिविल सेवा अभ्यर्थी के समक्ष अनेक प्रश्न सामने आते हैं। इनमें- उत्तर लेखन का अारंभ कब करना चाहिए? उत्तर लेखन के समय किन किन बातों को ध्यान में रखने रखने की आवश्यकता होती है? तथा स्वयं से उत्तरों का मूल्यांकन किस प्रकार किया जाए? आदि।
सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन का अभ्यास कैसे करें?
पाठ्यक्रम तथा पूर्ववर्ती प्रश्नों का विश्लेषणः आरंभ में ही यह बताया गया है कि सिविल सेवा अभ्यर्थी को अपनी तैयारी करने से पूर्व सर्वप्रथम पाठ्यक्रम तथा पूर्ववर्ती प्रश्नों का विश्लेषण करना चाहिए। ऐसा करने से उसे परीक्षा की प्रकृति को समझने में सहायता मिलती है। जब अभ्यर्थी पाठ्यक्रम तथा प्रश्नों की एक अवधारणा तक समझ को विकसित कर लेता है तो उसे अपनी तैयारी के साथ साथ उतर लेखन का आरंभ भी करना चाहिए।
लेखन अभ्यास आरंभ करने का उचित समयः यह प्रत्येक परीक्षार्थी की अलग-अलग क्षमता पर निर्भर करेगा कि उसे उत्तर लेखन तैयारी की किस अवस्था से आरंभ करना चाहिए।
कुछ विशेषज्ञ अथवा चयनित छात्र इस बात की वकालत करते हैं कि तैयारी के प्रथम दिन से ही किसी भी अभ्यर्थी को उत्तर लेखन आरंभ कर देना चाहिए। किंतु यह व्यवहारिक प्रतीत नहीं होता है क्योंकि जब तक अभ्यर्थी को विषयों की समझ तथा पाठ्यक्रम की बेहतर जानकारी नहीं होगी वह उत्तर लेखन शैली को विकसित करने में असमर्थ होगा। इस प्रकार, उत्तर लिखने की प्रक्रिया को आरंभ करने से पूर्व सिविल सेवा परीक्षा की सामान्य समझ होना अभ्यर्थी में अत्यंत आवश्यक है।
उत्तर लेखन में किन बातों का ध्यान दिया जाना चाहिए?
समय प्रबंधनः मुख्य परीक्षा के प्रत्येक प्रश्न पत्र में अभ्यर्थी को 3 घंटे का समय प्रदान किया जाता है। प्रत्येक प्रश्न पत्र में प्रश्नों की संख्या को देखते हुए अभ्यर्थी के पास एक उत्तर को लिखने के लिए लगभग 7 मिनट का समय होता है। ऐसी स्थिति में, मुख्य परीक्षा के दिए हुए प्रश्नों को निश्चित समय में हल करना अभ्यर्थी के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है।
लेखन की गति तीव्र रखनाः मुख्य परीक्षा में बैठने से पूर्व व्यापक लेखन अभ्यास के माध्यम से अभ्यर्थी न केवल उत्तर लेखन की गति में वृद्धि कर सकता है बल्कि लेखन प्रक्रिया में विभिन्न दृष्टिकोणों को शामिल करने में भी सक्षम हो सकता है।
- अभ्यास करते हुए अभ्यर्थी को चाहिए कि वह अपने उत्तर को 5-6 मिनट में समाप्त करने का प्रयास किए करे। ऐसा करके ही अभ्यर्थी परीक्षा में निश्चित समय में सभी प्रश्नों को हल करने में सक्षम हो पाएगा।
रटने की प्रवृत्ति से बचनाः अनेक छात्र अध्ययन की प्रक्रिया में रटने की प्रवृत्ति विकसित कर लेते हैं तथा यह प्रवृत्ति उनके उत्तर लेखन में भी प्रदर्शित होती है। अभ्यर्थियों को इस प्रवृत्ति से बचना चाहिए तथा किसी भी कोचिंग संस्थान अथवा पुस्तक के खंडों को अपने उत्तरों में हूबहू शामिल नहीं करना चाहिए। संघ लोक सेवा आयोग का उद्देश्य परीक्षार्थी की मौलिक लेखन क्षमता का मूल्यांकन करना होता है। अतः रटे-रटाए उत्तरों के लेखन के आधार पर इस परीक्षा में परीक्षार्थी बेहतर अंक प्राप्त नहीं कर पाएगा।
प्रश्नों की प्रकृति के अनुसार उत्तर लिखनाः जैसा हमने देखा है कि परीक्षा में प्रश्नों के प्रकृति अंतर्विषयी तथा बहु-विषयी (Interdisciplinary and Multidisciplinary) होती है। ऐसी स्थिति में संपूर्ण प्रश्न पत्र अथवा परीक्षा में लेखन शैली हेतु किसी भी निश्चित दृष्टिकोण (Approach) को अपनाना घातक सिद्ध हो सकता है।
अभ्यर्थी को चाहिए कि वह किसी प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व उसकी प्रकृति का मूल्यांकन करें तथा प्रत्येक उत्तर हेतु अलग-अलग दृष्टिकोण को अपनाए।
उत्तरों का स्व-मूल्यांकनः लेखन शैली का विकास एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है। आरंभिक स्तर पर अभ्यर्थी द्वारा लिखे गए उत्तर गुणवत्तापूर्ण नहीं होते हैं। ऐसे उतरो में लेखन की निरंतरता तथा उपयुक्त जानकारी का अभाव होता है। यह समस्या और भी बढ़ जाती है जब प्रश्नों की प्रकृति अंतर्विषयी तथा बहु-विषयी होती है। ऐसे किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए अभ्यर्थी को नियमित रूप से पत्र लेखन का अभ्यास करते रहना चाहिए तथा अपने द्वारा लिखे गए उत्तरों का स्वयं मूल्यांकन करना चाहिए।
- अभ्यर्थी प्रथम दिन से ही (जब सेवा उत्तर लेखन आरंभ करता है) लिखे गए उत्तरों का संकलन कर सकता है तथा 2-3 महीने के पश्चात उत्तरों को पुनः पढ़कर उन में पाई जाने वाली कमियों की पहचान कर सकते है। ऐसा करने के पश्चात इन प्रश्नों का दोबारा लेखन भी अभ्यर्थी द्वारा किया जा सकता है।
चित्र, मानचित्र तथा ग्राफ का उपयोगः मुख्य परीक्षा में निश्चित समय सीमा में प्रश्नों को हल करने के लिए उन्हें निर्धारित शब्दावली में पूरा करना अत्यंत आवश्यक होता है। अभ्यर्थी ऐसी स्थिति में प्रश्नों की प्रकृति के अनुसार चित्रों, मानचित्रों तथा ग्राफ का उपयोग कर सकते हैं। इससे किसी भी उत्तर में कम समय में अधिक आयाम सम्मिलित किए जा सकते हैं।
उत्तर लेखन में आवश्यक उपागम का पालनः यदि प्रश्न अंतर्विषयी तथा बहु-विषयी प्रकृति का है तो उसको हल करने के दृष्टिकोण में भी बहु-विषयी उपागम (Multidisciplinary Approach) का पालन किया जाना चाहिए। सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल की मासिक पत्रिका के लगभग प्रत्येक अंक में अलग-अलग विषयों पर विशिष्ट आलेख तथा निबंध प्रकाशित किए जाते हैं। इन आलेखों तथा निबंधों को लिखते समय क्रॉनिकल मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन के चारों प्रश्नपत्रों तथा पूछे जाने वाले निबंधों की प्रकृति का पालन करता है। अभ्यर्थी इनकी सहायता से वर्तमान परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों तथा निबंधों की प्रवृत्ति को समझ सकता है।
क्या सामान्य अध्ययन और वैकल्पिक में उत्तर लेखन के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है?
उत्तर लेखन में दृष्टिकोण संबंधी निम्नलिखित प्रमुख बातों को ध्यान में रखना आवश्यक हैः
- वैकल्पिक विषयों के उत्तर अधिक वर्णनात्मक प्रकृति के होते हैं वहीं दूसरी तरफ सामान्य अध्ययन के चारों प्रश्न पत्रों में वस्तुनिष्ठ तथा समसामयिक घटनाक्रम के आधार पर उत्तरों का लेखन किया जाता है।
- सामान्य अध्ययन के प्रत्येक प्रश्न पत्र में अलग-अलग विषयों से संबंधित प्रश्न होते हैं जिनका मूल्यांकन संबंधित विषय के विशेषज्ञ द्वारा मुख्य परीक्षा के पश्चात किया जाता है। दूसरी तरफ, वैकल्पिक विषय के प्रश्न एक निश्चित विषय से संबंधित होते हैं तथा इन्हें एक ही विषय के विशेषज्ञ द्वारा जांचा जाता है।
- सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्रों में संघ लोक सेवा आयोग की अपेक्षा रहती है कि अभ्यर्थी को संबंधित विषय की सामान्य जानकारी हो। वहीं दूसरी तरफ वैकल्पिक विषय के संदर्भ में अभ्यर्थी से अधिक गंभीर जानकारी की अपेक्षा की जाती है। गंभीरता का यह स्तर अभ्यर्थियों के उत्तर लेखन में भी दिखाई देना चाहिए।
- एक सिविल सेवक से यह अपेक्षा की जाती है कि वो चयन के पश्चात राजनीतिक रूप से तटस्थ होकर सरकार में आने वाली विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के अंतर्गत कार्य करेंगे। मुख्य परीक्षा में उत्तर लेखन की प्रक्रिया में भी अभ्यर्थी को किसी विशेष राजनीतिक पार्टी की तरफदारी करने से बचना चाहिए।
संतुलित दृष्टिकोण को अपनानाः अनेक बार परीक्षार्थी सामान्य अध्ययन के प्रश्नों का उत्तर लिखते समय विषय की कठिन तकनीकी शब्दावली तथा क्लिष्ट भाषा का प्रयोग करने को बेहतर मानते हैं। यह स्थिति बेहतर ज्ञान होने के बावजूद अभ्यर्थी को कम अंक आने का कारण बनती है। सामान्य ज्ञान के प्रश्न पत्रों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह इस रूप में जानकारी प्रस्तुत करें जो विषय की गंभीर जानकारी के बिना भी किसी भी व्यक्ति को आसानी से समझ में आ सके।
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