Interview - हिंदी माधयम के प्रतियोगियों के समक्ष चुनौतियां
हिंदी माधयम के प्रतियोगियों के समक्ष चुनौतियां
(AIR)
पिछले कुछ वर्षों में हिंदी माध्यम से सफल होने वाले छात्रों की कम संख्या यह प्रदर्शित कर रही है कि ऐसी अनेक चुनौतियां हैं जो हिंदी माध्यम के छात्रों के अंतिम रूप से सफल होने में बाधक हैं। वर्ष 2014 में हिंदी माध्यम के किसी छात्र द्वारा प्राप्त की गई सर्वाधिक बेहतर रैंक 13वीं थी। इसी प्रकार वर्ष 2021 के रिजल्ट में हिंदी माध्यम के छात्र द्वारा 18वीं रैंक प्राप्त की गई है। इन अपवादों को को छोड़ दिया जाए तो वर्ष 2011 के पश्चात प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी माध्यम के छात्रों का परिणाम अनुकूल नहीं रहा है।
हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
स्कूल तथा कॉलेज के स्तर की पढ़ाई का प्रभावः हिंदी माध्यम के अधिकांश छात्र सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं अथवा इनकी स्कूल एवं कॉलेज स्तर की शिक्षा सामान्य शैक्षणिक संस्थानों में होती है। ऐसी स्थिति में इन छात्रों के लिए सिविल सेवा परीक्षा के परिवर्तित पाठ्यक्रम के अनुसार स्वयं की तैयारी में परिवर्तन करना संभव नहीं होता है।
मानक अध्ययन सामग्री की उपलब्धता में कमीः हिंदी माध्यम के छात्रों के समक्ष एक प्रमुख चुनौती यह है कि उनके पास अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के समान मानक अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं है। हिंदी मीडियम में उपलब्ध अनेक सामग्री अंग्रेजी मीडियम की सामग्री का अनुवादित रूप ही होता है। ऐसी स्थिति में छात्रों के पास अध्यन सामग्री की सीमितता देखने को मिलती है। भारतीय सामाजिक व्यवस्था, सुरक्षा, सामाजिक न्याय, तथा पर्यावरण के संदर्भ में ऐसी पुस्तकों का अभाव देखने को मिलता है जो अंग्रेजी माध्यम के पुस्तकों के स्तर की हो।
- तैयारी के परंपरागत तरीकेः हिंदी माध्यम के अधिकांश छात्र गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं तथा वे अपनी तैयारी उचित मार्गदर्शन के अभाव में परंपरागत रूप से करते हैं। साथ ही,तैयारी के समय इन छात्रों को उत्तर लेखन शैली की उचित कला के विकास हेतु पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पाता है। ऐसे में, अंग्रेजी माध्यम से के छात्रों की तुलना में यह छात्र पिछड़ जाते हैं।
- भाषागत जटिलताएं: सिविल सेवा की प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा के प्रश्नों का निर्माण मौलिक रूप से अंग्रेजी में किया जाता है तथा हिंदी एवं अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में उन्हें अनुवादित किया जाता है। ऐसी स्थिति में छात्रों के समक्ष जटिल शब्दावली प्रस्तुत की जाती है जिसे समझने में हिंदी माध्यम के छात्रों को कठिनाई होती है।
- आत्मविश्वास में कमीः हिंदी माध्यम के स्कूलों तथा कॉलेजों में नियमित रूप से लेखन एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन नहीं किया जाता है। इन छात्रों को अंग्रेजी माध्यम से छात्रों की तुलना में बाहरी दुनिया का ज्ञान भी कम होता है। इन परिस्थितियों में हिंदी माध्यम के छात्र आत्मविश्वास की कमी का सामना करते हैं जो उनकी संपूर्ण तैयारी को प्रभावित करती है।
क्या हिंदी माध्यम से सफ़ल होना वास्तव में मुश्किल है?
हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के चयन की कम दर के कारण पिछले कुछ वर्षों में इस माध्यम से तैयारी करने वाले छात्रों में सफलता के प्रति चिंताजनक निराशा व्याप्त हो गई है। परंतु, हिंदी माध्यम से प्रत्येक वर्ष चयनित छात्रों तथा कुछ बेहतर रैंक लाने वाले छात्रों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि समस्या भाषागत चुनाव की नहीं है बल्कि रणनीति में बदलाव की अधिक है।
- विशेषज्ञों का सानिध्यः हिंदी माध्यम से सफलता के ग्राफ को ऊंचा उठाने के लिए यह आवश्यक है कि अभिभावकों को बच्चों को तैयारी की आरंभिक प्रक्रिया से ही ऐसे विशेषज्ञों के सानिध्य में रखना चाहिए जो उन्हें हिंदी माध्यम के छात्रों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं से लगातार अवगत कराते रहें तथा उनमें सुधार करने की सहायता करे।
- मानक पुस्तकों का अध्ययनः पिछले कुछ वर्षों में कोचिंग संस्थानों तथा विभिन्न लेखकों के प्रयासों के कारण हिंदी माध्यम में भी मानक अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो रही है। उदाहरण के लिए, क्रॉनिकल पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित लैक्सिकन की ‘‘नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा व अभिरुचि’’ की पुस्तक सामान्य अध्ययन के चतुर्थ प्रश्न पत्र के सभी खंडों को विस्तृत रूप से कवर करती है। इसी प्रकार बाजार में अन्य मानक पुस्तकें भी उपलब्ध हैं जिनकी सहायता हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों द्वारा ली जा सकती है।
- उत्तर लेखन पर अधिक ध्यान देनाः हिंदी माध्यम के छात्रों में पढ़ने की अभी अधिक प्रवृत्ति देखने को मिलती है जबकि उत्तर लेखन अभ्यास का उनमें अभाव पाया जाता है। इन छात्रों द्वारा लिखे जाने वाले उत्तरों में बिंदुवार स्पष्टीकरण तथा ग्राहक एवं मानचित्र के उपयोग की कमी दिखाई देती है।
- विशेषज्ञों के सानिध्य में हिंदी माध्यम के छात्रों को नियमित रूप से उत्तर लेखन का अभ्यास करना चाहिए।
- कठिन शब्दावली से निपटनाः यह चुनौती मुख्य रूप से प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन एवं CSAT के प्रश्न पत्र में देखने को मिलती है। अंग्रेजी माध्यम से अनुवादित इन प्रश्नपत्रों की शब्दावली अत्यंत कठिन होती है। हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को परीक्षा की तैयारी के आरंभ से ही संघ लोक सेवा आयोग द्वारा पूछे जाने वाले पूर्ववर्ती प्रश्नपत्रों के माध्यम से ही अपना अभ्यास करना चाहिए। ऐसा करके अभ्यर्थी भाषागत चुनौतियां से निपट सकते हैं।
क्वालीफ़ाइंग अंग्रेजी प्रश्न-पत्र की तैयारी कैसे करें?
प्रश्नपत्र का स्वरूपः क्वालीफाइंग अंग्रेजी का प्रश्नपत्र 300 अंको का होता है तथा इसमें सामान्य रूप से 5 प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें निबंध, गद्यांश, सारांश (Precis) लेखन तथा व्याकरण से संबंधित प्रश्न होते हैं। इन प्रश्नों का स्तर दसवीं कक्षा के अंग्रेजी के स्तर का होता है।
तैयारी की रणनीतिः इस प्रश्न पत्र के अंक अंतिम मेरिट लिस्ट में नहीं शामिल किए जाते हैं किंतु इसमें न्यूनतम अर्हता अंक (Qualifying Marks) प्राप्त करना अनिवार्य होता है। इस परीक्षा को पास न करने वाले छात्र मुख्य परीक्षा से बाहर कर दिया जाते हैं। इसके लिए अभ्यर्थी निम्नलिखित रणनीति को अपना सकता हैः
- पूर्ववर्ती प्रश्न पत्रों का अवलोकनः प्रश्नों की प्रकृति को जानने का सबसे बेहतर उपाय यह है कि अभ्यर्थी को पिछले 10 वर्षों के प्रश्न पत्रों का विस्तृत अध्ययन करना चाहिए। ऐसा करके अभ्यर्थी में प्रश्न पत्र की व्यापक समझ का विकास होने में सहायता मिलेगी।
- निबंध तथा सारांश का नियमित लेखन अभ्यासः वैसे तो मुख्य परीक्षा में एक प्रश्न पत्र निबंध का आता है। अभ्यर्थी को इसका नियमित अभ्यास करना होता है। किंतु, भाषा का समस्या के कारण हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों को अंग्रेजी में भी निबंध लेखन तथा सारांश लेखन का नियमित रूप से अभ्यास करना चाहिए।
- अंग्रेजी वाक्यों का निर्माणः छात्रों को स्कूली स्तर से ही सामान्य अंग्रेजी वाक्यों के निर्माण की प्रैक्टिस कराई जाती है। किंतु, यदि अभ्यर्थी ऐसा करने में असमर्थ है तो वह लगातार 2-3 महीने तक अंग्रेजी में सामान्य वाक्य रचना की प्रैक्टिस कर अंग्रेजी में के अपने स्तर को बेहतर कर सकता है।
- अध्ययन सामग्रीः अभ्यर्थी पूर्ववर्ती प्रश्नपत्रों को हल करके यह जान सकते हैं कि अंग्रेजी के प्रश्न पत्र में उनकी स्थिति कैसी है। आवश्यकता पड़ने पर अभ्यर्थी दसवीं कक्षा के स्तर की कोई भी व्याकरण (Grammar) की पुस्तक का अध्ययन कर सकता है। इस दौरान ‘द हिंदू’ तथा ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में नियमित रूप से प्रकाशित होने वाले एडिटोरियल को पढ़कर भी अभ्यर्थी अपनी अंग्रेजी के स्तर को ऊंचा उठा सकता है।
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