Interview - वैकल्पिक विषय का चुनाव करना

वैकल्पिक विषय का चुनाव करना

(AIR)

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में वैकल्पिक विषय का चुनाव एक व्यापक तथा महत्वपूर्ण निर्णय माना जाता है। सही अथवा गलत वैकल्पिक विषय के चयन के आधार पर ही अभ्यर्थी की सफलता एवं असफलता निर्धारित हो जाती है। अतः विशेषज्ञों की राय यह है कि वैकल्पिक विषय का चुनाव भावुकता के आधार पर न होकर व्यापक रणनीति के तहत तथा अनुभवी व्यक्तियों के साथ विचार-विमर्श करके किया जाना चाहिए।

उपयुक्त वैकल्पिक विषय का चुनाव किस प्रकार किया जाए?

वैकल्पिक विषय के चयन में निम्नलिखित आधारों का सहारा लिया जा सकता हैः

  • अभ्यर्थी की पृष्ठभूमि तथा रूचिः अनेक छात्र ऐसे विषय का वैकल्पिक विषय के रूप में चयन करते हैं जिसका उन्होंने अपने स्नातक व परास्नातक स्तर पर अध्ययन किया हुआ होता है। इसी प्रकार, अनेक लोगों की यह मान्यता रहती है कि अभ्यर्थियों को अपने रुचि के आधार पर किसी भी वैकल्पिक विषय का चुनाव कर लेना चाहिए। यह तर्क एक स्तर तक सही है क्योंकि अभ्यर्थी उन्हीं विषयों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते है जिसमें उसकी पढ़ने में रुचि हो।
  • बहु-उपयोगिताः मानविकी के विषयों विशेषकर इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान तथा अर्थशास्त्र जैसे कुछ विषय ऐसे हैं जिन्हें वैकल्पिक विषय के रूप में चयनित कर के अभ्यर्थी सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्रों में भी लाभान्वित हो सकते है। इस प्रकार यदि कोई विषय बहु-उपयोगी है तथा अभ्यर्थी की उसे पढ़ने में रुचि भी है तो ऐसे विषय को वैकल्पिक विषय के रूप में चयनित किया जा सकता है।
  • पाठ्यक्रम का आकार तथा विषय की स्थिरताः इतिहास तथा भूगोल जैसे कुछ विषय ऐसे हैं जिनका पाठ्यक्रम अत्यंत व्यापक है किंतु इन विषयों में निरंतर रूप से समसामयिक घटनाक्रम के संदर्भ में परिवर्तन नहीं होता है। अतः इस प्रकार के विषयों का चयन करके अभ्यर्थी एक निश्चित रणनीति के आधार पर कुछ समय में अपनी बेहतर पकड़ बना सकते है। इस प्रकार के विषयों में पाठ्यक्रम की व्यापकता एक प्रमुख चुनौती होती है। दूसरी तरफ हिंदी साहित्य अथवा अन्य भाषा के साहित्य जैसे कुछ ऐसे विषय हैं जिनका पाठ्यक्रम अन्य विषयों की तुलना में छोटा है तथा उनकी तैयारी कम समय में पूरी की जा सकती है। कुछ अन्य प्रकार के ऐसे विषय भी हैं (उदाहरण के लिए राजनीति विज्ञान तथा अर्थशास्त्र) जिन से संबंधित समसामयिक घटनाएं लगातार चर्चा में रहती हैं। ऐसे विषयों में बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए अभ्यर्थी को अपने नोट्स समसामयिक घटनाक्रमों के साथ अद्यतन करना अत्यंत आवश्यक होता है।
  • अन्य आधारः किंतु, परीक्षा की प्रकृति को देखते हुए विषयों के चुनाव में अभ्यर्थी की रूचि ही सर्वाधिक कारण नहीं होना चाहिए। लोक सेवा आयोग में मूल्यांकन की प्रक्रिया के दौरान सभी विषयों को एक पैमाने पर नहीं रखा जाता है क्योंकि ऐसा करने के लिए आयोग को स्केलिंग पद्धति को अपनाना होगा। किंतु, आयोग द्वारा साधारण मॉडरेशन के आधार पर यह देखा जाता है कि विभिन्न विषयों में अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त किए गए प्राप्त अंकों में अधिक अंतर तो नहीं है। अतः, वैकल्पिक विषयों के चुनाव में अभ्यर्थी की रुचि के साथ-साथ पिछले वर्षों में विषयों के द्वारा चयन की संख्या तथा विभिन्न विषयों में अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त अंकों को भी वैकल्पिक विषय के चयन के दौरान विश्लेषण का आधार बनाया जाना चाहिए।

क्या वैकल्पिक विषयों की स्कोरिंग में कोई पूर्वाग्रह है?

संघ लोक सेवा आयोग किसी भी विषय को अधिक महत्व अथवा दूसरे विषय को कम महत्व प्रदान नहीं करता है। अतः ऐसा कहना कि विषयों की स्कोरिंग में किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह व्याप्त हैं, गलत है। अभ्यर्थियों को उपर्युक्त आधारों पर अपने वैकल्पिक विषयों का चुनाव करते समय यह भी देखना चाहिए कि संबंधित विषयों पर गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध है अथवा नहीं।

  • अनेक बार हिंदी माध्यम के छात्रों के साथ यह समस्या देखने को मिलती है। क्योंकि एंथ्रोपोलॉजी, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन तथा विज्ञान विषयों की अध्ययन सामग्री हिंदी माध्यम की तुलना में अंग्रेजी माध्यम में अधिक आसानी से और अधिक गुणवत्ता पूर्ण रूप में उपलब्ध है।
  • इस प्रकार, अभ्यर्थियों को वैकल्पिक विषयों के चयन में अनेक पहलुओं का ध्यान रखना होता है। ऐसा करके वे किसी भी पूर्वाग्रह से बच सकते हैं। विषय के चयन में कठिनाई आने पर त्वरित निर्णय नहीं लिए जाने चाहिए।
  • अभ्यर्थी आरंभिक एक-दो महीने तक विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रम का विश्लेषण करने, पूर्वर्ती प्रश्नपत्रों का अध्ययन करने तथा विषय विशेषज्ञों की सलाह जानने प्रयास करना चाहिए और ऐसा करके उसे वैकल्पिक विषय के चयन में सहायता मिलेगी।

वैकल्पिक विषय का सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्रों के साथ ओवरलैप

उपर्युक्त खंड में हमने यह विश्लेषण किया है कि कुछ वैकल्पिक विषय ऐसे होते हैं जिनका लाभ सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्रों में अभ्यर्थी को प्राप्त होता है। अतः यदि अभ्यर्थी ऐसे किसी भी विषय का वैकल्पिक विषय के रूप में चयन करता है जो सामान्य अध्ययन के किसी भी प्रश्न पत्र से संबंधित है तो उसे अपनी अध्ययन रणनीति को इस प्रकार निर्मित करना चाहिए जिससे वैकल्पिक विषय के साथ-साथ अभ्यर्थी सामान्य अध्ययन के संबंधित खंड को भी पूरा कर सकें।

  • वैकल्पिक विषय तथा सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्रों की ओवरलैपिंग को स्मार्ट अध्ययन का एक अभिन्न अंग माना जाता है। पाठ्यक्रम की विशालता को देखते हुए किसी भी अभ्यर्थी के लिए इसके प्रत्येक खंड का अलग-अलग अध्ययन करने पर एक लंबा समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में अंतर्विषयी अवधारणा को अपनाते हुए अभ्यर्थी को निरंतर रूप से पाठ्यक्रम से ऐसे मुद्दों एवं अवधारणाओं की पहचान करनी चाहिए जिनका अध्ययन एक साथ किया जा सके।

वैकल्पिक विषय को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। कैसे?

वैकल्पिक विषय के चयन से लेकर मुख्य परीक्षा में प्रश्न पत्र को हल करने तक इसे नजर अंदाज करने से अभ्यर्थी की सफ़लता पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। सिविल सेवा परीक्षा में वैकल्पिक विषय का मूल्यांकन 500 अंकों के अंतर्गत किया जाता है जिसमें से कुछ अभ्यर्थी 300-315 अंक तक प्राप्त करने में सफ़ल रहते हैं तथा अंतिम चयन सूची में बेहतर रैंक लाते हैं।

  • वहीं दूसरी तरफ़ कुछ अन्य अभ्यर्थी ऐसे होते हैं जो सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्रों में बेहतर प्रदर्शन करते हैं किंतु वैकल्पिक विषय में 200-250 के मध्य ही अंक प्राप्त कर पाते हैं तथा ऐसी स्थिति में या तो उनका चयन नहीं होता है अथवा उन्हें अंतिम चयन सूची में बेहतर रैंक प्राप्त नहीं हो पाती है।
  • इस प्रकार, मुख्य परीक्षा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग के रूप में वैकल्पिक विषय का अध्ययन अत्यंत गंभीर रूप में किया जाना चाहिए था पूर्वर्ती प्रश्नों को देखते हुए उन्हें निरंतर रूप से हल किया जाना चाहिए।
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