Interview - निबंध लेखन

निबंध लेखन

(AIR)

किसी विशिष्ट विषय पर अपने विचारों तथा भावनाओं को परिमार्जित रूप से अभिव्यक्त करने की कला निबंध लेखन कहलाती है। सिविल सेवा परीक्षा में पूछे जाने वाले निबंध सामान्य रूप से वर्णनात्मक, विवरणात्मक तथा विचारात्मक प्रकृति के होते हैं। निबंध से संबंधित प्रश्न पत्र की मुख्य परीक्षा तथा परीक्षार्थी के अंतिम रूप से चयन होने की प्रक्रिया में व्यापक महत्व होता है।

निबंधः क्या वास्तव में यह एक गेमचेंजर (Game Changer) है?

निबंध मौलिक लेखन की विशिष्ट कला मानी जाती है। सिविल सेवा परीक्षा में यह खेल परिवर्तक (Game Changer) की भूमिका निभाता है। सामान्य अध्ययन के अन्य प्रश्न पत्र तथा वैकल्पिक विषय में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र अनेक बार इसलिए अच्छी रैंक हासिल नहीं कर पाते हैं क्योंकि उन्हें निबंध में अच्छे अंक प्राप्त नहीं होते हैं। इसी प्रकार, सभी प्रश्न पत्रों में औसत अंक हासिल करने वाले छात्र निबंध में 150-160 अंक हासिल करके रैंक तालिका में ऊपर आ जाते हैं।

  • यदि अभ्यर्थी वैकल्पिक विषय के साथ-साथ सामान्य अध्ययन के सभी प्रश्न पत्रों में औसत अंक हासिल करने के पश्चात यदि वह निबंध में 135-140 अंक ले आता है तो अभ्यर्थी के सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।

निबंध लेखन शैली किस प्रकार विकसित की जाए?

निबंध लेखन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे किसी भी कक्षा में पढ़कर अथवा किसी विशेषज्ञ की सहायता से तैयार नहीं किया जा सकता है। निबंध लेखन में लिखने की मौलिक कला की आवश्यकता होती है तथा अभ्यर्थी निरंतर लेखन प्रयास के माध्यम से ही इस पर अपनी बेहतर पकड़ बना सकता है। निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए अभ्यर्थी निबंध लेखन कला का विकास कर सकता है।

  • जानकारी को अद्यतन रखनाः अभ्यर्थी को निबंध लेखन में बेहतर प्रदर्शन हेतु चाहिए कि वह किसी भी विषय पर अपनी जानकारी अद्यतन रखें। जानकारी को एकत्र करने में पत्र-पत्रिकाओं अथवा पुस्तकों का सहारा लिया जा सकता है किंतु परीक्षा में इन जानकारियों को मौलिक रूप से प्रस्तुत करने की कला का विकास निरंतर लेखन अभ्यास से ही संभव हो सकता है।
  • स्व-अध्ययन को महत्व देनाः स्व-अध्ययन निबंध लेखन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अभ्यर्थियों में यह प्रवृत्ति देखी जाती है कि वे निबंध लेखन पर बाजार में प्रचलित कुछ पुस्तकों का सहारा लेकर लेखन का अभ्यास करने का प्रयास करते हैं। किंतु, सिविल सेवा परीक्षा में पूछे जाने वाले निबंधों की प्रकृति को देखते हुए ऐसे अभ्यास के द्वारा बेहतर अंक लाना संभव नहीं है। वर्ष 2021 की मुख्य परीक्षा में पूछे गए लगभग सभी निबंध दार्शनिक विषयों से संबंधित थे। ऐसे में उन अभ्यर्थियों को अधिक चुनौती का सामना करना पड़ा जिन्होंने स्व-अध्ययन तथा मौलिक लेखन अभ्यास नहीं किया था।
  • चिंतन एवं मंथनः निबंध लेखन का अभ्यास व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण प्रक्रिया का एक भाग है। परीक्षार्थी को निबंध लेखन को बेहतर बनाने के लिए गंभीरता पूर्वक मंथन तथा विचार के माध्यम से अपनी लेखन शैली में सुधार करते रहना चाहिए। इसके लिए यह आवश्यक है कि अभ्यर्थी पाठ्यक्रम को बेहतर रूप से तैयार करे तथा संपूर्ण पाठ्यक्रम पर अभ्यर्थी की मजबूत पकड़ हो।
  • विविध प्रकार की पुस्तकों का अध्ययनः हम जानते हैं कि निबंध लेखन किसी एक अथवा दो किताबों को पढ़ने से बेहतर नहीं हो सकता है। अतः अभ्यर्थी को अपनी तैयारी के दौरान विविध प्रकार की अन्य पुस्तकों (Variety of Books) को भी पढ़ने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा करने से अभ्यर्थी में विचारों को अभिव्यक्त करने की क्षमता विकसित होती है।
  • वैचारिक गहराई का विकासः अधिक गहराई से समझें तो हम पाते हैं कि भारतीय संविधान में बहु-सांस्कृतिक विविधता की वकालत की गई है। यह बहु-सांस्कृतिक विविधता विभिन्न प्रकार की वैचारिकी को जन्म देती है। और यही अलग-अलग वैचारिकी मिलकर भारतीय वैचारिकी का निर्माण करती हैं। अभ्यर्थी को इसी प्रकार की वैचारिकी को ध्यान में रखते हुए अपना अध्ययन करना चाहिए।
  • सामाजिक, सांस्कृतिक तथा दार्शनिक विविधता का अवबोधः अभ्यर्थी के लिए अपनी वैचारिकी की उत्कृष्टता में वृद्धि करने के लिए यह आवश्यक है कि वह प्रत्येक विषय का अध्ययन करते समय इस बात का ध्यान रखें कि संबंधित विषय के क्या प्रभाव भारतीय समाज पर पड़ेंगे। ऐसा करने से उसे भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक तथा दार्शनिक विविधता का अवबोध होगा। यह अवबोध अभ्यर्थी को निबंधों की किसी भी प्रकार की प्रकृति (सामाजिक, राजनीतिक, ऐतिहासिक भौगोलिक अथवा दार्शनिक) को समझने में सहायता करेगी।
  • सतत रूप से लेखन अभ्यासः निबंध लेखन में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि किसी भी सूक्ष्म विषय की हम किन-किन दृष्टिकोणों की सहायता से व्याख्या कर सकते हैं। यही कारण है कि अभ्यर्थी को उत्तर लेखन की तुलना में निबंध लेखन में अधिक मौलिक स्वरूप अपनाना पड़ता है। अनेक बार निबंध के टॉपिक की समझ विकसित करना निबंध लेखन की तुलना में अधिक कठिन होता है। पाठ्यक्रम के संदर्भ एक सामान्य समझ विकसित होने के पश्चात अभ्यर्थी को प्रत्येक सप्ताह लगभग एक निबंध अवश्य लिखना चाहिए। ऐसा करने से अभ्यर्थी सतत रूप से अपनी निबंध लेखन शैली को उत्कृष्ट बना सकता है।
  • नोट्स तैयार करनाः नोट्स वाले खंड में यह बताया गया था कि अभ्यर्थी को सामान्य अध्यन के चारों प्रश्न पत्रों तथा वैकल्पिक विषय के अनुरूप अलग-अलग नोट्स तैयार करनी चाहिए। यहां यह बात भी महत्वपूर्ण है कि अभ्यर्थी एक पृथक नोटबुक पर ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों तथा विषयों का संकलन कर सकते है जो उन्हे निबंध लेखन में सहायता करे।
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें

वार्षिक सदस्यता लें मात्र 600 में और पाएं...
पत्रिका की मासिक सामग्री, साथ ही पत्रिका में 2018 से अब तक प्रकाशित सामग्री।
प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा पर अध्ययन सामग्री, मॉक टेस्ट पेपर, हल प्रश्न-पत्र आदि।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित चुनिंदा पुस्तकों का ई-संस्करण।
पप्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के चुनिंदा विषयों पर वीडियो क्लासेज़।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित पुस्तकों पर अतिरिक्त छूट।