Interview - सही सलाहकार, अधययन समूह और कोचिंग संस्थान का चुनाव कैसे करें?
सही सलाहकार, अधययन समूह और कोचिंग संस्थान का चुनाव कैसे करें?
(AIR)
‘‘अपने ज्ञान पर आवश्यकता से अधिक यकीन करना मूर्खता है। यह याद दिलाना ठीक होगा कि सबसे मजबूत
व्यक्ति कमजोर हो सकता है और सबसे बुद्धिमान व्यक्ति भी गलती कर सकता है।’’ - महात्मा गांधी
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने के क्रम में सही मार्गदर्शन का होना अत्यंत आवश्यक होता है। उचित मार्गदर्शन के माध्यम से एक औसत परीक्षार्थी भी कम समय में इस परीक्षा में सफलता को अर्जित कर सकता है। इस परीक्षा के लिए यह आवश्यक है कि परीक्षार्थी को आरंभ से ही यह ज्ञात होना चाहिए कि उसे क्या पढ़ना चाहिए? कैसे पढ़ना चाहिए? तथा कैसे लिखना चाहिए? यदि इन प्रश्नों की उचित जानकारी देते हुए कोई मार्गदर्शक अभ्यर्थी को पर्याप्त समय देता है तो वह मार्गदर्शक अथवा सलाहकार बेहतर माना जाएगा।
- मार्गदर्शक के चयन हेतु मानकः अभ्यर्थियों की विशाल संख्या के कारण इन संस्थानों के विशेषज्ञों के पास समय का अभाव रहता है। ऐसी स्थिति में किसी भी परीक्षार्थी का व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन करना इन विशेषज्ञों के लिए संभव नहीं होता है।
- किसी भी व्यक्ति अथवा विशेषज्ञ को सलाहकार अथवा मार्गदर्शक मानने से पूर्व उसके बारे में अभ्यर्थी को यह जानना आवश्यक होता है कि वह निरंतर अध्ययन की प्रक्रिया में है अथवा नहीं? उसने कितनी बार मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार का सामना किया है? क्या वह व्यक्ति चयनित है अथवा नहीं? लगातार अध्ययन करने वाला, परीक्षा देने वाला तथा चयनित व्यक्ति ही इस परीक्षा में किसी अन्य व्यक्ति को बेहतर रूप से मार्गदर्शित कर सकता है।
- अध्ययन समूह का चुनावः मार्गदर्शक अथवा सलाहकार के चयन में कोचिंग संस्थान अथवा दूसरे लोग सहायता कर सकते हैं। किंतु, दूसरी तरफ अध्ययन समूह का चुनाव करना व्यक्तिगत रूप से परीक्षार्थी पर निर्भर करता है।
- एक साथ कुछ समय तक पढ़ाई करने के पश्चात अभ्यर्थी समूह के अन्य लोगों की तैयारी के प्रति गंभीरता स्तर को देख सकता है। इस परीक्षा में समय को बचाने तथा अपनी तैयारी में निरंतरता को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक होता है कि परीक्षार्थी ऐसे लोगों के ही संपर्क में रहे जो अपने भविष्य को लेकर अधिक गंभीर हैं।
- अध्ययन समूह में एक औसत स्तर से नीचे के अभ्यर्थी को शामिल करने से पूरे समूह की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। अभ्यर्थी को अध्ययन समूह तथा मित्र-मंडली में एक स्पष्ट अंतर करते हुए अपनी पढ़ाई को जारी रखना चाहिए। अनेक छात्र बेहतर मित्र हो सकते हैं किंतु यह आवश्यक नहीं है कि वे सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में भी उसी प्रकार सहायक हो।
- अहम को दूर रखनाः सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने की उम्र में छात्रों के मध्य एक अहम की भावना देखने को मिलती है तथा वह समान उम्र के ऐसे लोगों के साथ अनुकूलित महसूस नहीं करते हैं जो ज्ञान में उनसे बेहतर होते हैं।
- मार्गदर्शक तथा अध्ययन समूह के चुनाव के वक्त अभ्यर्थी की यह सबसे बड़ी भूल होती है कि वह ऐसे लोगों का चुनाव करता है जो ज्ञान तथा अनुभव में उसी के स्तर के होते हैं। अभ्यर्थियों को निरंतर सीखने के महत्व को ध्यान में रखने के साथ अपने अहम को दूर रखना होगा तथा इस बात को महत्व देना होगा कि उनके अहम से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वे कम समय में अधिक से अधिक कैसे सीख सकते हैं।
- अध्ययन समूह में विविधता का महत्वः यदि चार अभ्यर्थियों का एक अध्ययन समूह निर्मित किया जाता है तो उसके अधिकांश लाभ तभी प्राप्त किए जा सकते हैं जब चारों अभ्यर्थी अलग-अलग विषयों में बेहतर पकड़ रखते हों। उदाहरण के लिए, यदि इन अभ्यर्थियों को अलग-अलग रूप में चार भिन्न-भिन्न विषयों का बेहतर ज्ञान होगा तो वह एक दूसरे की कहीं अधिक मदद कर सकेंगे।
- यह आवश्यक नहीं है कि अध्ययन समूह के अभ्यर्थी एक ही स्थान पर रहते हो अथवा एक ही संस्थान से हो। वर्तमान इंटरनेट के युग में अनेक ऑनलाइन अध्ययन समूहों का भी निर्माण देखने को मिलता है।
- कोचिंग संस्थानों का चयनः यह ध्यान रखना होगा कि वर्तमान में जारी प्रत्येक कोचिंग संस्थान अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर मार्गदर्शन तथा अध्ययन सामग्री प्रदान करने का प्रयास करता है। यह अभ्यर्थी की क्षमता पर निर्भर करता है कि वह किसी भी संस्थान से किस प्रकार लाभान्वित होता है।
- फिर भी, किसी कोचिंग संस्थान का चयन करते समय अभ्यर्थी को यह पता करना चाहिए कि सिविल सेवा परीक्षा के कुछ प्रमुख विषयों विशेषकर- इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था तथा अर्थव्यवस्था से संबंधित शिक्षक कैसे हैं? सिविल सेवा क्षेत्र में इनके अनुभव तथा उपलब्धियां कितनी हैं?
गलत कोचिंग संस्थानों से बचाव के उपाय क्या हो सकते हैं?
किसी भी कोचिंग संस्थान द्वारा पाठ्यक्रम को गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय पर पूरा किया जाना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। कोचिंग संस्थानों के चुनाव में यह भी ध्यान देना चाहिए कि वह संस्थान परीक्षार्थियों को कितना समय देता है।
- कोचिंग संस्थानों के संदर्भ में यह देखा गया है कि कुछ संस्थान एक वर्ष के अंदर अंदर ही संपूर्ण पाठ्यक्रम को पूरा करा देते हैं। जबकि कुछ अन्य ऐसे संस्थान भी हैं जो पाठ्यक्रम को पूरा कराने की प्रक्रिया में लगभग दो वर्ष से भी अधिक समय ले लेते हैं। पाठ्यक्रम को पूरा करने की लंबी प्रक्रिया का पालन करने वाले संस्थानों से बचना चाहिए क्योंकि ऐसी स्थिति में समय तथा धन दोनों का व्यय होता है तथा अध्ययन की संपूर्ण प्रक्रिया अत्यंत ही बोझिल बन जाती है।
- कोचिंग संस्थानों में प्रवेश लेने के साथ-साथ यह भी देखना होता है कि अभ्यर्थी को स्व-अध्ययन (Self Study) हेतु कितना समय मिलता है। अनेक बार कोचिंग संस्थानों पर अति निर्भरता अभ्यर्थी को स्व-अध्ययन से दूर कर देती है जो अंततः घातक सिद्ध होता है एवं उसके अंतिम चयन में बाधक बनता है।
- सामान्य रूप से परीक्षार्थी मीडिया द्वारा किए गए प्रचार तथा कोचिंग संस्थानों के इंटरव्यू के रिजल्ट के आधार पर कोचिंग संस्थानों का चयन करते हैं।
- किंतु, संस्थानों का चुनाव करने से पूर्व अभ्यर्थी को यह जानना चाहिए कि वह संस्थान वैकल्पिक विषय के साथ-साथ सामान्य अध्ययन के अन्य प्रश्न पत्रों की तैयारी किस रणनीति के आधार पर कराता है? तथा, संस्थान लेखन शैली के विकास में किस प्रकार सहायता करता है? मित्र तथा परिचित व्यक्ति कोचिंग संस्थानों के चुनाव में किसी टॉपर के इंटरव्यू की तुलना में अधिक मदद कर सकते हैं।
- अनेक छात्र किसी विशिष्ट कोचिंग संस्थान के फाउंडेशन कोर्स में प्रवेश लेने की तुलना में अलग-अलग कोचिंग संस्थानों में अलग-अलग विषयों को तैयार करने को अधिक प्राथमिकता देते हैं। ऐसे छात्र एक साथ दो अथवा तीन कोचिंग संस्थानों में प्रवेश ले लेते हैं तथा उनका अधिकांश समय कोचिंग संस्थानों में ही व्यतीत होता है। इन छात्रों को समक्ष स्व-अध्ययन करने में समय के अभाव की समस्या का सामना करना पड़ता है। इससे इनकी तैयारी में स्मार्ट स्टडी तथा गुणवत्ता का अभाव दिखाई देता है। छात्रों को एक बार में एक से अधिक कोचिंग संस्थानों में प्रवेश नहीं लेना चाहिए तथा कोचिंग संस्थानों से अधिक स्व-अध्ययन पर बल देना चाहिए।
क्या पत्रचार पाठ्यक्रम सहायक हैं?
वर्तमान समय में ऑनलाइन क्लासेज के साथ-साथ लगभग सभी कोचिंग संस्थान पत्रचार पाठ्यक्रम उपलब्ध करा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों में उपलब्ध कराई जाने वाली अध्ययन सामग्री किताबों तथा पेनड्राइव के रूप में होती है।
- संस्थान नियमित कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्रों की तुलना में पत्रचार पाठ्यक्रम वाले छात्रों पर विशेष ध्यान नहीं देते हैं।
- किंतु, नौकरी अथवा रोजगार में संलग्न अभ्यर्थी जिनके पास समय का अभाव होता है तथा जो नियमित कोचिंग संस्थानों में प्रवेश नहीं ले सकते हैं, उनके लिए पत्रचार पाठ्यक्रम व्यापक रूप से सहायता करते हैं। पत्रचार पाठ्यक्रम का चुनाव करते समय अभ्यर्थियों को यह पहले से ही पता करना होगा कि संबंधित संस्थानों का अनुभव क्षेत्र में कितना है तथा उनके द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले अध्ययन सामग्री परिवर्तित सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम के अनुरूप है अथवा नहीं।
फि़यर ऑफ़ मिसिंग आउट (FOMO)
जब किसी अभ्यर्थी को असफलता का अधिक डर लगने लगता है तो उसे भीड़ में गुम हो जाने की अधिक चिंता सताने लगती है। यही अवधारणा ‘फियर ऑफ मिसिंग आउट’ (FOMO) के रूप में जानी जाती है।
- फियर ऑफ मिसिंग आउट की चिंता से बचने के लिए अभ्यर्थी को नियमित रूप से स्वयं को प्रेरित रखना होगा। नियमित रूप से पढ़ाई तथा सतत रूप से किए जाने वाले प्रयासों के माध्यम से कोई भी परीक्षार्थी असफलता के तनाव से बच सकता है।
- सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करने से पूर्व हुई अभ्यर्थी के लिए यह पता करना अत्यंत आवश्यक होता है कि उसके पास धन तथा समय की सीमाएं कितनी है? यदि अभ्यर्थी निर्धारित समय में सफलता को प्राप्त नहीं कर सका है तो उसे वैकल्पिक रोजगार के अवसरों पर भी ध्यान देना चाहिए।
- अनेक बार परिवार तथा व्यक्तिगत जीवन की विपरीत परिस्थितियों के कारण एक निश्चित समय सीमा में अध्ययन करके सफलता प्राप्त करना अभ्यर्थी के लिए मुश्किल होता है। इन परिस्थितियों में अभ्यर्थी को स्वयं की क्षमता पर विश्वास करना चाहिए तथा उसे व्यावहारिक वास्तविकता ओं को स्वीकार करते हुए अपने लिए दीर्घकालिक लक्ष्यों को तैयार करना चाहिए।
- तैयारी से किसी भी स्तर पर अभ्यर्थी को यह सदैव ध्यान में रखना चाहिए कि जब तक वह स्वयं से हार नहीं मान लेगा तब तक उसकी जीत के मार्ग खुले रहेंगे। यदि अभ्यर्थी एक अथवा दो प्रयासों में सफल नहीं होता है तो भी उसे आने वाले प्रयासों के लिए अधिक मेहनत तथा बेहतर रणनीति के साथ तैयारी करनी चाहिए। परीक्षा में सफल लोगों के साक्षात्कार द्वारा यह पता चलता है कि कुछ परीक्षार्थियों को छोड़कर अधिकांश परीक्षार्थियों को इस परीक्षा में सफलता पहले प्रयास के बाद दूसरे अथवा तीसरे प्रयास में ही प्राप्त हुई है।
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समूह में अधययन करने के क्या लाभ हैं? सामूहिक अध्ययन को किसी भी परीक्षा में बेहतर परिणाम प्रदान करने में सहायक माना जाता है। किंतु, जैसा हमने देखा है कि अध्ययन समूहों के निर्माण के लिए परीक्षार्थियों की तैयारी की का समान स्तर तथा उनमें गंभीरता का होना अत्यंत आवश्यक होता है।
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