Interview - शुरुआत कैसे करें?
शुरुआत कैसे करें?
(AIR)
"हमेशा ध्यान रखें कि सफ़ल होने के लिए आपका खुद का संकल्प
किसी और कार्य से अधिक महत्वपूर्ण है।" -अब्राहम लिंकन
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित सिविल सेवा परीक्षा देश की सर्वाधिक प्रतिष्ठित सेवा मानी जाती है। एक प्रसिद्ध उक्ति यह है कि ‘सपने भी उन्हीं के ही पूरे होते हैं जो इसकी कीमत चुकाते हैं।’ स्वतंत्र इस परीक्षा में सफलता का प्रतिशत अत्यंत निम्न होने के कारण प्रत्येक वर्ष लाखों अभ्यर्थियों को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। इस परीक्षा में सफलता के लिए परीक्षार्थी में अधिक से अधिक मेहनत करने की क्षमता के साथ उसके पास कुशल मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है। पिछले कुछ वर्षों में यह देखा जा रहा है कि अनेक छात्र कम उम्र में ही बेहतर मार्गदर्शन के आधार पर सफलता प्राप्त कर रहे हैं।
इंटरनेट तथा कंप्यूटर तकनीकी के प्रयोग की बढ़ती भूमिका के साथ बच्चों के जन्म के साथ ही व्यक्तिगत मार्गदर्शन (Personal Guidance) के माध्यम से उनकी पर्सनालिटी डेवलपमेंट (Personality Development) तथा व्यावसायिक गुणों (Professional Skills) के विकास की ओर व्यापक रुप से ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान समय में इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट के साथ सिविल सेवा के क्षेत्र में इस प्रकार के प्रयोग देखे जा रहे हैं जहां बच्चों को कोचिंग तथा अन्य संस्थाओं के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर ही मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है जिससे कम समय में बच्चों की सफलता सुनिश्चित की जा सके।
सिविल सेवा परीक्षा में बैठने वाले प्रतियोगी छात्रों के लिए न्यूनतम 21 वर्ष की आयु तथा सामान्य ग्रेजुएशन डिग्री धारक को योग्यता का आधार बनाया है। परीक्षा का आयोजन प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Examination), मुख्य परीक्षा (Mains Examination) तथा व्यक्तित्व परीक्षण (Personality Test) के रूप में 3 चरणों में किया जाता है।
परीक्षार्थी को स्वयं को तीनों चरणों के लिए तैयार करना होता है। सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष लगभग 08 लाख छात्र फॉर्म भरते हैं, इनमें से लगभग 3.50 लाख छात्र प्रारंभिक तथा लगभग 15 हजार छात्र मुख्य परीक्षा में बैठते हैं।
अंतिम रूप से चयनित 800-1000 छात्रों को उनकी रैंक के आधार पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय राजस्व सेवा (IRS) तथा विभिन्न प्रकार की केंद्रीय सेवाओं का आवंटन किया जाता है।
सिविल सेवा में जाने के इच्छुक छात्रों तथा प्रतियोगियों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपनी क्षमताओं की पहचान करें।
वर्तमान चर्चा में छात्रों की आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न चरणों के माध्यम से उचित रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया है। छात्र अपनी क्षमताओं का मूल्यांकन करते हुए इनमें से उपयुक्त रणनीति को अपना सकते हैं।
प्रारंभिक स्तर (For Beginners) पर शुरुआत किस प्रकार की जाए?
आरंभिक स्तर पर योग्यता को पूरा करते हुए पाठ्यक्रम की संपूर्ण समझ का विकास अत्यंत आवश्यक है। तैयारी आरंभ करते समय सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम (Syllabus) को सतत रूप से ध्यान में रखा जाना चाहिए।
- प्रतियोगी छात्रों का सर्वप्रमुख कार्य इस परीक्षा के पाठ्यक्रम से अवगत होकर पाठ्यक्रम के विभिन्न पहलुओं को समझते हुए अपनी तैयारी हेतु एक उपयुक्त रणनीति का निर्माण करना है।
- इस क्रम में, अपनी तैयारी के स्तर का समय-समय पर मूल्यांकन तथा समय प्रबंधन का ध्यान रखना भी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का अभिन्न अंग माना जाता है।
12वीं अथवा उसके पूर्व तैयारी की रणनीति क्या होनी चाहिए?
बच्चों की रुचियों एवं उनकी क्षमताओं को देखते हुए 12वीं कक्षा से पहले ही उन्हें सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी हेतु प्रेरित किया जा सकता है।
- 6ठी कक्षा से तैयारी की रणनीतिः सिविल सेवा विशेषज्ञ, कोचिंग संस्थान तथा सफल छात्र इस बात पर जोर देते हैं कि इस परीक्षा की तैयारी में 6ठी कक्षा से 12वीं कक्षा की NCERT पुस्तकों का व्यापक महत्व होता है। इसे ध्यान में रखते हुए 6ठी कक्षा से ही छात्रों को इस बात के लिए प्रेरित किया जा सकता है कि वे NCERT पुस्तकों के साथ अपने विषयों को अधिक गहराई के साथ अध्ययन करें।
- 10वीं कक्षा के पश्चात तैयारी की रणनीतिः 10वीं कक्षा के पश्चात प्रत्येक छात्र को अपनी रूचि के आधार पर कला, विज्ञान, कॉमर्स तथा अन्य विषयों का चयन करना होता है। सिविल सेवा परीक्षा की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए छात्र इस चरण में उपयुक्त विषयों का चुनाव करके सिविल सेवा में जाने का निर्णय ले सकते हैं।
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स्नातक के दौरान सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की क्या रणनीति होनी चाहिए? अनेक छात्र अपने भविष्यगत कैरियर का चुनाव ग्रेजुएशन के समय करते हैं। सिविल सेवा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए ग्रेजुएशन का प्रथम वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होता है जहां से वे एक नई शुरुआत करके सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी को आरंभ कर सकते हैं। मुख्य परीक्षा में एक वैकल्पिक विषय का चयन करना होता है। स्नातक स्तर पर छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान वैकल्पिक विषय पर मजबूत पकड़ बना सकते हैं, इससे परीक्षा के समय उन्हें वैकल्पिक विषय हेतु अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता नहीं होगी।
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स्नातक के पश्चात सिविल सेवा की तैयारी कैसे की जाए?
स्नातक के पश्चात तैयारी आरंभ करने वाले मानविकी, विज्ञान, इंजीनियरिंग तथा मैनेजमेंट क्षेत्र से संबंधित छात्र थोड़े बहुत अंतर के साथ लगभग समान धरातल पर होते हैं। सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम की व्यापकता एवं इसके विस्तार को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि स्नातक अथवा परास्नातक के पश्चात तैयारी आरंभ करने वाले किसी भी प्रतियोगी छात्र के लिए पाठ्यक्रम का गहन विश्लेषण करना अत्यंत आवश्यक है। इस अवस्था में छात्रों को निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिएः
- वैकल्पिक विषय का चयनः छात्रों को अपने रुचि के आधार पर किसी एक वैकल्पिक विषय का चयन करते हुए उसका गहन अध्ययन करना चाहिए। छात्र स्नातक में पढ़े गए विषय का चयन कर सकते हैं।
- इस प्रक्रिया में सिविल सेवा परीक्षा में सफल छात्रों के अनुभवों की मदद ली जा सकती है।
- सामान्य अध्ययन की तैयारीः प्रारंभिक तथा मुख्य दोनों परीक्षाओं में सामान्य अध्ययन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- सामान्य अध्ययन के विभिन्न खंडों (पाठ्यक्रम के अनुसार) का विस्तृत अध्ययन इस परीक्षा में सफलता हेतु अनिवार्य है।
- नोट्स तैयार करनाः परीक्षार्थी आरंभिक स्तर से ही पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा हेतु नोट्स तैयार कर सकते हैं। इससे परीक्षा के समय कम समय में रिवीजन किया जा सकता है।
- कोचिंग संस्थानों की सहायता लेनाः समय तथा धन की उपलब्धता को देखते हुए छात्र बेहतर मार्गदर्शन हेतु उपयुक्त कोचिंग संस्थानों की सहायता ले सकते हैं। किंतु, प्रत्येक स्तर पर यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि व्यक्तिगत मेहनत ही सफलता की अंतिम कुंजी है। अतः स्वयं पर भरोसा रखते हुए परीक्षार्थी को धैर्य पूर्वक आगे बढ़ना चाहिए।
- तैयारी में निरंतरताः सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में निरंतरता को बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। एक निश्चित समय-सारणी बनाकर नियमित एवं सतत रूप से उसका पालन करके प्रतियोगी छात्र अपनी तैयारी में उत्तरोत्तर प्रगति कर सकते हैं।
- स्पष्ट रणनीति, समय प्रबंधन, समय-सारणी का नियमित पालन एवं सतत अध्ययन इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए आवश्यक अनिवार्य शर्तों में शामिल हैं।
नौकरी/रोजगार के साथ तैयारी कैसे करें?
किसी भी नौकरी करने वाले व्यक्ति अथवा प्रोफेशनल्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती समय का प्रबंधन करना होता है। अतः इस वर्ग में आने वाले प्रतियोगी छात्र निम्नलिखित बिंदुओं का ध्यान रखते हुए अपनी तैयारी आरंभ कर सकते हैं।
- क्या वे प्रतिदिन कुछ निश्चित घंटे अथवा समय तैयारी के लिए निकाल सकते हैं अथवा नहीं?
- प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा के समय क्या उन्हें अपने कार्य से अवकाश प्राप्त होगा अथवा नहीं?
- ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन कोचिंग के लिए समय निकल सकता है अथवा नहीं?
नौकरी अथवा रोजगार के साथ प्रतियोगी छात्रों की आर्थिक चुनौतियां कम हो जाती हैं किंतु समय के अभाव में समय का प्रबंधन एक प्रमुख चुनौती होती है।
अतः, अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं अपनी नौकरी/ रोजगार की प्रकृति को देखते हुए अन्य छात्रों की तुलना में इस वर्ग के प्रतियोगी छात्रों को अपेक्षाकृत एक विस्तृत रणनीति तैयार करनी चाहिए।
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साक्षात्कार
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