Interview - साक्षात्कार की तैयारी
साक्षात्कार की तैयारी
(AIR)
साक्षात्कार को मुख्य परीक्षा के बाद सिविल सेवा परीक्षा में सर्वाधिक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। सामान्य रूप से मुख्य परीक्षा में सफल होने के पश्चात अभ्यर्थियों के पास साक्षात्कार की तैयारी हेतु अत्यंत सीमित समय होता है। अतः, सिविल सेवा की परीक्षा के साक्षात्कार की तैयारी मुख्य परीक्षा के पश्चात एक निश्चित समय में नहीं की जा सकती है। अभ्यर्थी को प्रारंभिक स्तर पर तैयारी आरंभ करने के साथ ही साक्षात्कार हेतु अपनी तैयारियां आरंभ कर देनी चाहिए।
इसके लिए अतिरिक्त ऊर्जा एवं समय की आवश्यकता नहीं होती बल्कि अभ्यर्थी को अपने व्यक्तित्व, निवास स्थान तथा सामान्य अध्ययन से संबंधित सामान्य जानकारियों को एकत्र करने की आवश्यकता होती है। लंबे समय में की गई साक्षात्कार की तैयारी अभ्यर्थी को साक्षात्कार बोर्ड के समक्ष संपूर्णता के साथ प्रस्तुत करने में सहायक सिद्ध होती है।
यह बात ध्यान में रखी जानी चाहिए थी औसत रूप से एक अभ्यर्थी को साक्षात्कार में लगभग 30-40 मिनट का समय दिया जाता है। इस दौरान उसके संपूर्ण व्यक्तित्व का परीक्षण करने का प्रयास किया जाता है। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा का साक्षात्कार 275 अंको का होता है। ऐसे अभ्यर्थी जो 200 अथवा 210 से अधिक अंक प्राप्त करते हैं उन्हें बेहतर माना जाता है। यह अंक अभ्यर्थी की अंतिम रैंक के निर्धारण में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
साक्षात्कार की तैयारी कैसे करें?
साक्षात्कार की प्रकृति की जानकारी होनाः साक्षात्कार के माध्यम से बोर्ड द्वारा सिविल सेवा के अभ्यर्थी की विश्लेषणात्मक क्षमता, पार्श्विक सोच तथा तार्किक निर्णय क्षमता का आकलन किया जाता है। इसके माध्यम से न केवल अभ्यर्थी के बौद्धिक गुणों का मूल्यांकन किया जाता है बल्कि सामाजिक तथा समसामयिक घटनाओं के संबंध में उसकी रुचियों की पहचान भी की जाती है।
निश्चित गुणों का विकास आवश्यकः साक्षात्कार की तैयारी की संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थी को स्वयं में मानसिक सतर्कता, आलोचनात्मक ग्रहण शक्ति, संतुलित निर्णय लेने, नेतृत्व एवं संगठन की योग्यता तथा बौद्धिक एवं नैतिक आयामों के विकास पर बल देना चाहिए।
साक्षात्कार की प्रक्रिया के स्वरूप की समझः सिविल सेवा परीक्षा में साक्षात्कार वार्तालाप की प्रक्रिया द्वारा लिया जाता है। इस दौरान अभ्यर्थी के साथ विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा चर्चा कर गए अभ्यर्थी के व्यक्तित्व, शैक्षणिक योग्यता तथा आसपास घटित होने वाली समसामयिक घटनाओं की जानकारी स्तर की जांच की जाती है।
प्रमाण पत्रों का संकलन एवं इनसे संबंधित जानकारीः अभ्यर्थी को साक्षात्कार के पूर्व अपने प्रमाण पत्रों की एक निश्चित फाइल तैयार करनी चाहिए। इन प्रमाण पत्रों में शैक्षणिक योग्यता, यदि आवश्यक हो तो जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, यदि कहीं कार्यरत हो तो अनापत्ति प्रमाण पत्र के साथ-साथ संघ लोक सेवा आयोग द्वारा अपने नोटिफिकेशन में निर्दिष्ट किए गए सभी प्रमाण पत्रों को एकत्र करते हुए अभ्यर्थी को इनका गहराई से अध्ययन करना चाहिए। जिससे साक्षात्कार बोर्ड द्वारा इनसे संबंधित पूछे गए सभी प्रश्नों का उचित उत्तर दिया जा सके।
वेशभूषा तथा पहनावाः साक्षात्कार भवन में जाने से पूर्व अभ्यर्थी को ऐसे कपड़ों का चयन करना चाहिए जिनके साथ वह सहज महसूस करता हो। साथ ही, इन कपड़ों के चयन में या ध्यान रखा जाना चाहिए कि वे औपचारिक वेशभूषा में आते हो। पुरुष अभ्यर्थी सामान्य पैंट, शर्ट, बेल्ट तथा फॉर्मल जूते पहन सकते हैं तो वही, महिला अभ्यर्थियों द्वारा सूट अथवा साड़ी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कपड़ों का रंग अधिक चमकीला एवं भड़काऊ नहीं होना चाहिए।
उत्तर देने का तरीकाः अभ्यर्थी को साक्षात्कार के दौरान अपने उत्तर संक्षिप्त में तथा संतुलित शब्दावली में देनी चाहिए। वार्तालाप से संबंधित प्रश्नों में भी अभ्यर्थी को संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए आवश्यक शब्द सीमा में ही बोलना चाहिए तथा अति भाषण से बचना चाहिए।
- अभ्यर्थी द्वारा साक्षात्कार बोर्ड से अनावश्यक बहसबाजी नहीं करनी चाहिए। यह हो सकता है कि गलती से अथवा जानबूझकर बोर्ड के किसी सदस्य द्वारा कोई गलत तथ्य प्रस्तुत किया गया हो। यदि ऐसा होता है तो अभ्यर्थी को यह बोलना चाहिए कि वह क्षमा प्रार्थी है तथा प्रस्तुत किए गए तथ्य के संदर्भ में उसे पर्याप्त जानकारी नहीं है।यदि आपने कोई गलत उत्तर दिया है और बोर्ड ने उसे इंगित किया है, तो उस बोर्ड सदस्य को धन्यवाद दें जिसने उसे इंगित किया है और अपनी प्रतिक्रिया को सामान्य रूप से संशोधित कर लेना चाहिए।
DAF की तैयारी करना कितना महत्वपूर्ण है?
अभ्यर्थी द्वारा मुख्य परीक्षा के दौरान भरे जाने वाले विस्तृत आवेदन पत्र (Detailed Application Form & DAF) में दी गई अधिकांश जानकारी अभ्यर्थी के व्यक्तित्व से संबंधित होती है, जिसके प्रत्येक खंड को विस्तृत रूप से तैयार करना चाहिए।
- नामः अभ्यर्थी को उसके नाम का अर्थ पता होना चाहिए साथ ही यदि कोई मध्य नाम (Middle Name) तथा अंतिम नाम (Lsat Name or Sir Name) है तो उसके अर्थ की भी जानकारी होनी चाहिए। अभ्यर्थी को यह पता होना चाहिए कि क्या उसके नाम का कोई पौराणिक, भौगोलिक अथवा ऐतिहासिक मूल्य है?
- यदि अभ्यर्थी आरक्षित वर्ग से है तो उसे अपने समुदाय की वर्तमान स्थिति तथा सरकार द्वारा प्रदत्त सुविधाओं की जानकारी भी होनी चाहिए। इस संदर्भ में अभ्यर्थी अपने समुदाय की साक्षरता दर, लैंगिक विशेषताओं तथा आर्थिक भागीदारी से संबंधित जानकारियां एकत्र कर सकता है।
- जन्मतिथिः यदि अभ्यर्थी की जन्म तिथि का संबंध किसी महापुरुष के जन्म दिवस से है तो उस महापुरुष के संदर्भ में व्यापक जानकारी होनी चाहिए। इसी प्रकार, अभ्यर्थी के जन्म वर्षों से संबंधित यदि कोई महत्वपूर्ण घटना घटित हुई हो तो उसके संदर्भ में भी अभ्यर्थी को जानना चाहिए।
- हॉबी अथवा रुचियां: साक्षात्कार के दौरान लगभग प्रत्येक अभ्यर्थी से उसकी रुचियों एवं हॉबी से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। रुचियों का विकास एक दीर्घकालिक प्रक्रिया के दौरान होता है अतः अभ्यर्थी को सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करने के साथ ही ऐसी एक अथवा दो रुचियों का विकास अपने व्यक्तित्व में करना चाहिए जो उसे आने वाले समय में साक्षात्कार में मदद कर सकें।
- उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति पैस खेलना पसंद करता है तो उसे इस खेल की उत्पत्ति, उसकी तकनीकी शब्दावली तथा वर्तमान परिस्थितियों में इसके मुख्य खिलाड़ियों के बारे में विस्तृत जानकारी होनी चाहिए। इसी प्रकार, यह भी पता होना चाहिए कि चैस को ओलंपिक, एशियन गेम्स तथा कॉमनवेल्थ में अभी तक क्यों शामिल नहीं किया गया है।
- निवास स्थान की जानकारीः शैक्षिक एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ साक्षात्कार में अभ्यर्थी से कुछ प्रश्न उसके निवास स्थान से संबंधित पूछे जाते हैं। अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि उसे अपने गृह राज्य के भूगोल, राजनीतिक विशेषताओं तथा इतिहास की जानकारी होनी चाहिए।
- इसी प्रकार उसके लिए अपने गृह जिले तथा संबंधित गांव एवं शहर की जानकारी को अद्यतन रखना आवश्यक होता है। निवासी स्थान से संबंधित जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया में अभ्यर्थी को इसके सामाजिक सांस्कृतिक एवं राजनीतिक महत्व पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- स्नातक के विषयों की सामान्य जानकारीः अपने स्नातक के विषयों की सामान्य जानकारी का होना अत्यंत आवश्यक है। तैयारी की एक लंबी प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थी अपने स्नातक विषयों की अवधारणा आत्मक समझ को भूल जाते हैं। किंतु, अनेक बार साक्षात्कार में इन विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
- सेवाओं की प्राथमिकताः अभ्यर्थी सिविल सेवा परीक्षा के अंतर्गत निर्धारित की गई सेवाओं में जिन सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर चयन करता है, उनसे संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। अभ्यर्थी से इन सेवाओं की प्रकृति तथा उत्तरदायित्व के संदर्भ में जानकारी ली जा सकती है।
अन्य विषय जिन्हें साक्षात्कार हेतु तैयार करना अत्यंत महत्वपूर्ण है
यदि अभ्यर्थी अपनी तैयारी, नौकरी अथवा पढ़ाई के दौरान किसी दूसरे राज्य अथवा देश में रहा है तो उसे उस राज्य अथवा देश के महत्वपूर्ण स्थलों, वहां की राजनीतिक व्यवस्था तथा सामाजिक सांस्कृतिक विशेषताओं का ज्ञान होना चाहिए।
- अभ्यर्थी द्वारा मुख्य परीक्षा के समय तैयार की गई भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक, भौगोलिक, आर्थिक तथा पर्यावरणीय दशाओं की जानकारी होना आवश्यक है।
- परीक्षार्थी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर अपनी नजर बनाए रखे। अभ्यर्थी से साक्षात्कार में समसामयिक घटनाओं से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं तथा यह भी पूछा जा सकता है कि इन घटनाओं का प्रभाव भारतीय परिस्थितियों पर किस प्रभाव पड़ेगा।
- अभ्यर्थी से यह भी पूछा जा सकता है कि वह किस राज्य को सेवा करने हेतु प्राथमिकता देगा। अभ्यर्थी को ऐसे प्रश्नों के लिए उचित कारणों की तैयारी करना अनिवार्य है।
- समसामयिक मुद्दों के साथ हाल ही में भारत सरकार द्वारा जारी की गई विभिन्न योजनाओं, आर्थिक सर्वेक्षण तथा बजट से संबंधित प्रश्न पूछे जाने की संभावना अधिक रहती है।
- यह एक सामान्य सवाल है कि आप सिविल सेवा में ही क्यों आना चाहते हैं? अभ्यर्थी को इस प्रश्न का सामना करने के लिए अधिक सकारात्मक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
- स्कूली शिक्षा, कॉलेज शिक्षा तथा नौकरी के मध्य यदि 1 अथवा 2 वर्षों का गैप है। तो अभ्यर्थी को इस प्रश्न के लिए तैयार रहना चाहिए की यह गैप क्यों रहा है। यदि अभ्यर्थी से यह पूछा जाता है कि इस परीक्षा को पास न कर पाने की स्थिति में आप क्या करेंगे? तो अभ्यर्थी को उत्तर देते समय इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए था और दृढ़ता के साथ उत्तर देना चाहिए।
अपने व्यक्तित्व का विकास कैसे करें?
व्यक्ति के स्वभाव, खान-पान, रहन-सहन, बोलचाल, निर्णय लेने की प्रक्रिया तथा अनेक अन्य विशेषताओं से मिलकर व्यक्तित्व का निर्माण होता है। व्यक्तित्व का निर्माण एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है जो उसके जन्म लेने के साथ ही आरंभ हो जाती है तथा मृत्यु तक चलती रहती है। सिविल सेवा परीक्षा के लिए अभ्यर्थी से ईमानदार, नैतिक तथा राजनीतिक रूप से तटस्थ होने की अपेक्षा की जाती है। इन गुणों का विकास भी एक लंबी प्रक्रिया के द्वारा होता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इस बात पर बल देते हैं कि साक्षात्कार की तैयारी उसी दिन से आरंभ कर देनी चाहिए जब एक छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के विषय में सोचता है। सिविल सेवक के व्यक्तित्व में निम्नलिखित गुणों का होना अत्यंत आवश्यक माना गया हैः
- बेहतर संचार कौशलः सिविल सेवक अभ्यर्थी को निरंतर रूप से विनम्र रहते हुए संचार कौशल को शब्द बनाने का प्रयास करते रहना चाहिए। एक बेहतर संचार-कौशल के साथ वार्तालाप करना व्यक्ति के आत्मविश्वास को प्रदर्शित करता है। उपयुक्त शब्दों का चयन, शारीरिक हाव-भाव तथा संतुलित वाणी बेहतर संचार कौशल के आवश्यक अंग माने जाते हैं।
- वेशभूषाः हम उपर्युक्त खंड में सिविल सेवक द्वारा साक्षात्कार में अपनाई जाने वाली संभावित वेशभूषा का वर्णन कर चुके हैं। वेशभूषा के माध्यम से अभ्यर्थी के व्यक्तित्व की गंभीरता तथा उसके अनुशासन का पता लगाया जा सकता है।
- अपने कार्यों के प्रति उत्तरदायीः नियमित समय पर कार्यों को पूरा करना, अलग-अलग कार्यों के लिए विशिष्ट रणनीति का निर्माण करना तथा उत्तरदायित्व के साथ बेहतर परिणामों को प्राप्त करना किसी भी व्यक्ति के लिए आवश्यक माना जाता है।
- नेतृत्व तथा सामाजिक संगठन से जुड़ावः मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। सिविल सेवक अभ्यर्थी से भी यह अपेक्षा की जाती है कि वह चयन के पश्चात विभिन्न सरकारी विभागों की मिलने वाली जिम्मेदारी को सुचारू रूप से निभाने में सक्षम होगा। प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सिविल सेवक को अनेक बार प्रत्यक्ष रूप से जनता से संवाद करने का अवसर प्राप्त होता है। ऐसे में उसे नेतृत्व तथा सामाजिक संगठन की बेहतर जानकारी होनी चाहिए।
- व्यक्तित्व के अन्य महत्वपूर्ण गुणः एक अच्छे व्यक्तित्व वाले व्यक्ति में समस्याओं को बेहतर रूप से समाधान करने की अभिवृद्धि होती है। ऐसे व्यक्तियों में व्यक्तिगत ज्ञान तथा कौशल के माध्यम से व्यापक विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित हो जाती है जो उसे उचित निर्णय लेने में मदद करती है। इस प्रकार, एक सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थी को अपनी तैयारी की संपूर्ण प्रक्रिया में स्वयं के अंदर उपर्युक्त गुणों का विकास करने का प्रयास करते रहना चाहिए।
साक्षात्कार प्रक्रिया में कार्य-अनुभव की जानकारी किस स्तर तक लाभकारी होती है?
अनेक अभ्यर्थी किसी नौकरी अथवा रोजगार के साथ-साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे अभ्यर्थियों को संबंधित संगठन की कार्यप्रणाली, उसका उद्भव तथा देश के विकास में उसके योगदान की जानकारी रखनी चाहिए।
- अभ्यर्थियों को अपने साथ उक्त संगठन से अनापत्ति प्रमाण पत्र ले जाना चाहिए। यदि साक्षात्कार बोर्ड को अभ्यर्थी की कार्यशैली एवं उसके कार्य-अनुभव प्रभावित करने में सफल होते हैं तो इससे अभ्यर्थी को निश्चित ही साक्षात्कार में अधिक अंक प्राप्त होने करने में सहायता मिलेगी।
साक्षात्कार के दौरान क्या करना चाहिए?
साक्षात्कार की संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थी को अपने आप को प्रफुल्लित और जीवंत बनाए रखना होता है। साक्षात्कार की तैयारी के दौरान कुछ शारीरिक व्यायाम, ध्यान, योग, दौड़ना, टहलना आदि करने से सकारात्मक व्यक्तित्व के विकास में सहायता मिलती है।
- परीक्षार्थी द्वारा ऐसे लक्षणों की पहचान की जानी चाहिए जो एक अच्छे नौकरशाह से अपेक्षित होते हैं। अभ्यर्थी को ऐसे लक्षणों को अपने व्यक्तित्व में शामिल करने का प्रयास करना चाहि जिससे ये लक्षण साक्षात्कार में स्वाभाविक रूप से दिखाई दें।
- साक्षात्कार बोर्ड के समक्ष अपने उत्तर देते समय तर्कसंगत रहें और एक ऐसे व्यक्ति के रूप में सामने आने का प्रयास करें जो समस्या को हल करने की कोशिश करता है और नवीन सोच रखता है।
- मूल साक्षात्कार से पूर्व प्रत्येक भर्ती को 3-4 मॉक इंटरव्यू अवश्य देना चाहिए। प्रत्येक मॉक इंटरव्यू में उसी वेशभूषा में जाना चाहिए जिन्हें मूल साक्षात्कार में अपनाना हो।
- धरती के पास उसके वैकल्पिक विषय से संबंधित मानक पुस्तकों की एक सूची होनी चाहिए। इस प्रकार की पुस्तकों की जानकारी अभ्यर्थी को रखनी चाहिए।
- अपने दृष्टिकोण में विनम्र बने रहना चाहिए तथा यदि किसी कठिन प्रश्न में उलझ जाते हैं अथवा बोर्ड के सदस्यों के साथ मुश्किल स्थिति उत्पन्न होती है तो अभ्यर्थी द्वारा कानूनों तथा संवैधानिक प्रक्रियाओं को उत्तर देने का आधार बनाया जाना चाहिए।
- अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी के दौरान कुछ प्रमुख सामाजिक आर्थिक लेखकों विशेषकर गुरुचरण दास, रुचिर शर्मा, अभिजीत बनर्जी, रामचंद्र गुहा, एडम तोजे आदि की लिखी हुई पुस्तकें अवश्य पढ़नी चाहिए जो उन्हें साक्षात्कार में उत्तर देने में मदद कर सकें। समय के अभाव में परीक्षार्थी इनके कार्यों को इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के माध्यम से संक्षिप्त में भी पढ़ सकते हैं।
साक्षात्कार के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?
अपने DAF में ऐसी हॉबी तथा रुचियों का उल्लेख नहीं करना चाहिए जो गलत हो। यदि आप बोर्ड के समक्ष पकड़े जाते हैं तो इसका नकारात्मक प्रभाव आपके संपूर्ण साक्षात्कार पर पड़ सकता है।
- साक्षात्कार देते समय बोर्ड के समक्ष अपने शरीर तथा हावभाव पर अधिक ध्यान नहीं देना चाहिए। इससे आपका ध्यान भटक सकता है और आप बोर्ड के समक्ष नर्वस और बेचौन दिख सकते हैं।
- साक्षात्कार के दौरान यदि अध्यक्ष अथवा कोई सदस्य बाहर जाता है, तो घबराएं नहीं, आप शांत रहें और अपना साक्षात्कार बेहतर प्रदर्शन के साथ जारी रखें।
- अभ्यर्थियों को साक्षात्कार बोर्ड के समक्ष आदर्शवादी दृष्टिकोण और आदर्शवादी उत्तरों से बचने का प्रयास करना चाहिए। यह भी ध्यान रखें कि यदि बोर्ड के सदस्य आपके उत्तर में कोई अशुद्धि बताते हैं, तो जिद न करते हुए उसे स्वीकार कर लेना चाहिए। यहां तक कि यदि आप अपने साक्षात्कार की शुरुआत में ही कुछ सवालों के जवाब देने में विफल रहे हैं, तो भी अपने दायरे को बनाए रखें तथा सही प्रश्न आने की प्रतीक्षा करें।
- अभ्यर्थी को साक्षात्कार बोर्ड के समक्ष अधिक दोस्ताना व्यवहार नहीं दिखाना चाहिए। साथ ही, साक्षात्कार में अपने पूर्वाग्रहों विशेषकर जाति, संप्रदाय राजनीतिक झुकाव आधारित मान्यताओं को प्रदर्शित नहीं करना चाहिए। विवादास्पद मुद्दों के संदर्भ में परीक्षार्थी को अधिक कठोर रुख तथा अति-सामान्यीकरण से बचना चाहिए।
- अभ्यर्थियों को अपनी परिवार की खराब स्थिति तथा देश के पिछड़े क्षेत्र से आने जैसी बातों की चर्चा करके साक्षात्कार बोर्ड की सहानुभूति प्राप्त करने से बचना चाहिए। अपने अधिक से अधिक उत्तरों को विश्लेषणात्मक एवं सुविचारित रूप में रखना चाहिए जैसा कि एक नवोदित नौकरशाह से करने की अपेक्षा की जाती है।
- साक्षात्कार बोर्ड के समक्ष अभ्यर्थी को ऐसे किसी भी कोचिंग संस्थान का नाम लेने से बचना चाहिए जिसमें उसने वैकल्पिक विषय अथवा सामान्य अध्ययन की तैयारी की हो।
- अभ्यर्थियों के लिए या जान लेना अत्यंत आवश्यक है कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम है। वास्तव में यह मायने रखता है कि एक व्यक्ति उत्तर देने में कितना तार्किक है। इसलिए, भाषा में धाराप्रवाह न होने पर घबराना नहीं चाहिए। प्रत्येक प्रश्न पर उचित समय लेते हुए तर्कसंगत रूप से अपना उत्तर देना चाहिए।
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साक्षात्कार
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