Interview - क्या अभ्यर्थी को टेस्ट सीरीज जॉइन करनी चाहिए?

क्या अभ्यर्थी को टेस्ट सीरीज जॉइन करनी चाहिए?

(AIR)

टेस्ट सीरीज का महत्व

सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा दोनों में विभिन्न कोचिंग संस्थानों द्वारा जारी टेस्ट सीरीज तैयारी के स्तर को जांचने तथा परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अभ्यर्थी अपनी तैयारी के अनुसार उचित समय का निर्धारण करते हुए टेस्ट सीरीज ज्वाइन कर सकता है।

  • प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यर्थी चयनित अभ्यर्थियों के अनुभवों तथा सहयोगी छात्रों की सहायता से बेहतर टेस्ट सीरीज का चयन कर सकता है। यहां ध्यान रखा जाना आवश्यक है कि अभ्यर्थी को यह स्वयं ही निर्धारित करना होगा कि उसे प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्र अथवा CSAT के प्रश्न पत्र में से किस पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। सामान्य रूप से अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा के प्रथम प्रश्न पत्र अर्थात सामान्य अध्ययन की टेस्ट सीरीज तो करते हैं किंतु CSAT के प्रश्न पत्र की अवहेलना करते हैं। अनेक बार यह रणनीति कारगर नहीं होती है तथा अभ्यर्थी CSAT के प्रश्न पत्र को उत्तीर्ण नहीं कर पाता है।
  • वर्तमान खंड में, विश्लेषण का मुख्य आधार मुख्य परीक्षा हेतु आयोजित की जाने वाली टेस्ट सीरीज है।
  • मुख्य परीक्षा के लिए चलाई जाने वाली टेस्ट सीरीज अभ्यर्थियों को उनके उत्तर लेखन शैली के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कौन सी टेस्ट सीरीज अच्छी है?

प्रत्येक अभ्यर्थी का तैयारी का स्तर अलग अलग होता है। इसलिए उसे अपनी तैयारी के अनुसार टेस्ट सीरीज का चयन करना चाहिए। सामान्य रूप से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी हेतु नीचे वर्णित तीन प्रकार की टेस्ट सीरीज चलाई जाती हैं अभ्यर्थी को अपनी तैयारी तथा सुविधा अनुसार इनका चयन करना चाहिए।

  • विषय आधारित (Topic Bsaed) टेस्ट सीरीजः अभ्यर्थी को तैयारी के आरंभ में कुछ निश्चित टॉपिक पढ़ने के बाद पूर्ववर्ती प्रश्न-पत्रों की सहायता से लेखन का आरंभ करना चाहिए। विभिन्न संस्थानों द्वारा ऐसी टेस्ट सीरीज भी चलाई जाती हैं जो विषय अथवा टॉपिक आधारित होती हैं, अभ्यर्थी इनकी सहायता भी ले सकता है। उदाहरण के लिए अभ्यर्थी ने भूगोल अथवा इतिहास के कुछ टॉपिक तैयार कर लिए हैं तो आगे की तैयारी को और अधिक बेहतर रूप में बनाने के लिए आवश्यक है कि वह संबंधित टॉपिक्स पर कुछ प्रश्नों को हल करके देखे।
  • खंड-आधारित (Section Bsaed) टेस्ट सीरीजः कुछ कोचिंग संस्थान पाठ्यक्रम के विभिन्न खंडों के लिए अलग-अलग टेस्ट सीरीज जारी करते हैं। ऐसे अभ्यर्थी जो तैयारी के आरंभिक स्तर को पार कर चुके हैं तथा जिनका एक निश्चित पाठ्यक्रम तैयार हो चुका है वे खंड-आधारित टेस्ट सीरीज जॉइन कर सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि अभ्यर्थी ने भारतीय विरासत एवं संस्कृति, इतिहास अथवा भूगोल के संपूर्ण खंड को तैयार कर लिया है तो उसे इन खंडों से संबंधित प्रश्नों को हल करने का प्रयास करना चाहिए।
  • मॉक टेस्ट अथवा कंप्लीट टेस्ट सीरीज (Mock Test or Complete Test Series): जब अभ्यर्थी संपूर्ण पाठ्यक्रम को तैयार कर लेता है तो उसे इस प्रकार की टेस्ट सीरीज ज्वाइन करनी चाहिए। यहां यह बात ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि आरंभिक स्तर से ही किसी भी परीक्षार्थी को मॉक टेस्ट नहीं देने चाहिए। ऐसा करने से अभ्यर्थी का समय की हानि होती है। इससे अभ्यर्थी अपनी तैयारी का बेहतर अनुमान भी नहीं लगा पाता है। अतः जब तक अगर दी की तैयारी पूर्ण न हो जाए तब तक उसे कंप्लीट टेस्ट सीरीज का सहारा नहीं लेना चाहिए। सामान्य रूप से अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा को पास करने के पश्चात मुख्य परीक्षा से पूर्व इस प्रकार के मॉक टेस्ट का सहारा लेते हैं।

मुख्य परीक्षा के लिए टेस्ट सीरीज किस प्रकार आपकी मदद करेगी?

  • तैयारी का मूल्यांकन करने में सहायताः मुख्य परीक्षा के लिए टेस्ट सीरीज अभ्यर्थी को अपनी तैयारी का मूल्यांकन करने में मदद करती है। सामान्य रूप से टेस्ट सीरीज की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच किसी विषय विशेषज्ञ द्वारा की जाती है। इससे अभ्यर्थी को अपनी वास्तविक कमियों का पता चलता है जिन्हें वह समय से दूर कर सकतें है।
  • उत्तर लेखन की उत्कृष्टता में वृद्धिः टेस्ट सीरीज की संचालन प्रक्रिया निश्चित एवं समयबद्ध रूप में होती है। अभ्यर्थी को टेस्ट सीरीज के माध्यम से निश्चित समय पर उत्तर लेखन का अभ्यास करने में सहायता मिलती है। सामान्य रूप से टेस्ट सीरीज ऑफलाइन विधि से आयोजित की जाती हैं। जहां अभ्यर्थियों को परीक्षा उपयोगी माहौल मिलता है।
  • समय प्रबंधन के लिए आवश्यकः टेस्ट सीरीज में भी अभ्यर्थी को उतना ही समय दिया जाता है जितना उसे वास्तविक मुख्य परीक्षा में मिलता है। ऐसी स्थिति में टेस्ट सीरीज के की सहायता से अभ्यर्थी उत्तर को निश्चित समय में लिखने में अभ्यस्त हो जाता है।
  • भौतिक वातावरण में ही टेस्ट लिखना चाहिएः वर्तमान समय में ऑनलाइन शिक्षा के महत्व में वृद्धि होने के पश्चात यह देखा गया है कि अनेक कोचिंग संस्थान प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा हेतु ऑनलाइन टेस्ट सीरीज उपलब्ध करा रहे हैं। चूँकि, संघ लोक सेवा आयोग ऑफलाइन मोड में ही दोनों परीक्षाओं का आयोजन करता है। अतः, अभ्यर्थियों को ऐसी टेस्ट सीरीज ही ज्वाइन करनी चाहिए जो भौतिक वातावरण अथवा ऑफलाइन मोड में हो।

मुख्य परीक्षा के लेखन अभ्यास हेतु अन्य किन बातों का धयान रखा जाना चाहिए?

निश्चित समय पर ही टेस्ट सीरीज जॉइन करें: अनेक अभ्यर्थी इस भ्रम में तैयारी के आरंभ से ही उत्तर लेखन हेतु टेस्ट सीरीज ज्वाइन कर लेते हैं। पाठ्यक्रम की बेहतर समझ तथा प्रश्नपत्रों की प्रकृति को समझे बिना उत्तर लेखन की यह प्रक्रिया अभ्यर्थी को हतोत्साहित करती है तथा सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में अभ्यर्थी बेहतर महसूस नहीं करते हैं।

टेस्ट सीरीज ज्वाइन करने की बाध्यताः ऐसे अभ्यर्थी जो नियमित रूप से प्रश्नों की फ्रेमिंग करते हैं अथवा अपने स्तर से ही उत्तर लेखन का अभ्यास निरंतर रूप से करते हैं। उनके लिए किसी भी टेस्ट सीरीज को ज्वाइन करना अनिवार्य नहीं होता है। इन अभ्यर्थियों के लिए आवश्यक यह है कि वह निरंतर रूप से पूर्ववर्ती प्रश्नपत्रों का मूल्यांकन करें तथा उसी अनुसार अपनी तैयारी को आगे बढ़ाएं।

निर्धारित तिथि पर ही टेस्ट लिखनाः लेखन अभ्यास के क्रम में एक सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अभ्यर्थी आरंभ में तो जोश के साथ टेस्ट सीरीज ज्वाइन कर लेता है। किंतु, तैयारी के उचित अभाव में हतोत्साहित होकर दो-तीन टेस्ट के पश्चात वे अन्य टेस्ट निर्धारित तिथि पर नहीं लिखते है। यह एक विलंब कारी प्रवृत्ति है तथा अभ्यर्थी की सफ़लता के मार्ग में बाधक बनती है।

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