Interview - सफ़लता कोई आश्चर्य नहीं है
सफ़लता कोई आश्चर्य नहीं है
(AIR)
यह कठिन परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति एवं सकारात्मक दृष्टिकोण की परिणति है
किसी भी व्यक्ति का जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफल होना इस बात पर निर्भर करता है कि वह वास्तविकता एवं दृढ़ता के किस तल पर जाकर सपने देखता है। वैसे तो हम प्रतिक्षण और प्रतिदिन किसी न किसी लक्ष्य को निर्धारित करते हैं और उसे पूरा करने की दिशा में प्रयास करते हैं। किंतु, महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या हमारे द्वारा प्रतिदिन किए जाने वाले कार्य किसी विशेष सपने को पूरा करने की प्रक्रिया का भाग हैं अथवा नहीं।
सपनों को देखने तथा उन्हें पूरा करने में एक विशिष्ट अंतर यही है कि दृढ़ व्यक्ति, निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने तक एक विशिष्ट अभिप्रेरणा से ओतप्रोत रहता है और उसके द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक कार्य में यह अभिप्रेरणा उसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए मार्गदर्शित करती है। सिविल सेवा में जाना तथा एक प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश की सेवा करना गर्व तथा सम्मान की बात है। देश की विकास प्रक्रिया में सिविल सेवाओं की बढ़ती प्रासंगिकता तथा लंबे समय से इनके योगदान के कारण इन सेवाओं को रोजगार तथा कैरियर के उद्देश्य से भी बेहतर माना जाता है। अपने स्कूली तथा कॉलेज जीवन के समय भारत के अनेक छात्र सिविल सेवक बनने का सपना देखते हैं। इनमें से कुछ छात्र अपनी क्षमता, प्राप्त मार्गदर्शन तथा उपलब्ध संसाधनों के आधार पर इस परीक्षा में सफल हो पाते हैं।
अध्ययन अथवा तैयारी की प्रक्रिया में एक सिविल सेवा के अभ्यर्थी को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। प्रत्येक वर्ष इस परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों के साक्षात्कार तथा मार्गदर्शन करने वाले अन्य विशेषज्ञों के सुझावों को आधार बनाते हुए परीक्षार्थी अपनी परीक्षा की रणनीति बनाने का प्रयास करता है। इस परीक्षा की खास विशेषता यही है कि इसमें सफल होने के लिए कोई भी निश्चित पैमाना अथवा मानक रणनीति नहीं है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग परिवेश से आने वाले परीक्षार्थियों के लिए एक निश्चित एवं विशिष्ट रणनीति का निर्माण करना चुनौतीपूर्ण कार्य होता है।
सामान्य रूप से एक अभ्यर्थी को आरंभिक स्तर पर ही अनेक ऐसे प्रश्नों का सामना करना पड़ता है, जिनका उत्तर प्राप्त होने पर उसे आगे बढ़ने में सहायता मिल सकती है। ये प्रश्न हैं-
- सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कब आरंभ करनी चाहिए?
- इस परीक्षा में सफल होने के लिए नियमित रूप से कितनी देर पढ़ाई की जानी चाहिए?
- पाठ्यक्रम का स्वरूप क्या है?
- पाठ्यक्रम में शामिल विभिन्न विषयों को पूरा करने के लिए किन मानक पुस्तकों को आधार बनाया जाना चाहिए?
- NCERT पुस्तकों से शुरुआत करनी चाहिए या नहीं?
- NCERT पुस्तकों को पढ़ने की रणनीति क्या होनी चाहिए?
- प्रारंभिक परीक्षा तथा मुख्य परीक्षा की रणनीति एक हो अथवा इन्हें अलग-अलग समय पर तैयार किया जाना चाहिए?
- उत्तर लेखन कब आरंभ करना चाहिए?
- साक्षात्कार की तैयारी किस प्रकार की जाए? आदि।
अभ्यर्थी के मन में उठने वाले प्रश्नों की व्यापकता तथा इनकी गंभीरता एक सामान्य परीक्षार्थी को भ्रम की स्थिति में ले जाने के लिए पर्याप्त है। बाजार में उपलब्ध अलग-अलग मार्गदर्शन तथा विविध प्रकार की अध्ययन सामग्री एक तरह से चुनौतियों में वृद्धि करने का ही कार्य करते हैं। इन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बात यह निकलकर सामने आती है कि सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने के लिए एक उचित रणनीति क्या होनी चाहिए? अथवा, परीक्षार्थी को अपनी अध्ययन योजना किस प्रकार निर्मित करनी चाहिए जिससे वह भटकाव के बिना सिविल सेवा परीक्षा की दीर्घकालिक प्रक्रिया को पार करते हुए परीक्षा में सफल हो सके? परीक्षा की रणनीति के निर्धारण से पूर्व परीक्षार्थी को यह समझ लेना चाहिए कि वास्तव में रणनीति किसे कहते हैं अथवा वे कौन से अवयव हैं जो सिविल सेवा परीक्षा की रणनीति में शामिल किए जाने चाहिए। रणनीति के अवयवों का निर्धारण हमारे द्वारा प्रस्तुत किये गए इस विशेष खंड में वर्णित किए गए प्रश्नों के आधार पर किया जा सकता है। प्रत्येक प्रश्न का आधार अत्यंत व्यापक है और यदि परीक्षार्थी अपनी तैयारी से पूर्व इन प्रश्नों के स्वरूप को समझ लेता है तथा इनके उत्तर प्राप्त कर लेता है तो यह कहा जा सकता है कि वह अभ्यर्थी सिविल सेवा परीक्षा में निश्चित एवं कम समय में सफल हो सकता है।
परीक्षा के तीन चरणीय स्वरूप तथा वर्ष भर चलने वाली प्रक्रिया के दौरान किसी भी अभ्यर्थी के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह होती है कि वह धैर्यपूर्वक अपना अध्ययन जारी रखे। पाठ्यक्रम की गंभीरता तथा विशालता के आधार पर यह कहा जा सकता है कि इस परीक्षा में सफल होने के लिए व्यक्ति में धैर्य एवं सकारात्मक दृष्टिकोण का होना अत्यंत आवश्यक है। धैर्य इस परीक्षा में अभ्यर्थी को स्वयं के अध्ययन स्तर का मूल्यांकन करने तथा सकारात्मक दृष्टिकोण अपनी सफलता के प्रति आश्वस्त बने रहने में मदद करते हैं। अमेरिकी लेखक तथा बिजनेसमैन ‘जिग जिग्लार’ का एक महत्वपूर्ण कथन है- फ्योग्यता नहीं बल्कि आपका दृष्टिकोण जीवन में आपकी ऊंचाइयों को निर्धारित करेगा।" अतः एक सिविल सेवा के अभ्यर्थी को अपने दृष्टिकोण में अत्यंत स्पष्ट रहना चाहिए तथा परीक्षा की संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान सकारात्मक बने रहना चाहिए। इसके साथ ही यह भी ध्यातव्य है कि जीवन में निर्धारित किए गए किसी भी लक्ष्य को पूरा करने के लिए कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। सफलता की चाहत रखने वाले लोगों को अभिप्रेरित करने वाली यह उक्ति कि "सफलता का कोई भी शॉर्टकट नहीं होता" सिविल सेवा की तैयारी के संदर्भ में सटीक बैठती है।
एक अभ्यर्थी को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि इस परीक्षा के लिए जितना महत्वपूर्ण यह पता लगाना है कि फ्क्या पढ़ा जाना चाहिएय् उतना ही महत्वपूर्ण यह भी पता करना है कि उसे फ्क्या नहीं पढ़ना चाहिएय्। अध्ययन सामग्री के दृष्टिकोण से इस प्रकार का चयन ‘स्मार्ट स्टडी’ का अभिन्न अंग माना जाता है। कठिन परिश्रम के साथ-साथ ‘स्मार्ट स्टडी’ भी एक सिविल सेवा के अभ्यर्थी के लिए आवश्यक होती है। इससे उसे समय प्रबंधन में मदद मिलती है तथा वह इस मर्म को बेहतर रूप से समझ जाता है कि इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत सारी पुस्तकों को पढ़ने से अधिक बेहतर है कि कुछ मानक पुस्तकों को बार-बार बार पढ़ा जाए। चयनात्मक अध्ययन सामग्री से समय प्रबंधन तथा अध्ययन को गुणवत्तापूर्ण बनाने में सहायता मिलती है। पुनः यह कहना अधिक सार्थक होगा कि एक अभ्यर्थी द्वारा परीक्षा की तैयारी के दौरान अध्ययन की मात्र (अधिक पढ़ने) की तुलना में अध्ययन की गुणवत्ता को महत्व दिया जाना चाहिए।
गुणवत्तापूर्ण अध्ययन से अभ्यर्थी में आरंभिक स्तर से ही विषयों की संकल्पनात्मक एवं आधारिक समझ विकसित हो सकती है। तैयारी की संपूर्ण प्रक्रिया में अध्ययन का दृष्टिकोण इस प्रकार होना चाहिए, जिससे एक परीक्षार्थी में समालोचनात्मक विचार उत्पन्न हो सकें तथा उसमें विश्लेषणात्मक क्षमता का विकास हो सके। ऐसे गुणों के विकास से अभ्यर्थी को मुख्य परीक्षा, साक्षात्कार तथा चयन के पश्चात सेवा के दौरान कार्य निष्पादन में मदद मिलेगी। विभिन्न पृष्ठभूमियों से आने वाले परीक्षार्थी अलग-अलग राजनैतिक एवं सामाजिक पूर्वाग्रहों से प्रेरित होते हैं। अभ्यर्थी को तैयारी के दौरान सदैव यह प्रयास करना चाहिए कि वह उपर्युक्त पूर्वाग्रहों का त्याग कर सके। प्रत्येक विवाद तथा राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में अभ्यर्थी को एक संतुलित दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए, जैसा कि एक सिविल सेवक अथवा प्रशासनिक अधिकारी से अपेक्षा की जाती है। अनेक विशेषज्ञों के अनुभवों से यह बात सिद्ध होती है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी एक योग्य तथा जागरूक नागरिक बनने में भी सहायता करती है। तैयारी की गंभीरता अथवा इसके बोझिलपन से बचने के लिए परीक्षार्थी को नियमित रूप से अपना स्व-मूल्यांकन करना चाहिए। तैयारी की संपूर्ण प्रक्रिया में अभ्यर्थी को अपनी रुचियों का भी ध्यान रखना चाहिए तथा लगातार ऐसे प्रयास करते रहने चाहिए, जिससे उसमें जीवंतता बनी रहे। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी व्यावसायिक कुशलता के आधार पर एक दायित्व के रूप में की जानी चाहिए। संक्षेप में कहा जाए तो उचित मार्गदर्शन, उपयुक्त रणनीति, चयनात्मक अध्ययन सामग्री, धैर्य, लगन तथा कठोर परिश्रम इस परीक्षा की तैयारी के लिए अनिवार्य पहलू हैं। सजग तथा सतत प्रयासों के साथ नियमित रूप से निर्धारित किए जाने वाले लक्ष्यों को पूरा करके अंततः सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
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