Interview - तैयारी की रणनीति क्या हो?

तैयारी की रणनीति क्या हो?

(AIR)

"सफ़लता का कोई रहस्य नहीं हैं। यह तैयारी, कड़ी मेहनत और
असफ़लता से सीखने का परिणाम है।" - कॉलिन पॉवेल

परीक्षा की तीन चरणीय प्रकृति

जैसा हमने देखा है कि सिविल सेवा परीक्षा की संपूर्ण प्रक्रिया प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार के रूप में 3 चरणों में संपन्न होती है।

  • प्रारंभिक परीक्षाः प्रारंभिक परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रकृति के दो प्रश्न पत्र (प्रत्येक में 200 अंक) होते हैं। प्रथम प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन से संबंधित होता है। इसमें इतिहास, भूगोल, आर्थिकी, विज्ञान एवं तकनीकी तथा समसामयिक घटनाक्रम पर आधारित 100 प्रश्न आते हैं। वहीं दूसरे प्रश्नपत्र जिसे सीसैट (C-SAT) के रूप में भी जाना जाता है- में सामान्य गणित, रिजनिंग, तथा परिच्छेद आधारित 80 प्रश्न पूछे जाते हैं। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा इन दोनों प्रश्न पत्रों को हल करने के लिए अलग-अलग 2-2 घंटे प्रदान किए जाते हैं।
    • सीटों की कुल संख्या के सापेक्ष परीक्षार्थियों की अधिक संख्या के कारण प्रारंभिक परीक्षा को पास करना एक प्रमुख चुनौती है। पाठ्यक्रम के अनुसार समसामयिक विषयों के साथ साथ सभी खंडों का के गहन एवं विस्तृत अध्ययन के माध्यम सहित प्रारंभिक परीक्षा को पास किया जा सकता है।
  • मुख्य परीक्षाः मुख्य परीक्षा लिखित रूप में आयोजित की जाती है, जिसमें एक परीक्षार्थी कुल 9 प्रश्नपत्रों को हल करता है। इनमें से अनिवार्य अंग्रेजी तथा एक क्षेत्रीय भाषा के साथ-साथ निबंध का एक प्रश्न पत्र होता है। 4 प्रश्न पर सामान्य अध्ययन के होते हैं तथा दो प्रश्न पत्र वैकल्पिक विषय से संबंधित होते हैं।
    • मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए परीक्षार्थी के लिए विश्लेषणात्मक पद्धति के माध्यम से अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। तैयारी के आरंभ से ही लेखन कला का अभ्यास करना महत्वपूर्ण होता है।
  • साक्षात्कारः इसे व्यक्तित्व परीक्षण के रूप में भी जाना जाता है। साक्षात्कार में अभ्यर्थी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह एक सिविल सेवक के रूप में कर्तव्यनिष्ठ रहे तथा अपने आसपास होने वाली घटनाओं के प्रति जागरूक रहे। चूँकि, चयन की अंतिम प्रक्रिया में केवल मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार के अंक जोड़े जाते हैं। अतः अभ्यर्थी को तैयारी के आरंभ से ही परीक्षा के इन दोनों चरणों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

क्या किया जाना चाहिए?

दीर्घकालिक रणनीतिः यदि अभ्यर्थी के पास पर्याप्त समय है तो परीक्षा में बैठने की जल्दबाजी न करते हुए उसे 2-3 वर्षों की दीर्घकालिक रणनीति के अनुसार तैयारी आरंभ करनी चाहिए।

वैकल्पिक विषय तथा मुख्य परीक्षा को अधिक महत्वः परीक्षार्थी द्वारा आरंभ से ही वैकल्पिक विषय को अधिक महत्व प्रदान किया जाना चाहिए। साथ ही साथ, मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम (चारों प्रश्नपत्रों) का गहन अध्ययन करके यह स्पष्ट समझ विकसित करनी चाहिए।

पूर्वर्ती प्रश्नपत्रों का गहन विश्लेषणः सिविल सेवा परीक्षा का एक निश्चित पाठ्यक्रम है तथा परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न इसी पाठ्यक्रम से संबंधित होते हैं। अतः आरंभिक स्तर से ही परीक्षार्थियों के लिए पूर्ववर्ती प्रश्नपत्रों का अवलोकन अनिवार्य होता है।

परीक्षा के तीनों चरणों की एक साथ तैयारीः प्रारंभिक परीक्षा मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार की पृथक रूप से तैयारी करना एक बोझिल कार्य हो सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि उपर्युक्त तीनों चरणों की तैयारी एक साथ की जानी चाहिए। अंतिम मेरिट लिस्ट में मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार के अंकों को शामिल किया जाता है। अतः तैयारी की संपूर्ण प्रक्रिया में अभ्यर्थी का इन्हीं दोनों खंडों पर विशेष ध्यान होना चाहिए।

अन्य बातें: अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा का अध्ययन करते समय प्रिलिम्स के बिंदुओं को अलग से नोट का हाईलाइट कर सकते हैं। किंतु, यदि अभ्यर्थी के पास उम्र के कारण प्रयास सीमित तथा अनिवार्य हैं तो उसे आरंभिक स्तर से ही प्रारंभिक परीक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

ऑनलाइन बनाम ऑफ़लाइन कोचिंग की दुविधा क्या है?

वर्तमान समय में इंटरनेट तथा कंप्यूटर सुविधाओं के कारण लगभग सभी कोचिंग संस्थान ऑनलाइन तथा ऑफ़लाइन अध्ययन सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। अभ्यर्थी अपनी आर्थिक स्थिति, अध्ययन क्षमता तथा परीक्षा की समझ के अनुसार इनमें से उपयुक्त माध्यम का चुनाव कर सकते हैं।

  • यदि अभ्यर्थी के निवास अथवा कार्यस्थल पर अध्ययन का अनुकूल माहौल है तो वह दिल्ली, इलाहाबाद, जयपुर तथा भोपाल जैसे स्थानों पर जाकर अध्ययन करने तथा अतिरिक्त खर्चे से बच सकतें है।

पढ़ने के लिए दिन की शुरुआत किस प्रकार की जाए?

कठिन विषयों के साथ आरंभः सुबह के समय अभ्यर्थी का दिमाग शांत एवं स्थाई रहता है अतः सिविल सेवक अभ्यर्थी अपने दिन का आरंभ एक ऐसे विषय से कर सकते है जो उसके लिए कठिन हो। उदाहरण के लिए, कई अभ्यर्थी सुबह के समय वैकल्पिक विषय के अध्ययन को उपयुक्त मानते हैं। उपर्युक्त विषयों का चयन अभ्यर्थी की रुचि के आधार पर तय होना चाहिए।

दिन अथवा रात में पढ़ाईः यह आवश्यक नहीं है कि अभ्यर्थी दिन में ही पढ़ाई करे, यदि वे रात में पढ़ाई करके बेहतर प्रदर्शन कर सकते है तो उसे अपनी समय-सारणी का निर्माण उसी प्रकार से करना चाहिए।

समय-सारणी का नियमित रूप से पालनः पढ़ाई का समय कोई भी हो किंतु पाठ्यक्रम का पूर्ण रूप से अध्ययन करने के लिए यह आवश्यक है यह अभ्यर्थी अपने द्वारा बनाई गई समय-सारणी का नियमित रूप से पालन करे। एक लंबी रणनीति के तहत प्रतिदिन 5-6 घंटे की नियमित पढ़ाई करके सिविल सेवा में सफलता अर्जित की जा सकती है।

स्व-अध्ययन तथा स्मार्ट-अध्ययनः स्व-अध्ययन तथा स्मार्ट-अध्ययन किसी भी परीक्षा में सफलता के आवश्यक तत्व माने जाते हैं। अतः अभ्यर्थी के लिए आवश्यक है कि वह अपनी क्षमताओं पर विश्वास करके सफलता प्राप्ति तक अध्ययन को नियमित रूप से जारी रखे।

पाठ्यक्रम के स्थाई-भाग (Static Portion) में किस प्रकार बेहतर करें?

सामान्य रूप से यह देखा जाता है कि स्थाई खंड (Static Portion) में प्रायोगिक (Applied) खंड की तुलना में भटकाव की संभावना अधिक रहती है।

उदाहरण के लिए- जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन तथा प्रदूषण जैसी अवधारणाएं पाठ्यक्रम के प्रायोगिक (Applied) खंड से संबंधित हैं तथा ये समसामयिक घटनाक्रम पर आधारित होते हैं। इस प्रकार की अवधारणाओं का एक बार अध्ययन करने के पश्चात करंट अफेयर्स के साथ इन्हें अद्यतन (Update) करने की आवश्यकता होती है।

  • वहीं दूसरी तरफ, स्थाई खंड (Static Portion) का अध्ययन करते समय अभ्यर्थी को कुछ नए टर्म, नई शब्दावलियाँ अथवा नए सिद्धांतों के बारे में पता चलता है। इस अवस्था में अभ्यर्थी अनेक बार भटकाव की स्थिति में आकर पाठ्यक्रम के बाहर आने वाले उपर्युक्त सिद्धांतों एवं शब्दावलियों की व्यापक जांच पड़ताल करने लगते है। उदाहरण के लिए- पर्यावरण में कार्बन की अवधारणा का अध्ययन करते समय कार्बन चक्र का भी अध्ययन करना पड़ता है जिसमें समुद्रों का विशेष महत्व होता है। किंतु, यदि अभ्यर्थी समुद्र की संपूर्ण क्रिया विधि का अध्ययन करता है तो इससे अनावश्यक रुप से समय खर्च होता है।
  • पाठ्यक्रम तथा पूर्ववर्ती प्रश्न पत्रों के अध्ययन के माध्यम से हमें यह पता चलता है कि ऐसे कौन से स्थाई खंड (Static Portion) हैं जहां से प्रश्नों के आने की संभावना सर्वाधिक रहती है।
  • ऐसे खंडों का विस्तृत अध्ययन करके उन पर मानक पाठ्य पुस्तकों (Standard Books) से नोट्स तैयार करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इन खंडों पर केवल एक बार समय देने की आवश्यकता होती है तथा बार-बार रिवीजन के माध्यम से अभ्यर्थी उन पर अपनी बेहतर पकड़ बना सकता है।
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