अमेरिका–सऊदी परमाणु समझौता: ऊर्जा सहयोग या परमाणु प्रसार का खतरा?

?>

अमेरिका और सऊदी अरब ने 30 वर्षीय असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसे "शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग" बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में सऊदी अरब की परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता बढ़ सकती है।

समझौते की प्रमुख बातें

  • समझौते के तहत अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में भागीदारी मिलेगी। इसके साथ एक द्विपक्षीय सुरक्षा (Safeguards) समझौता भी हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब को घरेलू स्तर पर यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की अनुमति मिल सकती है। यद्यपि इसका उद्देश्य बिजली उत्पादन है, लेकिन यही तकनीक हथियार-ग्रेड ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें

वार्षिक सदस्यता लें मात्र 600 में और पाएं...
पत्रिका की मासिक सामग्री, साथ ही पत्रिका में 2018 से अब तक प्रकाशित सामग्री।
प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा पर अध्ययन सामग्री, मॉक टेस्ट पेपर, हल प्रश्न-पत्र आदि।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित चुनिंदा पुस्तकों का ई-संस्करण।
पप्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के चुनिंदा विषयों पर वीडियो क्लासेज़।
क्रॉनिकल द्वारा प्रकाशित पुस्तकों पर अतिरिक्त छूट।

नियमित स्तंभ