जम्मू एवं कश्मीर रोशनी अधिनियम विवाद तथा निरस्तीकरण
जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन ने हाल ही में 2001 के रोशनी अधिनियम के कथित लाभार्थियों की सूची जारी की। रोशनी अधिनियम को अब रद्द कर दिया गया है, इस कानून ने अधिशुल्क के भुगतान के बदले राज्य की भूमि पर अनधिकृत कब्जाधारियों को उसके स्वामित्व का अधिकार प्रदान किया था।
रोशनी अधिनियम के कथित लाभार्थियों की सूची में राजनीतिक नेता और नौकरशाह शामिल हैं। जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय के हालिया आदेश के बाद प्रशासन ने इस अधिनियम को रद्द कर दिया था।
रोशनी अधिनियम क्या था?
- इसे औपचारिक रूप से ‘जम्मू एवं कश्मीर राज्य भूमि (अधिभोगियों के स्वामित्व का अधिकार) ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार कानून को और सशक्त किया
- 2 राष्ट्रमंडल देशों के लोक सभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन
- 3 जलज आजीविका केंद्र
- 4 विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली का उद्घाटन
- 5 भारतीय थल सेना और IISc के बीच समझौता (MoU)
- 6 लंबाडी समुदाय
- 7 UIDAI ने जारी किया आधार शुभंकर: उदय
- 8 86वां अखिल भारतीय अधिष्ठान अधिकारियों का सम्मेलन
- 9 राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (NCDS)
- 10 भारत के लोकपाल का स्थापना दिवस
- 1 विशेष श्रेणी का दर्जा तथा वर्तमान में इसकी व्यावहारिकता
- 2 नेशनल इंटरलिंकिंग ऑफ़ रिवर अथॉरिटी
- 3 1996 का पेसा कानूनः महत्व एवं मुद्दे
- 4 नौकरशाही में लेटरल एंट्री: पक्ष-विपक्ष
- 5 भारत का 72वां संविधान दिवस
- 6 कानूनों को निरस्त करने की प्रक्रिया
- 7 सीबीआई और ईडी के निदेशकों के कार्यकाल का विस्तार
- 8 विधि के शासन के लिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता अनिवार्य
- 9 ईडब्ल्यूएस आरक्षण के मानदंडों की समीक्षा हेतु समिति गठित

