डिजिटल लेंडिंग हेतु कार्य समूह का गठन
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और मोबाइल ऐप आदि के माध्यम से डिजिटल ऋण (digital lending) देने के संबंध में विभिन्न मुद्दों पर विचार करने के लिए एक कार्य समूह का गठन किया
- यह कार्य समूह विनियमित वित्तीय क्षेत्र के साथ-साथ अनियमित सेवा प्रदाताओं द्वारा डिजिटल ऋण गतिविधियों के सभी पहलुओं का अध्ययन करेगा।
- कार्य समूह का गठन इस उद्देश्य से किया गया है कि है कि एक उचित नियामक दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जाए। यह समूह 3 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
विचारार्थ विषय
- रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित संस्थाओं में डिजिटल उधार गतिविधियों का मूल्यांकन करना ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: आत्मनिर्भर चिप इकोसिस्टम की ओर
- 2 EPF-EPS योजनाएँ 2026: सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव
- 3 AI और वित्तीय साइबर सुरक्षा: RBI-SEBI की नई पहल
- 4 भारत में कौशल विकास: शिक्षा–रोजगार के बीच बढ़ता अंतर
- 5 53वीं PRAGATI बैठक: बुनियादी ढाँचा, AgriStack और साइबर फ्रॉड
- 6 NSE IPO: भारत के पूंजी बाजार में नया अध्याय
- 7 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का विलय: स्थानीय चरित्र पर सवाल
- 8 भारत के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में बड़ा विस्तार
- 9 असंगठित अर्थव्यवस्था: जिला-स्तरीय तस्वीर
- 10 भारत–EU FTA: स्टील के लिए टैरिफ-रेट कोटा

