Interview - अधययन सामग्री का चयन

अधययन सामग्री का चयन

(AIR)

"अगर आप मुझे पेड़ काटने के लिए छः घंटे का वक्त देते हैं तो मैं अपने
पहले चार घंटे कुल्हाड़ी की धार तेज करने में लगाऊंगा।" -अब्राहम लिंकन

एक अच्छा इंसान बनने के लिए अच्छे व्यक्तित्व का होना आवश्यक माना जाता है। इसी प्रकार अच्छे व्यक्तित्व के लिए बेहतर पुस्तकों का अध्ययन अनिवार्य होता है। सिविल सेवा परीक्षा के संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है कि अभ्यर्थी अध्ययन के लिए संदर्भ पुस्तकों (Reference Books) का चयन अत्यंत सावधानी से करे। उचित पाठ्य पुस्तकों का चुनाव करना ठीक उसी प्रकार महत्वपूर्ण है जैसे किसी औद्योगिक परियोजना (Industrial Project) को सफलतापूर्वक पूरा करने की प्रक्रिया में उसकी डिजाइन के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। संदर्भ पुस्तकों के चयन में इस बात का सदैव ध्यान रखा जाना चाहिए कि चयनित पुस्तकें पाठ्यक्रम के अनुरूप हो।

  • उदाहरण के लिए NCERT अथवा दूसरी पुस्तकें सिविल सेवा परीक्षार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नहीं लिखी जाती हैं, इनका अध्ययन करने के दौरान अभ्यर्थी को पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों एवं पाठ्यक्रम के आधार पर यह चयन करना होता है कि इन पुस्तकों के किन खंडों अथवा अध्यायों का अध्ययन किया जाना चाहिए। इस परीक्षा के लिए आवश्यक मानक पुस्तकों की सूची पिछले वर्षों में उच्च स्थान प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के साक्षात्कार अथवा अन्य स्रोतों से प्राप्त की जा सकती है।
  • फिर भी, परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए पाठ्य पुस्तकों की उपयुक्त मानक सूची नीचे प्रदान की गई है जिनका अध्ययन किया जा सकता है।

अध्ययन के महत्वपूर्ण स्रोत क्या हैं?

वे कौन से महत्वपूर्ण सरकारी संसाधन हैं जिन पर एक उम्मीदवार तैयारी करते समय भरोसा कर सकता है?

  • महत्वपूर्ण प्रकाशनः केंद्र तथा राज्य सरकारें प्रत्येक वित्तीय वर्ष अथवा सामान्य वर्ष में अनेक रिपोर्ट, अध्यादेश तथा पत्रिका में प्रकाशित करती हैं। केंद्र सरकार द्वारा प्रकाशित आर्थिक सर्वेक्षण, बजट, प्रशासनिक सुधार आयोग की रिपोर्ट, विभिन्न योजनाओं के संदर्भ में जारी अधिदेश, तथा अध्यादेश एवं संशोधित अधिनियम के संदर्भ में परीक्षार्थी की जानकारी का अद्यतन होना अत्यंत आवश्यक है।
  • अध्ययन विधिः उपर्युक्त का अध्ययन करते समय अभ्यर्थी के लिए किसी भी रिपोर्ट अथवा बिल का पूर्णरूपेण अध्ययन करना आवश्यक नहीं होता है।
  • स्मार्ट स्टडी के माध्यम से अभ्यर्थी को यह पता करना होगा कि वह किसी भी रिपोर्ट के किस भाग का अध्ययन अधिक गहराई से करे? विशेषज्ञ यह बल देते हैं कि अभ्यर्थी द्वारा सरकारी प्रकाशनों के उद्देश्यों (Objectives), पूर्वकथन (Preface) तथा मुख्य निष्कर्षों (Key Findings) का अध्ययन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।
  • नोट्स में शामिल करनाः उपर्युक्त का अध्ययन करके अभ्यर्थी अपने नोट्स तैयार कर सकता है अथवा पहले से तैयार नोट्स में इनकी महत्वपूर्ण बातों को शामिल कर सकता है। इससे वर्ष भर चलने वाली तैयारी की प्रक्रिया में अभ्यर्थी को सरकार द्वारा उठाए जाने वाले प्रत्येक कदम से अवगत रहने में सहायता मिलेगी।

प्रासंगिक पत्रिकाएं क्या हैं?

पत्रिकाओं का चयनः प्रासंगिक पत्रिकाओं का चयन करते समय अभ्यर्थी के लिए यह ध्यान रखा जाना आवश्यक है कि तैयारी आरंभ करने के दौरान उसका स्तर क्या है? यदि अभ्यर्थी एडवांस स्तर पर अपनी तैयारी को आरंभ करता है तो उसे ऐसी पत्रिकाओं का चयन करना चाहिए जहां से प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

मानक पत्रिकाएं: अभ्यर्थी किसी भी स्तर पर ‘सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल’ मैगजीन को अपनी तैयारी में शामिल कर सकते है। इस मैगजीन के प्रत्येक खंड को सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम तथा पूर्ववर्ती प्रश्नों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है। यही कारण है कि पिछले लगभग 3 दशकों से यह मैगजीन अभ्यर्थियों के बीच में प्रासंगिक बनी हुई है।

  • इसी प्रकार, ‘योजना’ तथा ‘कुरुक्षेत्र’ जैसी पत्रिकाएं भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। प्रत्येक महीने प्रकाशित होने वाली इन पत्रिकाओं में किसी विशेष प्रासंगिक मुद्दे को आधार बनाया जाता है तथा संबंधित मुद्दे को ध्यान में रखते हुए व्यापक जानकारी प्रदान की जाती है। संक्षेप में, पाठ्यक्रम तथा परीक्षा के लिए प्रासंगिकता को देखते हुए ‘सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल’ मैगजीन जबकि विषय की गहनता के संदर्भ में ‘योजना’ एवं ‘कुरुक्षेत्र’ पत्रिकाएं महत्वपूर्ण हैं।

समाचार पत्र कैसे पढ़ें?

  • समाचार पत्रों का महत्वः सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले परीक्षार्थियों के लिए समाचार पत्र पढ़ना अत्यंत आवश्यक होता है। कोई भी ऐसे मानक समाचार पत्र को आधार बनाया जा सकता है जिसमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों को व्यवस्थित रूप से कवर किया जाता हो, साथ ही उसमें सरकारी योजनाओं, नीतियों तथा प्रचलित मुद्दों का विश्लेषण शामिल हो।
  • महत्वपूर्ण समाचार पत्रः सिविल सेवा परीक्षा की दृष्टिकोण से विशेषज्ञ ‘द हिंदू’ तथा ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ जैसे समाचार पत्रों की सिफारिश करते हैं। किंतु अनिवार्य रूप से ऐसा आवश्यक नहीं है और अभ्यर्थी अपनी सुविधानुसार किसी भी मानक समाचार पत्र का चयन कर सकता है।
  • हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के समक्ष चुनौती एवं समाधानः हिंदी मीडियम के परीक्षार्थियों पर अक्सर अंग्रेजी समाचार पत्रों के अध्ययन हेतु दबाव रहता है।
  • ऐसी स्थिति में अचानक हिंदी समाचार पत्रों को छोड़कर इंग्लिश समाचार पत्रों का अध्ययन करने पर परीक्षार्थियों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अतः, ऐसी स्थिति में परीक्षार्थी समाचार पत्रों (हिंदी से इंग्लिश) में त्वरित रूप से बदलाव (Sudden Change) लाने के स्थान पर क्रमिक रूप बदलाव (Gradual Change) ला सकते हैं। ऐसा करना परीक्षार्थियों के लिए बोझिल नहीं होगा।
  • विशिष्ट समझ की आवश्यकताः अभ्यर्थी को यह ध्यान में रखना चाहिए कि प्रत्येक समाचार पत्र कि अपनी एक निश्चित रूप रेखा होती है तथा उनमें लिखने वाले लोग विभिन्न विचारधाराओं से प्रभावित रहते हैं। उनकी विशेषज्ञता के आधार पर किसी भी मुद्दे पर उनके मत भिन्न हो सकते हैं। संघ लोक सेवा आयोग अभ्यर्थी से यह अपेक्षा करता है कि वह किसी भी मुद्दे पर विश्लेषणात्मक रवैया रखते हुए स्वयं की एक ऐसी राय निर्मित करें जो समाज तथा देश के हित में हो। अतः, किसी भी समाचार पत्र के अध्ययन के समय अभ्यर्थी को सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए संतुलित रूप से समाज तथा देश हित के अनुसार अपने विचारों को निर्मित करना चाहिए।
  • विशेष ध्यान देने योग्य मुद्देः समाचार पत्र को पढ़ने के दौरान अभ्यर्थियों व्यक्तिगत राजनीति, व्यक्तिगत अपराध दलगत राजनीति जैसी प्रतिदिन की खबरों से बचना चाहिए। साथ ही सामाजिक अपराध, संगठित अपराध, गठबंधन की राजनीति, सामाजिक न्याय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित मुद्दों, पर्यावरणीय घटनाक्रम तथा देशहित से संबंधित अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • समाचार पत्र को कितना समय दें: समाचार पत्रों को पढ़ते समय समय प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अभ्यर्थी अपनी तैयारी के स्तर का स्व-मूल्यांकन करते हुए इस बात का निर्धारण कर सकता है प्रतिदिन समाचार पत्रों के अध्ययन में कितना समय दिया जाना चाहिए। तैयारी के एक स्तर के पश्चात अभ्यर्थी परीक्षा के लिए प्रासंगिक मुद्दों कि आसानी से पहचान करने लगता है। ऐसी स्थिति में प्रतिदिन लगभग 2 घंटे किसी भी मानक समाचार पत्र को देना आदर्श माना जाता है।
  • क्या नहीं करना चाहिएः तैयारी के एक स्तर को प्राप्त करने के पूर्व तक अभ्यर्थी को प्रतिदिन समाचार पत्र से नोट्स तैयार करना प्रश्न बनाना तथा उन्हें हल करने जैसी प्रक्रिया से बचना चाहिए। अन्यथा अभ्यर्थी का एक बहुमूल्य समय व्यर्थ हो सकता है। पाठ्यक्रम की बेहतर समझ तथा पूर्ववर्ती प्रश्नों के बार-बार अवलोकन के माध्यम से जब अभ्यर्थी तैयारी का एक उच्च स्तर प्राप्त कर लेता है तो वह स्वयं ही ऐसी घटनाओं तथा जानकारियों की पहचान करने में सक्षम हो जाता है जो प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा में सहायक सिद्ध होंगी।
  • भ्रम की स्थिति से बचने के उपायः अभ्यर्थी सामान्य रूप से अर्थव्यवस्था, विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय तथा पर्यावरण से संबंधित मुद्दों में भ्रमित हो जाते हैं तथा परीक्षा उपयोगी बातों की पहचान करने में असमर्थ होते हैं।
  • ऐसी स्थिति में अभ्यर्थी को देखना चाहिए कि यदि राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में प्रकाशित होने वाले किसी भी अधिनियम, कानून, रैंकिंग तथा योजना का संबंध भारत से प्रत्यक्ष रूप से है तो उस मुद्दे को महत्वपूर्ण मानते हुए उसका विस्तृत अध्ययन करना चाहिए। अन्य मुद्दों एवं घटनाक्रमों का सतही रूप से अध्ययन करके अभ्यर्थी उन पर एक सामान्य समझ विकसित कर सकता है।

क्या एनसीईआरटी की किताबें पढ़ना जरूरी है?

लगभग प्रत्येक कोचिंग संस्थान तथा विशेषज्ञ इस बात पर विशेष बल देता है कि अभ्यर्थी को अपनी तैयारी आरंभ करने की प्रक्रिया में कक्षा 6 से 12 तक की NCERT पुस्तकों का अध्ययन आवश्यक रूप से करना चाहिए। परंतु व्यावहारिक रुप से ऐसा करना उचित प्रतीत नहीं होता है। कक्षा 6 से 12 तक की NCERT पुस्तकों का मूल्यांकन करने पर हम पाते हैं कि कुल मिलाकर यह पुस्तकें लगभग 2500 पेज की होती हैं। गहन रूप से इनका अध्ययन करने के लिए किसी भी अभ्यर्थी को 6-8 महीने (प्रतिदिन 8-10 घंटा अध्ययन करने पर) की आवश्यकता होगी। अतः ऐसे अभ्यर्थी जिनके पास समय की कमी है उन्हें विशिष्ट रणनीति के माध्यम से NCERT पुस्तकों के केवल उन्हीं अध्ययन एवं खंडों का अध्ययन करना चाहिए जो परीक्षा के दृष्टिकोण से प्रासंगिक प्रतीत होते हैं।

  • वर्ष 2013 में पाठ्यक्रम में किए गए परिवर्तन के पश्चात यह देखने को मिला है कि संघ लोक सेवा आयोग सीधे NCERT पुस्तकों से प्रश्न पूछने से बच रहा है। हां, यह अवश्य होता है कि कुछ ऐसे प्रश्न पूछे जाते हैं जो आधारिक रूप से NCERT पुस्तकों से संबंधित होते हैं। किंतु, इन प्रश्नों के उत्तर अनेक अन्य मानक पुस्तकों से भी प्राप्त किए जा सकते हैं। विज्ञान, पर्यावरण तथा इतिहास जैसे कुछ प्रासंगिक विषयों को छोड़ दिया जाए तो अन्य विषयों के NCERT आधारित प्रश्नों के परीक्षा में आने की संभावना नगण्य रहती है।

एनसीईआरटी से क्या और कैसे पढ़ें?

NCERT पुस्तकों की एक यह विशेषता होती है कि कक्षा 6 से 12 तक इन पुस्तकों का लेखांकन इस प्रकार किया जाता है जिससे वे एक क्रमब) रूप में जानकारी प्रदान कर सकें। इतिहास, भूगोल, विज्ञान तथा राजनीति विज्ञान की पुस्तकें का अध्ययन करके उपर्युक्त तथ्य को देखा जा सकता है।

  • किंतु, यदि अभ्यर्थी किसी सामान्य विषय पर एक अथवा दो मानक पुस्तकों का अध्ययन कर रहा है तो उसके लिए गहनता पूर्वक NCERT पुस्तकों का अध्ययन करना अनिवार्य नहीं है। हां, यह अवश्य है कि उसे अपनी समझ को बढ़ाने के लिए इन पुस्तकों के कुछ अध्यायों अथवा खंडो का सहारा लिया जा सकता है।
  • संक्षेप में, यह कहा जा सकता है कि यदि अभ्यर्थी कक्षा 12 अथवा उससे पूर्व अपनी तैयारी आरंभ कर रहा है तो वह गहन रूप से NCERT पुस्तकों का अध्ययन कर सकता है। वहीं दूसरी तरफ़ से स्नातक अथवा उसके पश्चात तैयारी आरंभ करने वाले परीक्षार्थियों के लिए इन पुस्तकों का अध्ययन अपनी तैयारी के आधार निर्माण हेतु ही किया जाना चाहिए। समय की कमी को ध्यान में रखते हुए अभ्यर्थियों को मुख्य रूप से मानव पुस्तकों एवं पत्रिकाओं पर ही निर्भर रहना चाहिए।

पुरानी NCERT बनाम नई NCERT

तैयारी आरंभ करने के समय लगभग प्रत्येक अभ्यर्थी के समक्ष पुरानी तथा नई NCERT पुस्तकों के मध्य चुनाव की समस्या रहती है। यह एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण निर्णय होता है कि अभ्यर्थी उपर्युक्त दोनों में से किन पुस्तकों का चुनाव करे?

  • पुरानी NCERT पुस्तकों में तथ्यात्मक जानकारी अधिक होती हैं तो वहीं दूसरी तरफ नई NCERT पुस्तकें प्रासंगिक घटनाक्रमों, केस स्टडी तथा अधिक विश्लेषणात्मक पद्धति पर लिखी गई हैं। अतः अभ्यर्थी अपने समय को ध्यान में रखते हुए इनमें से किसी भी (पुरानी अथवा नई) NCERT पुस्तकों का चयन कर सकता है।
  • चुनौती के इस स्तर पर अभ्यर्थी द्वारा यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि लक्ष्मीकांत (भारत की राज्यव्यवस्था) अथवा विपिन चंद्रा (आधुनिक भारत का इतिहास) द्वारा लिखित मानक पुस्तकों के लिए भी NCERT पुस्तकों को ही आधार बनाया गया है। यदि अभ्यर्थी इन पुस्तकों का अध्ययन करता है तो उसे NCERT पुस्तकों के व्यापक अध्ययन की आवश्यकता नहीं है।
  • परीक्षार्थियों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए क्रॉनिकल पब्लिकेशन द्वारा ‘क्रॉनिकल टु दि पॉइंट’ पुस्तक सीरीज के अंतर्गत NCERT, IGNOU, NIOS, तमिलनाडु बोर्ड तथा तात्कालिक घटनाक्रमों को शामिल किया गया है। अभ्यर्थी अपनी तैयारी के संपूर्ण प्रक्रिया में इसे मानक पुस्तक के रूप में अपनाकर अपने समय को बचाते हुए स्मार्ट स्टडी कर सकता है।

पाठ्यक्रम की पहेली तथा इसका सामना कैसे करें?

सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम को पहली नजर से देखने पर एक भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। उदाहरण के लिए, मुख्य परीक्षा के तहत सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्न पत्र में भारतीय समाज को शामिल किया गया है वहीं तृतीय प्रश्न पत्र में सामाजिक न्याय को रखा गया है। इस प्रकार एक व्यवस्थित क्रम निर्मित नहीं होता है जो अभ्यर्थी को परेशान कर सकता है।

किंतु, पाठ्यक्रम का व्यापक अध्ययन करने पर हम यह देखते हैं कि संघ लोक सेवा आयोग ने पाठ्यक्रम के प्रत्येक खंड की रूपरेखा का निर्धारण अत्यंत तार्किक ढंग से किया है। इसे निम्नलिखित उदाहरणों से समझ सकते हैं:

  • भारतीय कला एवं संस्कृतिः भारतीय कला एवं संस्कृति को प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा दोनों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इसके माध्यम से परीक्षार्थी से यह अपेक्षा की गई है कि प्रत्येक अभ्यर्थी भारतीय कला की प्राचीन समय से आधुनिक काल तक की सभी मुख्य विशेषताओं की व्यापक जानकारी रखे। इससे अभ्यर्थी अपने आसपास होने वाली सामाजिक-सांस्कृतिक घटनाओं को पूर्वर्ती घटनाओं से संबंधित करके देख सकता है।
  • इतिहासः इतिहास के अंतर्गत प्रारंभिक परीक्षा में केवल भारतीय इतिहास को महत्व प्रदान किया गया है जबकि मुख्य परीक्षा में भारतीय इतिहास के साथ-साथ विश्व इतिहास को भी समान महत्व दिया गया है। इसका कारण यह है कि संघ लोक सेवा आयोग अभ्यर्थी से अपेक्षा करता है कि वह भारतीय इतिहास के संदर्भ में व्यापक तथ्यात्मक जानकारी के साथ-साथ वैश्विक घटनाओं के मद्देनजर एक विश्लेषणात्मक समझ विकसित करे।
  • भारत तथा विश्व का भूगोलः इसी प्रकार, भारत तथा विश्व के भूगोल को प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा दोनों के पाठ्यक्रम में रखा गया है। मनुष्य के जीवन की प्रत्येक घटना उसके आसपास के भौगोलिक वातावरण से प्रभावित होती है।
  • एक छोटे स्तर पर होने वाली बाढ़ एवं सूखा जैसी घटनाओं से लेकर जलवायु परिवर्तन जैसी व्यापक घटनाएं मनुष्य के प्रति दिन के क्रियाकलापों को प्रभावित कर रही हैं। यही कारण है कि लोक सेवा आयोग अभ्यर्थी से अपेक्षा करता है कि वह इस प्रकार की चुनौतियों को समझे तथा उनसे निपटने के उपयुक्त उपायों की पहचान कर सके।
  • नीतिशास्त्र, सत्य निष्ठा एवं अभिरुचिः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के चौथे प्रश्नपत्र के रूप में ‘नीतिशास्त्र, सत्य निष्ठा एवं अभिरुचि’ को शामिल किया गया है। सामान्य जीवनचर्या के उदाहरणों से प्रेरणा लेते हुए अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह चयन के पश्चात एक सिविल सेवक के रूप में अपने कार्यों का निर्वहन करने की प्रक्रिया में राजनीतिक रूप से तटस्थ बने रहकर समाज तथा देश हित को अधिकतम करने का प्रयास करे। नैतिकता के निश्चित पैमानों का पालन करते हुए एक प्रशासनिक अधिकारी सिविल सेवा की शुचिता को बनाए रख सकता है।

पाठ्यक्रम का सामना कैसे करें: उपर्युक्त उदाहरणों से यह सिद्ध होता है कि अभ्यर्थी को आरंभ में ही यह पता करना चाहिए कि पाठ्यक्रम के वे कौन से खंड हैं जिन्हें प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा दोनों में शामिल किया गया है तथा ऐसे किन खंडों को केवल प्रारंभिक अथवा केवल मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में रखा गया है।

  • पाठ्यक्रम के संदर्भ में अभ्यर्थी उपर्युक्त अवधारणात्मक समझ विकसित करके अध्ययन की प्रक्रिया में दोहराव की समस्या से बच सकता है। ऐसे खंड जिन्हें प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा दोनों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है उन्हें एक साथ तैयार किया जाना चाहिए। वहीं, दूसरे ऐसे खंड जिन्हें केवल प्रारंभिक अथवा केवल मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है, उनकी तैयारी पृथक रूप से की जानी चाहिए।

अध्ययन के मानक मॉडलः अभ्यर्थी के समक्ष एक चुनौती यह रहती है कि वह निबंध, सामान्य अध्ययन तथा वैकल्पिक विषयों की तैयारी करते हुए उनके मध्य संतुलन किस प्रकार निर्मित करे। इसके लिए अभ्यर्थी अपनी सुविधानुसार निम्नलिखित दिए गए मानक मॉडलों में से किसी एक मॉडल का पालन कर सकता हैः

  • मॉडल 1- इस मॉडल के अनुसार अभ्यर्थी को सर्वप्रथम वैकल्पिक विषय का अध्ययन करना चाहिए। इसके बाद सामान्य अध्ययन के ऐसे विषयों का चयन करना चाहिए जो वैकल्पिक विषय के अधिक नजदीक हैं। उदाहरण के लिए, यदि अभ्यर्थी इतिहास को वैकल्पिक विषय के रूप में चिंता है तो इतिहास का अध्ययन करते हुए सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र 1 के अंतर्गत आने वाले उन सभी खंडों को भी कवर कर लेना चाहिए जो इतिहास से संबंधित हैं। यही प्रक्रिया भूगोल, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र तथा अन्य विषयों के क्रम में भी अपनाई जानी चाहिए।
  • मॉडल 2- इस मॉडल के अनुसार अभ्यर्थी को चरणबद्ध रूप में सामान्य अध्ययन के चारों प्रश्नपत्रों का अध्ययन करते हुए पहले पाठ्यक्रम तथा परीक्षा के संदर्भ में अपनी एक व्यापक समझ विकसित करनी चाहिए। इसके पश्चात उसे वैकल्पिक विषय की तरफ प्रस्थान करना चाहिए। ऐसा करने से सामान्य अध्ययन के महत्वपूर्ण विषयों विशेषकर इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान तथा अर्थशास्त्र की प्रकृति के संदर्भ में अभ्यर्थी अवगत हो जाता है तथा इससे अभ्यर्थी को वैकल्पिक विषयों के चुनाव करने में भी सहायता मिलती है।
  • मॉडल 3- इस मॉडल के तहत अभ्यर्थी निबंध तथा नीतिशास्त्र जैसे प्रश्न पत्रों से शुरुआत कर सकता है। अभ्यर्थी की अंतिम सफलता में इन प्रश्न पत्रों से प्राप्त अंकों का व्यापक योगदान होता है। अतः ऐसा करने से अभ्यर्थी में आरंभ से ही लेखन शैली का विकास होने लगता है। इसके पश्चात अभ्यर्थी वैकल्पिक विषय अथवा सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्रों की तैयारी आरंभ कर सकता है।

कोचिंग संस्थान की अध्ययन सामग्री और अन्य के नोट्स

सामान्य रूप से बाजार में दो तरह के नोट्स दिखाई देते हैं। एक ऐसे नोट होते हैं जो किसी अभ्यर्थी द्वारा अथवा पूर्ववर्ती किसी चयनित/टॉपर्स अभ्यर्थी द्वारा तैयार किए जाते हैं और वही दूसरे कुछ नोट्स ऐसे होते हैं जो कोचिंग संस्थानों द्वारा तैयार करवाए जाते हैं। इन दोनों प्रकार के नोट्स पर तैयारी करने वाले अभ्यर्थी को पूर्णरूपेण निर्भर होने से बचना चाहिए। इनकी सहायता केवल उस स्तर पर ली जा सकती है जब वे स्वयं के नोट्स तैयार करते हैं।

  • तैयारी का अलग-अलग स्तरः चूँकि, प्रत्येक अभ्यर्थी के तैयारी का स्तर अलग-अलग होता है। अतः उसे अपनी सुविधा अनुसार स्वयं के नोट्स तैयार करने चाहिए। नोट्स बनाने की प्रक्रिया की सामान्य समझ यह है कि जिन अवधारणाओं की जानकारी अभ्यर्थी को होती है वह उन्हें नोट्स में शामिल करने से बचता है तथा अन्य महत्वपूर्ण एवं गूढ़ जानकारियों को नोट्स में शामिल करके अभ्यर्थी किसी भी विशिष्ट टॉपिक पर अपनी व्यापक समझ विकसित कर सकता है।
  • आरंभिक स्तर के अभ्यर्थियों के लिएः एकदम आरंभिक स्तर से तैयारी आरंभ करने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह बात ध्यान में रखी जानी अत्यंत आवश्यक है कि उन्हें किसी भी पूर्व अभ्यर्थी अथवा कोचिंग संस्थानों के नोट्स पर निर्भर रहने का प्रयास नहीं करना चाहिए। अन्यथा यह अनावश्यक निर्भरता ही अंततः उनकी सफलता में बाधक बनेगी। स्वयं द्वारा गंभीर अध्ययन एवं तैयारी के एक उच्च स्तर को प्राप्त करने के पश्चात स्वयं द्वारा निर्मित नोट्स ही किसी भी अभ्यर्थी के चयन में सहायता कर सकते हैं।

(क) क्या कोचिंग संस्थान की अध्ययन सामग्री विश्वसनीय होती है?

कोचिंग संस्थान दो प्रकार की अध्ययन सामग्री (Study Material) तैयार करते हैं।

  • कॉरस्पॉडिंग कोर्सेज (Corresponding Courses) के लिएः एक वह सामग्री होती है जो कोचिंग संस्थान अपने कॉरस्पॉडिंग कोर्सेज (Corresponding Courses) के लिए तैयार करते हैं। यह अध्ययन सामग्री पूर्ण (Complete) मानी जाती है तथा पुस्तकों के रूप में होती है। क्रॉनिकल पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित वैकल्पिक भूगोल, वैकल्पिक इतिहास तथा सामान्य अध्ययन हेतु भारत का भूगोल आदि इस संदर्भ में मानक पुस्तकें हैं। इस प्रकार, अभ्यर्थी यदि किसी कोचिंग संस्थान के कॉरस्पॉडिंग कोर्सेज का सहारा लेता है तो उसे मानक पुस्तकों का अध्ययन करने की विशेष आवश्यकता नहीं होती है। इसी प्रकार, दूसरी तरफ यदि अभ्यर्थी मानक पुस्तकों का गहन रूप से अध्ययन करता है तो उसे किसी भी कोचिंग संस्थान के कॉरस्पॉडिंग कोर्सेज का चयन नहीं करना चाहिए।
  • क्लास नोट्स (Class Notes): कोचिंग संस्थानों द्वारा क्लास में वितरित किए जाने वाले नोट्स सामान्य रूप से अधूरे होते हैं तथा उनमें खंडों से संबंधित सामग्री प्रदान नहीं की जाती है जिन्हें शिक्षक द्वारा क्लास में पढ़ाया जाना होता है। कोचिंग संस्थान ऐसा इस उद्देश्य से करते हैं कि अभ्यर्थी नियमित रूप से उनकी क्लास करें। प्रतिदिन की क्लास से अपडेट रहना अभ्यर्थी के लिए एक अतिरिक्त जिम्मेदारी बन जाती है। साथ ही, यह भी देखा जाता है कि क्लास में वितरित किए जाने वाले नोट्स सामान्यता विषय के विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा तैयार नहीं किया जाते हैं। इस प्रकार, नोट्स तैयार करने वाले तथा पढ़ाने वाले व्यक्ति के अलग-अलग विचार होने से वितरित अध्ययन सामग्री तथा कक्षा में पढ़ाए जाने वाली जानकारी के मध्य तालमेल का अभाव होता है।
  • क्या किया जाना चाहिएः आरंभिक स्तर से तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह अत्यंत आवश्यक होता है कि वे उचित मार्गदर्शन में मानक पुस्तकों को आधार बनाते हुए अपनी तैयारी आरंभ करें। उन्हें आरंभिक स्तर से ही किसी भी कोचिंग संस्थान अथवा व्यक्तिगत अभ्यर्थी द्वारा निर्मित नोट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। दूसरों के नोट्स पर निर्भर रहने से अभ्यर्थी की सफलता के मार्ग में अनेक चुनौतियां आ सकती हैं तथा वे निरंतर अपनी सफलता से दूर होते चले जाएंगे।

करेंट अफ़ेयर्स

(क) करेंट अफेयर्स की जानकारी कैसे रखें?

समय के साथ सिविल सेवा परीक्षा के अंतर्गत प्रारंभिक तथा मुख्य दोनों परीक्षाओं में करंट अफेयर्स के महत्त्व में वृद्धि हुई है। ऊपर के खंड में हमने देखा है कि किस प्रकार किसी भी मानक समाचार पत्र के माध्यम से प्रतिदिन के आधार पर करंट अफेयर्स से अपडेट रहा जा सकता है। इस संदर्भ में मानक करंट अफेयर्स पत्रिकाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उदाहरण हेतु, सिविल सर्विसेज के लिए क्रॉनिकल की मासिक पत्रिका तथा कॉनिकल ईयर बुक एक लंबे समय से अभ्यर्थियों को परीक्षा हेतु मानक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराती रही हैं तथा करंट अफेयर्स से अद्यतन बने रहने के लिए अभ्यर्थी इन पत्रिकाओं का चयन कर सकते हैं।

(ख) करेंट अफेयर्स की कितनी अवधि कवर करनी है?

सिविल सेवा परीक्षा हेतु कितनी अवधि के करंट अफेयर्स को तैयार करना चाहिए- यह इस बात पर निर्भर करता है कि घटनाक्रम की प्रकृति क्या है? दूसरे शब्दों में, यदि कोई घटनाक्रम दो-तीन वर्षों से क्रमिक रूप से चर्चा में है तथा आने वाले समय में भी उसकी प्रासंगिकता बनी रहने की संभावना है तो अभ्यर्थी को पिछले लगभग 3 वर्षों के मुद्दों का अध्ययन करना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे घटनाक्रम होते हैं जो किसी एक ही वर्ष में आरंभ होकर समाप्त हो जाते हैं तो ऐसे घटनाक्रमों की निश्चित वर्ष में आयोजित परीक्षा में प्रासंगिकता हो सकती है किंतु आने वाले वर्षों में इन पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता नहीं होती है।

  • उदाहरण के लिए- सरकार ने योजना आयोग को समाप्त करके नीति आयोग का गठन किया। इस संदर्भ में जब भी योजना आयोग तथा नीति आयोग के तुलनात्मक अध्ययन की बात की जाएगी तो अभ्यर्थी के लिए यह आवश्यक होगा कि वह दोनों के संदर्भ में अपनी अवधारणात्मक समझ विकसित करे।
  • परीक्षा में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण तथा सरकारी योजनाओं से संबंधित ऐसे विषयों से प्रश्न अधिक पूछे जाते हैं जो समाज को व्यापक रूप से प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। अतः किसी भी मुद्दे का अध्ययन करते समय अभ्यर्थी को यह ध्यान में रखना चाहिए कि उस मुद्दे की सामाजिक प्रभावशीलता कितनी है। यही बात अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के संदर्भ में भी लागू होती है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तथा भू-राजनीति से संबंधित ऐसे विषय जो भारत को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं वे अधिक प्रासंगिक माने जाते हैं।

(ग) समाचार पत्रों की सामग्री को स्थिर भाग से कैसे लिंक करें?

हमने आरंभिक खंडों में है देखा है कि पाठ्यक्रम के स्थिर भाग की तैयारी किस प्रकार की जानी चाहिए। तैयारी के अगले चरण में अभ्यर्थी को करंट अफेयर्स की तैयारी के समय या ध्यान में रखना चाहिए कि वह नोट्स बनाने की प्रक्रिया में प्रत्येक स्थिर भाग को संबंधित करंट अफेयर्स से जोड़ने का प्रयास करे।

  • ऐसा करने के लिए अभ्यर्थी चरणबद्ध रूप से नोट्स बनाने की प्रक्रिया को अपना सकता है। इसके अंतर्गत, किसी निश्चित टॉपिक पर नोट्स बन उसके अंत में कुछ स्थान खाली छोड़ दिया जाना चाहिए जिससे आने वाले समय में संबंधित करंट अफेयर्स को वहां पर शामिल किया जा सके।
  • करेंट अफेयर्स के छोटे-छोटे घटनाक्रमों को अभ्यर्थी पाठ्य पुस्तकों में ही संबंधित स्थिर भाग के पास छोटे-छोटे बिंदुओं के रूप में नोट कर सकता है। ऐसा करने से अभ्यर्थी को रिवीजन के समय सुविधा रहेगी।

सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवश्यक मानक पुस्तकों की सूची क्या है?

प्रत्येक वर्ष चयनित छात्र तथा कोचिंग विशेषज्ञों द्वारा सिविल सेवा के लिए उपयोगी तथा आवश्यक मानक पुस्तकों की चर्चा की जाती है। छात्रों की सुविधा को देखते हुए परीक्षा हेतु उपयोगी पुस्तकों की एक उपयुक्त मानक सूची नीचे दी गई है।

(क) मानक पुस्तकों की सूची

  • भारतीय कला एवं संस्कृति
    • कक्षा 11 की पुरानी NCERT (An Introduction to Indian Art and Architecture)
    • भारतीय कला एवं संस्कृति- नितिन सिंघानिया
  • इतिहास (भारत एवं विश्व)
    • कक्षा 6 से 12 तक की NCERT पुस्तकें
    • आधुनिक भारत का इतिहास (स्पेक्ट्रम)- राजीव अहीर
    • भारत का स्वतंत्रता संघर्ष- बिपिन चंद्र
    • वैकल्पिक इतिहास- कॉनिकल पब्लिकेशन
    • विश्व भूगोल के लिए- 12वीं कक्षा की NCERT पुस्तक (समकालीन विश्व इतिहास)
  • भूगोल (भारत एवं विश्व)
    • कक्षा 6 से 12 तक की NCERT पुस्तकें
    • वैकल्पिक भूगोल- कॉनिकल पब्लिकेशन
  • राजव्यवस्था
    • कक्षा 11 एवं 12 की NCERT पुस्तकें
    • भारतीय राजव्यवस्था- एम- लक्ष्मीकांत
  • भारतीय समाज
    • कक्षा 11 एवं 12 की NCERT पुस्तकें
    • भारतीय समाज- राम आहूजा
  • भारतीय अर्थव्यवस्था
    • कक्षा 11 एवं 12 की NCERT पुस्तकें
    • भारत सरकार द्वारा प्रकाशित आर्थिक सर्वेक्षण तथा बजट का सारांश
    • भारतीय अर्थव्यवस्था- रमेश सिंह
    • भारतीय अर्थव्यवस्थाः सर्वेक्षण तथा विश्लेषण- प्रो- एसएन लाल तथा डॉ- एसके लाल
  • पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
    • NCERT की 12वीं कक्षा की जीव विज्ञान की पुस्तक के अंतिम छः अध्याय
    • पर्यावरण- शंकर आईएएस अकैडमी
  • आंतरिक सुरक्षा
    • भारत की आंतरिक सुरक्षा के मुख्य चुनौतियां- अशोक कुमार (IPS) तथा विपुल अनेकांत (DANIPS)
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
    • कक्षा 6 से 10 तक की NCERT पुस्तकें
    • विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास- शीलवंत सिंह
  • नीतिशास्त्र, सत्य निष्ठा एवं अभिरुचि
    • द लैक्सिकनः क्रॉनिकल पब्लिकेशन
  • करेंट अफेयर्स हेतु महत्वपूर्ण पत्रिकाएं
    • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल मैगजीन- मासिक पत्रिका
    • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल ईयर बुक
    • विजन आईएएस- मासिक पत्रिका
  • महत्वपूर्ण समाचार पत्र
    • द हिंदू
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(ख) मैप्स को कैसे पढ़ें और समझें?

  • एटलस की आवश्यकताः प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा के विशेषकर भूगोल वाले खंड में प्रत्येक वर्ष कुछ प्रश्न स्थान विशेष पर आधारित होते हैं। प्राकृतिक स्थानों- पर्वत, पठार, नदी, मैदान तथा झीलों के साथ-साथ विभिन्न देशों की अवस्थिति पर आधारित अनेक प्रश्न पूछे जाते हैं। इस संदर्भ में खनिज संसाधनों एवं उद्योगों का वितरण तथा वर्षा एवं जलवायु की स्थिति पर आधारित प्रश्नों में भी मानचित्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • अभ्यर्थी को ‘ऑक्सफोर्ड स्कूल एटलस’ अथवा ‘ओरियंट लोंगमैन स्कूल एटलस’ अथवा कोई अन्य उपयोगी एटलस का लगातार अवलोकन करना चाहिए जिससे वह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्थलों से परिचित हो सके।
  • एटलस अध्ययन की विधिः प्रत्येक अटलस में महाद्वीपों एवं देशों को उनकी राजनीतिक एवं प्राकृतिक विशेषताओं के आधार पर दर्शाया जाता है। अभ्यर्थी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों की सामान्य प्राकृतिक एवं राजनीतिक विशेषताओं के साथ-साथ भारत के संदर्भ में प्रत्येक अवस्थिति की गहराई से अध्ययन करने की अपेक्षा की जाती है।
  • अभ्यर्थी राजनैतिक अथवा प्राकृतिक विशेषताओं में से एक को आधार मानकर क्रमबद्ध रूप में अन्य सभी विशेषताओं का अध्ययन कर सकता है।
  • प्रचलित स्थलों का महत्वः सिविल सेवा परीक्षा की सामान्य अवधारणा यह रही है कि इस परीक्षा में विशेषकर उन्हीं स्थलों पर प्रश्न पूछे जाते हैं जो पिछले एक-दो वर्षों में चर्चा में रहते हैं। अभ्यर्थी को करंट अफेयर्स की तैयारी के दौरान चर्चित स्थलों (ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक साक्ष्य स्थल, महत्वपूर्ण जैव विविधत क्षेत्र एवं उद्यान, राजनीतिक रूप से चर्चित क्षेत्र आदि) की जानकारी सतत रूप से रखनी चाहिए। इन स्थलों की एक सूची बनाकर एटलस के माध्यम से उन का अवलोकन करते रहना चाहिए।

(ग) क्या किताबों के संदर्भ में सभी सलाह अच्छी हैं?

विभिन्न वर्षों के टॉपर्स द्वारा दिए गए इंटरव्यू तथा सिविल सेवा परीक्षा के विषय विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित पुस्तकों के आधार पर इस परीक्षा हेतु निर्धारित की जाने वाली पुस्तकों की सूची को सामान्य रूप से मानक सूची माना जाता है।

फिर भी, अभ्यर्थी की समझ एवं परीक्षा की परिवर्तनशील प्रकृति को देखते हुए पुस्तकों की कोई भी सूची अंतिम नहीं कही जा सकती है।

  • किंतु, किसी भी अभ्यर्थी के लिए NCERT पुस्तकों के साथ-साथ इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था, पर्यावरण तथा अर्थव्यवस्था के संदर्भ में एक अथवा दो मानक पुस्तकों का अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक होता है।
  • इन पुस्तकों का चुनाव छात्र पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों तथा पाठ्यक्रम के गहन विश्लेषण के आधार पर विशेषज्ञों की सलाह पर कर सकता है।
  • पुस्तकों के चयन की संपूर्ण प्रक्रिया में अभ्यर्थियों को ध्यान में रखना होगा कि किसी भी एक विषय के लिए एक अथवा दो से अधिक पुस्तकों का चयन न किया जाए तथा चयनित पुस्तकों का ही बार-बार अध्ययन किया जाए। इस संदर्भ में यह उक्ति अधिक प्रचलित है कि ‘‘अभ्यर्थी के लिए 10 किताबों का एक-एक बार अध्ययन करने से बेहतर है कि वह किसी एक किताब का 10 बार अध्ययन करे’’।
  • पुस्तकों की उपर्युक्त वर्णित सूची एक मानक सूची है जहां से अभ्यर्थी को अधिकांश पुस्तकों के चयन में सहायता मिलेगी। फिर भी, अपनी आवश्यकता के अनुसार अभ्यर्थी इस सूची में थोड़े-बहुत बदलाव कर सकता है।
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