AI-जनित फर्जी न्यायिक निर्णय: प्रौद्योगिकी बनाम न्यायिक अखंडता

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हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने AI-जनित फर्जी न्यायिक निर्णयों पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। NCLT केएस्सेल इन्फ्राप्रोजेक्ट्स दिवालियापन मामले के आदेश को खारिज कर दिया गया क्योंकि वह AI-जनित फर्जी न्यायिक उदाहरणों पर आधारित था। कोर्ट ने कहा कि AI के "हैलुसिनेशन" (काल्पनिक निर्णय) के परिणाम "अदृश्य, कपटी और विनाशकारी" हैं, और इसकी तुलना मिथाइल आइसोसाइनेट रिसाव (भोपाल गैस त्रासदी) से की। कोर्ट ने कहा कि बिना सत्यापन के AI-जनित न्यायिक उदाहरण उद्धृत करना "व्यावसायिक कदाचार" है। यदि किसी निर्णय पर फर्जी सामग्री का "मामूली प्रभाव" भी पड़ा है, तो वह निर्णय रद्द किया जाना चाहिए। कोर्ट ने BCI को ....

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