प्रतिपूरक वनीकरणः भारत में पहलें
प्रतिपूरक वनीकरण (CA) भारत में एक प्रथा है, जहां बुनियादी ढांचे के विकास, खनन या कृषि जैसे गैर-वन उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाने वाली वन भूमि के नुकसान की भरपाई के लिए गैर-वन भूमि पर वनीकरण किया जाता है। इसका उद्देश्य वनों की कटाई के नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभावों को कम करना और भारत के वनावरण को बनाए रखना है।
वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980
- वन (संरक्षण) अधिनियम एक प्रमुख कानून है, जो गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि के परिवर्तन को विनियमित करता है। इसमें कहा गया है कि प्रति हेक्टेयर वन भूमि के बदले में गैर-वन भूमि के बराबर ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 NCERT MCQ अर्थशास्त्र
- 2 NCERT MCQ भूगोल
- 3 NCERT MCQ इतिहास
- 4 सामान्य अध्ययन मॉडल प्रश्न 2027
- 5 इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0
- 6 एआई इम्पैक्ट समिट, 2026
- 7 राष्ट्रीय शून्य खसरा–रूबेला उन्मूलन अभियान
- 8 नैफिथ्रोमाइसिन : भारत का पहला स्वदेशी एंटीबायोटिक
- 9 ज़ॉम्बी डियर रोग/क्रॉनिक वेस्टिंग डिज़ीज़
- 10 टीबी उन्मूलन की ओर भारत की तेज प्रगति

