भारतीय नैतिक विचारक

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भारतीय नैतिक परंपरा की पृष्ठभूमि

शीर्षक

विवरण

परिभाषा

भारतीय नैतिक परंपरा (Indian Ethical Tradition) वैदिक काल से लेकर आधुनिक युग तक के नैतिक चिंतन का समग्र प्रवाह है, जो मुख्यतः ऋत (वैदिक सत्य), धर्म (कर्तव्य-आधारित आचरण), कर्म (क्रिया-फल सिद्धांत) और मोक्ष (आत्म-साक्षात्कार) की अवधारणाओं पर आधारित है। यह व्यक्ति को श्रेष्ठ जीवन जीने एवं समाज के साथ सामंजस्य स्थापित करने की दिशा प्रदान करती है।

उदाहरण

ऋग्वेद का 'एकम् सत् विप्राः बहुधा वदन्ति' (सत्य एक है, विद्वान उसे अनेक नामों से पुकारते हैं) – सहिष्णुता एवं बहुलवाद का आधार।

यूपीएससी परिप्रेक्ष्य

UPSC प्रश्न: "प्राचीन भारतीय नैतिक परंपरा में 'धर्म' की ....

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