विहार एवं चैत्य वास्तुकला का विकास

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विहार (Viharas) - मठ वास्तुकला

पुरातात्विक साक्ष्यों से पता चलता है कि शुरुआती विहारों का निर्माण लकड़ी और धूप में सुखाई गई ईंटों जैसी क्षणभंगुर सामग्री से किया गया था। ये संरचनाएं तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व या मौर्य काल से पहले की हैं।

विहारों के प्रकार और विकास

प्रकार / श्रेणी

विशेषताएं और विवरण

प्रमुख उदाहरण

हीनयान विहार

- ये पश्चिमी घाटों में अधिक पाए जाते हैं।

इनके बाहरी हिस्से (Facades) अत्यधिक सजावटी होते हैं।

इनमें मूर्तिकला पैनल और नक्काशीदार पट्टियाँ मुख्य तत्व हैं।

अजंता, एलोरा, बेडसा, कोंडाणे, पीतलखोरा और नासिक।

महायान विहार

- महायानियों ने विहारों को केवल निवास स्थान से बदलकर 'चैत्य-गृह-सह-विहार' (पूजा + ....

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