अवैध सीमापार प्रवासन के सुरक्षा निहितार्थ

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भारत-बांग्लादेश और भारत-म्यांमार जैसी खुली सीमाओं के पार होने वाला अवैध प्रवासन, आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है। यह जनसांख्यिकी, संसाधनों के वितरण और सामाजिक स्थिरता को प्रभावित करता है, जिससे यह एक बहुआयामी सुरक्षा मुद्दा बन जाता है।

जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर प्रभाव

  • स्थानीय जनसंख्या संरचना में बदलाव
    • लगातार हो रहे प्रवासन से असम और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में स्थानीय स्तर पर जनसांख्यिकीय परिवर्तन देखने को मिलते हैं।
    • इससे जातीय तनाव और पहचान-आधारित संघर्ष उत्पन्न हो सकते हैं (जैसे असम आंदोलन, NRC से जुड़े विवाद)।
  • संसाधनों पर दबाव
    • बढ़ती जनसंख्या घनत्व भूमि, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव ....

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