सुरक्षा रणनीति के रूप में विकास: एक सुदृढ़ भविष्य का आधार

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वर्तमान दौर में ‘विकास’ को राष्ट्रीय सुरक्षा के एक मुख्य स्तंभ के रूप में पहचाना जाता है। सामाजिक-आर्थिक स्थिरता न केवल आंतरिक अशांति को कम करती है, बल्कि बाहरी ताकतों द्वारा किए जाने वाले शोषण की गुंजाइश को भी खत्म करती है। भारत का दृष्टिकोण शासन, बुनियादी ढांचे और जन-कल्याण को एकीकृत कर सुरक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करना है।

राज्य-प्रायोजित हस्तक्षेप का मुकाबला

  • बाहरी प्रभाव को कम करना: अल्पविकास (Underdevelopment) चीन और पाकिस्तान जैसे विरोधियों के लिए छद्म नेटवर्क (Proxy Networks), दुष्प्रचार और फंडिंग के जरिए हस्तक्षेप करने का रास्ता खोलता है।
    • सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास (जैसे वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम) ....

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