आलेख

समुद्री तट पर मैंग्रोव वन आवश्यकता एवं महत्व


मई 2021 में भारत के पूर्वी तट पर आए यास चक्रवात के कारण काफी नुकसान हुआ था, इस दौरान भितरकणिका राष्ट्रीय उद्यान के मैंग्रोव (Mangroves) वनों ने चक्रवाती हवाओं के प्रति एक प्राकृतिक अवरोध के रूप में कार्य किया था। इस कारण यहां कम नुकसान हुआ।


राजद्रोह क़ानून की संवैधानिक वैधता: आलोचनात्मक विश्लेषण


31 मई, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने दो टीवी समाचार चैनलों के खिलाफ आंध्र प्रदेश पुलिस को राजद्रोह (sedition) के आरोप में दंडात्मक कार्रवाई करने से रोकते हुए कहा कि “यह राजद्रोह की सीमा को परिभाषित करने का समय है” (“It’s time to define limits of sedition”)


यूरोपीय संघ का 'फिट फॉर 55' कानून


14 जुलाई, 2021 को यूरोपीय संघ ने 'फिट फॉर 55' पैकेज प्रस्तुत किया जो कि हरित गैसों के उत्सर्जन के संदर्भ में व्यापक परिवर्तनों को प्रस्तावित करता है। इसके अनुसार, वर्ष 2030 तक यूरोपीय संघ ग्रीन हाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में 55 प्रतिशत (1990 के स्तर की तुलना में) तथा वर्ष 2050 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करेगा।


शंघाई सहयोग संगठन के रक्षा मंत्रियों की बैठक


27 से 29 जुलाई, 2021 के मध्य शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित की गई।


राज्यपाल बनाम स्पीकर : सत्ता के लिए संघर्ष एवं संवैधानिक नैतिकता


लोकतंत्र की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि इसके संस्थान व्यवहार में कैसे काम करते हैं। साथ ही, लोकतंत्र की स्थिरता न केवल संवैधानिक सिद्धांतों पर बल्कि संवैधानिक नैतिकता और संवैधानिक औचित्य पर भी निर्भर करती है।

पिछले 6 वर्षों में राज्यपाल और स्पीकर के बीच सत्ता के लिए कानूनी-राजनीतिक विवाद बढ़ा है। परिणामस्वरूप सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा है जिसका तीन महत्वपूर्ण उदाहरण अरुणाचल प्रदेश (2015), उत्तराखंड (2016) और कर्नाटक (2019) हैं। तीनों मामलों में, अदालत ने विश्वासमत परीक्षण की प्रधानता पर जोर दिया।


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