भारतीय बुनाई का इतिहास और विकास के चरण
ऋग्वेद में मुख्य रूप से वस्त्रों को अधिवस्त्र, कुरला और अण्डप्रतिधि के रूप में वर्णित किया गया है, जो बाह्य आवरण (घूंघट), एक सिर-आभूषण या सिर-पोशाक (पगड़ी) तथा महिलाओं के कपड़ों का हिस्सा हैं।
- वैदिक संस्कृति में महिलाओं की पोशाक 'साड़ी' शब्द संस्कृत के 'षाटी' से लिया गया है। प्राचीनकाल में प्रचलित शती या शबाली, हिंदी में साड़ी बन गई।
- कताई का पहला उपकरण 'तकला' था, जिसमें अन्ततः एक चक्कर जोड़ा गया, जिससे 'चरखे' का आविष्कार हुआ।
- पावरलूम उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा कपड़ा मंत्रालय के तहत ‘पावरलूम विकास एवं निर्यात संवर्धन परिषद’ का गठन वर्ष ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें

