गुजरात के क्षेत्रीय शिल्प और बुनकर
कच्छ के शुष्क इलाके में बसा छोटा-सा गाँव 'भुजोड़ी' बुनकरी की परम्परागत तकनीकों और भव्य सजावटी वस्त्रों का पर्याय बन चुका है।
- भुजोड़ी बुनकरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें स्थानीय तौर पर उपलब्ध सामग्री, जैसे- भेड़ की ऊन और ऊंट के बाल का उपयोग किया जाता है।
- भुजोड़ी शॉल गुजरात के वणकर समुदायों में लगभग 500 वर्षों से प्रचलित है। ये शॉल गहरे प्राकृतिक रंगों एवं विशिष्ट डिजाइन के साथ सादे ताने-बाने पर निर्मित किए जाते हैं।
- अहमदाबाद की आशावली साड़ियों का इतिहास मुगल काल तक जाता है। इन साड़ियों को बुनकरी की विशेष तकनीकों- कड़वा (ब्रोकेडिंग), जाल ....
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