संज्ञानात्मक विसंगति (Cognitive Dissonance)

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विवरण

परिभाषा

संज्ञानात्मक विसंगति (Cognitive Dissonance) एक अत्यंत प्रचलित मनोवैज्ञानिक अवस्था है, जिसे सर्वप्रथम लियोन फेस्टिंगर (Leon Festinger) ने 1957 में प्रतिपादित किया। यह मानसिक बेचैनी (Mental Discomfort) की वह भावना है, जो तब उत्पन्न होती है जब किसी व्यक्ति के पास दो परस्पर विरोधी विश्वास (Beliefs), मूल्य (Values), विचार (Thoughts), या जब उसका व्यवहार (Behaviour) उसकी मूल अभिवृत्ति (Attitude) के विपरीत होता है। व्यक्ति इस असहजता को कम करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाता है, जिससे अक्सर अभिवृत्ति (Attitude) में परिवर्तन (Change) हो जाता है। यह मानव मस्तिष्क की ‘सुसंगति चाहने’ (Consistency-seeking) की प्रवृत्ति का ....

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