भारतीय नैतिक विचारक
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भारतीय नैतिक परंपरा की पृष्ठभूमि |
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शीर्षक |
विवरण |
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परिभाषा |
भारतीय नैतिक परंपरा (Indian Ethical Tradition) वैदिक काल से लेकर आधुनिक युग तक के नैतिक चिंतन का समग्र प्रवाह है, जो मुख्यतः ऋत (वैदिक सत्य), धर्म (कर्तव्य-आधारित आचरण), कर्म (क्रिया-फल सिद्धांत) और मोक्ष (आत्म-साक्षात्कार) की अवधारणाओं पर आधारित है। यह व्यक्ति को श्रेष्ठ जीवन जीने एवं समाज के साथ सामंजस्य स्थापित करने की दिशा प्रदान करती है। |
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उदाहरण |
ऋग्वेद का 'एकम् सत् विप्राः बहुधा वदन्ति' (सत्य एक है, विद्वान उसे अनेक नामों से पुकारते हैं) – सहिष्णुता एवं बहुलवाद का आधार। |
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यूपीएससी परिप्रेक्ष्य |
UPSC प्रश्न: "प्राचीन भारतीय नैतिक परंपरा में 'धर्म' की .... |
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संबंधित सामग्री
- 1 नैतिक तर्क (Moral Reasoning)
- 2 नैतिक अंतःप्रज्ञा (Moral Intuition)
- 3 करुणा (Compassion)
- 4 सहिष्णुता (Tolerance)
- 5 सहानुभूति (Empathy)
- 6 नवाचार और रचनात्मकता
- 7 सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण
- 8 वस्तुनिष्ठता और सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण
- 9 हितों का संघर्ष (Conflict of Interest)
- 10 निष्पक्षता और गैर-पक्षपात (Impartiality and Non-Partisanship)

