साक्षात्कार

मनीष कुमार
यूपीपीसीएस 2018 एसडीएम पद पर चयन
टाइम मैनेजमेंट और बेहतर रणनीति, सफलता का मूल मंत्र है


परिचय

  • नाम: मनीष कुमार
  • पिता का नाम एवं पेशा: श्री राम सनेही, शिक्षक
  • माता का नाम: श्रीमती सुनीता देवी (गृहिणी)
  • शैक्षिक योग्यता: स्नातक- मैथमेटिक्स_ परास्नातक- भूगोल।
  • अभिरुचियां: फिल्में देखना, संगीत सुनना एवं ज्वनतपेउ
  • आदर्श व्यक्ति: ई- श्रीधरन (मैट्रो मैन), टीएन शेषन, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी
  • सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्षः धैर्य एवं संयम- सकारात्मक पक्ष। अतिभावुकता- नकारात्मक पक्ष
  • वैकल्पिक विषय: भूगोल

टाइम मैनेजमेंट और बेहतर रणनीति, सफलता का मूल मंत्र है

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः यूपीपीसीएस 2018 में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई। आपकी सफलता में परिवार, मित्रें व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?

मनीष कुमारः जी धन्यवाद! सही दिशा सदैव सफलता को नजदीक लाती है, शिक्षकों व अन्य सीनियर्स ने मेरी इसमें मदद की। मित्रें और परिवारजनों ने सदैव सकारात्मक उत्साहवर्धन किया। इस प्रकार मैं सफलता के नजदीक पहुंच सका।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया? परीक्षा की तैयारी शुरू करने का आदर्श समय क्या होना चाहिए?

मनीष कुमारः शुरुआत में मेरा रुझान वन डे एग्जाम्स के प्रति था। लेकिन मेरे आस-पास ‘सिविल सेवा’ के अधिक विद्यार्थी थे, इस कारण मेरा भी आकर्षण इस प्रतियोगिता परीक्षा के लिए बढ़ा। सीनियर्स और अन्य डिजिटल माध्यमों से मैंने मदद ली। याद रखिए जिस दिन आपने लक्ष्य तय कर लिया और दृढ़विश्वास के साथ ‘सही दिशा’ में काम शुरू किया वही आदर्श समय है- तैयारी का।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानते हैं कि अंग्रेजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?

मनीष कुमारः मेरी मातृभाषा ‘हिन्दी’ थी, इसलिए ‘सिविल सेवा’ में भी मैंने अपनी परीक्षा का माध्यम ‘हिन्दी’ रखा क्योंकि अपनी भाषा में सहज और सरल अभिव्यक्ति की जा सकती है। ‘अंग्रेजी माध्यम’ के लिए अधिक पाठ्यसामग्री उपलब्ध है जो गुणवत्तापूर्ण भी है। यद्यपि हिन्दी भाषी थोड़ा अतिरिक्त मेहनत करें तो यह रुकावट बहुत बड़ी नहीं है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया?

मनीष कुमारः मेरा वैकल्पिक विषय ‘भूगोल’ था, चूंकि भूगोल एक वृहद विषय है, जिसमें अन्य सामान्य अध्ययन की विषयवस्तु भी सम्मिलित हो जाती है, साथ ही मैं विज्ञान वर्ग से था तो ‘भूगोल’ मुझे अनुकूल विषय भी लगा। इसके अतिरिक्त भूगोल में पाठ्यसामग्री आसानी से उपलब्ध हो जाती है इस कारण विषय को सम्पूर्णता के साथ पढ़ा जा सकता है। इन सब बिन्दुओं को ध्यान में रखकर मैंने अपने वैकल्पिक विषय का चुनाव किया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुक्त मानते हैं? तीनों चरणों की तैयारी में आपकी समय की रणनीति एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?

मनीष कुमारः टाइम मैनेजमेंट और बेहतर रणनीति, सफलता का मूल मंत्र है। प्रीलिम्स (fact + concept) मेंस (concept + answer writting) और इंटरव्यू (व्यक्तिगत परीक्षण), तीनों स्तरों पर हमें रणनीति में बदलाव करके काम करना चाहिए। मेंस, इंटरव्यू की तैयारी साथ में करें। जबकि प्रीलिम्स की तैयारी- प्रीलिम्स पेपर के 4 माह पूर्व से कर सकते हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयार करने का सर्वाेत्तम तरीका क्या हो सकता है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठड्ढक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनाई? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति अपनाई?

मनीष कुमारः सेलेबस को ध्यान में रखकर विषय-वस्तु को तैयार करें। कोशिश करें कि बिंदुवार सिनॉप्सिस (synopsis) बना लें। समय-समय पर उनका रिवीजन करें और उपयुक्त तथा सारगर्भित भाषा में उत्तर-लेखन अभ्यास करें। करेन्ट अफेयर्स को संबंधित विषय से जोड़कर अभ्यास करें_ इससे आपका उत्तर अधिक प्रासंगिक बनेगा।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?

मनीष कुमारः जी अवश्य। अपने नोट्स बनाना और उनसे तैयारी करना सदैव ही अच्छी रणनीति है। सम्पूर्णता में नोट्स बनाएं, साथ ही पेपर के हिसाब से ‘प्वाइंट-वाइज’ नोट्स भी बनाएं ताकि पेपर के समय रिवीजन आसानी से कर सकें।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः नीतिशास्त्र व सत्यनिष्ठा के प्रश्न-पत्र की तैयारी के लिए आपने क्या किया? छात्रें को इस संदर्भ में आप क्या मार्गदर्शन दे सकते हैं?

मनीष कुमारः Ignited Minds के ‘अमित सर’ के मार्गदर्शन में मैंने ‘नीतिशास्त्र पेपर’ की तैयारी की। नीतिशास्त्र का पेपर अवधारणात्मक स्तर पर मजबूत होना चाहिए, क्योंकि यह पेपर सरल व अंकदायी है। हालांकि इस पेपर को सम्पूर्णता से तैयार करना चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने निबंध की तैयारी कैसे की और परीक्षा भवन में इसके चयन और लेखन के लिए क्या रणनीति अपनाई?

मनीष कुमारः निबंध की तैयारी करने के लिए, आपको अपनी विश्लेषण क्षमता को बढ़ाना होगा। प्रसिद्ध व्यक्तित्वों के ‘कोटेशन’ एवं विभिन्न पत्रिकाओं से निबंध संबंधी डेटा एकत्रित कर लेना चाहिए। UPPCS में निबंध के विषय - पूर्व निर्धारित हैं इसलिए उन सब पर कुछ अच्छे निबंधों का अभ्यास कर लेना चाहिए, इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप पेपर में अधिक सहजता से निबंध का चुनाव कर पाएंगे।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?

मनीष कुमारः उत्कृष्ट उत्तर वही है जिसमें प्रश्न की मांग के अनुरूप सभी पहलुओं पर ध्यान दिया गया हो। मैप व अन्य प्रस्तुतिकरण विकल्पों का उपयोग कर अपना उत्तर अन्य अभ्यर्थियों से अच्छा किया जा सकता है। सारगर्भित और उचित शब्दावलियों का उपयोग करें। उदाहरण के लिए ‘अनुसंधान’ की जगह ‘रिसर्च’ शब्द उपयोग करें। इससे समय कम लगेगा और चर्चित शब्द उपयोग होगा।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए? क्या किसी प्रश्न पर आप नर्वस भी हुए?

मनीष कुमारः व्यक्तित्व का निर्माण कुछ माह में नहीं हो सकता, इसलिए अपनी तैयारी के दौरान ही व्यक्तित्व के निर्माण पर अपना ध्यान दें। जैसे- ‘सर्वोच्च न्यायालय’ न कहकर ‘माननीय सर्वोच्च न्यायालय’ कहें। ध्यान रखें साक्षात्कार देते समय सामान्यतः सभी नर्वस होते हैं लेकिन आपको डरना नहीं है। स्पष्ट जबाव दें, घबराएं नहीं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? वैसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?

मनीष कुमारः एक बार कोचिंग अवश्य लेनी चाहिए इससे पूरे पाठ्यक्रम और विषयों को सम्पूर्णता में समझा जा सकता है। कोचिंग समाप्त होने पर ‘सेल्फ-स्टडी’ और ‘डिजिटल प्लेटफॉर्म्स- यू-टयूब, वेबसाइट्स’ आदि का उपयोग करना चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे? यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहता हो, तो ऐसे छात्र को क्या करना चाहिए?

मनीष कुमारः ‘सिविल सेवा’ कैरियर के लिए बेहतर विकल्प है लेकिन इस तैयारी में धैर्य और संयम अधिक चाहिए। नकारात्मक लोगों से बचें, सकारात्मक तैयारी करें। जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं वो ‘स्कॉलरशिप’ टेस्ट दे सकते हैं जिससे कोचिंग में एडमिशन आसानी से हो जाएगा। इसके अतिरिक्त डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का भी प्रयोग करें।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सामान्य धारणा यह है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करने से पूर्व कोई कैरियर विकल्प भी अपने पास रखना चाहिए। क्या आपने भी कोई कैरियर विकल्प रखा था?

मनीष कुमारः ‘सिविल सेवा’ में धैर्य और संयम अधिक महत्वपूर्ण है इसलिए कॅरियर के लिए एक अन्य विकल्प अवश्य रखना चाहिए। मैंने अन्य विकल्प के लिए ‘उच्च शिक्षा में जाना’ तय कर रखा था। ताकि बेहतर डिग्री कॉलेज में पढ़ा सकूं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः तैयारी में पत्र-पत्रिकाओं से आपको कितनी सहायता मिली? आपने किन पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन किया? सिविल सेवा परीक्षा के लिए इन पत्र-पत्रिकाओं की कितनी उपयोगिता है?

मनीष कुमारः मासिक पत्रिकाएं आपके कंटेन्ट को बढ़ाती हैं। ‘भूगोल और आप’, डाउन टू अर्थ ‘सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल’ का मासिक अंक मैं नियमित रूप से पढ़ता था। इससे करेन्ट अफेयर्स पर पकड़ बेहतर बनती है और वर्तमान मुद्दों पर समझ विकसित होती है। इसके अतिरिक्त यू-ट्यूब, वेबसाइट्स वगैरह मेरे लिए मददगार रहे।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें किसी प्रकार के बदलाव की अपेक्षा रखते हैं?

मनीष कुमारः सिविल सेवा की तैयारी करने वाले ज्यादातर प्रतिस्पर्धी ‘क्रॉनिकल पत्रिका’ पढ़ते हैं। इस बात से ही पत्रिका का महत्व समझा जा सकता है। प्रीलिम्स फैक्ट्स, विषयों पर गहरी समझ और उचित शब्दावलियों का उपयोग पत्रिका में सारगर्भित व सहज तरीके से किया जाता है जिससे तैयारी को धार मिलती है।

धन्यवाद


अभितेष सिंह
यूपीपीसीएस 2018 डिप्टी एसपी पद पर चयन
मेरी सफलता में मेरी पृष्ठभूमि का बड़ा योगदान रहा।


परिचय

  • नाम: अभितेष सिंह
  • पिता का नाम एवं पेशा: श्री रायबहादुर सिंह (पुलिस उपनिरीक्षक)
  • माता का नाम: श्रीमती कुसुम सिंह (गृहिणी)
  • शैक्षिक योग्यताः बी-टेक- (ऑनर्स), इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग
  • अभिरुचियांः क्रिकेट खेलना, फिल्में देखना, गाने सुनना
  • आदर्श व्यक्तिः सचिन तेंदुलकर
  • पूर्व चयनः रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (M.P.), सॉफ्टवेयर इंजीनियर (Wipro Technologies, Bangalore)

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः यूपीपीसीएस 2018 में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई। आपकी सफलता में अपने परिवार, मित्रें व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान दिया?

अभितेष सिंहः जी बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरी सफलता में मेरी पृष्ठभूमि का बड़ा योगदान रहा। मेरा पूरा परिवार (विशेषकर बड़े भैया रितेष), मेरे सभी मित्र (विशेषकर मित्र ओम व ब्रजेन्द्र) एवं शिक्षक इस सफलता के अभिन्न अंग हैं। मैं इस सफलता का बाहरी चेहरा मात्र हूं। इस सफलता में पर्दे के पीछे कई लोगों का योगदान है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया? परीक्षा की तैयारी शुरू करने का आदर्श समय क्या होना चाहिए?

अभितेष सिंहः पारिवारिक माहौल व सिविल सेवा के प्रति लगाव के कारण मैंने तैयारी शुरू की। ‘संकल्पना निर्माण’ पर व वैकल्पिक विषय पर अधिक ध्यान दिया। स्नातक का अंतिम वर्ष एक उचित समय हो सकता है लेकिन यह प्रत्येक व्यक्ति की परिस्थिति पर भी निर्भर करता है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानते हैं कि अंग्रेजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?

अभितेष सिंहः जी नहीं। मेरा माध्यम हिन्दी था, जिसमें मुझे हानि ही हुई है। निश्चित रूप से अंग्रेजी माध्यम वाले उम्मीदवार लाभप्रद स्थिति में हैं। आंकड़े इसके गवाह हैं और यह कहना गलत होगा कि भाषा महज एक माध्यम है। भाषा एक 'status symbol' बन गई है, फिर चाहे वह समाज में हो या परीक्षा में।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपका वैकल्पिक विषय क्या था? इनके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया या उसमें बदलाव किये?

अभितेष सिंहः मेरा वैकल्पिक विषय भूगोल था। इसके चयन का आधार मेरी रुचि व मेरा इंजीनियरिंग बैकग्राउण्ड था। कथित लोकप्रियता तभी मायने रखती है जब आपकी उस विषय में रुचि हो।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुक्त मानते हैं? तीनों की तैयारी में समय की रणनीति आपकी एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?

अभितेष सिंहः करीब डेढ़ वर्ष का समय तैयारी के लिए उपयुक्त है लेकिन परीक्षा में चयन कई कारकों पर भी निर्भर करता है। निश्चित रूप से तीनों चरणों के लिए अलग-अलग रणनीति की आवश्यकता होती है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयारी करने का सर्वोत्तम तरीका क्या हो सकता है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठ्यक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनाई? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए आपने क्या कोई विशेष रणनीति अपनाई?

अभितेष सिंहः सर्वोत्तम तरीका ईमानदारी से मेहनत करना है। बहुविषयक दृष्टिकोण, सभी विषयों पर बराबर ध्यान देना और समाज व देश के मुद्दों के प्रति आंखें खुली रखना एक अच्छी रणनीति हो सकती है। ‘टू द पॉइंट’ उत्तर लिखना ही अब एकमात्र विकल्प है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?

अभितेष सिंहः जी हां, कुछ नोट्स खुद बनाए, कुछ में कोचिंग की मदद ली। कोचिंग के नोट्स में ही आप नये एवं रचनात्मक तथ्य जोड़कर उन्हें बेहतर बना सकते हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः नीतिशास्त्र व सत्यनिष्ठा पत्र की तैयारी के लिए आपने क्या किया? छात्रें को इस संदर्भ में आप क्या मार्गदर्शन दे सकते हैं?

अभितेष सिंहः सच कहूं तो नीतिशास्त्र के लिए कोई एक, स्तरीय किताब दिखाई नहीं देती। आपको इसे कई माध्यमों से तैयार करना होता है। दृष्टि IAS के नोट्स, विजन IAS नोट्स व क्रॉनिकल की LEXICON इसमें मददगार हो सकती है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने निबंध की तैयारी कैसे की और परीक्षा भवन में इसके चयन और लेखन के लिए क्या रणनीति अपनाई?

अभितेष सिंहः निबंध के लिए मैंने दृष्टि IAS के विकास दित्यकीर्ति सर से मार्गदर्शन लिया। दरअसल निबंध पर उनका एकाधिकार है। परीक्षा भवन में आप वही निबंध चुनें जिस पर आपकी पकड़ मजबूत हो। निबंध में समय प्रबंधन, विषय की गहराई व प्रवाह की भूमिका निर्णायक है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए?इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?

अभितेष सिंहः ‘प्रश्न की मांग के अनुसार उत्तर’ ही उत्कृष्ट उत्तर है। निःसंदेह इसमें मुद्दे की गहराई व बहुविषयक दृष्टिकोण का समावेश आवश्यक है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए? किसी प्रश्न पर आप नर्वस भी हुए?

अभितेष सिंहः साक्षात्कार में मैंने श्री आर-पी- सिंह सर से मार्गदर्शन लिया। मुझे नहीं लगता उनसे बेहतर उत्तर कोई दे सकता है। उनका साक्षात्कार कौशल अतुलनीय है। मेरा साक्षात्कार प्रभात कुमार सर (चेयरमैन) के बोर्ड में था। मुझसे हर तरह के प्रश्न पूछे गए। ये एक शानदार इंटरव्यू था। मैं प्रभात सर को इसके लिए धन्यवाद देना चाहूंगा। उन्होंने अपनी पंक्ति ‘‘दयालु दीन बंधु के बड़े विशाल हाथ हैं’’, को सार्थक कर दिखाया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? ऐसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?

अभितेष सिंहः जी हां अच्छे शिक्षक आपको सही रास्ता दिखाने का कार्य करते हैं, जिससे भटकाव कम होता है। लेकिन कई बार गलत शिक्षक आपको भटका भी सकते हैं। मेरा सुझाव है कि कोचिंग लेने में कोई बुराई नहीं है। आखिर अर्जुन ने भी तो कृष्ण से कोचिंग ही ली थी।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उनको आप क्या सुझाव देंगे? यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहता हो, तो ऐसे छात्रें को क्या करना चाहिए?

अभितेष सिंहःप्रथम सुझाव तो यह है कि तैयारी आरंभ कर दें। संकल्पनाओं व उत्तर लेखन पर अधिक ध्यान दें लेकिन प्रारंभिक परीक्षा को कमतर न आंके। ग्रामीण व कमजोर पृष्ठभूमि के छात्र हर वर्ष चयनित होते हैं इसलिए निराश न हों_ ईमानदारी से तैयारी करें। शुरुआती असफलता से भी निराश न हों और ध्यान रखें-

‘‘विधना तेरे लेख, किसी के समझ न आते हैं,
जन-जन के नायक राम, वन को जाते हैं।’’

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सामान्य धारणा यह है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करने से पूर्व कोई कॅरियर विकल्प भी अपने पास रखना चाहिए। क्या आपने भी कोई कॅरियर विकल्प रख रखा था?

अभितेष सिंहः यह एक व्यक्तिपरक मामला है। मैं तो पहले ही ‘विप्रो टेक्नोलॉजीस बैंगलोर’ में सॉफ्रटवेयर इंजीनियर था। वैसे मेरे ख्याल में इस परीक्षा की अनिश्चितता के चलते एक कॅरियर विकल्प रखना चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः तैयारी में पत्र-पत्रिकाओं से आपको कितनी सहायता मिली? आपने किन पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन किया? सिविल सेवा परीक्षा के लिए इन पत्र-पत्रिकाओं की कितनी उपयोगिता है?

अभितेष सिंहः पत्र-पत्रिकाएं ही सिविल सेवा की तैयारी का आधार हैं। मैंने सूची में वर्णित पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन किया, जिसमें सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल प्रमुख है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें किसी प्रकार के बदलाव की अपेक्षा रखते हैं?

अभितेष सिंहः वर्तमान परिदृश्य में सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल एक शानदार पत्रिका है। मेरी सफलता में इसका भरपूर योगदान रहा। बदलाव के तौर पर इसमें अनावश्यक तथ्यों को कम किया जा सकता है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः धन्यवाद

  • अभितेष सिंहः जी आपको भी धन्यवाद!
  • अनुशंसित पुस्तक सूची
  • इतिहास - स्पेक्ट्रम, राजव्यवस्था - लक्ष्मीकांत, भूगोल - महेश बर्णवाल, अर्थव्यवस्था - कुमार सर्वेश
  • वैकल्पिक विषय
  • आलोक रंजन नोट्स, कुमार ज्ञानेश नोट्स, सविन्द्र सिंह, भारत का भूगोल - आर-सी- तिवारी
  • पत्र एवं पत्रिकाएं: सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल, योजना, द हिन्दू, विजन IAS, घटना चक्र (वार्षिकी), AIR News.

ऋचा रत्नम
सिविल सेवा परीक्षा 2019 हिन्दी माध्यम टॉपर आल इंडिया रैंक 274
परीक्षार्थी को उसी भाषा में परीक्षा देनी चाहिए जिसमें वह सहज हो।


परिचय

  • नाम: ऋचा रत्नम
  • पिता का नाम एवं पेशा: डॉ शैलेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, एसोसिएट प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग (रिटायर्ड)
  • माता का नाम: श्रीमती शशि कला श्रीवास्तव, गृहिणी
  • शैक्षिक योग्यता: इंजीनियरिंग (B.Tech)
  • अभिरुचियां: गाने सुनना
  • आदर्श व्यक्ति: स्वामी विवेकानंद, राहुल द्रविड़
  • सकारात्मक एवं नकारात्मक पक्ष: धैर्य, सहनशीलता, अधिक भावुक होना।
  • वैकल्पिक विषय (मुख्य परीक्षा): इतिहास
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सेवा परीक्षा 2019 में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई। आपकी सफलता में अपने परिवार, मित्रें व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?
  • ऋचा रत्नमः मेरी सफलता में मेरे परिवार एवं शिक्षक के साथ-साथ मेरे गुरू का भी बहुत योगदान है। चूंकि आरंभ में मेरा चयन नहीं हो पा रहा था इसलिए पूरे परिवार का सहयोग मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था ताकि मैं अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी तैयारी अच्छे ढंग से कर सकूं।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया? परीक्षा की तैयारी शुरू करने का आदर्श समय क्या होना चाहिए?
  • ऋचा रत्नमः मैंने अपनी परीक्षा की तैयारी NCERT के पाठ्य पुस्तकों से प्रारंभ की। उसके बाद मैंने अपने वैकल्पिक विषय और सामान्य अध्ययन की तैयारी की। इसके साथ ही मैं नियमित तौर पर न्यूज पेपर पढ़ती थी। तैयारी के दौरान मेरा विशेष ध्यान नियमित व गुणवत्तापूर्ण अध्ययन पर था।
  • प्रतियोगियों को IAS परीक्षा की तैयारी स्नातक के बाद जल्द से जल्द शुरू करने के बारे में सोचना चाहिए। हालांकि यह परिस्थिति पर भी निर्भर करता है लेकिन मेरा मानना है कि प्रथम प्रयास से कम से कम 2 साल पहले तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ या हानि का सामना करना पड़ा? क्या आप मानते हैं कि अंग्रेजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?
  • ऋचा रत्नमः मेरे अनुसार किसी भी परीक्षार्थी को उसी भाषा में परीक्षा देनी चाहिए जिसमें वह सहज हो। मैंने हिंदी माध्यम का चयन इसी वजह से किया।
  • मेरा यह मानना है कि सिर्फ भाषा के कारण कोई भी माध्यम लाभप्रद स्थिति में है, ऐसा नहीं कहा जा सकता_ लेकिन यह अवश्य है कि हिंदी व अन्य भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री की कमी है। इसलिए हिंदी भाषा में अच्छी तैयारी के लिए थोड़ा अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपका वैकल्पिक विषय क्या था? इनके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया या उसमें बदलाव किए?
  • ऋचा रत्नमः मेरा वैकल्पिक विषय इतिहास था। मैंने इस विषय का चयन अपनी अभिरुचि के आधार पर किया। चूंकि इतिहास से सामान्य अध्ययनऔर निबंध के अनिवार्य पेपरों के पाठ्यक्रम का एक अच्छा हिस्सा भी कवर हो जाता है इसलिए यह मेरे लिए एक स्वाभाविक विकल्प था।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुक्त मानते हैं? तीनों चरणों की तैयारी में समय की रणनीति आपकी एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?
  • ऋचा रत्नमः मेरे अनुसार प्रथम प्रयास देने से पूर्व के 2 वर्ष प्रीलिम्स के लिए सामान्य अध्ययन एवं मुख्य परीक्षा के लिए सामान्य अध्ययन व वैकल्पिक विषय की तैयारी के लिए उपयुक्त हैं। जहां तक परीक्षा के तीनों चरणों के लिए समय की रणनीति का प्रश्न है तो फरवरी अंत तक मैंने प्रीलिम्स और मेन्स दोनों के लिए एक साथ अध्ययन किया। मार्च से मई के दौरान अंत तक मैंने पूरी तरह से प्रीलिम्स पर ध्यान केंद्रित किया। मैंने हर दिन एक मॉक टेस्ट किया। इस तरह मैंने अपना समय मेन्स और प्रीलिम्स के बीच बांट दिया। इंटरव्यू के तैयारी के लिए 1 महीने का समय पर्याप्त है।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयारी करने का सर्वोत्तम तरीका क्या हो सकता है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठ्यक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनायी? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए आपने क्या कोई विशेष रणनीति अपनायी?
  • ऋचा रत्नमः सामान्य अध्ययन की तैयारी हेतु प्रतिदिन एक न्यूज पेपर पढ़ना चाहिए। इसके साथ ही किसी कोचिंग इंस्टिट्यूट के मासिक संकलन या किसी मासिक पत्र पत्रिका को भी पढ़ना चाहिए। मैंने सामान्य अध्ययन के पाठ्यक्रम के सभी टॉपिक्स पर नोट्स तैयार किया था। इसके अलावा मुख्य परीक्षा में प्रश्नों के उत्तर तय समय सीमा में देने के लिए मैंने उत्तर लेखन का नियमित अभ्यास भी किया था। प्रश्नों के उत्तर बुलेट्स में लिखे, आपकी वाक्य की संरचना छोटी होनी चाहिए और जहां तक हो सके सरल भाषा का ही प्रयोग करें।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने अपना नोट्स बनाया? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इस नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनायी?
  • ऋचा रत्नमः हां मैंने मुख्य परीक्षा की तैयारी के अपने नोट्स तैयार किए थे। अपने नोट्स खुद से तैयार करने के कारण परीक्षा में मुझे बहुत मदद मिली। उदाहरण के लिए मुख्य परीक्षा के लिए मैंने अपने नोट्स तैयार किए थे, जिसमें सामान्य अध्ययन के सभी स्टैटिक (Static) टॉपिक्स पर मेरे पास एक हर विषय के लिए एक बुनियादी संरचना (Basic Structure) थी जिससे मुझे मुख्य परीक्षा में प्रश्नों के उत्तर लिखने में मदद मिली।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने निबंध की तैयारी कैसे की और परीक्षा भवन में इसके चयन और लेखन के लिए क्या रणनीति अपनायी?
  • ऋचा रत्नमः मैंने निबंध के लिए अलग से पढ़ाई नहीं की है एवं निबंध की तैयारी के लिए ज्यादातर सामान्य अध्ययन से उपाख्यानों (ancedotes) को एकत्र किया था। इसके अलावा मैंने प्रीलिम्स एवं मुख्य परीक्षा के बीच में प्रत्येक हफ्रते में कम से कम एक निबंध लिखने का अभ्यास किया। हर निबंध में मेरी यह कोशिश रहती थी कि उस विषय से संबंधित सभी मुख्य आयाम (speclih) को मैं निबंध में लिखूं। उदाहरण के लिए मैंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता व इससे उत्पन्न रोजगार संबंधी चुनौतियों पर निबंध लिखते समय इतिहासकार युवाल हरारी के विचार लिखे। साथ ही साथ इसके राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक पहलुओं को भी लिखा।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःउत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?
  • ऋचा रत्नमः मेरी पृष्ठभूमि इंजीनियरिंग से जुड़ी थी इसलिए मैंने जो शैली अपनाई वह थी-
  • छोटे-छोटे वाक्यों में लिखना
  • सरल भाषा का उपयोग
  • पैराग्राफ और बुलेट पॉइंट का उपयोग करना।
  • अधिक से अधिक उप शीर्षकों (Sub heading) का उपयोग करें। उदाहरण के लिए जब न्यायपालिका की समस्याएं पूछी जाती हैं, तो इसे प्रक्रियात्मक, अवसंरचनात्मक, परिचालनात्मक, नियुक्ति संबंधी आदि में विभाजित करना। जहां भी संभव हो डायग्राम और फ्रलोचार्ट का उपयोग_ साथ ही प्रश्न के अंत में ठोस निष्कर्ष लिखें जैसे मैंने प्रश्न के अंत में आगे का मार्ग लिखा और भविष्य के समाधान लिखे। इसमें ज्यादातर प्रासंगिक समिति की सिफारिशें शामिल थीं। इसके लिए मैंने नियमित अभ्यास किया था, जिसके बाद यह लेखन शैली विकसित हुई।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए? किसी प्रश्न पर आप नर्वस भी हुए।
  • ऋचा रत्नमः साक्षात्कार के लिए मैंने बहुत सारे मॉक इंटरव्यू दिए जिससे इंटरव्यू के लिए मेरी तैयारी बेहतर हो सके। मॉक इंटरव्यू देने से मेरे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हुई और मैंने अपने व्यक्तित्व से संबंधित कमियों को दूर करने के लिए मॉक इंटरव्यू में बताए गए सुझावों पर काम किया। इंटरव्यू के लिए मैंने DAF को आधार बनाते हुए इसके विभिन्न आयामों को ध्यान में रखते हुए ही तैयारी की थी। बोर्ड में मुख्यतः मेरे DAF से संबंधित प्रश्नों के अलावा वैकल्पिक विषय के साथ-साथ समसामयिकी पर प्रश्न पूछे गए थे।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? वैसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगी?
  • ऋचा रत्नमः सामान्य अध्ययन या वैकल्पिक विषय के लिए मैंने किसी भी कोचिंग के क्लासरूम प्रोग्राम को नहीं किया है। हालांकि मैंने कुछ कोचिंग संस्थान में अपना नामांकन कराया था लेकिन किसी भी कोचिंग संस्थान के क्लासरूम प्रोग्राम को मैंने पूरा नहीं किया। लेकिन मुख्य परीक्षा के लिए मेरे लिए यह आवश्यक था कि मुझे एक अच्छे ढंग से गाइडेंस मिले। सामान्य अध्ययन के लिए मैंने forum ias के मेंटर गाइडेंस प्रोग्राम एवं ऑनलाइन क्लासेज के साथ-साथ इतिहास के लिए सिहांता आईएएस में रजनीश सर का गाइडेंस लिया था।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उनको आप क्या सुझाव देंगे? यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर कोई छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हों, तो ऐसे छात्रें को क्या करना चाहिए?
  • ऋचा रत्नमः मेरा यह मानना है कि सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी के लिए किसी भी छात्र को ncert की पाठ्यपुस्तक के साथ तैयारी की शुरुआत करनी चाहिए इससे किसी भी छात्र को अपने आधार एवं समझ को मजबूत करने में मदद मिलती है साथ ही प्रतिदिन समाचार पत्र पढ़ना चाहिए। आपका माध्यम कोई भी हो लेकिन सभी को The Hindu समाचार पत्र पढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।
  • इसके अलावा छात्रें को अधिक से अधिक विभिन्न विषयों के नोट्स खुद से बनाने की कोशिश करनी चाहिए। आज के समय में जब इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है और इस परीक्षा से संबंधित सामग्री इंटरनेट पर उपलब्ध है तो ग्रामीण क्षेत्र से तैयारी कर रहे छात्रें को इंटरनेट का उपयोग प्रभावी ढंग से करना चाहिए।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सामान्य धारणा यह है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करने से पूर्व कोई कॅरियर विकल्प भी अपने पास रखना चाहिए। क्या आपने भी कोई कॅरियर विकल्प रख रखा था?
  • ऋचा रत्नमः हालांकि मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है लेकिन मैंने कभी भी किसी और कॅरियर विकल्प को प्राथमिकता नहीं दी और अपना पूरा ध्यान सिविल सेवा की परीक्षा में ही लगाया।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः तैयारी में पत्र-पत्रिकाओं से आपको कितनी सहायता मिली? आपने किन पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन किया? सिविल सेवा परीक्षा के लिए इन पत्र-पत्रिकाओं की कितनी उपयोगिता है?
  • ऋचा रत्नमः मैंने The Hindu समाचार पत्र का अध्ययन प्रतिदिन किया था। इसके अलावा समसामयिकी के लिए मैंने क्रॉनिकल को नियमित रूप से पढ़ा है। इस पत्रिका में प्रमुख मुद्दों को काफी अच्छे ढंग से कवर किया जाता है, जिससे मुझे अपनी तैयारी में मदद मिली।
  • सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें किसी प्रकार की बदलाव की अपेक्षा रखती हैं?
  • ऋचा रत्नमः मैंने नियमित रूप से सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल को अपनी तैयारी के दौरान पढ़ा है, इससे मुझे सामान्य अध्ययन की तैयारी में पूरी मदद मिली। इस पत्रिका में विभिन्न मुद्दों को काफी अच्छे ढंग से कवर किया जाता है।

अनुशंसित पुस्तक सूची

  • प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययनः NCERT पुस्तकें, संस्कृति कक्षा ग्यारहवीं NCERT, नितिन सिंघानिया, पुस्तक एवं इंटरनेट।
  • राजव्यवस्थाः एम- लक्ष्मीकांत
  • इकोनॉमीः क्लास 12 मैक्रो NCERT, शंकर-गणेश पुस्तक व मृणाल व्याख्यान
  • विज्ञानः कक्षा 12 जीवविज्ञान के पिछले 3-4 अध्याय
  • पर्यावरणः शंकर आईएएस
  • भूगोल (भौतिक+विश्व)ः कक्षा XI और XII NCERT एवं मृणाल व्याख्यान
  • इथिक्सः द लेक्सिकन क्रॉनिकल बुक्स
  • करंट अफेयर्सः क्लास-नोट्स (फोरम IAS), संकलन - मासिक और वार्षिक

वैकल्पिक विषय

  • भारत का प्राचीन इतिहास -आर-एस- शर्मा
  • प्राचीन एवं पूर्व मध्यकालीन भारत का इतिहास -उपिंदर सिंह
  • मध्यकालीन भारत का इतिहास (800-1700 AD) -सतीश चन्द्र
  • भारत का स्वतंत्रता संघर्ष -बिपिन चन्द्र
  • आजादी के बाद का भारत (1947-2000) -बिपिन चन्द्र
  • प्लासी से लेकर विभाजन और उसके बाद तक -शेखर बंदोपाध्याय
  • समकालीन विश्व इतिहास -अर्जुन देव
  • पत्र एवं पत्रिकाएंः -द हिन्दू, क्रॉनिकल पत्रिका

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