साक्षात्कार

बमबम कुमार
66वीं बीपीएससी परीक्षा श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (LEO)


जीवन परिचय

  • पिता: सूर्य नारायण मंडल, किसान
  • माता: रानी देवी, गृहणी
  • शैक्षणिक योग्यता: M. Tech, IIT (ISM) DHANBAD
  • अन्य योग्यताएं: Gate Qualified अभिरुचियां: वंचित बच्चों को पढ़ाना व मार्गदर्शित करना
  • आदर्श व्यक्ति: पिता
  • सकारात्मक: सहनशीलता, समस्या समाधान कौशल
  • नकारात्मक पक्ष: अधिक सोचना
  • पूर्व चयन: एयर ट्रैफिक कंट्रोल अथॉरिटी ऑफ इंडिया में ‘एयर टैªफिक कंट्रोल ऑफीसर’
  • वैकल्पिक विषय: इतिहास

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः बीपीएससी में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई- आपकी सफलता में परिवार, मित्रों व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?

बमबम कुमारः बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। किसी भी व्यक्ति की सफलता में परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण होता है। मेरी सफलता में खासकर मेरे परिवार का बहुत बड़ा योगदान है। जिस परिस्थिति में रहकर उन लोगों ने मुझे पढ़ाने का सपना देखा था, वो गिने चुने लोग ही कर पाते हैं। उनकी ऐसी सोच और संघर्ष की वजह से ही मैं यहां तक पहुंच पाया हूं। हालांकि जीवन में अच्छे मित्र और मार्गदर्शक (शिक्षक) का होना अनिवार्य है, और मैं इस मामले में भी भाग्यशाली हूं कि मुझे ऐसे लोगों का साथ मिलता रहा है।

जहां तक पृष्ठभूमि की बात है तो मेरे पिता किसान हैं, मैंने उनका संघर्ष बचपन से देखा है जिसने मुझे निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया? परीक्षा की तैयारी शुरू करने का आदर्श समय क्या होना चाहिए?

बमबम कुमारः M.Tech करने के बाद मैंने एक संस्थान में पढ़ाना शुरू किया। परंतु मन में था कि एक बार सिविल सेवा परीक्षा देनी चाहिए। मैंने BPSC की तैयारी के लिए पटना में ही परफेक्शन आईएएस जॉइन किया और यहीं से परीक्षा की तैयारी आरंभ हुई। तैयारी आरंभ करने से पहले मैंने पाठ्यक्रम को अच्छे से देखा और उसी के अनुसार मैंने महत्वपूर्ण टॉपिक्स को चिह्नित कर पढ़ना शुरू किया।

वैसे तो परीक्षा शुरू करने का कोई मानक समय नहीं होता है। इस परीक्षा की तैयारी कोई स्नातक के पहले भी शुरू कर सकता है, कोई स्नातक के बाद भी। जहां तक मेरा सवाल है, मैंने M.Tech के 2 साल बाद तैयारी शुरू की।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानते हैं कि अंग्रजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?

बमबम कुमारः भाषा माध्यम के बारे में, मैं यह कह सकता हूं कि आप जिस भाषा में सहज हैं वह ले सकते हैं। मैंने हिन्दी माध्यम में परीक्षा दी, क्योंकि मुझे लगता था मैं हिन्दी भाषा में अपनी बातों को सहजता से व्यक्त कर सकता हूं। आपको लगता है कि आप अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देने में अधिक सहज हैं तो अंग्रेजी से ही दीजिए, दोनों भाषाएं अपनी जगह सही हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया?

बमबम कुमारः मेरा वैकल्पिक विषय इतिहास था। वैकल्पिक विषय के चयन में सबसे महत्वपूर्ण पहलू है आपकी उस विषय में रुचि। फिर आप इतिहास को देखेंगे तो प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के GS-I में इतिहास से काफी प्रश्न पूछे जाते हैं। यही मेरा आधार था। मैंने लोकप्रियता को आधार नहीं बनाया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुत्तफ़ मानते हैं? तीनों चरणोंकी तैयारी में आपकी समय की रणनीति एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?

बमबम कुमारः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए जहां तक समय की बात है तो 1 वर्ष में हो सकता है, हालांकि अलग-अलग छात्रों के लिए यह अवधि घट या बढ़ भी सकती है।

परीक्षा के तीन चरण प्रारंभिक मुख्य परीक्षा एवं व्यक्तित्व परीक्षण, तीनों की अलग-अलग मांग है इसलिए रणनीति भी अलग-अलग ही होगी। प्रारंभिक के लिए मैंने तथ्यों पर ज्यादा ध्यान दिया और बहुत सारे मॉक टेस्ट दिए। हालांकि तीनों में समानता यह है कि जो चीजें आप प्रारंभिकी के लिए पढ़ते हैं वो मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में भी लाभदायक होते हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयार करने का सर्वोत्तम तरीका क्या हो सकता है? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति अपनाई?

बमबम कुमारः मुख्य परीक्षा के लिए सामान्य अध्ययन को तैयार करने के लिए मैंने मूल पूस्तकों को पढ़ा था ताकि विषय वस्तु की अवधारणात्मक समझ हो जाए मेरी रणनीति रही थी कि में विगत वर्षों के प्रश्न को अच्छे से तैयार कर मुख्य बिंदु नोट कर लेता था और उसका एक स्ट्रक्चर तैयार कर बार-बार याद करने की कोशिश करता था।

परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए मैंने सबसे पहले समय प्रबंधन करने की रणनीति बनाई थी, उसके लिए मैंने Perfection IAS का Mains Test Series दिया था। जिससे मैं 3 घंटे में सारे उत्तर लिख पाया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?

बमबम कुमारः हां। आप जब किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं तो आपको अपना नोट्स बनाना चाहिए तथा शॉर्ट नोट्स भी बनाने चाहिए। ये नोट्स आखिरी वक्त के रिवीजन में बहुत उपयोगी होते हैं।

मैंने अपने नोट्स में उन बिंदुओं को ज्यादा स्थान दिया जो परीक्षा के दृष्टिकोण से ज्यादा महत्वपूर्ण थे तथा वैसे Tricky Questions थे जहां पर मैं गलती करता था या कर सकता था उन पर भी ध्यान दिया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?

बमबम कुमारः वैसे तो उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली का कोई मानक रूप नहीं है, परंतु यदि आप प्रश्न के अनुसार, शब्द सीमा को ध्यान में रखते हुए उत्तर लेखन करते हैं, तो इसे एक अच्छा उत्तर लेखन माना जा सकता है। मैंने तैयारी के दौरान पूर्व में पूछे गये प्रश्नों की व्याख्या को देखकर उत्तर लेखन करना शुरू किया था। धीरे-धीरे उत्तर लेखन शैली बेहतर हो गई।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए?

बमबम कुमारः साक्षात्कार के लिए मैंने बहुत सारे चयनित प्रतियोगियों के मॉक इंटरव्यू के वीडियो को देखा तथा उसी के अनुसार मैंने तैयारी शुरू की।

अपने परिचय, रुचि, समसामयिकी, स्नातक विषय तथा एच्छिक विषय को तैयार किया।

फिर मैंने परफेक्शन IAS के Mock Interview Programe को जॉइन किया था।

मेरा साक्षात्कार साधारण ही रहा था। मुझसे पहले ठेंपब सवाल पूछे गये जैसे- ग्रेजुएशन कब किया, अभी क्या कर रहे हैं, पदों की प्राथमिकताएं क्या हैं, Hobby & Optional क्या हैं।

फिर मगध के इतिहास के बारे में, रूस-यूक्रेन युद्ध में रूस का तर्क और मेरा विचार क्या है? G.I tag जंह क्या होता है, गया संस्कृति आदि के बारे में प्रश्न पूछे हैं। OTT Platform और कुछ खेल से जुड़े प्रश्न भी थे।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? वैसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?

बमबम कुमारः हां। कोचिंग से आपको एक निरंतरता मिलती है तथा वो माहौल मिलता है जिसमें आप खुद को Motivated रख सकते हैं। हालांकि सफलता के लिए कोचिंग लेना ही है यह जरूरी नहीं है। आप स्व-अध्ययन से भी सफल हो सकते हैं। परंतु आप अगर कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं तो जरूर लीजिए, बस आपको याद रखना होगा कि आप नियमित क्लास लें और मेहनत आपको खुद ही करनी पड़ेगी।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?

यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहता हो, तो ऐसे छात्र को क्या करना चाहिए?

बमबम कुमारः जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं उनके लिए यह सुझाव है कि आप सबसे पहले सेलेबस को ध्यान से विश्लेषित करे फिर उसी के अनुसार अपनी तैयारी को आगे बढ़ाएं। Basic Concept के लिए मानक टेक्स्ट बुक को पढ़िये।

आर्थिक रूप से कमजोर छात्र You Tube के सहारे अपनी तैयारी शुरु कर सकते हैं। You Tube पर फ्री में अच्छी सामग्री उपलब्ध है आप उनका उपयोग कर सकते हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सामान्य धारणा यह है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करने से पूर्व कोई कैरियर विकल्प भी अपने पास रखना चाहिए। क्या आपने भी कोई कैरियर विकल्प रखा था?

बमबम कुमारः यह व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करता है। कुछ लोगों का मानना है अगर आपके पास कैरियर विकल्प है तो आप निशि्ंचत रहेंगें और बेहतर कर पाएंगे वहीं कुछ लोगों का इसके विपरीत मानना है।

जहां तक मेरी बात है तो मैं Teaching करते हुए इस परीक्षा की तैयारी किया था।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें किसी प्रकार की बदलाव की अपेक्षा रखते हैं?

बमबम कुमारः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका काफी व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत की जाती है। इसमें BPSC मुख्य परीक्षा के 10 संभावित प्रश्नों की श्रंृखला सराहनीय है। इससे मुझे अपने उत्तर लेखन शैली को बेहतर करने में मदद मिली। मुझे नहीं लगता इसमें किसी प्रकार के बदलाव की जरूरत है।

अनुशंसित पुस्तक सूची

प्रारंभिक परीक्षा सामान्य अध्ययन

  • प्राचीन भारत : कक्षा 11 NCERT
  • मध्यकालीन भारत : सतीश चन्द्रा
  • आधुनिक भारत : रू स्पेक्ट्रम
  • वैकल्पिक प्रश्नों के लिए : घटना चक्र
  • बिहार विशेष : इम्तियाज सर की पुस्तक
  • राजव्यवस्था : एम लक्ष्मीकांत
  • भूगोल : NCERT घटना चक्र

मुख्य परीक्षा

  • मूल पुस्तकें प्रारंभिक परीक्षा की ही तरह।
  • वैकल्पिक विषय (इतिहास): मणिकांत सर के नोट्स
  • पत्र एवं पत्रिकाएं: क्रॉनिकल मैगजीन।

राजीव कुमार
बीपीएससी रैंक-45 65वीं डीएसपी पद पर चयन


नाम: राजीव कुमार

पिता का नाम एवं पेशा: श्री बिरेन्द्र सिंह, किसान

माता का नाम एवं पेशा: श्रीमती सुनीता देवी, गृहिणी

शैक्षिक योग्यता: स्नातक (गणित प्रतिष्ठा)- बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर (प्रथम श्रेणी)

आदर्श व्यक्ति: मेरे पिताजी

अभिरुचियां: घूमना, संगीत सुनना

वैकल्पिक विषय (मुख्य परीक्षा): भूगोल

पूर्व चयन: (1) C.I.S.F., HC/CLK, (2) CENTRAL EXISE - TAX ASSISTANT,(3) CGL 2008 - PREVENTIVE OFFICER, (4) CGL 2010 - EXCISE INSP.(5) CDS – 2007

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्रॉनिकलः 65वीं बीपीएससी में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई. आपकी सफलता में परिवार, मित्रें व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?

राजीव कुमारः जी बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरी सफलता में ईश्वर, माता-पिता, छोटे भाई, परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग विशेष रूप से मेरी पत्नी तथा प्यारी बेटी का त्याग/सहयोग महत्वपूर्ण है। शिक्षक के रूप में अभिनव झा सर जिन्होंने भूगोल वैकल्पिक का मार्गदर्शन किया, साथ ही शाहिद इकबाल सर जो 60-62वीं एवं 63वीं बीपीएससी में डीएसपी पद पर चयनित है, उनका भी योगदान महत्वपूर्ण है। मित्र में आलोक परासर, संजीत, मुकेश जी, प्रणव प्रकाश, रणधीर ने मुझे तैयारी के प्रत्येक स्तर पर अकथनीय सहयोग किये हैं। चूंकि मैं ग्रामीण पृष्ठभूमि का छात्र रहा हूं, अतः गांव के लोगों के बारे में, उनकी समस्याओं के बारे में अच्छी तरह से अवगत हूं। अतः उन लोगों के लिए कुछ करने की इच्छा हमेशा से जागृत रही है। कहीं न कहीं इन सबने भी मुझे सिविल सेवा की ओर प्रेरित किया है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःआपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया?

राजीव कुमारः मैंने परीक्षा की तैयारी का आरंभ परीक्षा पैटर्न, सिलेबस तथा विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों का गहन अध्ययन करते हुए किया। तैयारी के दौरान मैंने तीनों स्तरों (प्रारंभिक, मुख्य, साक्षात्कार) के लिए अलग-अलग रणनीति बनाई। प्रारंभिक परीक्षा के लिए तथ्यात्मक अध्ययन पर जोर दिया। मुख्य परीक्षा के लिए विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों के पैटर्न को ध्यान में रखते हुए विस्तृत अध्ययन पर बल दिया तथा साक्षात्कार में अधिक से अधिक मॉक साक्षात्कार में शामिल हुआ। साक्षात्कार की तैयारी के दौरान ही मैं लक्ष्य कोचिंग दरभंगा के निदेशक आदरणीय पी.एन.झा सर से जुड़ा, उनके तथा हरिओम झा सर के मार्गदर्शन में ही मैंने साक्षात्कार में अच्छा अंक प्राप्त किया। साक्षात्कार की तैयारी के दौरान कैरियर क्वेस्ट के निदेशक संजीव कबीर सर से भी काफी सहयोग मिला।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानते हैं कि अंग्रजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?

राजीव कुमारः मैं हिन्दी माध्यम से इस परीक्षा में सफल हुआ हूं। जहां तक अंग्रेजी भाषी छात्रों की लाभप्रद स्थिति का सवाल है इस संबंध में, मैं यह कहना चाहूंगा कि विगत वर्षों के परिणाम से स्पष्ट है कि वर्ष दर वर्ष हिन्दी माध्यम से चयनित छात्रों की संख्या घटती जा रही है। 65वीं बी.पी.एस.सी. में ही अंतिम रूप से चयनित प्रथम 50 छात्रों में केवल दो छात्रों का माध्यम हिन्दी था। इसमें मेरा स्थान द्वितीय था। मैं अपने अनुभव के आधार पर हिन्दी माध्यम के छात्रों, अभ्यर्थियों से कहना चाहूंगा कि वो माध्यम को लेकर हतोत्साहित/निराश न हो तथा सही दिशा में, मानक अध्ययन सामग्री को आधार बनाते हुए तैयारी करें, आपको सफलता अवश्य मिलेगी।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःआपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया?

राजीव कुमारः मेरा वैकल्पिक विषय भूगोल था। इस विषय के प्रति मेरी अभिरुचि, अध्ययन सामग्री की उपलब्धता, अंकदायी होने के कारण मैंने इस विषय का चयन किया। मैं वर्ष 2011 संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली गया था। उस समय मुखर्जी नगर में सर्वत्र यह चर्चा का विषय था कि UPSC में वैकल्पिक विषय के रूप में केवल लोक प्रशासन एवं विधिशास्त्र (LAW) को ही वैकल्पिक विषय के रूप में रख सकेंगे। मैंने लोक प्रशासन विषय को चुना। लेकिन 56-59वीं एवं 64वीं बी.पी.एस.सी. में मैंने भूगोल वैकल्पिक का चयन किया तथा मुझे अंतिम रूप से इस परीक्षा में सफलता मिली।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःपरीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुत्तफ़ मानते हैं? तीनों चरणों की तैयारी में आपकी समय की रणनीति एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?

राजीव कुमारः तीनों चरणों की तैयारी के लिए उपयुक्त समय परीक्षार्थी की रणनीति, कार्य के प्रति समर्पण आदि पर निर्भर करता है। फिर भी यदि प्रयास स्नातक स्तर से ही किया जाए तो स्नातक के उपरांत एक वर्ष का समय पर्याप्त है। मुझे ज्यादा समय लगने का कारण यह है कि मैं सरकारी सेवा में कार्यरत हूं तथा तैयारी केवल परीक्षा के समय में ही अनियोजित तरीके से करता था। साथ ही पिछले 4-5 वर्षों से बी.पी.एस.सी. की परीक्षा नियमित होने लगी है, उससे पहले फार्म प्रकाशित होने से अंतिम परिणाम तक लगभग 4-5 वर्ष लगते थे, इस कारण भी देर हुई। इसके अतिरिक्त लॉकडाउन के कारण ऑफिस में रोस्टर सिस्टम लागू था, जिससे मुझे 65वीं मुख्य परीक्षा की तैयारी में काफी सहायता मिली।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयार करने का सर्वाेत्तम तरीका क्या हो सकता है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठड्ढक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनाई? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति अपनाई?

राजीव कुमारः सामान्य अध्ययन की तैयारी का सर्वोत्तम तरीका है कि इस विषय के दोनों पेपर के विभिन्न खंडों का विभाजन कर तैयारी करना। जैसे स्टैटिक्स को अधिक बल देना ताकि इसमें अधिकतम अंक प्राप्त हो सके। इस भाग में अच्छा स्कोर मिलने पर ही उच्च रैंक प्राप्त करने की सम्भावना रहती है। परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करते समय मैंने समय प्रबंधन पर विशेष बल दिया तथा प्रत्येक खंड के सभी प्रश्नों को एक निर्धारित समय-सीमा में हल करने का प्रयत्न किया। साथ में यह भी ध्यान रखा कि कोई भी प्रश्न छूट न जाए। एक भी प्रश्न छूट जाने पर उच्च रैंक तो दूर सफलता की संभावना भी नगण्य हो जाती है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःक्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?

राजीव कुमारः वैकल्पिक विषय भूगोल तथा समान्य अध्ययन के इतिहास एवं राजव्यवस्था खंड का नोट्स बनाया था। स्वयं का बनाया नोट्स तैयारी के दौरान तथा परीक्षा के समय रिवीजन में काफी लाभप्रद साबित हुआ। मैंने किसी कोचिंग के नोट्स का उपयोग नहीं किया। मैंने मूल किताब से स्वयं नोट्स बनाया तथा इसे नियमित रूप से अपडेट किया। मैंने सामान्य अध्ययन के लिए बी.पी.एस.सी. पाठशाला टेलीग्राम चैनल द्वारा मुफ्त में आयोजित टेस्ट सीरीज में भाग लिया तथा टॉपर्स की कॉपी से अपने उत्तर तथा नोट्स को अपडेट किया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?

राजीव कुमारः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली में निर्धारित समय में सरल भाषा में तथा प्रश्न की मांग के अनुरूप सभी भागों को कवर करना चाहिए। इसके लिए मैंने नियमित रूप से टेस्ट सीरीज में भाग लेकर अपने उत्तर को अपडेट करने का प्रयास किया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःआपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए? क्या किसी प्रश्न पर आप नर्वस भी हुए?

राजीव कुमारः साक्षात्कार हेतु मैंने संजीव कबीर सर (Career Quest) से काफी सहयोग मिला, सर ने साक्षात्कार के दौरान क्या, क्यों, कब करना चाहिए, आपके ड्रेस पैटर्न, बैठने का तरीका, प्रवेश करने तथा निकलने के समय अभिवादन आदि के बारे में बताया। मॉक साक्षात्कार में, मैं संजीव सर, आस्था आईएएस, परम आईएएस तथा लक्ष्य कोचिंग दरभंगा में शामिल हुआ। लक्ष्य कोचिंग में ही मैंने सबसे अधिक मॉक दिया, वहां पर आदरणीय पी.एन. झा सर का सहयोग काफी प्रशंसनीय था। मेरा साक्षात्कार 6 अगस्त, 2021 को प्रथम पाली में श्री चौधरी सर के बोर्ड में था। साक्षात्कार में मुझसे ऐच्छिक विषय, वर्तमान नौकरी तथा हॉबी से संबंधित प्रश्न पूछे गए। बोर्ड का व्यवहार बहुत ही सहयोगपूर्ण था।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? वैसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?

अनुशंसित पुस्तक सूची

प्रारंभिकी:

  • इतिहास-घटना चक्र (इतिहास), KCT, Lucent
  • भूगोल-महेश बर्णवाल, Lucent
  • राजव्यवस्था-एम- लक्ष्मीकांत
  • बिहार विशेष-विवास पैनोरमा
  • विज्ञान-Lucent, Speedy प्रकाशन
  • समसामयिकी-क्रॉनिकल, GKT

मुख्य परीक्षा:

  • GS-I-बिहार समग्र (इतिहास)
  • -L.K. Jha (सांख्यिकी)
  • -क्रॉनिकल मासिक (IR/CA)
  • GS-II-लक्ष्मीकांत (राजव्यवस्था)
  • -क्रॉनिकल मासिक (विज्ञान)

वैकल्पिक विषय: भूगोल

  • (1)सविन्द्र सिंह (भौतिक भूगोल)
  • (2)D.R. खुल्लर

राजीव कुमारः साक्षात्कार हेतु मार्गदर्शन व मॉक इंटरव्यू के अतिरिक्त मैंने कोई कोचिंग नहीं ली थी। जो छात्र तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें कहना चाहूंगा कि सर्वप्रथम वे वैकल्पिक विषय का चयन कर पाठयक्रम तथा विगत वर्षों के प्रश्न को ध्यान में रखते हुए एक बेस तैयार कर लें फिर कोचिंग जॉइन करें। वैसे, बिना कोचिंग के भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःजो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे? यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहता हो, तो ऐसे छात्र को क्या करना चाहिए?

राजीव कुमारः तैयारी आरंभ करने वाले छात्र को मेरी सलाह है कि वह बिना समय गवाएं वैकल्पिक विषय का चयन कर पाठयक्रम के अनुसार, प्रामाणिक अध्ययन सामग्री को इकट्ठा कर एक सही रणनीति बनाकर तैयारी शुरु कर दे। ग्रामीण पृष्ठभूमि के तथा आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मैं सलाह दूंगा कि वे भी उक्त रणनीति के अनुसार तैयारी करें। आज के समय में स्मार्टफोन सभी के पास उपलब्ध है, अतः उन्हें शहर की ओर जाने की कोई जरूरत नहीं है। वे सभी प्रकार की सूचना अपने निवास स्थान पर भी प्राप्त कर सकते हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःतैयारी में पत्र-पत्रिकाओं से आपको कितनी सहायता मिली? आपने किन पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन किया? सिविल सेवा परीक्षा के लिए इन पत्र-पत्रिकाओं की कितनी उपयोगिता है?

राजीव कुमारः मासिक पत्रिका जैसे क्रॉनिकल मेरी तैयारी का महत्वपूर्ण भाग था। इससे न केवल समसामयिकी बल्कि प्रत्येक माह में सामान्य अध्ययन के सभी भागों पर अध्ययन सामग्री छपने के कारण, सामान्य अध्ययन की तैयारी भी आसान हो जाती है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें किसी प्रकार की बदलाव की अपेक्षा रखते हैं?

राजीव कुमारः यह पत्रिका सिविल सेवा के प्रत्येक चरणों की तैयारी में काफी उपयोगी सिद्ध हुई। सामान्य अध्ययन में अच्छे अंक प्राप्त होने के साथ ही भूगोल वैकल्पिक को करेंट से जोड़ने में यह पत्रिका काफी लाभप्रद सिद्ध हुई। क्रॉनिकल टीम को धन्यवाद एवं आभार।


बिंदुनन्दन सिंह
यूपीपीसीएस 2019 नायब तहसीलदार पद पर चयन


  • नाम: बिंदुनन्दन सिंह
  • पिता का नाम एवं पेशा: शिवेन्द्र प्रताप सिंह, एडवोकेट
  • माता का नाम: श्रीमति बिंदु सिंह (गृहिणी)
  • शैक्षिक योग्यता: एम-ए- नेट (हिन्दी साहित्य)
  • सबल पक्ष: आत्म विश्वास, लक्ष्य के प्रति निष्ठा
  • दुर्बल पक्ष: अति भावुक होना
  • रुचियां: क्रिकेट खेलना, मूवी देखना
  • आदर्श व्यक्तित्व: कबीर, ए-पी-जे- अब्दुल कलाम
  • वैकल्पिक विषय: हिन्दी साहित्य

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः यूपीपीसीएस 2019 में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई।

बिंदुनन्दन सिंहः धन्यवाद।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपकी सफलता में परिवार, मित्रें व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?

बिंदुनन्दन सिंहः मैं अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता एवं अपने गुरुजनों के साथ बड़े भाई और मार्गदर्शक उपेन्द्र प्रताप सिंह (सहायक कमान्डेंट सीआरपीएफ) एवं अनूप कुमार सिंह (आईपीएस) को देना चाहता हूं, जिन्होंने मेरी इस यात्र में सदैव मेरे उत्साह को बनाए रखा। कोई भी सफलता मित्रें के सहयोग के बिना मुश्किल है अतः इस प्रयत्न यात्र में अपने मित्रें प्रभात, आशुतोष, अभिषेक, अनुज, शुभम के सहयोग का ऋणी हूं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गौरवमयी नागरिक सेवा संबंधी वातावरण एवं डॉ- ताराचन्द्र छात्रवास के चयनित अग्रजों ने उस भाव-बोधना का सृजन किया जिसने इस यात्र को आसान बनाया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया? परीक्षा की तैयारी शुरू करने का आदर्श समय क्या होना चाहिए?

बिंदुनन्दन सिंहः मैंने परीक्षा की तैयारी स्नातक में प्रवेश के साथ ही आरम्भ कर दी थी। विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम ने सिविल सेवा के पाठ्यक्रम से नैरंतर्य स्थापित करने में सहयोग किया। स्नातक के दौरान ही मैंने विषय की मूलभूत समझ के लिए एनसीईआरटी का अध्ययन किया और समझ विकसित होने के उपरान्त प्रामाणिक किताबों का अध्ययन प्रारम्भ किया।

स्नातक के प्रारंभ में ही सिविल सेवा के पाठ्यक्रम के प्रति समझ विकसित करते हुए तैयारी प्रारम्भ करनी चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानते हैं कि अंग्रेजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?

बिंदुनन्दन सिंहः आरंभिक शिक्षा एवं स्नातक हिन्दी परिपाटी से करने के कारण भाषा की सहजता की दृष्टि से हिन्दी ही मेरे लिए सर्वोत्तम विकल्प था अतः मैंने हिन्दी को ही चुना। मेरी सलाह है कि आप जिस भाषा में सहज हों उसी भाषा को चुने।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया?

बिंदुनन्दन सिंहः मेरा वैकल्पिक विषय हिन्दी साहित्य था। यह विषय छोटा होने के साथ अंकदायी भी है और साथ ही मेरे रुचि के अनुरूप भी है।

वैकल्पिक विषय के चयन में मैंने कथित लोकप्रियता को कभी आधार नहीं बनाया बल्कि अपने अभिरुचि को आधार बनाया जिससे मैं अपने वैकल्पिक विषय को बिना किसी तनाव के पढ़ सकूं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुक्त मानते हैं? तीनों चरणों की तैयारी में आपकी समय की रणनीति एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?

बिंदुनन्दन सिंहः सिविल सेवा की तैयारी एक लम्बी प्रक्रिया है जिसमें 2 से 3 वर्ष का समय लग सकता है। तैयारी की प्रारंभिक अवस्था में प्रिलिम्स और मेंस को साथ में लेकर चलना चाहिए आगे प्रिलिम्स के समय 3-4 महीने का अलग से समय देना चाहिए और मेंस के समय अपने बनाए गए नोट्स को ध्यान में रखकर रिवीजन करना चाहिए और साक्षात्कार के समय ग्रुप डिस्कशन के माध्यम से समसामयिक विषयों पर पकड़ बनाने का प्रयास करना चाहिए।

इस परीक्षा की पूरी प्रक्रिया के दौरान अपने आप को सकारात्मक बनाए रखें।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयार करने का सर्वाेत्तम तरीका क्या हो सकता है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठड्ढक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनाई? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति अपनाई?

बिंदुनन्दन सिंहः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत महत्वपूर्ण होती है, लेकिन इसके साथ-साथ वैकल्पिक विषय का भी महत्व है।

मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन पर पूरी तरह पकड़ बनाने के लिए मैंने अपने क्लास नोट्स के बार-बार रिवीजन पर जोर दिया साथ ही कुछ प्रामाणिक पुस्तकों से जरूरी तथ्यों, अवधारणाओं को नोट्स में सम्मिलित कर पाठ्यक्रम को पूरा करने का प्रयास किया।

इसके साथ ही टेस्ट सीरीज के माध्यम से अपने उत्तर में गुणवत्ता लाने का प्रयास किया_ साथ ही टेस्ट सीरीज के जो प्रश्न मुझे नहीं आते थे उनको कॉपी में नोट कर उनके अभ्यास पर जोर दिया, जिसका मुझे मुख्य परीक्षा में काफी सहयोग मिला। परीक्षा भवन में मैंने सबसे पहले उन प्रश्नों को हल किया जो अच्छी तरह से आते थे उसके बाद उन प्रश्नों को जो आधे-अधूरे आते थे। अन्त में उन प्रश्नों को हल किया जो एकदम से नहीं आते थे।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?

बिंदुनन्दन सिंहः कोचिंग के क्लास नोट्स के अलावा मैंने अपना एक अलग नोट्स बनाया था जो कि क्लास नोट्स का संक्षिप्त रूप था। इन नोट्स में विभिन्न टेस्ट सीरीज के कठिन प्रश्नों को शामिल कर विषय पर पकड़ बनाई जा सकती है, जो औरों के नोट्स से आपको बढ़त बनाए रखने में सहायता करेगी है।

सि-स- क्रॉनिकलः नीतिशास्त्र व सत्यनिष्ठा के प्रश्न-पत्र की तैयारी के लिए आपने क्या किया? छात्रें को इस संदर्भ में आप क्या मार्गदर्शन दे सकते हैं?

बिंदुनन्दन सिंहः नीतिशास्त्र व सत्यनिष्ठा के लिए मैंने डॉ- विकास दिव्यकीर्ति सर के नोट्स का अनुकरण किया था, जो काफी मददगार साबित हुआ।

विकास सर के नोट्स का अध्ययन कर अन्य छात्र अपने नीतिशास्त्र विषय पर पकड़ बना सकते हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने निबंध की तैयारी कैसे की और परीक्षा भवन में इसके चयन और लेखन के लिए क्या रणनीति अपनाई?

बिंदुनन्दन सिंहः निबंध के लिए मैंने समसामयिक मुद्दों पर पकड़ बनाई जिसमें सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल, Only IAS यू-ट्यूब चैनल का महत्वपूर्ण योगदान रहा साथ ही पर्यावरण, महिला, राजनीति जैसे विषयों के लिए अलग से Quotes (दोहे या कथन) का नोट्स बनाया जो परीक्षा में काफी मददगार रहा।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?

बिंदुनन्दन सिंहः लेखन शैली के अन्तर्गत पहले, प्रश्न से संबंधित प्रस्तावना लिखना चाहिए, फिर मुख्य बिन्दु और अंत में निष्कर्ष के साथ खत्म करना चाहिए।

फ्रलो चार्ट, डायग्राम, रिपोर्ट, आंकड़े ये उत्तर को काफी प्रभावशाली बनाते हैं, साथ ही उत्तर को निबंधात्मक शैली में ना लिखकर प्वाइंट में लिखना चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए? क्या किसी प्रश्न पर आप नर्वस भी हुए?

बिंदुनन्दन सिंहः मेरे साक्षात्कार की तैयारी में श्रेष्ठ एकेडमी का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जहां शिवम सर के मार्गदर्शन में हमने समसामयिक विषयों पर ग्रुप डिस्कशन के द्वारा अपनी पर्सनालिटी में सुधार किया और आत्म विश्वास से परिपूर्ण हुए।

साक्षात्कार में किसान बिल, आत्मनिर्भर भारत, वैक्सीन पर प्रश्न पूछे गये वहीं म्-चालान में किस कैमरे का प्रयोग होता है एवं आप विज्ञान को साहित्य की भाषा में कैसे पढ़ाएंगे, के प्रश्न पर मैं काफी नर्वस हो गया था।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? ऐसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?

बिंदुनन्दन सिंहः मैंने दृष्टि संस्थान से कोचिंग ली थी और कोचिंग के द्वारा मुझे ‘‘क्या पढ़ना है, क्या छोड़ना है, कैसे लिखना है’’ की सीख के साथ अवधारणाओं को समझने में काफी सहयोग मिला। कोचिंग लेने वाले छात्र को पहले अपने लिखित क्लास नोट्स पर कमांड करना चाहिए। तत्पश्चात प्रिंट मैटेरियल पर ऐसा अनुकरण कर छात्र विषय पर कमांड बना सकता है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे? यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहता हो, तो ऐसे छात्र को क्या करना चाहिए?

बिंदुनन्दन सिंहः जो छात्र सिविल सेवा की तैयारी करना चाहते हैं उन्हें अपने स्नातक के पाठ्यक्रम को सही से पढ़ना चाहिए जो आगे सिविल सेवा में सहायक हो सकेगा। साथ ही एनसीईआरटी की बुक्स, वीडियो के माध्यम से समझ विकसित कर तैयरी करनी चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः तैयारी में पत्र-पत्रिकाओं से आपको कितनी सहायता मिली? आपने किन पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन किया? सिविल सेवा परीक्षा के लिए इन पत्र-पत्रिकाओं की कितनी उपयोगिता है?

बिंदुनन्दन सिंहः पत्रिकाओं के तौर पर मैंने क्रॉनिकल और विजन का अनुकरण किया जो परीक्षा के तीनों चरण में मददगार रहें।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें िकसी प्रकार के बदलाव की अपेक्षा रखते हैं?

बिंदुनन्दन सिंहः क्रॉनिकल मैगजीन प्रिलिम्स एक्जाम के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है जो अन्य छात्रें की तुलना में आपको बढ़त बनाने में मददगार होगी।

अनुशंसित पुस्तक सूची

प्रारंभिक परीक्षा

  • दृष्टि के नोट्स, लूसेंट एवं क्रॉनिकल मैगजीन

मुख्य परीक्षा

  • दृष्टि के नोट्स, रामेश्वरम सर की नोट्स (अर्थव्यवस्था)
  • साइंसटेक (रितेश जायसवाल)
  • विजन मैगजीन

वैकल्पिक विषय - हिन्दी साहित्य

  • दृष्टि के नोट्स

दिव्य प्रकाश
64वीं बीपीएससी परीक्षा (राजस्व अधिकारी)


  • नाम: दिव्य प्रकाश
  • पिता का नाम एवं पेशा: के-पी- अस्थाना, LIC अभिकर्ता
  • माता का नाम एवं पेशा: उषा सिन्हा, शिक्षिका (सेवानिवृत)
  • शैक्षिक योग्यता: बी-ए-- एलएनडी कॉलेज (मोतिहारी), विषय- भूगोल, श्रेणी- प्रथम एम-ए-, पटना विश्वविद्यालय, विषय- भूगोल, श्रेणी- प्रथम
  • सकारात्मक पक्ष: जुझारूपन, हार न मानना, सकारात्मक सोच, ईमानदारी
  • नकारात्मक पक्ष: जल्दी किसी पर भरोसा कर लेना, कभी-कभी भावनात्मक पक्ष और क्रियात्मक पक्ष के मध्य भावनात्मक पक्ष को तवज्जो देना
  • अभिरुचियां: अलग-अलग तरह का खाना बनाना, दोस्तों के साथ बातें करना
  • आदर्श व्यक्ति: मेरा कोई एक आदर्श व्यक्ति नहीं है। जिसके भी व्यक्तित्व में जो अच्छी बातें लगाती हैं मैं उसे अपनाने कि कोशिश करता हूँ। दैनंदिन जीवन में मैं अपनी माँ से बहुत प्रभावित और प्रेरित होता हूँ, खासकर उनके निर्णयन क्षमता से। मेरी माँ सही अर्थाे में एक सशक्त महिला हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः 64वीं बीपीएससी में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई।

दिव्य प्रकाशः आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपकी सफलता में परिवार, मित्रें व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?

दिव्य प्रकाशः मेरा स्पष्ट मानना है कि, अगर परिवार का साथ ना हो तो मंजिल के रास्ते काफी मुश्किल हो जाते हैं। मैं खुशनसीब हूँ कि मुझे मेरे परिवार का भरपूर साथ और सहयोग मिला। परिवार की तरफ से कभी कोई अनावश्यक दबाव मेरे ऊपर नहीं था। मित्रें का भी काफी सहयोग रहा और मैंने जिन-जिन शिक्षकों का संसर्ग प्राप्त किया सभी ने मेरा मार्गदर्शन किया।

मेरी मां बिहार सरकार में प्रधानाचार्या थीं। इसके कारण घर में शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई का माहौल था। इसलिए मेरी पृष्ठभूमि ने हमेशा मुझे प्रेरित किया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया? परीक्षा की तैयारी शुरू करने का आदर्श समय क्या होना चाहिए?

दिव्य प्रकाशः मैं जब स्नातक के अंतिम वर्ष में था तब से सिविल सेवा में जाने को लेकर सोचना आरम्भ किया, परन्तु पूर्णतः तैयारी की शुरुआत एम-ए- के बाद की। तैयारी आरम्भ करने से पहले मैंने बीपीएससी परीक्षा के पूरे पैटर्न और पाठड्ढक्रम को समझा एवं तब तैयारी आरम्भ की। जहाँ तक तैयारी शुरू करने के आदर्श समय की बात है तो मेरा मानना है कि यह जितनी जल्दी हो उतना बेहतर है। हालाँकि मैंने काफी देर से तैयारी शुरू की। मेरे अनुसार कम से कम स्नातक प्रथम वर्ष से ही तैयारी आरम्भ हो जानी चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानते हैं कि अंग्रजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?

दिव्य प्रकाशः मेरी भाषा हिंदी थी। भाषा के ऊपर मेरी पकड़ एवं मेरी लेखन शैली भी ठीक है। मेरी समझ में मुझे इसका काफी लाभ हुआ। मुझे ऐसा नहीं लगता है कि अंग्रेजी भाषा बहुत लाभप्रद स्थिति में है, क्योंकि वैकल्पिक विषय में मुझे 195 अंक मिले हैं और सामान्य अध्ययन 1 में मुझे 170 अंक मिले हैं, जो कई अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों से ज्यादा हैं। मेरा ऐसा मानना है कि भाषा जो भी हो, उसकी गहरी समझ और उस पर पकड़ एवं उचित लेखन शैली का होना अनिवार्य है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया?

दिव्य प्रकाशः मेरा वैकल्पिक विषय भूगोल था। मेरे वैकल्पिक विषय के चयन का आधार कोई लोकप्रियता नहीं थी, वरन मेरी पृष्ठभूमि थी। दरअसल मेरा स्नातक और स्नातकोत्तर भूगोल से ही था और जब मैंने तैयारी आरम्भ की तो वैकल्पिक विषय को लेकर मैं स्पष्ट था, कि मुझे भूगोल ही रखना है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुक्त मानते हैं? तीनों चरणों की तैयारी में आपकी समय की रणनीति एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?

दिव्य प्रकाशः बीपीएससी की तैयारी में एक औसत दर्जे के विद्यार्थी के लिए अधिकतम 1-5 से 2 वर्ष पर्याप्त समय है।

तीनों चरणों की परीक्षा की तैयारी में समय की रणनीति अलग-अलग होती है। प्रारम्भ में आप औसत 6-7 घंटे भी पढ़ें तो काफी है। प्रारंभिक परीक्षा के तीन महीने पूर्व से 8-10 घंटे एवं मुख्य परीक्षा के समय 13-14 घंटे का समय देना चाहिए। हालांकि यह विद्यार्थी की क्षमता पर निर्भर करता है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयार करने का सर्वाेत्तम तरीका क्या हो सकता है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठड्ढक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनाई? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति अपनाई?

दिव्य प्रकाशः निश्चित रूप से मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की काफी अहमियत है। इसके लिए मैंने अपनी तैयारी के आरम्भिक दौर में अपने समय को दो हिस्सों में बांटा था। एक हिस्सा वैकल्पिक विषय हेतु एवं दूसरा हिस्सा सामान्य अध्ययन हेतु। सामान्य अध्ययन के लिए मैंने सर्वप्रथम एनसीईआरटी को पढ़ा। मुख्य परीक्षा के समय मेरी सिर्फ करेंट अफेयर्स की तैयारी ही शेष थी, बाकी सभी हिस्सों का मात्र रिवीजन ही करना था। सामान्य अध्ययन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा STATISTICS होता है और मेरा ऐसा मानना है कि इसके बिना परीक्षा उत्तीर्ण करना काफी मुश्किल है। इसके लिए मैं प्रारंभिक परीक्षा के बाद प्रतिदिन 2 प्रश्नों का अभ्यास करता था और कोशिश करता था कि 20 मिनट में एक प्रश्न बना लूं।

जहां तक परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने की बात है, तो मैंने पहले पूरे इत्मिनान से सभी प्रश्नों को पढ़ा एवं उनमें से उन प्रश्नों का चयन किया जिनको मैं सबसे बेहतर निभा सकता था, इसका मुख्य पैमाना मेरे पास प्रश्नों की मांग के अनुरूप कंटेंट की उपलब्धता थी।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?

दिव्य प्रकाशः जी हाँ, मैंने नोट्स बनाये थे। दरअसल मेरे पास कोचिंग के नोट्स भी थे और किताबे भी थी। मैं जब भी कोई टॉपिक पढ़ता था तो पहले किताब पढ़ता था फिर नोट्स पढ़ता था_ उसके बाद दोनों की मदद से अपनी भाषा में पुनः नोट्स बनाता था। यह इसलिए भी जरूरी होता है क्योंकि किसी भी नोट्स का समय के साथ अपडेट होना जरूरी है। कुल मिलाकर परीक्षा के लिए मैंने अंतिम रूप से जिस नोट्स का सहारा लिया वो मेरा अपना बनाया हुआ नोट्स था।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?

दिव्य प्रकाशः अच्छी लेखन शैली मेरी तैयारी का बहुत अहम् हिस्सा था। जब मैं गोपाल सिंह सर के संसर्ग में था तो उन्होंने उत्तर लेखन पर बहुत काम कराया था। मेरे अनुसार, इसके लिए सर्वप्रथम अपना एक बढि़या शब्दकोष विकसित करने की आवश्यकता होती है। उत्तर लेखन में उत्तर का स्वरूप यानी STRUCTURING बहुत महत्वपूर्ण होती है_ अर्थात उत्तर की सजावट प्रश्न की मांग के अनुरूप होनी चाहिए। इसके लिए एकमात्र तरीका जो मैंने अपनाया था, वह था प्रैक्टिस_ तैयारी के आरम्भ से ही मैं गोपाल सिंह सर के पास प्रत्येक शनिवार को प्रैक्टिस करता था और उनसे दिशा निर्देश प्राप्त करता था।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए? क्या किसी प्रश्न पर आप नर्वस भी हुए?

दिव्य प्रकाशः साक्षात्कार के समय मैंने अपने विषय (भूगोल) के बेसिक चीजों का एक बार रिवीजन किया। साथ ही समाचार पत्र (जो मैं प्रतिदिन पढ़ता हूँ) में बिहार से निकलने वाले अखबारों को ज्यादा महत्व देना शुरू किया। उसके बाद पटना में ही टारगेट सिविल सर्विसेज में मैंने मॉक इंटरव्यू दिया था।

मेरा साक्षात्कार औसत रहा था, यद्यपि बोर्ड के अध्यक्ष महोदय द्वारा पूछे गए पहले सवाल का ही जवाब मैं नहीं दे पाया था। मुझसे करेंट मुद्दे, किसान आंदोलन, भूगोल और हॉबी से मुख्यतः सवाल पूछे गए थे। बोर्ड में अंदर प्रवेश से पहले मैं थोड़ा नर्वस जरूर था पर थोड़ी ही देर में मैं सहज हो गया। बोर्ड काफी सहयोगी था।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः तैयारी में पत्र-पत्रिकाओं से आपको कितनी सहायता मिली? आपने किन पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन किया? सिविल सेवा परीक्षा के लिए इन पत्र-पत्रिकाओं की कितनी उपयोगिता है?

दिव्य प्रकाशः पत्र पत्रिकाएं एवं समाचार पत्र तैयारी का एक अभिन्न अंग हैं। मैं ‘द हिन्दू’ नियमित रूप से पढ़ता हूं और मासिक पत्रिका के तौर पर ‘सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल’ पढ़ता हूं।

प्रारंभिक परीक्षा में तो सीधे-सीधे समसामयिकी के प्रश्न होते हैं_ इसके अलावा मुख्य परीक्षा के भी प्रश्नों का पैटर्न आजकल समसामयिकी आधारित ज्यादा हो गया है। साथ ही यदि अपने उत्तर में समकालीन उदाहरण दिया जाए तो उत्तर सुदृढ़ होता है। ऐसे में पत्रिकाएं और न्यूज पेपर बेहद सहायक हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें किसी प्रकार के बदलाव की अपेक्षा रखते हैं?

दिव्य प्रकाशः मैं 2015 से ही सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल का नियमित पाठक हूं। मेरा अनुभव है कि सिविल सर्विस की तैयारी के लिए यह बहुत ही सटीक और सारगर्भित पत्रिका है। इसका दायरा काफी व्यापक है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी भाषा मुझे पसंद है जो हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए काफी सहायक है। इसके अलावा प्रत्येक महीना किसी विषय से संबंधित विशेषांक निकलता है वो विभिन्न विषयों के रिवीजन के लिए बहुत उपयुक्त है। पिछले कुछ महीनों से बीपीएससी के लिए जो विशेष प्रश्नोत्तर शृंखला प्रकाशित हो रही है, वो आने वाली मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से बेहद उपयोगी है।

अनुशंसित पुस्तक सूची

प्रारंभिकी सामान्य अध्ययनः

  • सबसे पहले एनसीईआरटी पढ़ना चाहिए।
  • उसके बाद घटनाचक्र काफी सहायक है। साथ ही बिहार सम्बंधित प्रश्नों के लिए इम्तियाज अहमद की ‘बिहार एक परिचय’। इसके अलावा बिहार के बजट और आर्थिक सर्वे से भी प्रश्न रहते हैं।
  • विज्ञान के लिए LUCENT का ‘सामान्य विज्ञान’ काफी सहायक होता है और प्रश्नों का अभ्यास सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययनः

  • मुख्य परीक्षा के लिए एनसीईआरटी से बनाए गए खुद के नोट्स। आजकल ज्यादातर प्रश्नों को बिहार से जोड़कर पूछा जाता है ऐसे में इतिहास में एनसीईआरटी को ‘बिहार एक परिचय’ के साथ मिला के नोट्स बनाना चाहिए। इसी प्रकार पॉलिटी में लक्ष्मीकांत की किताब को करेंट के साथ जोड़कर पढ़ना चाहिए। ज्योग्राफी इकोनॉमिक्स और विज्ञान प्रौद्योगिकी में व्यावहारिक प्रश्न ज्यादा होते हैं, इसके लिए उसे भी करेंट मुद्दों खासकर बिहार के मुद्दों के साथ पढ़ना चाहिए। समाचार पत्र रोजाना पढ़ना बहुत आवश्यक है।

मुख्य परीक्षा वैकल्पिक विषयः

  • भूगोल वैकल्पिक के लिए मैंने सबसे पहले एनसीईआरटी और फिर खुल्लर की 11वीं और 12वीं की किताब पढ़ी थी।
  • भू-आकृति विज्ञान के लिए सविन्द्र सिंह, जलवायु एवं समुद्र विज्ञान के लिए डी-एस- लाल, भौगोलिक चिंतन एवं मानव भूगोल के लिए माजिद हुसैन, आर्थिक भूगोल के लिए काशीनाथ सिंह और भारत के भूगोल के लिए गोपाल सिंह की किताब का सहारा लिया। मेरे पास ए-के- झा सर का क्लास नोट्स भी था। मैंने दोनों की सहायता से अपना नोट्स बना कर पढ़ाई की।

पत्र एवं पत्रिकाएं:

  • कोई भी एक राष्ट्रीय स्तर का समाचार पत्र पढ़ना चाहिए, इसमें मेरी राय है कि हिंदी माध्यम वाले विद्यार्थियों को भी द हिन्दू पढ़ना चाहिए_ साथ ही बिहार से निकलने वाला एक अखबार भी पढ़ना चाहिए। साथ में सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल प्रत्येक माह पढ़ने की सलाह दूंगा।

अंकिता वर्मा
64वीं बीपीएससी


  • पिता का नाम: श्री अनिल कुमार वर्मा, सर्विस सेक्टर
  • माता का नाम: श्रीमती रंजना वर्मा (गृहिणी)
  • शैक्षिक योग्यता: फिजिक्स (Hons), किरोड़ीमल कॉलेज- दिल्ली विश्वविद्यालय
  • अभिरुचियां: पेंटिंग एवं कुकिंग
  • आदर्श व्यक्ति: माता-पिताजी, श्री अब्दुल कलाम, श्रीमती सुषमा स्वराज।
  • सकारात्मक पक्षः ईमानदारी एवं निष्ठा
  • नकारात्मक पक्षः एंजाइटी (Anxiety)
  • वैकल्पिक विषय (मुख्य परीक्षा): भूगोल

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः 64वीं बीपीएससी में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई। आपकी सफलता में परिवार, मित्रें व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?

अंकिता वर्माः मुझे मेरे परिवार, मित्रें एवं शिक्षकों से हमेशा सहायता मिली। सभी ने मुझे सकारात्मक रह कर प्रयास करने एवं असफलताओं से सीखने के लिए प्रेरित किया।

मेरे परिवार की पृष्ठभूमि में मैंने सबको मेहनत से अपना लक्ष्य साधते हुए देखा है। मुझे भी इसी से निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा मिली और फलस्वरूप मेरा बीपीएससी में चयन हुआ।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया? परीक्षा की तैयारी शुरू करने का आदर्श समय क्या होना चाहिए?

अंकिता वर्माः मैंने अपने ग्रेजुएशन के आिखरी वर्ष से परीक्षा की तैयारी प्रारंभ की। तैयारी शुरू करने के लिए मैंने सबसे पहले सिलेबस को समझा, फिर प्राथमिक परीक्षा, मेंस एवं साक्षात्कार के लिए टॉपिक चुने और उसी के हिसाब से अपने नोट्स तैयार किए। मेरे हिसाब से ग्रेजुएशन के साथ ही तैयारी करना लाभदायक रहता है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानती हैं कि अंग्रेजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?

अंकिता वर्माः मेरा माध्यम अंग्रेजी था क्योंकि बचपन से शिक्षा अंग्रेजी माध्यम में हुई थी। मेरा मानना है कि अच्छे अंक लाने के लिए छात्र/छात्रओं को बस अच्छी जानकारी जरूरी है, जो किसी भी माध्यम से व्यत्तफ़ की जा सके और अच्छे अंक मिल सकें।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया?

अंकिता वर्माः मेरा वैकल्पिक विषय भूगोल था। सिलेबस एवं पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्नों को देखकर मुझे लगा कि यह विषय अच्छे अंक लाने में सहायक रहेगा।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुत्तफ़ मानती हैं? तीनों चरणोंकी तैयारी में आपकी समय की रणनीति एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?

अंकिता वर्माः पूरी तैयारी के लिए 10 से 12 महीने का समय लग जाता है। तीनों चरणों के लिए मैंने समय की रणनीति में बदलाव किए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयार करने का सर्वाेत्तम तरीका क्या हो सकता है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठड्ढक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनाई? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति अपनाई?

अंकिता वर्माः प्रिलिम्स के लिए भी सामान्य अध्ययन की तैयारी करनी होती है। उसी समय से महत्वपूर्ण विषयों के नोट्स बनाना अच्छा रहता है, जो मेंस के समय सहायता करता है।

मैंने उत्तर हमेशा निर्धारित शब्द सीमा में लिखने का प्रयास किया। GS-1 में सांख्यिकी (Statistics) के प्रश्नों को पहले हल किया जाए तो बाकी प्रश्नों के लिए समय मिल जाता है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?

अंकिता वर्माः हां! खुद बनाए हुए नोट्स से लिखने की प्रैक्टिस होती है और रिवीजन में भी कम समय लगता है। मैंने नोट्स पॉइंट वाइज बनाए एवं मैप व फ्लो चार्ट भी बनाए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःउत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?

अंकिता वर्माः मैंने अपना उत्तर हमेशा शब्द सीमा में देने का प्रयास किया। पॉइंट वाइज उत्तर लिखना एवं फ्रलो चार्ट का प्रयोग करना उत्तर को आकर्षक बनाता है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए? क्या किसी प्रश्न पर आप नर्वस भी हुईं?

अंकिता वर्माः साक्षात्कार के लिए अपने शिक्षकों की मदद से प्रश्नावली बनाई। अपने बायो-डेटा के हिसाब से उत्तर देने की प्रैक्टिस की। मॉक इंटरव्यू देखे और दिए भी। मुझसे मेरे वैकल्पिक विषय, रुचियों और करेंट अफेयर्स से प्रश्न पूछे गए थे। मैं कुछ प्रश्नों में नर्वस भी हुई थी।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? वैसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?

अंकिता वर्माः मैंने टेस्ट सीरीज ली थी। साथ ही मैंने मेन्स के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की मदद से तैयारी की। कोचिंग लेने का, ऑनलाइन पढ़ाई करने का या खुद से ही पढ़ के परीक्षा देने का निर्णय हर छात्र को अपने हिसाब से लेना चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगी? यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहता हो, तो ऐसे छात्र को क्या करना चाहिए?

अंकिता वर्माः मेरा यही सुझाव होगा कि अपना रुटीन बनाएं, सिलेबस समझें, पूछे गए प्रश्नों को हल करें। डेली टारगेट बनाएं और तैयारी आगे बढ़ाएं।

आजकल ऑनलाइन हिन्दी व अंग्रेजी दोनों में मैटेरियल्स मिल जाते हैं जिनको छात्र फ्री में भी पढ़ सकते हैं। मैंने भी Online बहुत टॉपिक्स पढ़े। यह काफी छात्रें के लिए लाभदायक है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सामान्य धारणा यह है कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करने से पूर्व कोई कैरियर विकल्प भी अपने पास रखना चाहिए। क्या आपने भी कोई कैरियर विकल्प रखा था?

अंकिता वर्माः जी नहीं! मैंने कोई कैरियर विकल्प नहीं रखा था।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः तैयारी में पत्र-पत्रिकाओं से आपको कितनी सहायता मिली? आपने किन पत्र-पत्रिकाओंका अध्ययन किया? सिविल सेवा परीक्षा के लिए इन पत्र-पत्रिकाओं की कितनी उपयोगिता है?

अंकिता वर्माः मैंने योजना और क्रॉनिकल मैगजीन (मासिक) का अध्ययन किया। इससे मुझे डेटा एवं फैक्ट मिले और करेंट अफेयर्स के टॉपिक में मदद मिली।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें किसी प्रकार की बदलाव की अपेक्षा रखती हैं?

अंकिता वर्माः मुझे सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल काफी उपयोगी लगी। मुझे इससे सही डेटा मिले।

धन्यवाद

अनुशंसित पुस्तक सूची

  • प्रारंभिकी सामान्य अध्ययनः स्पेक्ट्रम, एम- लक्ष्मीकांत, एनसीईआरटी कक्षा 11 एवं 12, जी-सी- लियोंग, योजना, क्रॉनिकल
  • मुख्य परीक्षा सामान्य अध्ययनः उपर्यु क्त का ही अध्ययन किया
  • मुख्य परीक्षा वैकल्पिक विषयः एनसीईआरटी कक्षा 10, 11 एवं 12, जी-सी- लियोंग, मानव भूगोल (Majid Hussain), भारत का भूगोल- खुल्लर, साथ ही इन्हीं टॉपिक्स का ऑनलाइन अध्ययन
  • पत्र एवं पत्रिकाएंः योजना मैगजीन, क्रॉनिकल मासिक पत्रिका, New India@75 (नीति आयोग)

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