जम्मू-कश्मीर की लुप्त होती झीलें

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  • CAG (Comptroller and Auditor General) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 1967 के बाद से जम्मू-कश्मीर की 697 झीलों में से 315 झीलें लुप्त हो चुकी हैं और 203 झीलें आकार में सिकुड़ गई हैं।
  • झीलें जैव विविधता (biodiversity), आर्द्रभूमि (wetlands) , भूजल पुनर्भरण और स्थानीय जलवायु को नियंत्रित करने के लिए पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
  • वे पर्यटन, मत्स्य पालन, कृषि और पेयजल आपूर्ति के लिए भी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
  • झीलों के क्षेत्रफल में कमी का प्रमुख कारण अतिक्रमण (encroachment) है, विशेष रूप से श्रीनगर के आसपास डल झील, वुलर झील और होकरसर आर्द्रभूमि में।
  • प्रदूषण (pollution) , ....
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